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अफ़ग़ानिस्तान

सूची अफ़ग़ानिस्तान

अफ़ग़ानिस्तान इस्लामी गणराज्य दक्षिणी मध्य एशिया में अवस्थित देश है, जो चारो ओर से जमीन से घिरा हुआ है। प्रायः इसकी गिनती मध्य एशिया के देशों में होती है पर देश में लगातार चल रहे संघर्षों ने इसे कभी मध्य पूर्व तो कभी दक्षिण एशिया से जोड़ दिया है। इसके पूर्व में पाकिस्तान, उत्तर पूर्व में भारत तथा चीन, उत्तर में ताजिकिस्तान, कज़ाकस्तान तथा तुर्कमेनिस्तान तथा पश्चिम में ईरान है। अफ़ग़ानिस्तान रेशम मार्ग और मानव प्रवास का8 एक प्राचीन केन्द्र बिन्दु रहा है। पुरातत्वविदों को मध्य पाषाण काल ​​के मानव बस्ती के साक्ष्य मिले हैं। इस क्षेत्र में नगरीय सभ्यता की शुरुआत 3000 से 2,000 ई.पू.

657 संबंधों: चना, चमन, चार्ल्स विल्सन (राजनेता), चारीकार, चित्राल ज़िला, चिपोरसुन, चग़चरान, चीता, चीनी जनवादी गणराज्य, ट्यूलिप, टोबी मैग्वायर, एरियाना अफ़्गान एयरलाइंस, एशिया की संकटापन्न भाषाओं की सूची, एशियाई राजमार्ग १, एशियाई क्रिकेट परिषद, ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम, डिश टीवी, डूरण्ड रेखा, डेल्टा फ़ोर्स (Delta Force), डेविड हिक्स, ढाका-इस्तांबुल फ्रेट कॉरिडोर, तरीनकोट, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, तापी गैस परियोजना, तालिबान आन्दोलन, तालोक़ान, ताशक़ुरग़ान​ ताजिक स्वशासित ज़िला, ताजमहल, ताजिक लोग, ताजिकिस्तान, ताजिकी भाषा, तिब्बती साम्राज्य, तिरमिज़, तिराह, तिरिच मीर, तख़ार प्रान्त, तगर, तकबीर, तुर्क लोग, तुर्कमेन भाषा, तुर्कमेन लोग, तुर्कमेनिस्तान, तुर्किस्तान, तुर्की भाषा परिवार, तुर्की का इतिहास, तुषारी लोग, त्रेगामी भाषा, तैमूरी राजवंश, तोबा ककड़, तोरख़म, ..., तीराही भाषा, थ़, थाली (बर्तन), द गान, दरी फ़ारसी, दशराज्ञ युद्ध, दश्त-ए-मारगो, दही (योगहर्ट या योगर्ट), दायकुंदी प्रान्त, दार्द लोग, दार्दिस्तान, दार्दी भाषाएँ, दक्षिण एशिया वन्यजीव प्रवर्तन नेटवर्क, दक्षिण एशिया उपग्रह, दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय, दक्षिण एशियाई खेल, दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन, दक्षेस महासचिव, दक्षेस गान, दुर्रानी साम्राज्य, द्रुह्यु लोग, देशों के दूरभाष कूट की सूची, देशों के राजचिह्नों की सूची, देशी भाषाओं में देशों और राजधानियों की सूची, देवदार, धर्मांतरण, धार किला, नरेन्द्र मोदी, नरेन्द्र मोदी द्वारा किए गए अंतरराष्ट्रीय प्रधानमन्त्रीय यात्राओं की सूची, नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति, नाटो, नानख़ताई, नायमन लोग, नासिर जमाल, निलोफर रहमानी, नव-उपनिवेशवाद, नंगरहार प्रान्त, नंगलामी भाषा, नौरोज़, नूडल, नूर जहाँ, नूरिस्तान प्रान्त, नूरिस्तानी, नूरिस्तानी भाषाएँ, नूरिस्तानी लोग, नेपाल शिवसेना, नोशक पर्वत, नीमरूज़ प्रान्त, नीली, अफ़्ग़ानिस्तान, पटना, पटना का इतिहास, पठान, पद्म श्री पुरस्कार (१९७०-७९), पन्ना, पनीर, परवान प्रान्त, परवेज़ मुशर्रफ़, पश्तो भाषा, पानीपत का तृतीय युद्ध, पानीपत का प्रथम युद्ध, पामीर नदी, पामीर पर्वतमाला, पामीरी भाषाएँ, पारस, पारून, पालूला भाषा, पाशाई भाषा, पाक अधिकृत कश्मीर, पाकिस्तान, पाकिस्तान बम धमाके २००९, पाकिस्तान के ज़िले, पितृ दिवस, पिशीन, पवन टर्बाइन, पख़्तूनिस्तान, पंज नदी, पंजदेह प्रकरण, पंजशीर प्रान्त, पंजशीर वादी, पकतिया प्रान्त, पकतीका प्रान्त, पुल-ए-ख़ुमरी, पुल-ए-आलम, प्रतिजैविक प्रतिरोध, प्रयाग प्रशस्ति, प्राचीन भारत, प्राचीन मिस्र, प्राचीन ख़ुरासान, पूर्वी ईरानी भाषाएँ, पेच नदी, पॉल वुल्फोवित्ज़, पोसवाल, फरजाना वाहिदी, फ़राह नदी, फ़राह प्रान्त, फ़राह, अफ़्ग़ानिस्तान, फ़ातिमा भुट्टो, फ़ारयाब प्रान्त, फ़ारसी भाषा, फ़ारसी साम्राज्य, फ़ारसी साहित्य, फ़िरोज़कोह, फ़ैज़ाबाद, बदख़्शान, फातमागुल, फ्रांस का सैन्य इतिहास, बदख़्शान, बदख़्शान प्रान्त, बदख़्शान भूस्खलन २०१४, बनबेर, बन्नू ज़िला, बरोग़िल दर्रा, बल्लभगढ़, बल्ख़ प्रान्त, बलूचिस्तान मुक्ति सेना, बलूचिस्तान संघर्ष, बलूचिस्तान का इतिहास, बलोच भाषा और साहित्य, बलोच लोग, बादग़ीस प्रान्त, बाब -ए- ख़ैबर, बाबरनामा, बाबा (बहुविकल्पी), बामयान, बामयान प्रान्त, बामियान के बुद्ध, बाल्टिस्तान, बाश्गल नदी, बासमाची विद्रोह, बाज़ारक, पंजशीर, बाघ, बिहार का मध्यकालीन इतिहास, बग़लान प्रान्त, बंसी लाल, बुरहानुद्दीन रब्बानी, बुज़कशी, बुख़ारा, ब्रहमदग बुगती, ब्राहुई भाषा, ब्रिटिश भारतीय सेना, ब्रिटिश काउंसिल, बैसाखी, बैक्ट्रिया, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस, भरतपुर, भारत में आतंकवाद, भारत में इस्लाम, भारत और अफगानिस्तान, भारत का भूगोल, भारत का इतिहास, भारत के भाषाई परिवार, भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश, भारत-संयुक्त राज्य सम्बन्ध, भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग, भारतीय शिल्प, भारतीय सेही, भारतीय गणित का इतिहास, भारतीय उपमहाद्वीप, भोजन शिष्टाचार, मध्य एशिया, मरुस्थलीकरण, मरी प्रान्त, मरी, तुर्कमेनिस्तान, मलालई जोया, मस्तुज वादी, मस्जिद, महमूद-ए-राक़ी, महाभारत कालीन जनपद, महाजनपद, मातृ दिवस, मातृवंश समूह जे, मातृवंश समूह आर०, मानसेहरा ज़िला, मानी, मारखोर, मार्शल आर्ट, मिर्ज़ा मोहम्मद हाकीम, मिस ऐनाक नाइट्स, मज़ार-ए-शरीफ़, मजार शरीफ, मई 2015 नेपाल भूकम्प, मंगोल भाषा, मुरग़ाब नदी, मुहम्मद ज़िया-उल-हक़, मुहम्मद जौनपुरी, मुहम्मद इक़बाल, मुग़ल साम्राज्य, मुंशी नवल किशोर, मौलाना मसूद अज़हर, मैदान शहर, मैदान वरदक प्रान्त, मेयमना, मेरीलेबोन क्रिकेट क्लब, मेहतर लाम, मेहमान ख़ाना, मोहन लाल ज़ुत्शी, मोहम्मद शहज़ाद, मोहम्मद हामिद अंसारी, मीनार, मीनार-ए-जाम, मीर प्रकाशन, यामीन अहमदजई, यारकन्द ज़िला, यासीन वादी, यूटीसी+०४:३०, यूनाइटेड किंगडम, यूनाइटेड किंगडम के सशस्त्र बाल, यूसुफ़ज़ई, रबातक शिलालेख, रहमत शाह, राशिद खान (अफ़ग़ान क्रिकेटर), राष्ट्रपिता, राष्ट्रीय हित, राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति, राजा महेन्द्र प्रताप सिंह, राव तुला राम, राखीगढ़ी, रिचर्ड होलब्रूक, रियाद प्रान्त, रैम्बो (फ़िल्म), रूस का इतिहास, रूज़ा शरीफ, रोबोट, रोमा (लोग), लश्कर गाह, लश्कर गाह मस्जिद, लश्कर-ए-तैयबा, लश्करगढ़ मस्जिद, लाल कुर्ती आन्दोलन, लाजवर्द, लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम, लग़मान प्रान्त, लंबाई के आधार पर नदियों की सूची, लोया पकतिया, लोगर प्रान्त, शतरंज, शफी मुहम्मद बरफात, शबरग़ान, शरना, अफ़्ग़ानिस्तान, शापेजा क्रिकेट लीग, शाह, शिया चंद्र, शिया इस्लाम, शिंजियांग, शक, शकुनि, शक्‍ति-संतुलन, शुमश्ती भाषा, शुग़नी भाषा, शेर शाह सूरी, शेर सिंह राणा, शोरतुग़ई, शीतयुद्ध, शीर ख़ुर्मा, सफ़्फ़ारी राजवंश, सफ़ेद कोह, सफ़ी एयरवेज़, सफ़ीद नदी, सबवे (रेस्तरां), समंगान प्रान्त, समकालीन, सम्पर्क भाषा, सर-ए-पोल प्रान्त, सर-ए-पोल शहर, सर-ए-संग, सरहद-ए-ब्रोग़िल, सरिकोली भाषा, सरेपोल, सरीसृप, सलमान रुश्दी, 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ख़ोरासान, ख़ोरूग़​, ख़ोस्त, ख़ोस्त प्रान्त, खाड़ी युद्ध, खैशगी, खूनी दरवाजा, गरदेज़, गलियारा, ग़िज़र ज़िला, ग़ज़नवी साम्राज्य, ग़ज़नी प्रान्त, ग़ोर प्रान्त, ग़ोरी राजवंश, गाँजा, गिलगित-बल्तिस्तान, गुरु नानक, गुर्जर, गुग्गुल, ग्रैंड ट्रंक रोड, ग्वादर, ग्वार-बती भाषा, गृहयुद्ध, गूगूश, गॉन्डोफर्नीज, गोमल नदी, गोजाल, ऑरलैंडो नाइट क्लब गोलीबारी, ऑरिल स्टाइन, ओड़िशा का इतिहास, ओमेर्टा, ओरूज़्गान प्रान्त, ओसामा बिन लादेन, औरंगज़ेब, आतंकी प्रशिक्षण शिविर, आत्मा राम, आमिर हमजा, आमिर ख़ान, आमू दरिया, आर्यभट, आलू बुख़ारा, आलींगार नदी, आश्कूनू भाषा, आज़ाद हिन्द फ़ौज, आख़ाल प्रान्त, आइएसओ ३१६६ - १, इण्डियन एयरलाइंस फ्लाइट ८१४, इन्द्र कुमार गुजराल, इन्नोसेंस ऑफ़ मुस्लिम्स, इमरान ख़ान, इराक पर आक्रमण 2003, इर्शाद दर्रा, इलख़ानी साम्राज्य, इस्लाम के राष्ट्र, इस्लामी दुनिया, इस्लामी सहयोग संगठन, इस्लामी सैन्य गठबंधन, इस्लामी गणराज्य, इंटेलिजेंस ब्यूरो, इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार, कनिष्क, करोंदा, करीम सादिक, कलश लोग, कला स्नातक, कश्मीर, कश्मीर की संस्कृति, क़ला-ए-नौ, अफ़्ग़ानिस्तान, क़लात, ज़ाबुल प्रान्त, क़हवा, क़ारेह बुलाक़, क़िला अब्दुल्लाह ज़िला, क़ज़ा, क़ुतुब मीनार, कादिरी संप्रदाय, कापीसा प्रान्त, काफ़िरिस्तान, काबुल, काबुल नदी, काबुल प्रान्त, काबुल हमला 2016, काबुल होटल आंतकी हमला 2018, काबुल आत्मघाती बम विस्फोट मार्च 2018, काबुल आत्मघाती हमला 2017, काबुल अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र, काबुलिस्तान, काम एयर, काला तीतर, काशीपुर का इतिहास, कांधार, कांधार प्रान्त, कांधार अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र, किरण कार्निक, किरगिज़ लोग, किर्गिज़ भाषा, किर्गिज़स्तान, किंडरगार्टन (बालवाड़ी), कज़ाख़ भाषा, कजकी बाँध, कंबोज, कुत्तों की नस्लों की सूची, कुनर नदी, कुनर प्रान्त, कुबलई ख़ान, कुर्रम नदी, कुर्रम वादी, कुषाण राजवंश, कुषाण कला, कुजुल कडफिसेस, कुंदुज़, कुंदुज़ प्रान्त, कुंदोज, क्रिस्टीन वेस्टन, क्रिकेट, क्वेटा, कृत्तिका तारागुच्छ, कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त, कोटला मुबारकपुर, कोहिनूर हीरा, कोकचा नदी, कोकलास, अन्तर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन के सदस्य राष्ट्र, अप्रैल 2015 नेपाल भूकम्प, अप्रैल 2017 नांगहार हवाई हमला, अफ़रीदी, अफ़ग़ानिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान युद्ध (2001–वर्तमान), अफ़ग़ानिस्तान गृहयुद्ध (1978–वर्तमान), अफ़ग़ानिस्तान का इतिहास, अफ़ग़ानिस्तान के प्रांत, अफ़्पाक, अफ़्गान उड़न गिलहरी, अफ़्गानिस्तान का राष्ट्रगान, अफ़्गानिस्तान क्रिकेट बोर्ड, अफगान हाउन्ड, अफगानिस्तान में हिन्दू धर्म, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की झड़पें, अफगानिस्तान का ध्वज, अफगानिस्तान के शहरों की सूची, अबुल कलाम आज़ाद, अब्दुर रहमान ख़ान, अब्दुल रहमान मस्जिद, अब्दुल हाफ़िज़ मोहम्मद बरकतउल्ला, अमीर अमानुल्ला खान अवॉर्ड, अमीरा एंड सैम, अमीरात, अराकोशिया, अल बेरुनी, अल-क़ायदा, अलाउद्दीन साबिर कलियरी, अल्प तिगिन, अल्फाल्फा, अल्बानिया, अलीन लोग, अशोक, अशोक के अभिलेख, असदाबाद, अफ़्ग़ानिस्तान, असगर स्टैनिकजई, अहमद शाह मसूद, अहमद शाह अब्दाली, अहमद शाह अब्दाली 4-दिवसीय टूर्नामेंट, अज़ ज़ाहिराह मुहाफ़ज़ाह, अखण्ड भारत, अंजन, अइमाक़ लोग, अइज़ोल, अकबर, अक्टूबर २०१५ हिन्दू कुश भूकंप, अकीला आसिफी, उत्तरी मित्रपक्ष, उत्तरी रेशम मार्ग, उदयान, उनई दर्रा, उर्दू भाषा, उज़बेक लोग, उज़्बेकिस्तान, १ फ़रवरी, १ई+११ मी॰², १६ जनवरी, १७ जुलाई, १७ जून, १९ अगस्त, १९१९, २ अक्तूबर, २० सितम्बर, २००२, २००५ कश्मीर भूकम्प, २००८, २००९, २०१०, २०११, २०११ पाकिस्तान भूकम्प, २०११ में निधन, २०१५ क्रिकेट विश्व कप, २०१६ में अमेरिका ने गिराए बम, २१ नवम्बर, २५ जून, २८ फ़रवरी, ३ जनवरी, ४ अक्टूबर, ५ दिसम्बर, ५ जनवरी, ६ नवम्बर, ६ अगस्त, ७ अक्तूबर, ८ दिसम्बर, 11 सितम्बर 2001 के हमले, 1954 एशियाई खेल, 1974 एशियाई खेल, 1992 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, 2002 एशियाई खेल, 2004 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, 2010 एशियाई खेल पदक तालिका, 2016 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, 2016 क्वेटा पुलिस ट्रेनिंग सेंटर हमला, 2016 उड़ी हमला सूचकांक विस्तार (607 अधिक) »

चना

चना चना एक प्रमुख दलहनी फसल है। .

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चमन

सन् १८९५ में खींची गई चमन के पास अफ़्ग़ान सीमाई पहरेदारों की तस्वीर चमन (Chaman) पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत के क़िला अब्दुल्लाह ज़िले की राजधानी है। यह अफ़्ग़ानिस्तान की सीमा के बहुत क़रीब है और सीमा के पार अफ़्ग़ानिस्तान के कंदहार प्रान्त का स्पिन बोल्दक शहर है। चमन की आबादी लगभग २०,००० है जिनमें से चंद-हज़ार लोग हिन्दू समुदाय के हैं। .

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चार्ल्स विल्सन (राजनेता)

चार्ल्स नेस्बिट विल्सन (1 जून 1933 - 10 फ़रवरी 2010), एक अमेरिकी नौसेना अधिकारी और टेक्सास के दूसरे काँग्रेसी जिले के पूर्व 12-कार्यकालीन डेमोक्रेटिक अमेरिकी प्रतिनिधि थे। वह केन्द्रीय खुफिया एजेंसी या सेन्ट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए (CIA)) के ऑपरेशन साइक्लोन नामक अब तक के सबसे बड़े गुप्त ऑपरेशन के समर्थन में काँग्रेस का नेतृत्व करने के लिए काफी मशहूर थे जिसने रीगन प्रशासन के तहत सोवियत-अफगानिस्तान युद्ध के दौरान अफगान मुजाहिदीन के लिए विशेष क्रियाकलाप प्रभाग से अर्द्धसैनिक बल के अधिकारियों और स्टिंगर विमानभेदी मिसाइल जैसे विमानभेदी हथियारों सहित सैन्य उपकरणों की आपूर्ति की थी। उनके परदे के पीछे का अभियान, जॉर्ज क्राइल की चार्ली विल्सन्स वॉर नामक गैर-कल्पनात्मक पुस्तक और बाद में विल्सन की भूमिका निभाने वाले टॉम हैंक्स अभिनीत एक फिल्म रूपांतरण का विषय था। .

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चारीकार

चारीकार में जानवरों की एक डाक्टर चारीकार (दरी फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Charikar) उत्तर-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के परवान प्रान्त की राजधानी है। यह कोहदामन (अर्थ:पहाड़ का दामन) नामक वादी का मुख्य शहर है और ग़ोरबंद नदी के किनारे स्थित है।, Ludwig W. Adamec, pp.

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चित्राल ज़िला

चित्राल (उर्दू:, अंग्रेज़ी: Chitral) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत के सबसे उत्तरी भाग में स्थित एक ज़िला है। यह उस प्रान्त का सबसे बड़ा ज़िला है। इसका क्षेत्रफल १४,८५० वर्ग किमी है और १९९८ की जनगणना में इसकी आबादी ३,१८,६८९ थी। ७,७०८ मीटर ऊँचा तिरिच मीर, जो दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ों में से है, इस ज़िले में स्थित है। चित्राल ज़िले की राजधानी चित्राल शहर है।, Sarina Singh, Lindsay Brown, Paul Clammer, Rodney Cocks, John Mock, Lonely Planet, 2008, ISBN 978-1-74104-542-0 .

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चिपोरसुन

चिपोरसुन (Chiporsun) या चपुरसन (Chapursan) पाक-अधिकृत कश्मीर के के गिलगित-बलतिस्तान क्षेत्र के हुन्ज़ा-नगर ज़िले की गोजाल तहसील में स्थित एक वादी है। इस घाटी में आठ गाँव हैं, जिनमें अधिकतर वाख़ी भाषा बोलने वाले इस्माइली शिया रहते हैं। यह इलाक़ा इर्शाद दर्रे द्वारा अफ़ग़ानिस्तान के वाख़ान गलियारे से जुड़ता है और चीन की सरहद के भी काफ़ी समीप है।, H. W. Tilman, pp.

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चग़चरान

चग़चरान​ का एक पुल चग़चरान​ (दरी फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Chaghcharan), जिसे इतिहास में चख़चेरान और आहंगारान​ के नाम से भी जाना जाता था, मध्य अफ़ग़ानिस्तान के ग़ोर प्रान्त की राजधानी है। हरीरूद (हरी नदी) के दक्षिणी किनारे पर बसा यह शहर २,२८० मीटर की ऊँचाई पर है।, Ludwig W. Adamec, pp.

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चीता

बिल्ली के कुल (विडाल) में आने वाला चीता (एसीनोनिक्स जुबेटस) अपनी अदभुत फूर्ती और रफ्तार के लिए पहचाना जाता है। यह एसीनोनिक्स प्रजाति के अंतर्गत रहने वाला एकमात्र जीवित सदस्य है, जो कि अपने पंजों की बनावट के रूपांतरण के कारण पहचाने जाते हैं। इसी कारण, यह इकलौता विडाल वंशी है जिसके पंजे बंद नहीं होते हैं और जिसकी वजह से इसकी पकड़ कमज़ोर रहती है (अतः वृक्षों में नहीं चढ़ सकता है हालांकि अपनी फुर्ती के कारण नीची टहनियों में चला जाता है)। ज़मीन पर रहने वाला ये सबसे तेज़ जानवर है जो एक छोटी सी छलांग में १२० कि॰मी॰ प्रति घंटे ऑलदो एकोर्डिंग टू चीता, ल्यूक हंटर और डेव हम्मन (स्ट्रुइक प्रकाशक, 2003), pp.

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चीनी जनवादी गणराज्य

चीनी जनवादी गणराज्य (चीनी: 中华人民共和国) जिसे प्रायः चीन नाम से भी सम्बोधित किया जाता है, पूर्वी एशिया में स्थित एक देश है। १.३ अरब निवासियों के साथ यह विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है और ९६,४१,१४४ वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ यह रूस और कनाडा के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा क्षेत्रफल वाला देश है। इतना विशाल क्षेत्रफल होने के कारण इसकी सीमा से लगते देशों की संख्या भी विश्व में सर्वाधिक (रूस के बराबर) है जो इस प्रकार है (उत्तर से दक्षिणावर्त्त): रूस, मंगोलिया, उत्तर कोरिया, वियतनाम, लाओस, म्यान्मार, भारत, भूटान, नेपाल, तिबत देश,पाकिस्तान, अफ़्गानिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान और कज़ाख़िस्तान। उत्तर पूर्व में जापान और दक्षिण कोरिया मुख्य भूमि से दूरी पर स्थित हैं। चीनी जनवादी गणराज्य की स्थापना १ अक्टूबर, १९४९ को हुई थी, जब साम्यवादियों ने गृहयुद्ध में कुओमिन्तांग पर जीत प्राप्त की। कुओमिन्तांग की हार के बाद वे लोग ताइवान या चीनी गणराज्य को चले गए और मुख्यभूमि चीन पर साम्यवादी दल ने साम्यवादी गणराज्य की स्थापना की। लेकिन चीन, ताईवान को अपना स्वायत्त क्षेत्र कहता है जबकि ताइवान का प्रशासन स्वयं को स्वतन्त्र राष्ट्र कहता है। चीनी जनवादी गणराज्य और ताइवान दोनों अपने-अपने को चीन का वैध प्रतिनिधि कहते हैं। चीन विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है जो अभी भी अस्तित्व में है। इसकी सभ्यता ५,००० वर्षों से अधिक भी पुरानी है। वर्तमान में यह एक "समाजवादी गणराज्य" है, जिसका नेतृत्व एक दल के हाथों में है, जिसका देश के २२ प्रान्तों, ५ स्वायत्तशासी क्षेत्रों, ४ नगरपालिकाओं और २ विशेष प्रशासनिक क्षेत्रों पर नियन्त्रण है। चीन विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य भी है। यह विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है और एक मान्यता प्राप्त नाभिकीय महाशक्ति है। चीनी साम्यवादी दल के अधीन रहकर चीन में "समाजवादी बाज़ार अर्थव्यवस्था" को अपनाया जिसके अधीन पूंजीवाद और अधिकारवादी राजनैतिक नियन्त्रण सम्मित्लित है। विश्व के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक ढाँचे में चीन को २१वीं सदी की अपरिहार्य महाशक्ति के रूप में माना और स्वीकृत किया जाता है। यहाँ की मुख्य भाषा चीनी है जिसका पाम्परिक तथा आधुनिक रूप दोनों रूपों में उपयोग किया जाता है। प्रमुख नगरों में बीजिंग (राजधानी), शंघाई (प्रमुख वित्तीय केन्द्र), हांगकांग, शेन्ज़ेन, ग्वांगझोउ इत्यादी हैं। .

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ट्यूलिप

ट्यूलिप के फूल ट्यूलिप (Tulip) वसंत ऋतु में फूलनेवाला पादप है। ट्यूलिप (Tulip) के नैसर्गिक वासस्थानों में एशिया माइनर, अफगानिस्तान, कश्मीर से कुमाऊँ तक के हिमालयी क्षेत्र, उत्तरी ईरान, टर्की, चीन, जापान, साइबीरिया तथा भूमध्य सागर के निकटवर्ती देश विशेषतया उल्लेखनीय हैं। वनस्पति विज्ञान के ट्यूलिया (Tulipa) वंश का पारिभाषिक उद्गम ईरानी भाषा के शब्द टोलिबन (अर्थात् पगड़ी) से इसलिये माना जाता है कि ट्यूलिप के फूलों को उलट देने से ये पगड़ी नामक शिरोवेश जैसे दिखाई देते हैं। ट्यूलिपा वंश के सहनशील पौधों का वानस्पतिक कुल लिलिएसिई (Liliaceae) है। टर्की से यह पौधा 1554 ई0 में ऑस्ट्रिया, 1571 ई0 में हॉलैंड और 1577 ई0 में इग्लैंड ले जाया गया। इस पौधे का सर्वप्रथम उल्लेख 1559 ई0 में गेसनर ने अपने लेखों और चित्रों में किया था और उसी के आधार पर ट्यूलिपा गेसेनेरियाना (Tulipa gesenereana) का नामकरण हुआ। अल्प काल में ही इसके मनमोहक फूलों के चित्ताकर्षक रूपरंग के कारण यह पौधा यूरोप भर में सर्वप्रिय होकर फैल गया है। ट्यूलिप के अंदर .

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टोबी मैग्वायर

टोबियास विन्सेंट "टोबी" मैग्वायर (Tobias Vincent "Tobey" Maguire, जन्म २७ जून १९७५) एक अमेरिकी अभिनेता व निर्माता है। इन्होने अपने करियर की शुरुआत १९८० में की थी। सैम रायामी की स्पाइडर-मैन फ़िल्म तिकड़ी में पिटर पार्कर/स्पाइडर-मैन की भूमिका के आलावा इन्होने वंडर बॉइज़ (२०००), सीबिस्कुट (२००३), ट्रॉपिक थंडर (२००८) और ब्रदर्स (२००९) जैसी फ़िल्मों में भी काम किया है। इन्हें अबतक स्क्रीन ऐक्टर्स गिल्ड और गोल्डेन ग्लोब पुरस्कारों के लिए नामांकन हासिल हुआ है व दो सैटर्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है जिसमे सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ख़िताब शामिल है। .

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एरियाना अफ़्गान एयरलाइंस

एरियाना अफ़्गान एयरलाइंस कंपनी लि. (هواپیمایی آریانا), जिसे एरियाना भी कहा जाता है, अफ़्गानिस्तान की सबसे बड़ी वायु-सेवा है। यह वहां की राष्ट्रीय कैरियर भि घोषित है। १९५५ में स्थापित हुई यह अफ़्गानिस्तान की सब्से पुरानी वायु सेवा है। कंपनी का प्रमुख आधार काबुल अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र में स्थित है, जहां से ये अन्तर्देशीय संचालन करती है, साथ ही चीन, जर्मनी, भारत, ईरान, पाकिस्तान, रूस, सऊदी अरब एवं तुर्की की सेवाएं भी चलाती है। इस सेवा का मुख्यालय राजधानी काबुल में स्थित है। यह कंपनी पूर्णतया अफ़गान सरकार के स्वामित्त्व में है। .

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एशिया की संकटापन्न भाषाओं की सूची

संकटापन्न भाषा वह भाषा है जिसपर प्रयोगबाह्य होने का खतरा मँडरा रहा हो। इसका कारण प्रायः यह होता है कि इसके जीवित भाषियों की संख्या बहुत कम रह गयी हो। यदि किसी भाषा के सभी भाषी समाप्त हो चुके हों तो यह विलुप्त भाषा कहलाती है।.

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एशियाई राजमार्ग १

एशियाई राजमार्ग १ (ए एच १) एशियाई राजमार्ग जाल में सबसे लम्बा राजमार्ग है। इसकी कुल लम्बाई २०,५५७ किलोमीटर (१२,७७४ मील) है। यह टोक्यो, जापान से शुरू होकर कोरिया, चीन, हांगकांग, दक्षिण पूर्व एशिया, बांग्लादेश, भारत, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और ईरान से होता हुआ तुर्की और बुल्गारिया तक जाता है। इस्तांबुल के पश्चिम में यह यूरोपीय ई८० मार्ग से मिल जाता है। .

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एशियाई क्रिकेट परिषद

एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) एक क्रिकेट संगठन है जो 1983 में स्थापित किया गया था, को बढ़ावा देने और एशिया में क्रिकेट के खेल को विकसित करने के लिए है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अधीनस्थ, परिषद महाद्वीप के क्षेत्रीय प्रशासनिक निकाय है, और वर्तमान में 25 सदस्य संघों के होते हैं। शहरयार खान एशियाई क्रिकेट परिषद के वर्तमान अध्यक्ष हैं। .

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ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम

अबुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम अथवा ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम (A P J Abdul Kalam), (15 अक्टूबर 1931 - 27 जुलाई 2015) जिन्हें मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के नाम से जाना जाता है, भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें निर्वाचित राष्ट्रपति थे। वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, जानेमाने वैज्ञानिक और अभियंता (इंजीनियर) के रूप में विख्यात थे। इन्होंने मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक और विज्ञान के व्यवस्थापक के रूप में चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) संभाला व भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइल के विकास के प्रयासों में भी शामिल रहे। इन्हें बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास के कार्यों के लिए भारत में मिसाइल मैन के रूप में जाना जाने लगा। इन्होंने 1974 में भारत द्वारा पहले मूल परमाणु परीक्षण के बाद से दूसरी बार 1998 में भारत के पोखरान-द्वितीय परमाणु परीक्षण में एक निर्णायक, संगठनात्मक, तकनीकी और राजनैतिक भूमिका निभाई। कलाम सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी व विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोनों के समर्थन के साथ 2002 में भारत के राष्ट्रपति चुने गए। पांच वर्ष की अवधि की सेवा के बाद, वह शिक्षा, लेखन और सार्वजनिक सेवा के अपने नागरिक जीवन में लौट आए। इन्होंने भारत रत्न, भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किये। .

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डिश टीवी

डिश टीवी भारत की पहली डीटीएच मनोरंजन सेवा है। इस पर डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच), पे-पर-वियु आदि सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यह एमपेग-2 डिजिटल संपीड़न तकनीक की मदद से कर एनएसएस-6 उपग्रह के द्वारा अपनी सेवाएं संचारित करता है। 2011 में "भारत फॉर्च्यून 500" द्वारा प्रकाशित भारत के सबसे बड़े मीडिया कंपनियों की सूची में डिश टी० वी० इंडिया लिमिटेड को #437 और # 5 स्थान मिला था। एस्सेल समूह द्वारा प्रारम्भ की गई इस उपग्रह प्रसारण सेवा के उपभोगता भारत, श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान के अलावा दक्षिण-पूर्वी एशिया में भी हैं | वर्तमान में डिश टीवी के पास २८५ से भी ज़्यादा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय चैनल्स और २५ रेडियो चैनल्स हैं | .

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डूरण्ड रेखा

अफ़गानिस्तान -पाकिस्तान को बांटने वाली डूरण्ड रेखा अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच २४३० किमी॰ लम्बी अन्तराष्ट्रीय सीमा का नाम डूरण्ड रेखा (Durand Line; पश्तो: د ډیورنډ کرښه‎) है। यह 'रेखा' १८९६ में एक समझौते के द्वारा स्वीकार की गयी थी। यह रेखा पश्तून जनजातीय क्षेत्र से होकर दक्षिण में बलोचिस्तान से बीच से होकर गुजरती है। इस प्रकार यह रेखा पश्तूनों और बलूचों को दो देशों में बाँटते हुए निकलती है। भूराजनैतिक तथा भूरणनीति की दृष्टि से डूरण्ड रेखा को विश्व की सबसे खतरनाक सीमा माना जाता है। अफगानिस्तन इस सीमा को अस्वीकार करता रहा है। अफ़्गानिस्तान चारों ओर से जमीन से घिरा हुआ है और इसकी सबसे बड़ी सीमा पूर्व की ओर पाकिस्तान से लगी है, इसे डूरण्ड रेखा कहते हैं। यह 1893 में हिंदुकुश में स्थापित सीमा है, जो अफगानिस्तान और ब्रिटिश भारत के जनजातीय क्षेत्रों से उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों को रेखांकित करती हुयी गुजरती थी। आधुनिक काल में यह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की सीमा रेखा है। .

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डेल्टा फ़ोर्स (Delta Force)

सामान्यतः डेल्टा, डेल्टा फ़ोर्स या संयुक्त राज्य अमेरिका के सुरक्षा विभाग द्वारा कॉम्बैट एप्लिकेशन्स ग्रुप (CAG) के रूप में विख्यात 1st Special Forces Operational Detachment-Delta (1st SFOD-D) एक विशिष्ट अभियान सेना (SOF) है और संयुक्त विशेष अभियान कमान (JSOC) का अभिन्न अंग है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका की मुख्य आतंकवाद विरोधी इकाई है। डेल्टा फ़ोर्स के प्रमुख कार्य हैं आतंकवाद का विरोध करना, विद्रोह को दबाना और राष्ट्रीय हस्तक्षेप वाले अभियान, हालांकि यह कई गुप्त मिशन संभालने में सक्षम एक अत्यंत बहुमुखी समूह है जो बंधकों को बचाने और छापों सहित बहुत कुछ करता है। .

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डेविड हिक्स

डेविड मैथ्यू हिक्स (जन्म 7 अगस्त, 1975), उर्फ़ अबू मुस्लिम अल-आस्ट्रेलियाई उर्फ़ महमूद दाऊद, एक आस्ट्रेलियाई नागरिक हैं जिन्हें अफगानिस्तान में गैर-क़ानूनी गतिविधियों के सिलसिले में पकड़ा गया और उनपर गुआंतानामो बे कारागार में रखकर अमरीकी सरकार द्वारा उनपर मुक़दमा चलाया जा रहा है। इस कारागार में उन्हें क़ैदी नंबर 002 के नाम से पुकारा जाता है। गुआंतानामो बे में कैद 500 कैदियों में से हिक्स उन चार कैदियों में शामिल हैं जिनपर औपचारिक रूप से मुकदमा चलाया जा रहा है। अमरीकी सरकार के अनुसार श्री हिक्स तालिबान के पैदल सेना की टुकड़ी में शामिला थे। श्री हिक्स पर न्यायिक प्रक्रिया की शुरुआत नवंबर 2005 में होनी थी लेकिन अमरीका की सर्वोच्च न्यायलय द्वारा एक फैसले के तहत रोक लगा दी गयी थी और इनपर न्यायिक प्रक्रिया की शुरुआत होनी अभी प्रतिक्षित है। श्रेणी:गुआंतानामो बे में कैद कैदी.

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ढाका-इस्तांबुल फ्रेट कॉरिडोर

ढाका-इस्तांबुल फ्रेट कॉरिडोर एक अंतरराष्ट्रीय रेल मार्ग परियोजना है।यह रेल मार्ग परियोजना बांग्लादेश,भारत,पाकिस्तान,ईरान और तुर्की को जोड़ती है।http://www.business-standard.com/article/news-ians/india-to-trial-run-goods-train-on-dhaka-istanbul-freight-corridor-117030300947_1.htmlभारत का पूर्वी डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर इस कॉरिडोर का एक हिस्सा है। .

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तरीनकोट

तरीनकोट (पश्तो:, अंग्रेज़ी: Tarinkot या Tarin Kowt) दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के ओरूज़्गान प्रान्त की राजधानी है। इस शहर की आबादी सन् २०१२ में लगभग ६,३०० अनुमानित की गई थी। यह शहर वास्तव में एक छोटा सा क़स्बा है जिसके बाज़ार में लगभग २०० दुकाने हैं। प्रांत के राज्यपाल, जो २०१२ में असदउल्लाह हमदम थे, इसी बाज़ार से लगे एक दफ़्तर में काम करते हैं। .

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तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान

तहरीक-ए-तालिबान का ध्वज फ़ाटा क्षेत्र से शुरु हुई थी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (उर्दू), जिसे कभी-कभी सिर्फ़ टी-टी-पी (TTP) या पाकिस्तानी तालिबान भी कहते हैं, पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा के पास स्थित संघ-शासित जनजातीय क्षेत्र से उभरने वाले चरमपंथी उग्रवादी गुटों का एक संगठन है। यह अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान से अलग है हालांकि उनकी विचारधाराओं से काफ़ी हद तक सहमत है। इनका ध्येय पाकिस्तान में शरिया पर आधारित एक कट्टरपंथी इस्लामी अमीरात को क़ायम करना है। इसकी स्थापना दिसंबर २००७ को हुई जब बेयतुल्लाह महसूद​ के नेतृत्व में १३ गुटों ने एक तहरीक (अभियान) में शामिल होने का निर्णय लिया।, Marlène Laruelle, Sébastien Peyrouse, pp.

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तापी गैस परियोजना

तापी गैस परियोजना अंतर्राष्ट्रीय परियोजना है। तापी शब्द तुर्कमेनिस्तान,अफगानिस्तान,पाकिस्तान और इंडिया के आदि अक्षरों से मिलकर बना है। यह तापी शब्द उक्त चारों देशों को एक साथ व्यक्त करता है। त .

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तालिबान आन्दोलन

तालिबान आंदोलन (طالبان) जिसे तालिबान या तालेबान के नाम से भी जाना जाता है, एक सुन्नी इस्लामिक आधारवादी आन्दोलन है जिसकी शुरूआत 1994 में दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में हुई थी। तालिबान पश्तो भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है ज्ञानार्थी (छात्र)। ऐसे छात्र, जो इस्लामिक कट्टरपंथ की विचारधारा पर यकीन करते हैं। तालिबान इस्लामिक कट्टपंथी राजनीतिक आंदोलन हैं। इसकी सदस्यता पाकिस्तान तथा अफ़ग़ानिस्तान के मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को मिलती है। 1996 से लेकर 2001 तक अफगानिस्तान में तालिबानी शासन के दौरान मुल्ला उमर देश का सर्वोच्च धार्मिक नेता था। उसने खुद को हेड ऑफ सुप्रीम काउंसिल घोषित कर रखा था। तालेबान आन्दोलन को सिर्फ पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने ही मान्यता दे रखी थी। अफगानिस्तान को पाषाणयुग में पहुँचाने के लिए तालिबान को जिम्मेदार माना जाता है। .

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तालोक़ान

अलाउद्दीन मुहम्मद इब्न तेकेश (राजकाल: १२००-१२२०) द्वारा तालोक़ान में ज़र्ब सिक्का - इस राजा से चंगेज़ ख़ान ने आक्रमण करके राज छीन लिया था तालोक़ान (दरी फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Taloqan) उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के तख़ार प्रान्त की राजधानी है। यह शहर २,८७४ फ़ुट (८७६ मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है। .

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ताशक़ुरग़ान​ ताजिक स्वशासित ज़िला

ताशक़ुरग़ान​ ताजिक स्वशासित ज़िला जनवादी गणतंत्र चीन द्वारा नियंत्रित शिंजियांग प्रान्त के काश्गर विभाग का एक ज़िला है। इसकी ८०% से अधिक आबादी ताजिक समुदाय की है। इस ज़िले की राजधानी ताशक़ुरग़ान​ शहर है जहाँ से पाक-अधिकृत कश्मीर से गुज़रकर पाकिस्तान व चीन को जोड़ने वाला काराकोरम राजमार्ग निकलता है।, Andrew Burke, pp.

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ताजमहल

ताजमहल (تاج محل) भारत के आगरा शहर में स्थित एक विश्व धरोहर मक़बरा है। इसका निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने, अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में करवाया था। ताजमहल मुग़ल वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इसकी वास्तु शैली फ़ारसी, तुर्क, भारतीय और इस्लामी वास्तुकला के घटकों का अनोखा सम्मिलन है। सन् १९८३ में, ताजमहल युनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना। इसके साथ ही इसे विश्व धरोहर के सर्वत्र प्रशंसा पाने वाली, अत्युत्तम मानवी कृतियों में से एक बताया गया। ताजमहल को भारत की इस्लामी कला का रत्न भी घोषित किया गया है। साधारणतया देखे गये संगमर्मर की सिल्लियों की बडी- बडी पर्तो से ढंक कर बनाई गई इमारतों की तरह न बनाकर इसका श्वेत गुम्बद एवं टाइल आकार में संगमर्मर से ढंका है। केन्द्र में बना मकबरा अपनी वास्तु श्रेष्ठता में सौन्दर्य के संयोजन का परिचय देते हैं। ताजमहल इमारत समूह की संरचना की खास बात है, कि यह पूर्णतया सममितीय है। इसका निर्माण सन् १६४८ के लगभग पूर्ण हुआ था। उस्ताद अहमद लाहौरी को प्रायः इसका प्रधान रूपांकनकर्ता माना जाता है। .

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ताजिक लोग

अफ़्ग़ान सांसद नीलोफ़र इब्राहिमी एक ताजिक हैं ताजिकिस्तान का एक परिवार ईद-उल-फ़ित्र की ख़ुशियाँ मनाते हुए ताजिक (ताजिक: Тоҷик, फ़ारसी:, तॉजिक) मध्य एशिया (विशेषकर ताजिकिस्तान, अफ़्ग़ानिस्तान, उज़बेकिस्तान और पश्चिमी चीन) में रहने वाले फ़ारसी-भाषियों के समुदायों को कहा जाता है। बहुत से अफ़्ग़ानिस्तान से आये ताजिक शरणार्थी ईरान और पाकिस्तान में भी रहते हैं। अपनी संस्कृति और भाषा के मामले में ताजिक लोगों का ईरान के लोगों से गहरा सम्बन्ध रहा है।, Olivier Roy, I.B.Tauris, 2000, ISBN 978-1-86064-278-4 चीन के ताजिक लोग अन्य ताजिक लोगों से ज़रा भिन्न होते हैं क्योंकि वे पूर्वी ईरानी भाषाएँ बोलते हैं जबकि अन्य ताजिक फ़ारसी बोलते हैं।, New World Press, 1989, ISBN 978-7-80005-078-7,...

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ताजिकिस्तान

अंतरिक्ष से ताजिकिस्तान का मंज़र ताज़िकिस्तान (ताजिक: Тоҷикистон,, तोजिकिस्तोन) मध्य एशिया मे स्थित एक देश है जो चारों ओर से ज़मीन से घिरा (स्थलवेष्ठित) है। यह पहले सोवियत संघ का हिस्सा था और उस देश के विघटन के बाद सन् १९९१ में एक स्वतंत्र देश बना। १९९२-९७ के काल में गृहयुद्धों की मार झेल चुके इस देश की कूटनीतिक-भौगोलिक स्थिति बहुत महत्वपूर्ण है। यह उज़बेकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, किर्गिज़स्तान तथा चीन के मध्य स्थित है। इसके अलावा पाकिस्तान के उत्तरी इलाके से इसे केवल अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रान्त का पतला-सा वाख़ान गलियारा ही अलग करता है। ताजिकिस्तान की राजधानी दुशानबे शहर है और यहाँ की भाषा को ताजिक कहा जाता है जो फ़ारसी भाषा का एक रूप माना जाता है। इस भाषा को सीरीलिक अक्षरों में लिखा जाता है जिसमें रूसी तथा कुछ अन्य भाषाएँ भी लिखी जाती हैं। .

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ताजिकी भाषा

द्वार पर ताजिकी में सिरिलिक लिपि में लिखा है 'बाग़-ए उस्तोद रुदाकी' (उस्ताद रुदाकी का बाग़) ताजिकी या ताजिकी फ़ारसी (тоҷикӣ,, तोजिकी) मध्य एशिया में बोली जाने वाली आधुनिक फ़ारसी भाषा का एक रूप है। ताजिकी बोलने वाले ज़्यादातर ताजिकिस्तान और उज़बेकिस्तान में रहते हैं, हालांकि ताजिकी मातृभाषियों के कुछ समुदाय अफ़्ग़ानिस्तान, रूस और चीन के शिनजियांग प्रान्त में भी मिलते हैं। अनुमानित किया गया है कि कुल मिलकर सन् १९९१ में ताजिकी बोलने वालों की संख्या ४४.६ लाख थी। वैसे तो ताजिकी ईरान में बोली जाने वाली फ़ारसी से काफ़ी मिलती है लेकिन ईरानी फ़ारसी में अरबी भाषा का प्रभाव अधिक है जबकि ताजिकी में तुर्की भाषाओँ और कुछ हद तक उज़बेक भाषा का असर ज़्यादा दिखता है।, Raymond Hickey, John Wiley and Sons, 2010, ISBN 978-1-4051-7580-7,...

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तिब्बती साम्राज्य

तिब्बती साम्राज्य (तिब्बती: བོད་, बोड) ७वीं से ९वीं सदी ईसवी तक चलने वाला एक साम्राज था। तिब्बत-नरेश द्वारा शासित यह साम्राज्य तिब्बत के पठार से कहीं अधिक विस्तृत क्षेत्रों पर फैला हुआ था। अपने चरम पर पश्चिम में आधुनिक अफ़ग़ानिस्तान, उज़बेकिस्तान, कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से लेकर बंगाल और युन्नान प्रान्त के कई भाग इसके अधीन थे।, Saul Mullard, pp.

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तिरमिज़

सुल्तान साओदात का महल तिरमिज़ (उज़बेक: Термиз, तेरमिज़; अंग्रेज़ी: Termez) मध्य एशिया के उज़बेकिस्तान देश के दक्षिणी भाग में स्थित सुरख़ानदरिया प्रान्त की राजधानी है। यह उज़बेकिस्तान की अफ़्ग़ानिस्तान के साथ सरहद के पास प्रसिद्ध आमू दरिया के किनारे बसा हुआ है। इसकी आबादी सन् २००५ में १,४०,४०४ थी। .

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तिराह

तिराह क्षेत्र (पश्तो: تیراہ‎), जिसे तिराह घाटी (उर्दु: وادی تیراہ‎), भी कहा जाता है पाकिस्तान के संघ प्रशासित जनजातीय क्षेत्र खैबर, कुर्रम और ओराकज़इ एजेंसियों में स्थित है। इसका एक छोटा भाग अफगानिस्तान में नंगरहार प्रांत में भी फैला है। तिराह खैबर दर्रे और खांकी घाटी के बीच फैली है। यह पश्तूनों की अफरीदी, ओराकज़इ और शिनवारी जनजातियों का निवास स्थान है। .

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तिरिच मीर

तिरिच मीर (Tirich Mir) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त में चित्राल शहर के पास स्थित एक पर्वत है, जो हिन्दु कुश पर्वत शृंखला का सबसे ऊँचा पहाड़ भी है। ७,७०८ मीटर (२५,२८९ फ़ुट) ऊँचा यह पर्वत हिमालय-काराकोरम श्रेणी के बाहर का सबसे ऊँचा पहाड़ है और दुनिया भर का ३३वाँ सबसे ऊँचा शिखर है (बाक़ी ३२ हिमालय-काराकोरम में स्थित हैं)। चित्राल शहर से तिरिच मीर दिखता ही है लेकिन यह पहाड़ इतना विशाल है कि इसे पाकिस्तान की सरहद के पार अफ़्ग़ानिस्तान के कुछ सीमाई इलाक़ों से भी देखा जा सकता है।, Michael Palin, Basil Pao, Macmillan, 2005, ISBN 978-0-312-34162-6,...

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तख़ार प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का तख़ार प्रान्त (लाल रंग में) तख़ार (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Takhar) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल १२,३३३ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग ८.९ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी तालोक़ान शहर है। यहाँ के अधिकतर लोग फ़ारसी बोलने वाले ताजिक और उज़बेक भाषा बोलने वाले उज़बेक लोग हैं। यह प्रान्त अपने नमक के क़ानों (खानों) के लिए मशहूर है जहाँ से खोदकर हज़ारों सालों से नमक निकाला जा रहा है।, Fariba Nawa, HarperCollins, 2011, ISBN 978-0-06-210061-0,...

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तगर

तगर (वानस्पतिक नाम: Valeriana wallichii) एक प्रकार का पेड़ जो अफगानिस्तान, कश्मीर, भूटान और कोंकण में नदियों के किनारे पाया जाता है। भारत के बाहर यह मडागास्कर और जंजीबार में भी होता है। इसकी लकड़ी बहुत सुगंधित होती है और उसमें से बहुत अधिक मात्रा में एक प्रकार का तेल निकलता है। यह लकड़ी अगर की लकड़ी के स्थान पर तथा औषध के काम में आती है। लकड़ी काले रंग की और सुगंधित होती है और उसका बुरादा जलाने के काम में आता है। भावप्रकाश के अनुसार तगर दो प्रकार का होता है, एक में सफेद रंग के और दूसरे में नीले रंग के फूल लगते हैं। इसकी पत्तियों के रस से आँख के अनेक रोग दूर होते हैं। वैद्यक में इसे उष्ण, वीर्यवर्धक, शीतल, मधुर, स्निग्ध, लघु और विष, अपस्मार, शूल, दृष्टिदोष, विषदोष, भूतोन्माद और त्रिदोष आदि का नाशक माना है। श्रेणी:औषधीय पादप.

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तकबीर

एक मुसलमान अपने हाथ उठाकर प्राथना में तकबीर पढ़ता हुआ। तकबीर (تكبير), वाक्यांश अल्लाहु अकबर (الله أكبر) (अरबी, उर्दू, फ़ारसी: اللہ اکبر) का अरबी नाम है, जिसका हिन्दी अनुवाद आम तौर पर "ईश्वर सबसे महान है", या "ईश्वर महान है" होता है। यह एक आम इस्लामी अरबी अभिव्यक्ति है, जिसे विश्वास की एक अनौपचारिक अभिव्यक्ति या फिर औपचारिक घोषणा दोनो में समान रूप में प्रयोग किया जाता है। इस्लामी धार्मिक दृष्टिकोण में यह एक नारा भी है। जिसका अर्थ अल्लाह बहुत बडा है। नारे के रूप में इसे "नारा ए तकबीर" भी कहा जाता है। .

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तुर्क लोग

तुर्क लोगों का वितरण वे देश और प्रदेश जहाँ तुर्की भाषाओँ को सरकारी मान्यता प्राप्त है तुर्क लोग (तुर्की भाषा: Türk halkları, अंग्रेज़ी: Turkic peoples) मध्य एशिया, मध्य पूर्व और उनके पड़ोसी इलाक़ों में रहने वाली उन जातियों को कहा जाता है जिनकी मातृभाषाएँ तुर्की भाषा-परिवार की सदस्य हैं। इनमें आधुनिक तुर्की देश के लोगों के अलावा, अज़रबैजान, कज़ाख़स्तान, किरगिज़स्तान, उज़बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के ज़्यादातर लोग शामिल हैं। उत्तरी अफ़्ग़ानिस्तान, पश्चिमी चीन के उईग़ुर लोग, रूस के तातार और चुवाश लोग और बहुत से अन्य समुदाय भी तुर्क लोगों के परिवार में आते हैं। गोएकतुर्क और ख़ज़र जैसी प्राचीन जातियाँ भी तुर्क थीं और संभव है कि मध्य एशिया में किसी ज़माने में धाक रखने वाले शियोंगनु लोग और हूण लोग भी तुर्क रहें हों।, Encyclopædia Britannica, Online Academic Edition, 2010 .

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तुर्कमेन भाषा

तुर्कमेन तुर्कमेनिस्तान की राष्ट्रीय भाषा है। यह तुर्कमेनिस्तान में रहने वाले करीबन तीस लाख लोगो के अलावा उत्तरी पश्चिमी अफगानिस्तान में रहने वाले करीबन चार लाख और उत्तरी पूर्वी ईरान में रहने वाले करीबन पांच लाख लोगो द्वारा बोली जाती है। तुर्कमेन विवादास्पद अल्टियाक भाषा परिवार की तुर्किक शाखा से संबद्ध है। यह दक्षिणी पश्चिमी तुर्किक उप शाखा खासतौर से पूर्वी ओगुज समूह का सदस्य है। तुर्कमेन तुर्किश और अजरबैजानी से निकट से जुड़ा हुआ है। श्रेणी:तुर्की भाषाएँ श्रेणी:भाषाएँ.

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तुर्कमेन लोग

तुर्कमेन मध्य एशिया में बसने वाली एक तुर्की-भाषी जाति का नाम है। तुर्कमेन लोग मुख्य रूप से तुर्कमेनिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, पूर्वोत्तरी ईरान, सीरिया, इराक़ और उत्तरी कॉकस क्षेत्र में रूस के स्ताव्रोपोल क्राय में रहते हैं। यह तुर्कमेन भाषा बोलते हैं जो तुर्की भाषा-परिवार की ओग़ुज़ शाखा की एक बोली है। कुछ तुर्कमेन लोग तुर्की, अज़ेरी, क़शक़ाई और गागाउज़ भाषाएँ भी बोलते हैं। .

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तुर्कमेनिस्तान

तुर्कमेनिस्तान (तुर्कमेनिया के नाम से भी जाना जाता है) मध्य एशिया में स्थित एक तुर्किक देश है। १९९१ तक तुर्कमेन सोवियत समाजवादी गणराज्य (तुर्कमेन SSR) के रूप में यह सोवियत संघ का एक घटक गणतंत्र था। इसकी सीमा दक्षिण पूर्व में अफ़ग़ानिस्तान, दक्षिण पश्चिम में ईरान, उत्तर पूर्व में उज़्बेकिस्तान, उत्तर पश्चिम में कज़ाख़िस्तान और पश्चिम में कैस्पियन सागर से मिलती है। 'तुर्कमेनिस्तान' नाम फारसी से आया है, जिसका अर्थ है, 'तुर्कों की भूमि'। देश की राजधानी अश्गाबात (अश्क़ाबाद) है। इसका हल्के तौर पर "प्यार का शहर" या "शहर जिसको मोहब्बत ने बनाया" के रूप में अनुवाद होता है। यह अरबी के शब्द 'इश्क़' और फारसी प्रत्यय 'आबाद' से मिलकर बना है।, Bradley Mayhew, Lonely Planet, 2007, ISBN 978-1-74104-614-4,...

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तुर्किस्तान

सन् १९१४ के नक़्शे में रूसी तुर्किस्तान दर्शाया गया है तुर्किस्तान (अंग्रेज़ी: Turkistan या Turkestan, फ़ारसी) मध्य एशिया के एक बड़ा भूभाग का पारम्परिक नाम है जहाँ तुर्की भाषाएँ बोलने वाले तुर्क लोग रहते हैं। इस नाम द्वारा परिभाषित इलाक़े की सीमाएँ समय के साथ बदलती रहीं हैं और इसका प्रयोग भी तुर्किस्तान से बाहर रहने वाले लोग ही अधिक करते थे।, Anita Sengupta, Lexington Books, 2009, ISBN 978-0-7391-3606-5,...

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तुर्की भाषा परिवार

विश्व के देश (गाढ़े नीले रंग में) और प्रदेश (हलके नीले रंग में) जहाँ तुर्की भाषाओँ को सरकारी मान्यता प्राप्त है सन् 735 के लगभग तराशे गए एक ओरख़ोन शिलालेख का हिस्सा यूरेशिया में तुर्की भाषाओँ का फैलाव तुर्की भाषाएँ पैंतीस से भी अधिक भाषाओँ का एक भाषा-परिवार है। तुर्की भाषाएँ पूर्वी यूरोप और भूमध्य सागर से लेकर साईबेरिया और पश्चिमी चीन तक बोली जाती हैं। कुछ भाषावैज्ञानिक इन्हें अल्ताई भाषा परिवार की एक शाखा मानते हैं। विश्व में लगभग 16.5 से 18 करोड़ लोग तुर्की भाषाएँ अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं और अगर सभी तुर्की भाषाओँ को बोल सकने वालों की गणना की जाए तो क़रीब 25 करोड़ लोग इन्हें बोल सकते हैं। सब से अधिक बोली जाने वाली तुर्की भाषा का नाम भी तुर्की है, हालाँकि कभी-कभी इसे अनातोल्वी भी कहा जाता है (क्योंकि यह अनातोलिया में बोली जाती है)। .

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तुर्की का इतिहास

तेरहवीं शताब्दी का एक मंगोल तीरबाज तुर्की के इतिहास को तुर्क जाति के इतिहास और उससे पूर्व के इतिहास के दो अध्यायों में देखा जा सकता है। सातवीं से बारहवीं सदी के बीच में मध्य एशिया से तुर्कों की कई शाखाएँ यहाँ आकर बसीं। इससे पहले यहाँ से पश्चिम में आर्य (यवन, हेलेनिक) और पूर्व में कॉकेशियाइ जातियों का बसाव रहा था। तुर्की में ईसा के लगभग ७५०० वर्ष पहले मानव बसाव के प्रमाण यहां मिले हैं। हिट्टी साम्राज्य की स्थापना १९००-१३०० ईसा पूर्व में हुई थी। १२५० ईस्वी पूर्व ट्रॉय की लड़ाई में यवनों (ग्रीक) ने ट्रॉय शहर को नेस्तनाबूत कर दिया और आसपास के इलाकों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। १२०० ईसापूर्व से तटीय क्षेत्रों में यवनों का आगमन आरंभ हो गया। छठी सदी ईसापूर्व में फ़ारस के शाह साईरस ने अनातोलिया पर अपना अधिकार जमा लिया। इसके करीब २०० वर्षों के पश्चात ३३४ इस्वीपूर्व में सिकन्दर ने फ़ारसियों को हराकर इसपर अपना अधिकार किया। बाद में सिकन्दर अफ़गानिस्तान होते हुए भारत तक पहुंच गया था। इसापूर्व १३० इस्वी में अनातोलिया रोमन साम्राज्य का अंग बना। ईसा के पचास वर्ष बाद संत पॉल ने ईसाई धर्म का प्रचार किया और सन ३१३ में रोमन साम्राज्य ने ईसाई धर्म को अपना लिया। इसके कुछ वर्षों के अन्दर ही कान्स्टेंटाईन साम्राज्य का अलगाव हुआ और कान्स्टेंटिनोपल इसकी राजधनी बनाई गई। छठी सदी में बिजेन्टाईन साम्राज्य अपने चरम पर था पर १०० वर्षों के भीतर मुस्लिम अरबों ने इसपर अपना अधिकार जमा लिया। बारहवी सदी में धर्मयुद्धों में फंसे रहने के बाद बिजेन्टाईन साम्राज्य का पतन आरंभ हो गया। सन १२८८ में ऑटोमन साम्राज्य का उदय हुआ और सन् १४५३ में कस्तुनतुनिया का पतन। इस घटना ने यूरोप में पुनर्जागरण लाने में अपना महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। .

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तुषारी लोग

तारिम द्रोणी में स्थित क़िज़िल गुफ़ाओं में तुषारियों की छठी सदी में बनी तस्वीर - माना जाता है कि इनमें से बहुत के सुनहरे बाल और बिलौरी आँखें होती थीं तुषारी या तुख़ारी (अंग्रेज़ी: Tocharian, टोचेरियन) प्राचीन काल में मध्य एशिया में स्थित तारिम द्रोणी में बसने वाली एक जाति थी। यह हिन्द-यूरोपीय भाषाएँ बोलने वाले सब से पूर्वतम लोग थे। चीनी स्रोतों के अनुसार इनका युएझ़ी लोगों से गहरा सम्बन्ध था। इनकी उत्तरी शियोंगनु लोगों से बहुत झड़पें हुई, जिसके बाद इन्होनें तारिम द्रोणी का इलाक़ा छोड़ दिया। ८०० ईसवी के बाद इस क्षेत्र में इस क्षेत्र में उइग़ुर लोग के आकर बसने पर यहाँ हिन्द-यूरोपीय भाषाएँ विलुप्त हो गई और तुर्की भाषाएँ बोली जाने लगी। अफ़्ग़ानिस्तान के तख़ार प्रांत का नाम इसी जाति पर पड़ा है। इनका ज़िक्र संस्कृत ग्रंथों में बहुत होता है। अथर्ववेद में इन्हें शक लोगों और बैक्ट्रिया के लोगों से सम्बंधित बताया गया है।, Vasudev Sharan Agrawal, Prithvi Prakashan, 1963,...

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त्रेगामी भाषा

त्रेगामी भाषा (Tregami language), जिसे त्रिगामी भाषा और गाम्बीरी भाषा भी कहते हैं, अफ़ग़ानिस्तान के कुनर प्रान्त के मध्य भाग में स्थित वटापूर ज़िले के गाम्बीर और कटार गाँवो में बोली जाने वाली एक भाषा है।, R. Khanam, pp.

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तैमूरी राजवंश

अपने चरम पर तैमूरी साम्राज्य तैमूरी राजवंश (फ़ारसी:, तैमूरियान), जो स्वयं को 'गुरकानी राजवंश' कहते थे, मध्य एशिया और उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीप के विस्तृत इलाक़ों पर राज करने वाला तुर्की-मंगोल नस्ल का एक सुन्नी मुस्लिम वंश था। अपने चरम पर इसके साम्राज्य में समस्त ईरान, अफ़्ग़ानिस्तान और उज़बेकिस्तान के साथ-साथ पाकिस्तान, उत्तर भारत, आनातोलिया, कॉकस और मेसोपोटामिया के बड़े भूभाग शामिल थे। इस राजवंश की नीव १४वीं शताब्दी ईसवी में तैमूरलंग नामक आक्रामक और विजेता ने रखी थी।, Maria Subtelny, BRILL, 2007, ISBN 978-90-04-16031-6 १६वीं सदी में उज़बेकिस्तान की फ़रग़ना वादी से भारत पर आक्रमण करके मुग़ल सलतनत की स्थापना करने वाला बाबर भी इसी तैमूरी राजवंश का हिस्सा था। क्योंकि तैमूरलंग को अक्सर 'अमीर तैमूर' कहा जाता था इसलिए इस राजघराने के वंशज अपने नामों में अक्सर 'मिर्ज़ा' जोड़ लिया करते थे जो 'अमीरज़ादा' (यानि 'अमीर का पुत्र') का संक्षिप्त रूप है।, Mansura Haidar, Mukhtar Ahmad Ansari, Department of History, Jamia Millia Islamia (India), Aakar Books, 2003, ISBN 978-81-87879-11-4,...

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तोबा ककड़

पाकिस्तान और अफ़्ग़ानिस्तान के इस नक़्शे के बीच में तोबा ककड़ शृंखला नामांकित है तोबा ककड़, तोबा काकड़ या तोबा ककड़ी (Toba Kakar) पाकिस्तान के पश्चिमी बलोचिस्तान प्रांत में स्थित सफ़ेद कोह पहाड़ों की एक दक्षिणी उपशाखा है। तोबा ककड़ की शुष्क पहाड़ियों से गुज़रने का सबसे प्रसिद्ध रास्ता बोलन दर्रा है जिसका भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास पर गहरा प्रभाव है क्योंकि बहुत सी जातियाँ और फ़ौजें इस से भारत और अफ़्ग़ानिस्तान व ईरान के बीच आई-गई हैं और यह हजारों सालों से लगातार एक व्यापार मार्ग बना रहा है। १९८० के दशक के बाद यह पर्वत ख़बरों में रहें हैं क्योंकि पहले इनमें पाकिस्तानी परमाणु विस्फोट परीक्षण स्थल होने की अफ़वाह थी और फिर बाद में यह शक़ हुआ की ओसामा बिन लादेन और उसके सहयोगी यहाँ छुपे हुए हैं। इस शृंखला को कभी-कभी बलोचिस्तान और अफ़्ग़ानिस्तान के बीच एक प्राकृतिक सीमा माना जाता है। चमन के शहर के बाद यह शृंखला दक्षिण-पश्चिम को मुड़ जाती है और उसके बाद इसे 'ख़्वाजा अमरान' के नाम से जाना जाता है।, Sir William Wilson Hunter, Great Britain.

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तोरख़म

तोरख़म में पाकिस्तान-अफ़्ग़ानिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर करते लोग तोरख़म या तूरख़म (पश्तो) पाकिस्तान के पश्चिमोत्तरी संघ-शासित जनजातीय क्षेत्र (फ़ाटा) की ख़ैबर एजेंसी में स्थित पाकिस्तान-अफ़्ग़ानिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर एक छोटा सा सरहदी क़स्बा है। सीमा के उस पार अफ़्ग़ानिस्तान का नंगरहार प्रान्त है। यह बस्ती प्रसिद्ध ख़ैबर दर्रे से सिर्फ़ पाँच किलोमीटर पूर्व पर स्थित है और पाकिस्तान-अफ़्ग़ानिस्तान के दर्मियान यातायात और व्यापार का एक मुख्य पड़ाव है। तोरख़म और उसके इर्द-गिर्द के इलाक़ों में मुख्य रूप से पश्तून लोग बसते हैं।, United Nations, United Nations Publications, 2009, ISBN 978-92-1-130285-1,...

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तीराही भाषा

तीराही (Tirahi) कोहिस्तानी उपशाखा की एक दार्दी भाषा है जो अफ़ग़ानिस्तान के नंगरहार प्रान्त प्रान्त के नंगरहार नामक गाँव के आसपास बोली जाती है। इसे मूल रूप से बोलने वाले समुदाय की जनसंख्या ५,००० है लेकिन उनमें से १०० के अलावा बाक़ी सभी अब अन्य भाषाएँ बोलते हैं। भाषावैज्ञानिकों को डर है कि यह भाषा विलुप्त होने वाली है। .

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थ़

थ़ की ध्वनि सुनिए - यह थ से भिन्न है थ़ देवनागरी लिपि का एक वर्ण है जिसके उच्चारण को अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला में θ के चिन्ह से लिखा जाता है। मानक हिंदी और मानक उर्दू में इसका प्रयोग नहीं होता है, लेकिन हिंदी की कुछ पश्चिमी उपभाषाओं में इसका 'थ' के साथ सहस्वानिकी संबंध है। मुख्य रूप से इसका प्रयोग पहाड़ी भाषों को देवनागरी में लिखने के लिए होता है। अंग्रेज़ी के कईं शब्दों में इसका प्रयोग होता है, जैसे की 'थ़िन' (thin, यानि पतला)। .

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थाली (बर्तन)

स्टील की थाली एक खाना लगी भरी हुई थाली थाली (नेपाली: थाली, तमिल: தட்டு) भोजन करने के लिए एक बर्तन है जिसमें ज्यादातर भारत में ही प्रयोग की जाती है। साथ ही थाली का प्रयोग विशिष्ट खाने बनाने के लिए भी किया जाता है। यह भारत, नेपाल, बांग्लादेश, फिजी, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, श्रीलंका, मॉरीशस और सिंगापुर में भोजन करने के लिए लोकप्रिय है। .

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द गान

द गान (The Ghan) ऑस्ट्रेलिया में एडिलेड, ऐलिस स्प्रिंग्स और डार्विन के बीच चलने वाली एक यात्री रेल सेवा है। यह ५४ घंटों में २,९७९ किलोमीटर का रास्ता तय करती है। इसका नाम १९वीं शताब्दी के अंत में ऑस्ट्रेलिया लाए गए कुछ अफ़्गान ऊंट-सवारों पर रखा गया है जिनकी मदद से ऑस्ट्रेलिया के भीतरी रेगिस्तानी भाग की खोज व जाँच करी गई थी। .

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दरी फ़ारसी

अंग्रेज़ी और दरी भाषाओँ में बामियान शहर का स्वागत चिह्न - सबसे ऊपर लिखा है 'बा शहर-ए-बास्तानी बामियान ख़ुश आमदीद' (बामियान के प्राचीन शहर में स्वागत) दरी या दरी फ़ारसी अफ़ग़ानिस्तान में प्रचलित आधुनिक फ़ारसी का एक रूप है। पश्तो के साथ-साथ यह अफ़ग़ानिस्तान की दो संवैधानिक राजभाषाओं में से एक है। यह अफ़ग़ानिस्तान के लगभग ५०% लोगों की मातृभाषा है और देश की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा भी है। अफ़ग़ानिस्तान में अलग-अलग भाषाएँ बोलने वाले समुदायों के बीच में भी इसका सम्पर्क भाषा के रूप में इस्तेमाल होता है। ईरानी फ़ारसी और दरी फ़ारसी बोलने वाले एक दुसरे को आसानी से समझ पाते हैं और इनमें सिर्फ़ लहजे और कुछ शब्दों का अंतर है। बहुत से भाषावैज्ञानिकों के अनुसार दरी में पुरानी फ़ारसी के बहुत से ऐसे तत्व सुरक्षित हैं जो आधुनिक ईरानी फ़ारसी में खो गये हैं।, Shaista Wahab, Hippocrene Books, 2004, ISBN 978-0-7818-1012-8 .

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दशराज्ञ युद्ध

दशराज्ञ युद्ध या दस राजाओं का युद्ध एक युद्ध था जिसका उल्लेख ऋग्वेद के सातवें मंडल में ७:१८, ७:३३ और ७:८३:४-८ में मिलता है। इस युद्ध में एक तरफ़ पुरु नामक आर्य क़बीला और उनका मित्रपक्ष समुदाय था, जिनके सलाहकार ऋषि विश्वामित्र थे। दूसरी ओर भारत नामक समुदाय था, जिसका नेतृत्व तृत्सु नामक क़बीले के राजा सुदास कर रहें थे और जिनके प्रेरक ऋषि वशिष्ठ थे।, Sushant Kumar, pp.

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दश्त-ए-मारगो

सीस्तान द्रोणी क्षेत्र में दश्त-ए-मारगो दश्त-ए-मारगो (फ़ारसी) दक्षिण-पश्चिमी अफ़्ग़ानिस्तान के हेलमंद और नीमरूज़ प्रान्तों में स्थित एक रेगिस्तान है। इस मरुस्थल का कुल क्षेत्रफल १,५०,००० वर्ग किमी है और इसकी ऊंचाई ५०० से ७०० मीटर के बीच है। .

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दही (योगहर्ट या योगर्ट)

तुर्की दही एक तुर्की ठंडा भूख बढ़ाने वाला दही का किस्म दही (Yoghurt) एक दुग्ध-उत्पाद है जिसे दूध के जीवाण्विक किण्वन के द्वारा बनाया जाता है। लैक्टोज के किण्वन से लैक्टिक अम्ल बनता है, जो दूध के प्रोटीन पर कार्य करके इसे दही की बनावट और दही की लाक्षणिक खटास देता है। सोय दही, दही का एक गैर-डेयरी विकल्प है जिसे सोय दूध से बनाया जाता है। लोग कम से कम 4,500 साल से दही-बना रहे हैं-और खा रहे हैं। आज यह दुनिया भर में भोजन का एक आम घटक है। यह एक पोषक खाद्य है जो स्वास्थ्य के लिए अद्वितीय रूप से लाभकारी है। यह पोषण की दृष्टि से प्रोटीन, कैल्सियम, राइबोफ्लेविन, विटामिन B6 और विटामिन B12 में समृद्ध है। .

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दायकुंदी प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का दायकुंदी प्रांत (लाल रंग में) दायकुंदी या दाय कुंदी (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Daykundi) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के मध्य भाग में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल १८,०८८ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००६ में लगभग ४ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी नीली शहर है। बामयान प्रान्त की तरह, इस प्रान्त में भी अधिकतर आबादी हज़ारा समुदाय की है, जो मंगोल नस्ल के वंशज हैं और शिया इस्लाम के अनुयायी हैं। .

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दार्द लोग

दार्द या दारद उन समुदायों को कहा जाता है जो दार्दी भाषाएँ बोलते हैं। यह हिन्द-आर्य लोगों की एक उपशाखा है। दार्द लोग मुख्य रूप से उत्तर भारत के कश्मीर व लद्दाख़ क्षेत्र, पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र, पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त और पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के कुछ भागों में बसते हैं। अलग-अलग स्थनों के दार्द लोगों को 'ब्रोकपा', 'द्रोकपा' व 'शीन' जैसे नामों से भी जाना जाता है। .

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दार्दिस्तान

दार्दिस्तान (पारसी-अरबी: داردستان) जी डब्ल्यू लिटनर द्वारा दिया गया एक भौगोलिक नाम है जो भारतीय कश्मीर, उत्तरी पाकिस्तान तथा उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान को सूचित करता है। इस भूभाग के निवासी दार्दी भाषाएँ बोलते हैं और 'दार्द' कहलाते हैं। इसके अंतर्गत चित्राल, यासिन, पेंन्याल, गिलगिट घाटी, हुजा एवं नागार बुंजी से वातेरा तक की सिंधु घाटी अस्तोर घाटी तथा कोहिस्तान मालाजाई क्षेत्र थे। इसका उल्लेख प्लिनी एवं टालिमी नामक इतिहासवेत्ताओं ने भी किया है। दार्द लोग 'आर्य जाति' के माने गए हैं। वे चौदहवीं शती में मुसलमान बन गए थे। श्रेणी:कश्मीर श्रेणी:भारत के क्षेत्र.

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दार्दी भाषाएँ

दार्दी या दार्दिक भाषाएँ (ज़बान दार्दी) हिन्द-आर्य भाषाओं की एक उपशाखा है जिसकी सबसे जानी-मानी भाषा कश्मीरी है। दार्दी भाषाएँ उत्तरी पाकिस्तान, उत्तर-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान और भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य में बोली जातीं हैं।, Peter K. Austin, University of California Press, ISBN 0-520-25560-7,...

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दक्षिण एशिया वन्यजीव प्रवर्तन नेटवर्क

दक्षिण एशिया वन्यजीव प्रवर्तन नेटवर्क (South Asia Wildlife Enforcement Network (SAWEN/सावन)) दक्षिण एशियाई देशों की अन्त्र-सरकार संस्था है जो वन्यजीवों से सम्बन्धित कानूनों को कार्यान्वित करने का कार्य करती है। इसमें भारत, श्रीलंका, अफगानिस्तान, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, मालदीव तथा पाकिस्तान सम्मिलित हैं। इसका आरम्भ २०११ में भूटान से किया गया था। यह संस्था क्षेत्रीय सहयोग द्वारा वन्यजीवों से सम्बन्धित अपराधों को रोकने का कार्य करती है। इसका सचिवालय काठमाण्डू में है। .

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दक्षिण एशिया उपग्रह

दक्षिण एशिया उपग्रह (इंग्लिश: South Asia Satellite) जिसका नाम पहले सार्क उपग्रह (SAARC Satellite) था, दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) क्षेत्र के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा बनाया गया भू-समकालिक संचार और मौसम विज्ञान उपग्रह है। २०१४ में नेपाल में आयोजित १८वें सार्क शिखर सम्मेलन के दौरान, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक उपग्रह सार्क के सदस्य देशों की आवश्यकताओं की सेवा का विचार रखा था। जो उनकी 'पहले पड़ोस' नीति का हिस्सा था। हालांकि उपग्रह सार्क क्षेत्र में सेवा करने का इरादा है, पाकिस्तान कार्यक्रम से बाहर निकल गया, जबकि अफगानिस्तान और बांग्लादेश ने अपनी वचनबद्धता देने का वायदा नहीं किया था।, Economic Times .

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दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय

दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय (एसएयू), दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के आठ सदस्य राज्यों द्वारा प्रायोजित एक अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय है। आठ देश हैं: अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका। दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय ने अकबर भवन, भारत में अस्थायी परिसर में, 2010 में छात्रों को स्वीकार करना शुरू किया। इसका स्थायी परिसर भारत में दक्षिण दिल्ली, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (आईजीएनओयू) के बगल में मैदान गढ़ी में होगा। विश्वविद्यालय का पहला अकादमिक सत्र अगस्त 2010 में दो स्नातकोत्तर शैक्षणिक कार्यक्रमों के साथ अर्थशास्त्र और कंप्यूटर विज्ञान में शुरू हुआ था। 2014 के रूप में एसएयू ने गणित, जैव प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर विज्ञान, विकास अर्थशास्त्र, अंतरराष्ट्रीय संबंधों, कानून और समाजशास्त्र में मास्टर और एमफिल / पीएचडी कार्यक्रमों की पेशकश की। 8 देशों के विदेश मंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित एक अंतर-सरकारी समझौते के अनुसार सार्क के सभी सदस्य राष्ट्रों द्वारा विश्वविद्यालय की डिग्री मान्यता प्राप्त है। दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय, प्रमुख रूप से सभी आठ सार्क देशों से छात्रों को आकर्षित करता है, हालांकि अन्य महाद्वीपों के छात्र भी भाग लेते हैं। छात्रों के प्रवेश के लिए कोटा प्रणाली है। हर साल एसएयू सभी 8 देशों में कई केन्द्रों में प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है। .

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दक्षिण एशियाई खेल

दक्षिण एशिया ओलम्पिक परिषद चिह्न दक्षिण एशियाई खेल (जिन्हें सैफ़ खेल या सैग और पूर्व में दक्षिण एशियाई संघ खेलों के नाम से भी जाना जाता था) द्वि-वार्षिक बहु-क्रीड़ा प्रतियोगिता है, जिसमें दक्षिण एशियाई खिलाड़ी प्रतिभागी होते हैं। इन खेलों का शासी निकाय दक्षिण एशियाई खेल परिषद है, जिसकी स्थापना १९८३ में हुई थी। वर्तमान में सैग के आठ सदस्य हैं अफ़्गानिस्तान, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भारत, भूटान, मालदीव और श्रीलंका। प्रथम सैफ़ खेल १९८४ में काठमांडु, नेपाल में आयोजित हुए थे और तबसे ये खेल प्रति दो वर्षों के अन्तराल पर आयोजित होते हैं, केवल कुछ अवसरों को छोड़कर। २००४ में दक्षिण एशियाई खेल परिषद की ३२वीं बैठक में यह निर्णय लिया गया की इन खेलों का नाम दक्षिण एशियाई संघ खेलों से बदलकर दक्षिण एशियाई खेल कर दिया जाए क्योंकि अधिकारियों का मानना था की संघ शब्द प्रतियोगिता पर कम बल दे रहा है और भीड़ आकर्षित करने में बाधक बन रहा है। इस खेलों को बहुधा दक्षिण एशिया ओलम्पिक खेलों के रूपान्तर के रूप में बढ़ाचढ़ा कर प्रस्तुत किया जाता है। .

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दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) दक्षिण एशिया के आठ देशों का आर्थिक और राजनीतिक संगठन है। संगठन के सदस्य देशों की जनसंख्या (लगभग 1.5 अरब) को देखा जाए तो यह किसी भी क्षेत्रीय संगठन की तुलना में ज्यादा प्रभावशाली है। इसकी स्थापना ८ दिसम्बर १९८५ को भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान द्वारा मिलकर की गई थी। अप्रैल २००७ में संघ के 14 वें शिखर सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान इसका आठवा सदस्य बन गया। .

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दक्षेस महासचिव

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन महासचिव, सार्क सचिवालय का प्रमुख है, जिसका काठमांडू, नेपाल में मुख्यालय है। सार्क आठ दक्षिण एशियाई सदस्य देशों, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच एक आर्थिक और भू राजनीतिक संघ है। सदस्य-राज्यों के मंत्रियों की परिषद द्वारा चुनाव से तीन साल की अवधि के लिए महासचिव नियुक्त किया जाता है। 1987 को बांग्लादेशी राजनयिक अबुल अहसान ने अपने पहले महासचिव के रूप में काठमांडू में सार्क सचिवालय की स्थापना की थी और नेपाल के राजा बिरेंद्र बीर बिक्रम शाह ने उद्घाटन किया था। इसकी रचना के बाद से, इसके सदस्य देशों ने कुल 13 तेरह सचिवों को रूप में योगदान दिया है। पाकिस्तान के राजनयिक अमजद हुसैन बी सियाल 1 मार्च, 2017 को प्रभार संभालने वाले मौजूदा महासचिव हैं। .

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दक्षेस गान

दक्षेस गान जो आठ दक्षिण एशियाई देशों के लिए एक प्रस्तावित क्षेत्रीय गान है। अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका इस दक्षेस के सदस्य हैं। इस गान रचनाकार भारतीय राजनयिक और कवि अभय कुमार हैं। वें नेपाल स्थित भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव (प्रेस, सूचना एवं संस्कृति) के रूप में तैनात हैं। अभय कुमार ने दक्षेस गान को मूलत: हिंदी में लिखा है लेकिन अब इसका अनुवाद सात अन्य दक्षेस राष्ट्रों की मातृभाषा में किया हैं। इस गान को लिखकर अभय कुमार ने दक्षेस देशों में परस्पर सहयोग की भावना को और पुष्ट करने की कोशिश की हैं। गान में दक्षेस के सभी आठ देशों- नेपाल, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, मालदीव, श्रीलंका और भूटान की भाषाओं का इस्तेमाल किया गया है। दक्षेस गान को सर्वप्रथम नेपाल से प्रकाशित हिन्दी मासिक ‘हिमालिनी’ नामक वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया। .

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दुर्रानी साम्राज्य

दुर्रानी साम्राज्य (पश्तो:, द दुर्रानियानो वाकमन​ई) एक पश्तून साम्राज्य था जो अफ़्ग़ानिस्तान पर केन्द्रित था और पूर्वोत्तरी ईरान, पाकिस्तान और पश्चिमोत्तरी भारत पर विस्तृत था। इस १७४७ में कंदहार में अहमद शाह दुर्रानी (जिसे अहमद शाह अब्दाली भी कहा जाता है) ने स्थापित किया था जो अब्दाली कबीले का सरदार था और ईरान के नादिर शाह की फ़ौज में एक सिपहसलार था। १७७३ में अहमद शाह की मृत्यु के बाद राज्य उसके पुत्रों और फिर पुत्रों ने चलाया जिन्होने राजधानी को काबुल स्थानांतरित किया और पेशावर को अपनी शीतकालीन राजधानी बनाया। अहमद शाह दुर्रानी ने अपना साम्राज्य पश्चिम में ईरान के मशाद शहर से पूर्व में दिल्ली तक और उत्तर में आमू दरिया से दक्षिण में अरब सागर तक फैला दिया और उसे कभी-कभी आधुनिक अफ़्ग़ानिस्तान का राष्ट्रपिता माना जाता है।, Library of Congress Country Studies on Afghanistan, 1997, Accessed 2010-08-25 .

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द्रुह्यु लोग

द्रुह्यु बृहत भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर भाग में बसने वाले आर्य समुदाय का एक प्रमुख क़बीला था। इनका वर्णन ऋग्वेद में अनु समुदाय के साथ आता है। ऋग्वेद के सातवे मंडल में द्रुह्यु योद्धा पुरुओं द्वारा स्थापित उस मित्रपक्ष में थे जिन्होने दस राजाओं के युद्ध (दशराज्ञ युद्ध) में भारत क़बीले के राजा सुदास से जंग की थी जिसमें पुरुओं की हार हुई थी। .

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देशों के दूरभाष कूट की सूची

यह ITU-T की सिफारिश E.164 के अनुसार देशों की दूरभाष कुट सँख्या कि सुची है। .

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देशों के राजचिह्नों की सूची

This gallery of sovereign state coats of arms shows the coat of arms (or an emblem serving a similar purpose) of each of the sovereign states in the list of sovereign states.

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देशी भाषाओं में देशों और राजधानियों की सूची

निम्न चार्ट विश्व के देशों को सूचीबद्ध करता है (जैसा की यहां परिभाषित किया गया है), इसमें उनके राजधानीयों के नाम भी शामिल है, यह अंग्रेजी के साथ साथ उस देश की मूल भाषा और/या सरकारी भाषा में दी गयी है। ज टी की कोण नॉन en .

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देवदार

देवदार (वैज्ञानिक नाम:सेडरस डेओडारा, अंग्रेज़ी: डेओडार, उर्दु: ديودار देओदार; संस्कृत: देवदारु) एक सीधे तने वाला ऊँचा शंकुधारी पेड़ है, जिसके पत्ते लंबे और कुछ गोलाई लिये होते हैं तथा जिसकी लकड़ी मजबूत किन्तु हल्की और सुगंधित होती है। इनके शंकु का आकार सनोबर (फ़र) से काफी मिलता-जुलता होता है। इनका मूलस्थान पश्चिमी हिमालय के पर्वतों तथा भूमध्यसागरीय क्षेत्र में है, (१५००-३२०० मीटर तक हिमालय में तथा १०००-२००० मीटर तक भूमध्य सागरीय क्षेत्र में)।Farjon, A. (1990).

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धर्मांतरण

सेंट पॉल के रूपांतरण, इतालवी कलाकार कैरावैजियो (1571-1610) द्वारा एक 1600 सदी का चित्र धर्मांतरण किसी ऐसे नये धर्म को अपनाने का कार्य है, जो धर्मांतरित हो रहे व्यक्ति के पिछले धर्म से भिन्न हो.

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धार किला

धार दुर्ग (या धार का किला) मध्य प्रदेश के धार नगर में स्थित है। यह किला नगर के उत्तर में स्थित एक छोटी पहाड़ी पर बना हुआ है। लाल बलुआ पत्थर से बना यह विशाल किला अपने समय में बहुत समृद्ध रहा है तथा इतिहास के उतार-चढ़ावों को देख चुका है। १४वीं शताब्दी में दिल्ली के तत्कालीन सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने इसका निर्माण करवाया था। १८५७ के प्रथम भारतीय स्वाधीनता संग्राम के समय इस किले का महत्व बहुत था क्योंकि तब क्रांतिकारियों ने इस किले पर अधिकार कर लिया था। हालांकि बाद में ब्रिटिश सेना ने किले पर पुन: अधिकार प्राप्त कर लिया और यहां लोगों पर अनेक प्रकार के अत्याचार किए। किले की स्थापत्य शैली हिन्दू, मुस्लिम और अफगान शैली है और यह लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है। धार नगरी की योजना मानचित्र .

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नरेन्द्र मोदी

नरेन्द्र दामोदरदास मोदी (નરેંદ્ર દામોદરદાસ મોદી Narendra Damodardas Modi; जन्म: 17 सितम्बर 1950) भारत के वर्तमान प्रधानमन्त्री हैं। भारत के राष्‍ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उन्हें 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमन्त्री पद की शपथ दिलायी। वे स्वतन्त्र भारत के 15वें प्रधानमन्त्री हैं तथा इस पद पर आसीन होने वाले स्वतंत्र भारत में जन्मे प्रथम व्यक्ति हैं। वडनगर के एक गुजराती परिवार में पैदा हुए, मोदी ने अपने बचपन में चाय बेचने में अपने पिता की मदद की, और बाद में अपना खुद का स्टाल चलाया। आठ साल की उम्र में वे आरएसएस से  जुड़े, जिसके साथ एक लंबे समय तक सम्बंधित रहे । स्नातक होने के बाद उन्होंने अपने घर छोड़ दिया। मोदी ने दो साल तक भारत भर में यात्रा की, और कई धार्मिक केंद्रों का दौरा किया। गुजरात लौटने के बाद और 1969 या 1970 में अहमदाबाद चले गए। 1971 में वह आरएसएस के लिए पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए। 1975  में देश भर में आपातकाल की स्थिति के दौरान उन्हें कुछ समय के लिए छिपना पड़ा। 1985 में वे बीजेपी से जुड़े और 2001 तक पार्टी पदानुक्रम के भीतर कई पदों पर कार्य किया, जहाँ से वे धीरे धीरे वे सचिव के पद पर पहुंचे।   गुजरात भूकंप २००१, (भुज में भूकंप) के बाद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के असफल स्वास्थ्य और ख़राब सार्वजनिक छवि के कारण नरेंद्र मोदी को 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। मोदी जल्द ही विधायी विधानसभा के लिए चुने गए। 2002 के गुजरात दंगों में उनके प्रशासन को कठोर माना गया है, की आलोचना भी हुई।  हालांकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) को अभियोजन पक्ष की कार्यवाही शुरू करने के लिए कोई है। मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी नीतियों को आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए । उनके नेतृत्व में भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा और 282 सीटें जीतकर अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की। एक सांसद के रूप में उन्होंने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी वाराणसी एवं अपने गृहराज्य गुजरात के वडोदरा संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा और दोनों जगह से जीत दर्ज़ की। इससे पूर्व वे गुजरात राज्य के 14वें मुख्यमन्त्री रहे। उन्हें उनके काम के कारण गुजरात की जनता ने लगातार 4 बार (2001 से 2014 तक) मुख्यमन्त्री चुना। गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त नरेन्द्र मोदी विकास पुरुष के नाम से जाने जाते हैं और वर्तमान समय में देश के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से हैं।। माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर भी वे सबसे ज्यादा फॉलोअर वाले भारतीय नेता हैं। उन्हें 'नमो' नाम से भी जाना जाता है। टाइम पत्रिका ने मोदी को पर्सन ऑफ़ द ईयर 2013 के 42 उम्मीदवारों की सूची में शामिल किया है। अटल बिहारी वाजपेयी की तरह नरेन्द्र मोदी एक राजनेता और कवि हैं। वे गुजराती भाषा के अलावा हिन्दी में भी देशप्रेम से ओतप्रोत कविताएँ लिखते हैं। .

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नरेन्द्र मोदी द्वारा किए गए अंतरराष्ट्रीय प्रधानमन्त्रीय यात्राओं की सूची

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी मई २०१६ में तेहरान, ईरान में पधारते हुए। २०१४ के आम चुनाव के बाद नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधान मंत्री बने। नरेन्द्र मोदी द्वारा की गयीं अन्तर्राष्ट्रीय प्रधानमन्त्रीय यात्राओं की सूची इस प्रकार है। .

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नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति

नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति को मोदी सिद्धान्त भी कहते हैं। २६ मई, २०१४ को सत्ता में आने के तुरन्त बाद से ही मोदी सरकार ने अन्य देशों के साथ सम्बन्धों को नया आयाम देने की दिशा में कार्य करना आरम्भ कर दिया। श्रीमती सुषमा स्वराज भारत की विदेश मंत्री हैं। दक्षिण एशिया के अपने पड़ोसियों से सम्बन्ध सुधारना मोदी की विदेश नीति के केन्द्र में है। इसके लिए उन्होने १०० दिन के अन्दर ही भूटान, नेपाल, जापान की यात्रा की। इसके बाद अमेरिका, म्यांमार, आस्ट्रेलिया और फिजी की यात्रा की। श्रीमती सुषमा स्वराज ने भी बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, म्यांमार, सिंगापुर, वियतनाम, बहरीन, अफगानिस्तान, तजाकिस्तान, यूएसए, यूके, मॉरीसस, मालदीव, यूएईदक्षिण कोरिया, चीन, ओमान, और श्रीलंका की यात्रा की है। ९वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में विश्व नेताओं के साथ मोदी .

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नाटो

नाटो गठबंधन का ध्वज उत्‍तरी एटलांटिक संधि संगठन (नार्थ एटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (नाटो)) एक सैन्य गठबंधन है, जिसकी स्थापना ४ अप्रैल १९४९ को हुई। इसका मुख्यालय ब्रुसेल्स (बेल्जियम) में है। संगठन ने सामूहिक सुरक्षा की व्यवस्था बनाई है, जिसके तहत सदस्य राज्य बाहरी हमले की स्थिति में सहयोग करने के लिए सहमत होंगे। गठन के शुरुआत के कुछ वर्षों में यह संगठन एक राजनीतिक संगठन से अधिक नहीं था। लेकिन कोरियाई युद्ध ने सदस्य देशों को प्रेरक का काम किया और दो अमरीकी सर्वोच्च कमांडरों के दिशानिर्देशन में एक एकीकृत सैन्य संरचना निर्मित की गई। लॉर्ड इश्मे पहले नाटो महासचिव बने, जिनकी संगठन के उद्देश्य पर की गई टिप्पणी, "रुसियों को बाहर रखने, अमरीकियों को अंदर और जर्मनों को नीचे रखने" (के लिए गई है।) खासी चर्चित रही। यूरोपीय और अमरीका के बीच रिश्तों की तरह ही संगठन की ताकत घटती-बढ़ती रही। इन्हीं परिस्थितियों में फ्रांस स्वतंत्र परमाणु निवारक बनाते हुए नाटो की सैनिक संरचना से १९६६ से अलग हो गया। १९८९ में बर्लिन की दीवार के गिरने के बाद संगठन का पूर्व की तरफ बाल्कन हिस्सों में हुआ और वारसा संधि से जुड़े हुए अनेक देश १९९९ और २००४ में इस गठबंधन में शामिल हुए। १ अप्रैल २००९ को अल्बानिया और क्रोएशिया के प्रवेश के साथ गठबंधन की सदस्य संख्या बढ़कर २८ हो गई। संयुक्त राज्य अमेरिका में ११ सितंबर २००१ के आतंकवादी हमलों के बाद नाटो नई चुनौतियों का सामना करने के लिए नए सिरे से तैयारी कर रहा है, जिसके तहत अफ़ग़ानिस्तान में सैनिकों की और इराक में प्रशिक्षकों की तैनाती की गई है। बर्लिन प्लस समझौता नाटो और यूरोपीय संघ के बीच १६ दिसम्बर २००२ को बनाया का एक व्यापक पैकेज है, जिसमें यूरोपीय संघ को किसी अंतरराष्ट्रीय विवाद की स्थिति में कार्रवाई के लिए नाटो परिसंपत्तियों का उपयोग करने की छूट दी गई है, बशर्ते नाटो इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं करना चाहता हो। नाटो के सभी सदस्यों की संयुक्त सैन्य खर्च दुनिया के रक्षा व्यय का ७०% से अधिक है, जिसका संयुक्त राज्य अमेरिका अकेले दुनिया का कुल सैन्य खर्च का आधा हिस्सा खर्च करता है और ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली १५ % खर्च करते हैं। .

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नानख़ताई

नानख़ताई बिस्कुट की एक प्रकार है जिस की उत्पत्ति सूरत में हुई। ये बिस्कुट भारत और पाकिस्तान में बहुत लोकप्रिय हैं। नानख़ताई का शब्द फ़ारसी के शब्द नान और अफ़ग़ानी के शब्द ख़ताई से आया है जिस का अर्थ रोटी के बिस्कुट है। अफ़ग़ानिस्तान और पूर्वोत्तर ईरान में इसे कुल्चाये खताई कहा जाता है। कुलचा भी नान जैसी एक रोटी का नाम है। .

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नायमन लोग

चंगेज़ ख़ान के मंगोल साम्राज्य से पहले १३वीं सदी में यूरेशिया के स्थिति - नायमन (Naiman) राज्य नक़्शे में दिख रहा है नायमन या नायमन तुर्क या नायमन मंगोल (मंगोल: Найман ханлиг, नायमन ख़ानलिग) मध्य एशिया के स्तेपी इलाक़े में बसने वाली एक जाति का मंगोल भाषा में नाम था, जिनके कारा-ख़ितान के साथ सम्बन्ध थे और जो सन् ११७७ तक उनके अधीन रहे। मंगोल नाम होने के बावजूद, नायमानों को एक मंगोल जाति नहीं बल्कि एक तुर्की जाति माना जाता है।, René Grousset, Rutgers University Press, 1970, ISBN 978-0-8135-1304-1,...

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नासिर जमाल

नासिर जमाल (जन्म; २१ दिसंबर १९९३, अफ़ग़ानिस्तान) एक दाहिने हाथ के बल्लेबाज है जो अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम के लिए साल २०१४ से खेलते आ रहे है। इन्होंने एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का पहला मैच २२ जुलाई २०१४ को ज़िम्बाब्वे क्रिकेट टीम के खिलाफ खेला था। नासिर जमाल दाहिने हाथ से बल्लेबाजी करते है जबकि दाहिने ही हाथ से लेग ब्रेक गेंदबाजी भी करते है। ये मुख्य रूप से एक बल्लेबाज है जिन्हें भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ अफगानिस्तान के पहले टेस्ट मैच में १६ सदस्यीय टीम में जगह दी गई। .

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निलोफर रहमानी

निलोफर रहमानी (फारसी:نیلوفر رحمانی जन्म: 1992), अफगानिस्तान की पहली महिला 'फिक्सड विंग एयर फोर्स एविएटर' पायलट हैं। वर्ष 1992 में जन्मी निलोफर 18 साल की उम्र में ही अफगान एयरफोर्स में शामिल हो गई थीं। इनके परिवार को कई बार तालिबान से धमकियां भी मिलीं, लेकिन उन्होने अपने लगन और हिम्मत के बल पर तालिबान लड़ाकों के लिए 'किलर' बनकर अपने जज्बे को लगातार नया आयाम दिया हैं। अमेरिकी राज्य सचिव के द्वारा निलोफर को "साहस पुरस्कार हेतु प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय महिला" के लिए नहीं चुना गया है। .

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नव-उपनिवेशवाद

विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों के आन्तरिक मामलों में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किये जाने वाले हस्तक्षेप को नव-उपनिवेशवाद (Neocolonialism) कहा जाता है। नवउपनिवेशवाद की धारणा के मानने वालों का सोचना है कि पूर्व में उपनिवेशी शक्तियों ने जो आर्थिक ढांचा बना रखा था उनका अब भी उन उपनिवेशों पर नियन्त्रण करने में इस्तेमाल किया जा रहा है। यूरोप के देशों ने एक लम्बे समय तक एशिया और अफ्रीका के देशों पर अपना साम्राज्यवादी जाल फेंकर उनका राजनीतिक व आर्थिक शोषण किया लेकिन उन देशों में उभरने वाले स्वतन्त्रता आन्दोलनों ने साम्राज्यवादी देशों के मनसूबों पर पानी फेर दिया। धीरे-धीरे एशिया और अफ्रीका के देश एक-एक करके साम्राज्यवादी चुंगल से मुक्ति पाने लगे। जब साम्राज्यवादी शक्तियों को अपने दिन लदते नजर आए तो उन्होंने औपनिवेशिक शोषण के नए नए तरीके तलाशने शुरू कर दिए। उन्होंने इस प्रक्रिया में उन देशों पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए आर्थिक साम्राज्यवाद का सहारा लिया। स्वतन्त्र होने के बाद नवोदित राष्ट्र इस स्थिति में नही रहे कि वे अपना स्वतन्त्र आर्थिक विकास कर सकें। उनके आर्थिक विकास में सहायता के नाम पर विकसित साम्राज्यवादी देशों ने डॉलर की कूटनीति (डॉलर डिप्लोमैसी) का प्रयोग करके उनकी अर्थव्यवस्थाओं पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया और धीरे-धीरे वे नए साम्राज्यवाद के जाल में इस कदर फंस गए कि आज तक भी वे विकसित देशों के ही पराधीन हैं। इस व्यवस्था को नव-उपनिवेशवाद के नाम से जाना जाता है। .

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नंगरहार प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का नंगरहार प्रान्त (लाल रंग में) नंगरहार (पश्तो:, अंग्रेजी: Nangarhar) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ७,७२७ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग १३.३ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी जलालाबाद शहर है। इस प्रान्त की पूर्वी और दक्षिणी सरहदें पाकिस्तान से लगती हैं। यहाँ के अधिकतर निवासी पश्तो बोलने वाले पठान हैं। .

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नंगलामी भाषा

नंगलामी (Nangalami), जिसे ग्रंगाली (Grangali) भी कहते हैं, कुनर (कुनड़) शाखा की एक दार्दी भाषा है जो अफ़ग़ानिस्तान​ के कुनर प्रान्त और नंगरहार प्रान्त की सीमा पर विस्तृत क्षेत्र में बोली जाती है जहाँ निंगलाम गाँव भी पड़ता है। यह पेच नदी और वाएगल नदी के संगम स्थल के पास है। इसकी तीन उपभाषाएँ है - नंगलामी, ग्रंगाली और ज़ेमियाकी - हालांकि ज़ेमियाकी के बारे में कुछ विवाद है कि यह वास्तव में इसकी उपभाषा है कि नहीं। .

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नौरोज़

नौरोज़ या नवरोज़ (फारसी: نوروز‎‎ नौरूज़; शाब्दिक रूप से "नया दिन"), ईरानी नववर्ष का नाम है, जिसे फारसी नया साल भी कहा जाता है और मुख्यतः ईरानियों द्वारा दुनिया भर में मनाया जाता है। यह मूलत: प्रकृति प्रेम का उत्सव है। प्रकृति के उदय, प्रफुल्लता, ताज़गी, हरियाली और उत्साह का मनोरम दृश्य पेश करता है। प्राचीन परंपराओं व संस्कारों के साथ नौरोज़ का उत्सव न केवल ईरान ही में ही नहीं बल्कि कुछ पड़ोसी देशों में भी मनाया जाता है। इसके साथ ही कुछ अन्य नृजातीय-भाषाई समूह जैसे भारत में पारसी समुदाय भी इसे नए साल की शुरुआत के रूप में मनाते हैं। पश्चिम एशिया, मध्य एशिया, काकेशस, काला सागर बेसिन और बाल्कन में इसे 3,000 से भी अधिक वर्षों से मनाया जाता है। यह ईरानी कैलेंडर के पहले महीने (फारवर्दिन) का पहला दिन भी है। यह उत्सव, मनुष्य के पुनर्जीवन और उसके हृदय में परिवर्तन के साथ प्रकृति की स्वच्छ आत्मा में चेतना व निखार पर बल देता है। यह त्योहार समाज को विशेष वातावरण प्रदान करता है, क्योंकि नववर्ष की छुट्टियां आरंभ होने से लोगों में जो ख़ुशी व उत्साह दिखाता है वह पूरे वर्ष में नहीं दिखता। .

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नूडल

ताइवान के लुकांग शहर में बनते हुए मीसुआ नूडल्ज़ नूड्ल्ज़ गेहूं, चावल, बाजरे या अन्य क़िस्म के आटे से बनाकर सुखाये गए पतले, लम्बे रेशे होते हैं जिन्हें उबलते हुए पाने या तेल में डालकर खाने के लिए पकाया जाता है। जब नूड्ल्ज़ सूखे होते हैं तो अक्सर तीली की तरह सख़्त होतें हैं लेकिन उबालने के बाद मुलायम पड़कर खाने योग्य हो जाते हैं। नूड्ल्ज़ के एक रेशे को "नूड्ल" कहा जाता है। .

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नूर जहाँ

सत्रह वर्ष की अवस्था में मेहरुन्निसा का विवाह 'अलीकुली' नामक एक साहसी ईरानी नवयुवक से हुआ था, जिसे जहाँगीर के राज्य काल के प्रारम्भ में शेर अफ़ग़ान की उपाधि और बर्दवान की जागीर दी गई थी। 1607 ई. में जहाँगीर के दूतों ने शेर अफ़ग़ान को एक युद्ध में मार डाला। मेहरुन्निसा को पकड़ कर दिल्ली लाया गया और उसे बादशाह के शाही हरम में भेज दिया गया। यहाँ वह बादशाह अकबर की विधवा रानी 'सलीमा बेगम' की परिचारिका बनी। मेहरुन्निसा को जहाँगीर ने सर्वप्रथम नौरोज़ त्यौहार के अवसर पर देखा और उसके सौन्दर्य पर मुग्ध होकर जहाँगीर ने मई, 1611 ई. में उससे विवाह कर लिया। विवाह के पश्चात् जहाँगीर ने उसे ‘नूरमहल’ एवं ‘नूरजहाँ’ की उपाधि प्रदान की। 1613 ई. में नूरजहाँ को ‘पट्टमहिषी’ या ‘बादशाह बेगम’ बनाया गय.

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नूरिस्तान प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का नूरिस्तान प्रान्त (लाल रंग में) नूरिस्तान (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Nuristan) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ९,२२५ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००२ में लगभग १.१ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी पारून शहर है। इस प्रान्त की सरहदें पाकिस्तान से लगती हैं। यहाँ के लगभग ९५% लोग नूरिस्तानी हैं। .

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नूरिस्तानी

नूरिस्तानी का सम्बन्ध अफ़ग़ानिस्तान के नूरिस्तान क्षेत्र के इन विषयों से हो सकता है -.

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नूरिस्तानी भाषाएँ

नूरिस्तानी भाषाएँ (Nuristani languages) हिन्द-ईरानी भाषा-परिवार का एक उपपरिवार है जिसकी सदस्य भाषाएँ पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में और पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त के चित्राल ज़िले के कुछ हिस्सों में बोली जाती हैं। इन्हें लगभग १,३०,००० लोग बोलते हैं जो नूरिस्तानी या कलश कहलाते हैं। कुछ भाषावैज्ञानिक इन्हें हिन्द-आर्य भाषा-परिवार की दार्दी शाखा की उपशाखा समझा है लेकिन अन्य इन्हें ईरानी भाषाओं और हिन्द-आर्य भाषाओं के साथ हिन्द-ईरानी भाषा-परिवार की एक अलग तीसरी श्रेणी माना जाता है।, Andrew Dalby, pp.

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नूरिस्तानी लोग

एक नूरिस्तानी लड़की नूरिस्तानी समुदाय पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के नूरिस्तान इलाक़े में रहने वाली एक जाती है। नूरिस्तान के लोग अपने सुनहरे बालों, हरी-नीली आँखों और गोरे रंग के लिए जाने जाते हैं। उन्नीसवी सदी के अंत तक नूरिस्तानियों का धर्म हिन्दू धर्म से मिलता जुलता एक अति-प्राचीन हिन्द-ईरानी धर्म था और नूरिस्तान को इर्द-गिर्द के मुस्लिम इलाक़ों के लोग "काफ़िरिस्तान" के नाम से जानते थे। सैंकड़ों-हज़ारों वर्षों तक यहाँ के लोग स्वतन्त्र रहे और यहाँ तक कि पंद्रहवी सदी के आक्रमणकारी तैमुरलंग को भी हरा दिया। १८९० के दशक में अफ़ग़ानिस्तान के अमीर अब्दुर रहमान ख़ान ने इस इलाक़े पर हमलों के बाद इस पर क़ब्ज़ा कर लिया। इसके बाद यहाँ के लोगों को मजबूरन मुस्लिम बनाना पड़ा और इस क्षेत्र का नाम भी बदल कर नूरिस्तान कर दिया गया, जिसका अर्थ है "नूर" (यानि "रोशनी") का स्थान। यहाँ के लोगों के रीति-रिवाज और धार्मिक मान्यताओं में अभी भी उनके इस्लाम से पूर्व के धर्म के तत्व मिलते हैं। नूरिस्तान से लगे हुए पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी चित्राल इलाक़े के कलश लोग नूरिस्तानियों से मिलते-जुलते हैं, लेकिन वे उन्नीसवी सदी में ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन भारत में आते थे, इसलिए वे अब्दुर रहमान ख़ान के हमलों से बचे रहे और उनमें से कई अभी भी अपने पूर्वजों के धर्म के अनुयायी हैं। अलग-अलग नूरिस्तानी और कलश क्षेत्रों में भाषा का भी अंतर है, लेकिन ये सारी भाषाएँ दार्दी भाषाओँ में ही गिनी जाती हैं। .

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नेपाल शिवसेना

नेपाल शिवसेना की एक दीवार पेंटिंग, जिसमें लिखा गया है, "माओवाद मुर्दाबाद"। नेपाल शिवसेना (नेपाली: नेपाल शिवसेना) नेपाल का एक हिन्दूवादी राजनैतिक दल है। इस दल का गठन १९९९ में किया गया था। यह भारत के शिव सेना से जुड़ा हुआ है। किरण सिंह बुधाथोकि इसके वर्तमान अध्यक्ष हैं। जब इस्लामी आतंकवादी संगठन तालिबान ने अफ्गानिस्तान में भगवान बुद्ध की हज़ारों वर्ष पुरानी कलाकृतियों को ढहा दिया था, तब नेपाल शिवसेना और शिवसेना नेपाल ने इसकी कड़ी निंदा की। .

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नोशक पर्वत

नोशक पर्वत नोशक या नौशक (Noshaq) अफ़्ग़ानिस्तान का सबसे ऊँचा और, तिरिच मीर पर्वत के बाद, हिन्दु कुश पर्वत शृंखला का दूसरा सबसे ऊँचा पहाड़ है। ७,४९२ मीटर (२४,५८० फ़ुट) ऊँचा यह पर्वत अफ़्ग़ानिस्तान की पाकिस्तान के साथ सरहद के पास स्थित है। पूरी दुनिया का यह ५२वाँ सबसे ऊँचा पहाड़ है और ७,००० मीटर से ज़्यादा ऊँचे पहाड़ों में यह सबसे पश्चिमी स्थान पर है। नोशक पर्वत की उत्तरी और पश्चिमी ढलाने अफ़्ग़ानिस्तान में आती हैं जबकि इसकी दक्षिणी और पूर्वी ढलाने पाकिस्तान में हैं। इसे सबसे पहला सन् १९६० में जापान के तोशीयाकी साकाई और गोरो इवात्सुबो ने चढ़ा था।, Richard Spilsbury, The Rosen Publishing Group, 2012, ISBN 978-1-4488-6619-9,...

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नीमरूज़ प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का नीमरूज़ प्रान्त (लाल रंग में) नीमरूज़ प्रान्त में शुष्क-पथरीली ज़मीन पर उगने वाला 'चश्त' नामक पौधा नीमरूज़ प्रान्त के चख़ानसूर ज़िले का एक नज़ारा नीमरूज़ (पश्तो:, अंग्रेजी: Nimruz) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पश्चिम में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ४१,००५ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००२ में लगभग १.५ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी ज़रंज शहर है। इस प्रान्त की सरहदें ईरान और पाकिस्तान से लगती हैं। नीमरूज़ प्रान्त अफ़्ग़ानिस्तान की सब से कम घनी आबादी वाला सूबा है और इसका एक बड़ा भूभाग सीस्तान द्रोणी और दश्त-ए-मारगो के भयंकर रेगिस्तान में आता है। .

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नीली, अफ़्ग़ानिस्तान

दायकुंदी प्रान्त की राजधानी नीली का एक नज़ारा नीली​ (हज़ारगी:, अंग्रेज़ी: Nili) मध्य अफ़ग़ानिस्तान के दायकुंदी प्रान्त की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है। यहाँ के ज़्यादातर लोग हज़ारा समुदाय के हैं। २,०२२ मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस शहर में बहुत ज़बरदस्त सर्दियाँ पड़ती हैं और सड़कें ख़राब होने से उस मौसम में यातायात बहुत कठिन होता है। दिसम्बर २००८ में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़​ई ने अज़रा जाफ़री को नीली का महापौर नियुक्त किया जिस से यह अफ़ग़ानिस्तान का पहला महिला महापौर वाला नगर बन गया।, Sayed Askar Mousavi, Curzon Press, 1998, ISBN 978-0-7007-0630-3 .

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पटना

पटना (पटनम्) या पाटलिपुत्र भारत के बिहार राज्य की राजधानी एवं सबसे बड़ा नगर है। पटना का प्राचीन नाम पाटलिपुत्र था। आधुनिक पटना दुनिया के गिने-चुने उन विशेष प्राचीन नगरों में से एक है जो अति प्राचीन काल से आज तक आबाद है। अपने आप में इस शहर का ऐतिहासिक महत्व है। ईसा पूर्व मेगास्थनीज(350 ईपू-290 ईपू) ने अपने भारत भ्रमण के पश्चात लिखी अपनी पुस्तक इंडिका में इस नगर का उल्लेख किया है। पलिबोथ्रा (पाटलिपुत्र) जो गंगा और अरेन्नोवास (सोनभद्र-हिरण्यवाह) के संगम पर बसा था। उस पुस्तक के आकलनों के हिसाब से प्राचीन पटना (पलिबोथा) 9 मील (14.5 कि॰मी॰) लम्बा तथा 1.75 मील (2.8 कि॰मी॰) चौड़ा था। पटना बिहार राज्य की राजधानी है और गंगा नदी के दक्षिणी किनारे पर अवस्थित है। जहां पर गंगा घाघरा, सोन और गंडक जैसी सहायक नदियों से मिलती है। सोलह लाख (2011 की जनगणना के अनुसार 1,683,200) से भी अधिक आबादी वाला यह शहर, लगभग 15 कि॰मी॰ लम्बा और 7 कि॰मी॰ चौड़ा है। प्राचीन बौद्ध और जैन तीर्थस्थल वैशाली, राजगीर या राजगृह, नालन्दा, बोधगया और पावापुरी पटना शहर के आस पास ही अवस्थित हैं। पटना सिक्खों के लिये एक अत्यंत ही पवित्र स्थल है। सिक्खों के १०वें तथा अंतिम गुरु गुरू गोबिंद सिंह का जन्म पटना में हीं हुआ था। प्रति वर्ष देश-विदेश से लाखों सिक्ख श्रद्धालु पटना में हरमंदिर साहब के दर्शन करने आते हैं तथा मत्था टेकते हैं। पटना एवं इसके आसपास के प्राचीन भग्नावशेष/खंडहर नगर के ऐतिहासिक गौरव के मौन गवाह हैं तथा नगर की प्राचीन गरिमा को आज भी प्रदर्शित करते हैं। एतिहासिक और प्रशासनिक महत्व के अतिरिक्त, पटना शिक्षा और चिकित्सा का भी एक प्रमुख केंद्र है। दीवालों से घिरा नगर का पुराना क्षेत्र, जिसे पटना सिटी के नाम से जाना जाता है, एक प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्र है। .

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पटना का इतिहास

लोककथाओं के अनुसार, राजा पत्रक को पटना का जनक कहा जाता है, जिसने अपनी रानी पाटलि के लिये जादू से इस नगर का निर्माण किया। इसी कारण नगर का नाम पाटलिग्राम पड़ा। पाटलिपुत्र नाम भी इसी के कारण पड़ा। संस्कृत में पुत्र का अर्थ पुत्र या बेटा तथा ग्राम का अर्थ गांव होता है। पुरातात्विक अनुसंधानो के अनुसार पटना का इतिहास 490 ईसा पूर्व से होता है जब हर्यक वन्श के शासक अजातशत्रु ने अपनी राजधानी राजगृह से बदलकर यहां स्थापित की, क्योंकि वैशाली के लिच्छवियों से संघर्ष में उपयुक्त होने के कारण पाटलिपुत्र राजगृह की अपेक्षा सामरिक दृष्टि से अधिक रणनीतिक स्थान पर था। उसने गंगा के किनारे यह स्थान चुना और अपमा दुर्ग स्थापित कर लिया। उस समय से ही इस नगर का लगातार इतिहास रहा है - ऐसा गौरव दुनिया के बहुत कम नगरों को हासिल है। बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध अपने अन्तिम दिनों में यहां से गुजरे थे। उन्होने ये भविष्यवाणी की थी कि नगर का भविष्य उज्जवल होगा, पर कभी बाढ़, आग या आपसी संघर्ष के कारण यह बर्बाद हो जाएगा। मौर्य साम्राज्य के उत्कर्ष के बाद पाटलिपुत्र सत्ता का केन्द्र बन गया। चन्द्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य बंगाल की खाड़ी से अफ़ग़ानिस्तान तक फैल गया था। शुरूआती पाटलिपुत्र लकड़ियों से बना था, पर सम्राट अशोक ने नगर को शिलाओं की संरचना मे तब्दील किया। चीन के फाहियान ने, जो कि सन् 399-414 तक भारत यात्रा पर था, अपने यात्रा-वृतांत में यहां के शैल संरचनाओं का जीवन्त वर्णन किया है। मेगास्थनीज़, जो कि एक युनानी इतिहासकार और चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में एक राजदूत के नाते आया था, ने पाटलिपुत्र नगर का प्रथम लिखित विवरण दिया। ज्ञान की खोज में, बाद में कई चीनी यात्री यहां आए और उन्होने भी यहां के बारे में, अपने यात्रा-वृतांतों में लिखा है। इसके पश्चात नगर पर कई राजवंशों का राज रहा। इन राजाओं ने यहीं से भारतीय उपमहाद्वीप पर शासन किया। गुप्त वंश के शासनकाल को प्राचीन भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है। पर इसके बाद नगर को वह गैरव नहीं मिल पाया जो एक समय मौर्य वंश के समय प्राप्त था। गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद पटना का भविष्य काफी अनिश्चित रहा। 12 वीं सदी में बख़्तियार खिलजी ने बिहार पर अपना अधिपत्य जमा लिया और कई आध्यात्मिक प्रतिष्ठानों को ध्वस्त कर डाला। पटना देश का सांस्कृतिक और राजनैतिक केन्द्र नहीं रहा। मुगलकाल में दिल्ली के सत्ताधारियों ने यहां अपना नियंत्रण बनाए रखा। इस काल में सबसे उत्कृष्ठ समय तब आया जब शेरसाह सूरी ने नगर को पुनर्जीवित करने की कोशिश की। उसने गंगा के तीर पर एक किला बनाने की सोची। उसका बनाया कोई दुर्ग तो अभी नहीं है, पर अफ़ग़ान शैली में बना एक मस्जिद अभी भी है। मुगल बादशाह अकबर 1574 में अफ़गान सरगना दाउद ख़ान को कुचलने पटना आया। अकबर के राज्य सचिव एवं आइने अकबरी के लेखक (अबुल फ़जल) ने इस जगह को कागज, पत्थर तथा शीशे का सम्पन्न औद्योगिक केन्द्र के रूप में वर्णित किया है। पटना राइस के नाम से यूरोप में प्रसिद्ध चावल के विभिन्न नस्लों की गुणवत्ता का उल्लेख भी इन विवरणों में मिलता है। मुगल बादशाह औरंगजेब ने अपने प्रिय पोते मुहम्मद अज़ीम के अनुरोध पर 1704 में, शहर का नाम अजीमाबाद कर दिया। अज़ीम उस समय पटना का सूबेदार था। पर इस कालखंड में, नाम के अतिरिक्त पटना में कुछ विशेष बदलाव नहीं आया। मुगल साम्राज्य के पतन के साथ ही पटना बंगाल के नबाबों के शासनाधीन हो गया जिन्होंने इस क्षेत्र पर भारी कर लगाया पर इसे वाणिज्यिक केन्द्र बने रहने की छूट दी। १७वीं शताब्दी में पटना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का केन्द्र बन गया। अंग्रेज़ों ने 1620 में यहां रेशम तथा कैलिको के व्यापार के लिये यहां फैक्ट्री खोली। जल्द ही यह सॉल्ट पीटर (पोटेशियम नाइट्रेट) के व्यापार का केन्द्र बन गया जिसके कारण फ्रेंच और डच लोग से प्रतिस्पर्धा तेज हुई। बक्सर के निर्णायक युद्ध के बाद नगर इस्ट इंडिया कंपनी के अधीन चला गया और वाणिज्य का केन्द्र बना रहा। 1912, में बंगाल के विभाजन के बाद, पटना उड़ीसा तथा बिहार की राजधाान बना। It soon emerged as an important and strategic centre.

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पठान

अफ़्ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के नक़्शे में पश्तून क्षेत्र (नारंगी रंग में) ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान एक पश्तून थे अफ़्ग़ानिस्तान के ख़ोस्त प्रान्त में पश्तून बच्चे अमीर शेर अली ख़ान अपने पुत्र राजकुमार अब्दुल्लाह जान और सरदारों के साथ (सन् १८६९ ई में खींची गई) पश्तून, पख़्तून (पश्तो:, पश्ताना) या पठान (उर्दू) दक्षिण एशिया में बसने वाली एक लोक-जाति है। वे मुख्य रूप में अफ़्ग़ानिस्तान में हिन्दु कुश पर्वतों और पाकिस्तान में सिन्धु नदी के दरमियानी क्षेत्र में रहते हैं हालांकि पश्तून समुदाय अफ़्ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के अन्य क्षेत्रों में भी रहते हैं। पश्तूनों की पहचान में पश्तो भाषा, पश्तूनवाली मर्यादा का पालन और किसी ज्ञात पश्तून क़बीले की सदस्यता शामिल हैं।, James William Spain, Mouton,...

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पद्म श्री पुरस्कार (१९७०-७९)

पद्म श्री पुरस्कार, भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरीक सम्मान है। जिसके ई॰ सन् १९७४ से १९७९ के प्राप्त कर्ता निम्न हैं: .

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पन्ना

पन्ना, बेरिल (Be3Al2(SiO3)6) नामक खनिज का एक प्रकार है जो हरे रंग का होता है और जिसे क्रोमियम और कभी-कभी वैनेडियम की मात्रा से पहचाना जाता है।हर्ल्बट, कॉर्नेलियस एस.

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पनीर

पनीर पनीर (Indian cottage cheese) एक दुग्ध-उत्पाद है। यह चीज़ (cheese) का एक प्रकार है जो भारतीय उपमहाद्वीप में खूब उपयोग किया जाता है। इसी तरह छेना भी एक विशेष प्रकार का भारतीय चीज़ है जो पनीर से मिलता-जुलता है और रसगुल्ला बनाने में प्रयुक्त होता है। भारत में पनीर का प्रयोग सीमित मात्रा में ही होता है। कश्मीर आदि जैसे ठंढे प्रदेशों में अपेक्षाकृत अधिक पनीर खाया जाता है। .

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परवान प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का परवान प्रान्त (लाल रंग में) परवान (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Parwan) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ५,९७४ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग ५.६ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी चारीकार शहर है। यहाँ के ज़्यादातर लोग फ़ारसी बोलने वाले ताजिक लोग हैं, हालाँकि यहाँ पश्तून समुदाय के लोग भी रहते हैं। .

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परवेज़ मुशर्रफ़

परवेज़ मुशर्रफ़ परवेज़ मुशर्रफ़ (उर्दू: پرويز مشرف; जन्म अगस्त 11, 1943) पाकिस्तान के राष्ट्रपति और सेना प्रमुख रह चुके हैं। इन्होंने साल 1999 में नवाज़ शरीफ की लोकतान्त्रिक सरकार का तख्ता पलट कर पाकिस्तान की बागडोर संभाली और 20 जून, 2001 से 18 अगस्त 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे। .

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पश्तो भाषा

कोई विवरण नहीं।

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पानीपत का तृतीय युद्ध

पानीपत का तृतीय युद्ध अहमद शाह अब्दाली और मराठों के बीच हुआ। पानीपत की तीसरी लड़ाई (95.5 किमी) उत्तर में मराठा साम्राज्य और अफगानिस्तान के अहमद शाह अब्दाली, दो भारतीय मुस्लिम राजा Rohilla अफगान दोआब और अवध के नवाब Shuja-उद-Daula (दिल्ली के सहयोगी दलों) के एक गठबंधन के साथ अहमद शाह अब्दाली के एक उत्तरी अभियान बल के बीच पर 14 जनवरी 1761, पानीपत, के बारे में 60 मील की दूरी पर हुआ। लड़ाई018 वीं सदी में सबसे बड़े, लड़ाई में से एक माना जाता है और एक ही दिन में एक क्लासिक गठन दो सेनाओं के बीच लड़ाई की रिपोर्ट में मौत की शायद सबसे बड़ी संख्या है। मुग़ल राज का अंत (१६८०-१७७०) में शुरु हो गया था, जब मुगलों के ज्यादातर भू भागों पर मराठाओं का अाधिपत्य हो गया था। गुजरात और मालवा के बाद बाजी राव ने १७३७ में दिल्ली पर मुगलों को हराकर अपने अधीन कर लिया था और दक्षिण दिल्ली के ज्यादातर भागों पर अपने मराठाओं का राज था। बाजी राव के पुत्र बाला जी बाजी राव ने बाद में पंजाब को भी जीतकर अपने अधीन करके मराठाओं की विजय पताका उत्तर भारत में फैला दी थी। पंजाब विजय ने १७५८ में अफगानिस्तान के दुर्रानी शासकों से टकराव को अनिवार्य कर दिया था। १७५९ में दुर्रानी शासक अहमद शाह अब्दाली ने कुछ पसतून कबीलो के सरदारों और भारत में अवध के नवाबों से मिलकर गंगा के दोआब क्षेत्र में मराठाओं से युद्ध के लिए सेना एकत्रित की। इसमें रोहलिआ अफगान ने भी उसकी सहायता की। पानीपत का तीसरा युद्ध इस तरह सम्मिलित इस्लामिक सेना और मराठाओं के बीच लड़ा गया। अवध के नवाब ने इसे इस्लामिक सेना का नाम दिया और बाकी मुसल्मानों को भी इस्लाम के नाम पर इकट्ठा किया। जबकि मराठा सेना ने अन्य हिन्दू राजाओं से सहायता की उम्मीद की १४ जनवरी १७६१ को हुए इस युद्ध में भूखे ही युद्ध में पहुँचे मराठाओं को सुरवती विजय के बाद हार का मुख देखना पड़ा.

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पानीपत का प्रथम युद्ध

पानीपत का पहला युद्ध, उत्तरी भारत में लड़ा गया था और इसने इस इलाके में मुग़ल साम्राज्य की नींव रखी। यह उन पहली लड़ाइयों में से एक थी जिसमें बारूद, आग्नेयास्त्रों और मैदानी तोपखाने को लड़ाई में शामिल किया गया था। सन् 1526 में, काबुल के तैमूरी शासक ज़हीर उद्दीन मोहम्मद बाबर, की सेना ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी, की एक ज्यादा बड़ी सेना को युद्ध में परास्त किया। युद्ध को 21 अप्रैल को पानीपत नामक एक छोटे से गाँव के निकट लड़ा गया था जो वर्तमान भारतीय राज्य हरियाणा में स्थित है। पानीपत वो स्थान है जहाँ बारहवीं शताब्दी के बाद से उत्तर भारत के नियंत्रण को लेकर कई निर्णायक लड़ाइयां लड़ी गयीं। एक अनुमान के मुताबिक बाबर की सेना में 15000 के करीब सैनिक और 20-24 मैदानी तोपें थीं। लोधी का सेनाबल 130000 के आसपास था, हालांकि इस संख्या में शिविर अनुयायियों की संख्या शामिल है, जबकि लड़ाकू सैनिकों की संख्या कुल 100000 से 110000 के आसपास थी, इसके साथ कम से कम 300 युद्ध हाथियों ने भी युद्ध में भाग लिया था। क्षेत्र के हिंदू राजा-राजपूतों इस युद्ध में तटस्थ रहे थे, लेकिन ग्वालियर के कुछ तोमर राजपूत इब्राहिम लोदी की ओर से लड़े थे। .

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पामीर नदी

वाख़ान गलियारे का नक़्शा जिसमें पामीर नदी और ज़ोरकुल सरोवर देखे जा सकते है पामीर नदी (फ़ारसी:, दरिया-ए-पामीर) ताजिकिस्तान और अफ़्ग़ानिस्तान की एक नदी है। यह पंज नदी की एक उपनदी है। यह ताजिकिस्तान के सुदूर पूर्वी कोहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त में पामीर पर्वतों की हिमानियों (ग्लेशियर) में उत्पन्न होती है। इसका मुख्य स्रोत ज़ोरकुल सरोवर माना जाता है। यहाँ से आगे इसके मार्ग को अफ़्ग़ानिस्तान के वाख़ान गलियारे की उत्तरी सरहद और ताजिकिस्तान और अफ़्ग़ानिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय सीमा माना जाता है। अफ़्ग़ानिस्तान के लंगर और क़िला-ए-पंज नामक गाँवों के पास इसका विलय वाख़ान नदी से होता है और इस संगम के बाद यह पंज नदी के नाम से जानी जाती है।, World Bank Publications, ISBN 978-0-8213-5890-0 .

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पामीर पर्वतमाला

पामीर (अंग्रेजी: Pamir Mountains, फ़ारसी), मध्य एशिया में स्थित एक प्रमुख पठार एवं पर्वत शृंखला है, जिसकी रचना हिमालय, तियन शान, काराकोरम, कुनलुन और हिन्दू कुश शृंखलाओं के संगम से हुआ है। पामीर विश्व के सबसे ऊँचे पहाड़ों में से हैं और १८वीं सदी से इन्हें 'विश्व की छत' कहा जाता है। इसके अलावा इन्हें इनके चीनी नाम 'कोंगलिंग' के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ उगने वाले जंगली प्याज़ के नाम पर इन्हें प्याज़ी पर्वत भी कहा जाता था।, John Navazio, pp.

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पामीरी भाषाएँ

पामीरी भाषाएँ पामीर पर्वत क्षेत्र में बोली जाती हैं पामीरी भाषाएँ (फ़ारसी:, ज़बानहा-ए-पामीरी; अंग्रेज़ी: Pamir languages) पूर्वी ईरानी भाषा-परिवार की एक उपशाखा हैं जिसकी सदस्य भाषाएँ पामीर पर्वत क्षेत्र में बसने वाले बहुत से समुदाय बोलते हैं, विशेषकर वह समुदाय जो पंज नदी और उसकी उपनदियों के किनारे वास करते हैं। इसे बोलने वाले इलाक़ों में पूर्वोत्तरी अफ़्ग़ानिस्तान का बदख़्शान प्रान्त और पूर्वी ताजिकिस्तान के कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त हैं। इनके अलावा एक सरिकोली नामक भाषा अफ़्ग़ानिस्तान और चीन के शिनजियांग प्रान्त के सीमावर्ती इलाक़ों में बोली जाती है। सरिकोली को चीन में 'ताजिकी भाषा' कहा जाता है लेकिन ध्यान दें कि यह ताजिकिस्तान में बोली जाने वाली ताजिकी भाषा से बिलकुल अलग है।, Frank Bliss, Psychology Press, 2006, ISBN 978-0-415-30806-9,...

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पारस

पारस (संस्कृत: पारस्य) हिंदुस्तान के पश्चिम सिन्धु नदी और अफगानिस्तान के आगे पड़नेवाला एक देश। यह प्राचीन कांबोज और वाह्लीक के पश्चिम का देश था जिसका प्रताप प्राचीन काल में बहुत दूर-दूर तक विस्तृत था और जो अपनी सभ्यता और शिष्टाचार के लिये प्रसिद्ध चला आता है। अत्यंत प्राचीन काल से पारस देश आर्यों की एक शाखा का वासस्थान था जिसका भारतीय आर्यों से घनिष्ट संबंध था। अत्यंत प्राचीन वैदिक युग में तो पारस से लेकर गंगा सरयू के किनारे तक की काली भूमि आर्यभूमि थी, जो अनेक प्रेदशों में विभक्त थी। इन प्रदेशों में भी कुछ के साथ आर्य शब्द लगा था। जिस प्रकार यहाँ आर्यांवर्त एक प्रदेश था उसी प्रकार प्राचीन पारस में भी आधुनिक अफगानिस्तान से लगा हुआ पूर्वींय प्रदेश 'अरियान' या 'ऐर्यान' (यूनानी— एरियाना) कहलाता था जिससे ईरान शब्द बना है। ईरान शब्द आर्यावास के अर्थ में सारे देश के लिये प्रयुक्त होता था। शाशानवंशी सम्राटों ने भी अपने को 'ईरान के शाहंशाह' कहा है। पदाधिकारियों के नामों के साथ भी 'ईरान' शब्द मिलता है।— जैसे 'ईरान-स्पाहपत' (ईरान के सिपाहपति या सेनापति), 'ईरान अंबारकपत' (ईरान के भंडारी) इत्यादि। प्राचीन पारसी अपने नामों के साथ आर्य शब्द बडे़ गौरव के साथ लगाते थे। प्राचीन सम्राट् दारयवहु (दारा) ने अपने को 'अरियपुत्र' लिखा है। सरदोरों के नामों में भी आर्य शब्द मिलता है, जैसे, अरियशम्न, अरियोवर्जनिस, इत्यादि। प्राचीन पारस जिन कई प्रदेशों में बँटा था उनमें पारस की खाड़ी के पूर्वी तट पर पड़नेवाला पार्स या पारस्य प्रदेश भी था जिसके नाम पर आगे चलकर सारे देश का नाम पड़ा। इसकी प्राचीन राजधानी पारस्यपुर (यूनानी-पार्सिपोलिस) थी, जहाँपर आगे चलकर 'इश्तख' बसाया गया। वैदिक काल में 'पारस' नाम प्रसिद्ध नहीं हुआ था। यह नाम हखामनीय वंश के सम्राटों के समय से, जो पारस्य प्रदेश के थे, सारे देश के लिये व्यवहृत होने लगा। यही कारण है जिससे वेद और रामायण में इस शब्द का पता नहीं लगता। पर महाभारत, रघुवंश, कथासरित्सागर आदि में 'पारस्य' और पारसीकों का उल्लेख बराबर मिलता है। अत्यंत प्राचीन युग के पारसियों और वैदिक आर्यों में उपासना, कर्मकांड आदि में भेद नहीं था। वे अग्नि, सूर्य वायु आदि की उपासना और अग्निहोत्र करते थे। मिथ (मित्र .

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पारून

पारून (दरी फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Parun) उत्तर-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के नूरिस्तान प्रान्त की राजधानी है। वास्तव में राजधानी होने के बावजूद यह एक छोटा सा क़स्बा है, जहाँ लगभग ५० लोग ही रहते हैं। यह नूरिस्तान प्रान्त के अन्य भागों से अच्छी सड़कों से जुड़ा नहीं है और यहाँ से आने-जाने के लिए आमतौर पर कुनर प्रान्त की राजधानी असदाबाद से गुज़ारना पड़ता है। यहाँ के लगभग सभी लोग नूरिस्तानी हैं। .

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पालूला भाषा

पालूला (Palula), जिसे फालूला, फालूरा और अशरेती भी कहते हैं, शीना उपशाखा की एक दार्दी भाषा है जो पाकिस्तान के ख़ैबर​-पख़्तूनख़्वा प्रान्त के चित्राल ज़िले की अशरेत​, बेयोड़ी, शीम्शी और कल्कटक​ वादियों में बोली जाती है। खोवार भाषा बोलने वाले चित्राली लोग इस भाषा को डंगरीक्वार​ और इसे बोलने वाले समुदाय को 'डंगरीक' बुलाते हैं। इस से मिलती-जुलती बोलियाँ अफ़ग़ानिस्तान के साऊ गाँव में और पाकिस्तान के ही दीर ज़िले के खलकोट गाँव में बोली जाती है। .

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पाशाई भाषा

पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान की एक पाशाई भाषीय लड़की पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान का एक पाशाई भाषीय लड़का अफ़ग़ानिस्तान के ज़िलों का नक्शा - पाशाई भाषा पूर्वोत्तर में गुलाबी रंग वाले केवल चार ज़िलों में बोली जाती है पाशाई अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी नूरिस्तान, नंगरहार और कुनर राज्यों में बोली जाने वाली एक दार्दी भाषा है। अनुमान है के १९९८ में इसे २१६,८४२ लोग बोलते थे। पाशाई बोलने वालों को पाशाई समुदाय का सदस्य माना जाता है, जिसके अधिकतर लोग धर्म से मुसलमान हैं। २००३ से पहले पाशाई का कोई लिखित रूप नहीं था। बहुत से पाशाई बोलने वाले पश्तो भी बोलते हैं और उनमें साक्षरता का दर २५% है। .

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पाक अधिकृत कश्मीर

भारतीय कश्मीर है और अकसाई चिन चीन के अधिकार में है। इस क्षेत्र का अधिकार चीन को पाकिस्तान द्वारा सौंपा गया था। पाक अधिकृत कश्मीर मूल कश्मीर का वह भाग है, जिस पर पाकिस्तान ने १९४७ में हमला कर अधिकार कर लिया था। यह भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित क्षेत्र है। इसकी सीमाएं पाकिस्तानी पंजाब एवं उत्तर पश्चिमी सीमांत प्रांत से पश्चिम में, उत्तर पश्चिम में अफ़गानिस्तान के वाखान गलियारे से, चीन के ज़िन्जियांग उयघूर स्वायत्त क्षेत्र से उत्तर और भारतीय कश्मीर से पूर्व में लगती हैं। इस क्षेत्र के पूर्व कश्मीर राज्य के कुछ भाग, ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट को पाकिस्तान द्वारा चीन को दे दिया गया था व शेष क्षेत्र को दो भागों में विलय किया गया था: उत्तरी क्षेत्र एवं आजाद कश्मीर। इस विषय पर पाकिस्तान और भारत के बीच १९४७ में युद्ध भी हुआ था। भारत द्वारा इस क्षेत्र को पाक अधिकृत कश्मीर (पी.ओ.के) कहा जाता है।रीडिफ, २३ मई २००६ संयुक्त राष्ट्र सहित अधिकांश अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं एम.एस.एफ़, एवं रेड क्रॉस द्वारा इस क्षेत्र को पाक-अधिकृत कश्मीर ही कहा जाता है। .

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पाकिस्तान

इस्लामी जम्हूरिया पाकिस्तान या पाकिस्तान इस्लामी गणतंत्र या सिर्फ़ पाकिस्तान भारत के पश्चिम में स्थित एक इस्लामी गणराज्य है। 20 करोड़ की आबादी के साथ ये दुनिया का छठा बड़ी आबादी वाला देश है। यहाँ की प्रमुख भाषाएँ उर्दू, पंजाबी, सिंधी, बलूची और पश्तो हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और अन्य महत्वपूर्ण नगर कराची व लाहौर रावलपिंडी हैं। पाकिस्तान के चार सूबे हैं: पंजाब, सिंध, बलोचिस्तान और ख़ैबर​-पख़्तूनख़्वा। क़बाइली इलाक़े और इस्लामाबाद भी पाकिस्तान में शामिल हैं। इन के अलावा पाक अधिकृत कश्मीर (तथाकथित आज़ाद कश्मीर) और गिलगित-बल्तिस्तान भी पाकिस्तान द्वारा नियंत्रित हैं हालाँकि भारत इन्हें अपना भाग मानता है। पाकिस्तान का जन्म सन् 1947 में भारत के विभाजन के फलस्वरूप हुआ था। सर्वप्रथम सन् 1930 में कवि (शायर) मुहम्मद इक़बाल ने द्विराष्ट्र सिद्धान्त का ज़िक्र किया था। उन्होंने भारत के उत्तर-पश्चिम में सिंध, बलूचिस्तान, पंजाब तथा अफ़गान (सूबा-ए-सरहद) को मिलाकर एक नया राष्ट्र बनाने की बात की थी। सन् 1933 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली ने पंजाब, सिन्ध, कश्मीर तथा बलोचिस्तान के लोगों के लिए पाक्स्तान (जो बाद में पाकिस्तान बना) शब्द का सृजन किया। सन् 1947 से 1970 तक पाकिस्तान दो भागों में बंटा रहा - पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान। दिसम्बर, सन् 1971 में भारत के साथ हुई लड़ाई के फलस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना और पश्चिमी पाकिस्तान पाकिस्तान रह गया। .

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पाकिस्तान बम धमाके २००९

इसी दिन नवाज शरीफ के नेतृत्‍व में एक बड़ी रैली इस्‍लामाबाद पहुंचने वाली थी जिसमें राष्‍ट्रपति जरदारी का विरोध किया जा रहा था और उनसे बर्खास्‍त जजों की तुरंत बहाली करने को भी कहा जा रहा था। पाकिस्‍तान की सरकार ने नवाज शरीफ की मांगों को मान लिया था जिसकी वजह से रैली को इस्‍लामाबाद पहुंचने की जरूरत ही नहीं पड़ी.

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पाकिस्तान के ज़िले

पाकिस्तान के ज़िले पाकिस्तान के तीसरे दर्जे की प्रशासनिक इकाइयाँ हैं। पाकिस्तान में कुल 135 ज़िले और 7 आदिवासी क्षेत्र हैं। अगस्त 2000 से पूर्व ज़िले डिवीज़न के तहत होते थे लेकिन उस वक़्त डिवीज़न को ख़त्म करके ज़िलों को सीधे सूबों के अधीन कर दिया गया। .

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पितृ दिवस

फादर्स डे पिताओं के सम्मान में एक व्यापक रूप से मनाया जाने वाला पर्व हैं जिसमे पितृत्व (फादरहुड), पितृत्व-बंधन तथा समाज में पिताओं के प्रभाव को समारोह पूर्वक मनाया जाता है। अनेक देशों में इसे जून के तीसरे रविवार, तथा बाकी देशों में अन्य दिन मनाया जाता है। यह माता के सम्मान हेतु मनाये जाने वाले मदर्स डे(मातृ-दिवस) का पूरक है। .

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पिशीन

पिशीन (Pishin) पाकिस्तान के पश्चिमी बलोचिस्तान सूबे के पिशीन ज़िले की राजधानी है। यह एक पश्तून बहुसंख्यक इलाक़ा है और यहाँ की आम-बोली पश्तो है। किसी ज़माने में यह अफ़्ग़ानिस्तान का हिस्सा हुआ करता था लेकिन प्रथम ब्रिटिश-अफ़्ग़ान युद्ध के बाद इसे ब्रिटिश हिन्दुस्तान में सम्मिलित कर लिया गया और भारत की आज़ादी और विभाजन के बाद यह पाकिस्तान में आ गया। पिशीन में बहुत गर्मी और सर्दी दोनों पड़ती हैं। गर्मियों में तापमान ४० सेंटीग्रेड से ज्यादा और सर्दियों में शुन्य से कम जाता है। पिशीन शहर इसी नाम की पिशीन वादी में स्थित है, जो एक बहुत ही शुष्क इलाक़ा है। यहाँ कुछ फलों के पेड़ों को छोड़कर बहुत कम वृक्ष हैं।, British Association for the Advancement of Science, J. Murray, 1879,...

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पवन टर्बाइन

बेल्जियम के उत्तरी सागर में अपतटीय पवन फार्म 5 मेगावॉट टर्बाइन आरई-पॉवर एम5 (REpower M5) का उपयोग करते हुए पवन टर्बाइन एक रोटरी उपकरण है, जो हवा से ऊर्जा को खींचता है। अगर यांत्रिक ऊर्जा का इस्तेमाल मशीनरी द्वारा सीधे होता है, जैसा कि पानी पंप करने लिए, इमारती लकड़ी काटने के लिए या पत्थर तोड़ने के लिए होता है, तो वह मशीनपवन-चक्की कहलाती है। इसके बदले अगर यांत्रिक ऊर्जा बिजली में परिवर्तित होती है, तो मशीन को अक्सर पवन जेनरेटर कहा जाता है। .

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पख़्तूनिस्तान

दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में जनजातीय एवं धार्मिक नेता पख़्तूनिस्तान का प्रस्तावित ध्वज पख़्तूनिस्तान या पठानिस्तान, शब्द "पठान" (पश्तून) और "स्तान" (जगह या क्षेत्र) के संयोजन है। इसका अर्थ संसार का वह ऐतिहासिक क्षेत्र जिसमें पठान लोगों की जनसंख्या सर्वाधिक है और जहाँ पश्तो भाषा बोली जाती है। पख़्तूनिस्तान का अधिक हिस्सा अफ़्ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की भूमि में है लेकिन भारत और ईरान का भी छोटा सा हिस्सा शामिल है। पख़्तूनिस्तान शब्द का उपयोग अंग्रेज़ों ने तब किया जब वह भारत पर शासन कर रहे थे, ब्रिटिश राज ने पश्चिमी-उत्तरी क्षेत्रों को पख़्तूनिस्तान कहा करते थे और यही कारण से इस नाम संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में प्रसिद्ध हुआ और फिर इस क्षेत्र को पख़्तूनिस्तान कहा गया है। .

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पंज नदी

अफ़्ग़ानिस्तान और ताजिकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय सीमा का एक बड़ा हिस्सा पांज नदी को माना जाता है पांज नदी या पंज नदी (ताजिकी: Панҷ) मध्य एशिया में स्थित एक नदी है जो आमू दरिया की एक उपनदी भी है। यह नदी १,१२५ किमी लम्बी है। अफ़्ग़ानिस्तान और ताजिकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय सीमा का एक बड़ा हिस्सा इसी नदी इसी नदी को माना जाता है। पांज नदी पूर्वी अफ़्ग़ानिस्तान में क़िला-ए-पंजेह गाँव के पास वाख़ान नदी और पामीर नदी के विलय से बनती है। फिर यह पश्चिम चलती है और आगे चलकर वख़्श नदी से मिल जाती है, जिसके बाद इन्हें अमु दरिया के नाम से जाना जाता है।, Reuel R. Hanks, ABC-CLIO, 2010, ISBN 978-0-313-35422-9,...

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पंजदेह प्रकरण

PAGENAME पंजदेह (अब तुर्कमेनिस्तान का सेरहेताबत) भारत के पड़ोसी देश अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर स्थित एक गाँव तथा ज़िला। यह मर्व नगर से 100 मील की दूरी पर दक्षिण में स्थित है। इतिहास में पंजदेह अपने सामरिक महत्त्व के कारण काफ़ी प्रसिद्ध था। एक समय ऐसा भी आया, जब इस जगह को लेकर रूस तथा इंग्लैण्ड आमने-सामने आ गए और उनमें युद्ध की भी सम्भावना प्रबल हो गई। पंजदेह प्रकरण (1885) ने रूस और ब्रिटेन के मध्य कूटनीतिक संकट पैदा कर दिया था। उस वक्त रूस और अफगानिस्तान के बीच सीमा को लेकर विवाद चल रहा था। 29 मार्च 1885 को रूसी सेना ने कुश्क नदी के पूर्वी तट पर पंजदेह (अब तुर्कमेनिस्तान का सेरहेताबत) में डेरा डालते हुए अफगान फौजों से पीछे हटने के लिए कहा। उनके ऐसा न करने पर रूसी सेना ने 30 मार्च को उन पर हमला करते हुए उन्हें पुल-इखिश्ति सेतु तक खदेड़ दिया। रूसी सेना के इस कदम से ब्रिटेन उत्तेजित हो उठा, जो उस वक्त रूस की तरह मध्य व दक्षिण एशिया में अपना प्रभुत्व बढ़ाने में लगा था। यदि ये युद्ध होता तो निश्चित रूप से दो शक्तियों के बीच अफ़ग़ानिस्तान ही युद्ध का मैदान बन जाता और उसे बहुत नुकसान उठाना पड़ता, किंतु अफ़ग़ानिस्तान के अमीर अब्दुर्रहमान की बुद्धिमानी से युद्ध टल गया। .

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पंजशीर प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का पंजशीर प्रान्त (लाल रंग में) पंजशीर वादी में भेड़ें पंजशीर (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Panjshir) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ३,६१० वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग १.४ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी बाज़ारक शहर है। यहाँ के ज़्यादातर लोग फ़ारसी बोलने वाले ताजिक लोग हैं। पंजशीर प्रान्त में मशहूर पंजशीर वादी आती है और इसे अप्रैल २००४ में परवान प्रान्त को बांटकर बनाया गया था। .

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पंजशीर वादी

पंजशीर वादी का एक नज़ारा पंजशीर वादी (दरी फ़ारसी:, दरा-ए-पंजशीर) उत्तर-मध्य अफ़ग़ानिस्तान में स्थित एक घाटी है। यह राष्ट्रीय राजधानी काबुल से १५० किमी उत्तर में हिन्दु कुश पर्वतों के पास स्थित है।, Accessed 2006-11-22 यह वादी पंजशीर प्रान्त में आती है और इसमें से प्रसिद्ध पंजशीर नदी गुज़रती है। यहाँ लगभग १,४०,००० लोग बसे हुए हैं जिनमें अफ़ग़ानिस्तान का सबसे बड़ा ताजिक लोगों का समुदाय भी शामिल है।, Library of Congress Country Studies, Library of Congress, 1997, Accessed 2006-11-19 .

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पकतिया प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का पकतिया प्रान्त (लाल रंग में) पकतिया प्रान्त के बमोज़ई गाँव में पढ़ते बच्चे पकतिया (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Paktia) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ६,४३२ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००२ में लगभग ४.१५ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी गरदेज़ शहर है। इस प्रान्त की सरहदें पाकिस्तान से लगती हैं। यहाँ के लगभग ९०% लोग पश्तून हैं और लगभग १०% फ़ारसी बोलने वाले ताजिक लोग हैं। .

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पकतीका प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का पकतीका प्रान्त (लाल रंग में) पकतीका प्रान्त में एक चरवाहा अपनी बकरियों के साथ पकतीका (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Paktika) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल १९,४८२ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग ४ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी शरना शहर है। पकतीका की सरहदें पाकिस्तान से लगती हैं। यहाँ के लगभग ९६% लोग पश्तून हैं। यहाँ चंद हज़ार उज़बेक लोग भी रहते हैं जो आबादी के २% से भी कम हैं। .

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पुल-ए-ख़ुमरी

पुल-ए-ख़ुमरी (फ़ारसी) अफगानिस्तान का एक शहर है और बग़लान प्रान्त की राजधानी है। यहाँ पर ताजिक समुदाय बहुसंख्यक है। .

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पुल-ए-आलम

पुल-ए-आलम का एक दृश्य पुल-ए-आलम (दरी फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Pul-i-Alam) पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के लोगर प्रान्त की राजधानी है। यह शहर अफ़ग़ानिस्तान के गृह युद्ध में बहुत क्षतिग्रस्त हुस था और सन् २००१ में तालिबान के सत्ता से हटाए जाने के बाद यहाँ काफ़ी पुनर्निर्माण हुआ है। अपने शासन के दौरान तालिबान ने यहाँ सभी लड़कियों के स्कूल बंद कराने की कोशिश करी थी। सत्ता से हटाए जाने के बाद भी २ अक्टूबर २००६ को दस कट्टरपंथियों के दस्ते ने यहाँ एक लड़कियों की पाठशाला जलाने की कोशिश करी लेकिन नागरिकों ने एक दल ने उन्हें खदेड़ दिया।, Brendan O'Malley, pp.

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प्रतिजैविक प्रतिरोध

प्रतिजैविक प्रतिरोध एक प्रकार का दवा प्रतिरोध है, जहाँ एक सूक्ष्मजीव प्रतिरोध जोखिम जीवित करने के लिए सक्षम है। जीन को एक जीवाणु के बिच में फैशन द्वारा या विकार क्षैतिज कर संक्रमित में हस्तांतरित किया जा सकता है। इस प्रकार प्राकृतिक चयन के माध्यम से एक जीन को एंटीबायोटिक प्रतिरोध से साझा कर के बिकसित किया जा सकता है। विकासवादी तनाव एंटीबायोटिक प्रतिरोधी लक्षण जोखिम के रूप में एंटीबायोटिक दवाओं को चुनता है। कई एंटीबायोटिक प्रतिरोध जीनों प्लाज़्मिड प्लाज़्मिड पर रहते हैं, उनके हस्तांतरण की सुविधा.

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प्रयाग प्रशस्ति

प्रयाग प्रशस्ति गुप्त राजवंश के सम्राट समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण द्वारा रचित लेख था। इस लेख को समुद्रगुप्त द्वारा २०० ई में कौशाम्बी से लाये गए अशोक स्तंभ पर खुदवाया गया था। इसमें उन राज्यों का वर्णन है जिन्होंने समुद्रगुप्त से युद्ध किया और हार गये तथा उसके अधीन हो गये। इसके अलावा समुद्रगुप्त ने अलग अलग स्थानों पर एरण प्रशस्ति, गया ताम्र शासन लेख, आदि भी खुदवाये थे। इस प्रशस्ति के अनुसार समुद्रगुप्त ने अपने साम्राज्य का अच्छा विस्तार किया था। उसको क्रान्ति एवं विजय में आनन्द मिलता था। इलाहाबाद के अभिलेखों से पता चलता है कि समुद्रगुप्त ने अपनी विजय यात्रा का प्रारम्भ उत्तर भारत से किया एवं यहां के अनेक राजाओं पर विजय प्राप्त की। .

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प्राचीन भारत

मानव के उदय से लेकर दसवीं सदी तक के भारत का इतिहास प्राचीन भारत का इतिहास कहलाता है। .

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प्राचीन मिस्र

गीज़ा के पिरामिड, प्राचीन मिस्र की सभ्यता के सबसे ज़्यादा पहचाने जाने वाले प्रतीकों में से एक हैं। प्राचीन मिस्र का मानचित्र, प्रमुख शहरों और राजवंशीय अवधि के स्थलों को दर्शाता हुआ। (करीब 3150 ईसा पूर्व से 30 ई.पू.) प्राचीन मिस्र, नील नदी के निचले हिस्से के किनारे केन्द्रित पूर्व उत्तरी अफ्रीका की एक प्राचीन सभ्यता थी, जो अब आधुनिक देश मिस्र है। यह सभ्यता 3150 ई.पू.

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प्राचीन ख़ुरासान

इस पुराने नक़्शे में ख़ोरासान नामकित है प्राचीन ख़ुरासान (फ़ारसी:, ख़ुरासान-ए-कहन) या प्राचीन ख़ोरासान मध्य एशिया का एक ऐतिहासिक क्षेत्र था जिसमें आधुनिक अफ़्ग़ानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज़बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और पूर्वी ईरान के बहुत से भाग शामिल थे। इसमें कभी-कभी सोग़दा और आमू-पार क्षेत्र शामिल किये जाते थे। ध्यान दीजिये कि आधुनिक ईरान में एक 'ख़ोरासान प्रांत' है जो इस ऐतिहासिक ख़ुरासान इलाक़े का केवल एक भाग है। .

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पूर्वी ईरानी भाषाएँ

पूर्वी ईरानी भाषाएँ ईरानी भाषा-परिवार की एक उपशाखा हैं जो मध्य ईरानी काल (लगभग चौथी शताब्दी ईसापूर्व) से उभरीं। अवस्ताई भाषा अक्सर इस शाखा की एक प्राचीनतम सदस्या मानी जाती है। आधुनिक काल में सब से ज़्यादा बोली जाने वाली पूर्वी ईरानी भाषा पश्तो है, जिसके दुनिया में लगभग ५ करोड़ मातृभाषी हैं। यह अफ़्ग़ानिस्तान और पश्चिमोत्तरी पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त में बोली जाती है। इसके अलावा पूर्वी ताजिकिस्तान के कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त और चीन के सुदूर पश्चिमी शिनजियांग प्रान्त में भी पूर्वी ईरानी भाषाएँ बोली जाती हैं। प्राचीन सोग़दाई से विकसित हुई पश्चिमोत्तरी ताजिकिस्तान की यग़नोबी भाषा और स्किथी-सरमती से विकसित हुई कॉकस क्षेत्र की ओसेती भाषा भी दोनों पूर्वी ईरानी भाषाएँ मानी जाती हैं।, Thomas Albert Sebeok, Walter de Gruyter, 1970,...

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पेच नदी

पेच नदी (Pech River;, दरिया-ए-पेच) पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में स्थित एक नदी है। यह नूरिस्तान प्रान्त के मध्य भाग में हिन्दु कुश पर्वतों की बर्फ़ और हिमानियों (ग्लेशियरों) से शुरु होकर दक्षिण-दक्षिणपूर्व दिशा में कुनर प्रान्त में प्रवेश करती है और प्रान्तीय राजधानी असदाबाद के पास कुनर नदी में विलय हो जाती है।, David B. Edwards, pp.

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पॉल वुल्फोवित्ज़

पॉल वुल्फोवित्ज़ पॉल वुल्फोवित्ज़ ने अमरीका और दुनिया के सार्वजनिक जीवन मे तीस से भी ज्यादा साल एक अध्यापक और अन्य दूसरे रूपों में गुज़ारे हैं जिसमें छ: अमरीकी राष्ट्रपतियों के अधीन चौबीस साल की सरकारी सेवा भी शामिल है। मार्च 2001 में एक बार फिर अमरीका के अट्ठाइसवें रक्षा सचिव के रूप में उनकी वापसी हुई। पेंटागन के इस दूसरे सबसे महत्वपूर्ण पद के लिये वुल्फोवित्ज़ डोनाल्ड रम्सफील्ड के साथ वे अमरीकी सेना के लिये महत्वपूर्ण नीति निर्माण की प्रक्रिया को अंज़ाम देते हैं। ग्यारह सितंबर के हमलों के बाद पॉल वुल्फोवित्ज़ ने पूरे विश्व में आतंकवाद के खिलाफ़ अमरीकी रणनीति तैयार करने से लेकर ईराक़ और अफ़गानिस्तान के हमलों के लिये नीति तैयार करने में अति विशिष्ट भूमिका निभाई है। 1989 में राष्ट्रपति बुश ने उन्हें पेंटागन में वापिस बुलाया और उन्होंने तत्कालीन रक्षा सचिव डिक चेनी को खाड़ी युद्ध के संचालन एवं उसके लिये पैसे का जुगाड़ करने में काफी मदद की। राष्ट्रपति रीगन के शासनकाल में वुल्फोवित्ज़ ने तीन साल तक इंडोनेशिया में अमरीका के राजदूत की भूमिका भी अदा की। इस दौरना श्री वुल्फोवित्ज़ की छवि काफी अच्छी रही थी और इस्लामी दुनिया से सार्थक संवाद में उन्होंने काफी अच्छी भूमिका निभाई। इंडोनेशिया जाने से पहले वुल्फोवित्ज़ केन्द्रीय सरकार के नीति निर्धाण एवं योजना कार्यान्वयन विभाग के प्रमुख पद पर तीन साल तक और लगभग ढाई साल तक पूर्वी एशिया और प्रशांत महासगरीय देशों के मामले के समीति के सचिव पद पर कार्य कर चुके थे। चीन के साथ अमरीका के संबंध सुधारने मे वुल्फोवित्ज़ काफी आगे रहे थे और जापान तथा कोरिया के मामलों में भी अमरीकी सरकार उनपर काफी निर्भ रही थी। कोरिया और फिलिपींस में लोकतंत्र संबंधी आंदोलोनों में भी वे काफी प्रभावी साबित हुये। पॉल वुल्फोवित्ज़ के सराकारी दायरों से बाहर की भूमिका मुख्य रूप से एक प्राध्यापक के रूप में रही है। 1994 से 2001 के बीच वे जान हापकिन्स विश्वविद्यालय में डीन एवं प्रोफ़ेसर के रूप में उन्होंने काम किया। प्राध्यापक के रूप में उन्होंने अमरीका की रक्षा नीति से संबंधित बहसों में जमकर भाग लिया और कई बहसों के आयोजक बने। इससे पहले श्री पॉल वुल्फोवित्ज़ येल विश्वविद्यालय में 1970 से 1973 के बीच राजनीति शास्त्र के प्राध्यापक भी रह चुके थे। श्री पॉल वुल्फोवित्ज़ ने सुरक्षा संबंधी मामलों पर काफी कुछ लिखा भी है। उन्होंने गणित में अपने स्नातक की उपाधि 1965 में कोर्नेल विश्वविद्यालय से प्राप्त की और 1972 में शिकागो विश्वविद्यालय से डाक्टरेट की उपाधि हासिल की। श्रेणी:अमेरीका के अर्थशास्त्री श्रेणी:आधार श्रेणी:व्यक्तिगत जीवन.

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पोसवाल

पोसवाल भारत, पाकिस्तान और अफ़्गानिस्तान में पाये जाने वाली एक गुर्जर गोत्र है। .

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फरजाना वाहिदी

फरजाना वाहिदी (जन्म-१९८४) अफ़ग़ानिस्तान की पुरस्कृत अफगानी डोकुमेंटरी फोटोग्राफर और फोटोजौरनालिस्ट हैं। वह अफगानिस्तान के महिलाओ और लडकियों की तस्वीरो के लिए लोकप्रिय हैं। वह अफ़ग़ानिस्तान की पहली महिला फोटोग्रफेर हैं। वाहिदी ने ऐआईएनऐ फोटोजर्नलिज्म इंस्टीटूट, काबुल से पढाई की हैं। शुरुआत में २००२ में वह चुने गए १५ विद्यार्थियों में से एक थी जिन्हें ५०० विद्यार्थियों में से चुना गया था। .

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फ़राह नदी

अमेरिकी सैनिक इंजिनियर आधी-सूखी हुई फ़राह नदी का मुआइना करते हुए - इस स्थान पर बाद में तोग्ज पुल नाम सेतु बनाया गया था फ़राह नदी (अंग्रेज़ी: Farah river) या फ़राह रूद (फ़ारसी और पश्तो) पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान की एक ५६० किमी लम्बी नदी है जो बंद-ए-बायान पहाड़ों से उभरकर ईरान और अफ़ग़ानिस्तान की सरहद पर सीस्तान द्रोणी में स्थित हेलमंद नदी के नदीमुख (डेल्टा) क्षेत्र में जाकर ख़ाली हो जाती है। अफ़ग़ानिस्तान के फ़राह प्रान्त की राजधानी फ़राह शहर इसी नदी के किनारे बसी हुई है। फ़राह रूद एक मौसमी नदी है जिसका पानी कभी ज़्यादा और कभी बहुत ही कम हो जाता है।, Encyclopaedia Britannica, 1998, ISBN 978-0-85229-633-2,...

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फ़राह प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का फ़राह प्रांत (लाल रंग में) फ़राह (पश्तो:, अंग्रेजी: Farah) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पश्चिमी भाग में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ४८,४७१ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००६ में लगभग ९. ३ लाख अनुमानित की गई थी। यह ईरान की सरहद से लगा हुआ बहुत ही हलकी आबादी वाला इलाक़ा है।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी फ़राह नाम का ही शहर है। इस प्रान्त में बसने वाले अधिकतर लोग पश्तून हैं। फ़राह में बहुत से प्राचीन क़िलों के खँडहर मिलते हैं। इनमें एक मिटटी की ईंटों का बना क़िला जिसका नाम 'काफ़िर क़ला' (यानि 'काफ़िर का क़िला') प्रसिद्ध है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसे सिकंदर महान ने बनाया था।, Malalai Joya, Derrick O'Keefe, Simon and Schuster, 2009, ISBN 978-1-4391-0946-5,...

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फ़राह, अफ़्ग़ानिस्तान

कुछ अमेरिकी सैनिक फ़राह में 'सिकंदर का क़िला' कहलाए जाने वाले ढाँचे के सामने फ़राह (फ़ारसी और पश्तो:, अंग्रेजी: Farah) पश्चिमी अफ़्ग़ानिस्तान के फ़राह प्रान्त की राजधानी है। यह शहर फ़राह नदी के किनारे स्थित है और ईरान की सीमा के काफ़ी पास है। .

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फ़ातिमा भुट्टो

फ़ातिमा भुट्टो (فاطمہ بھٹو) जन्म नाम, फ़ातिमा मुर्तज़ा भुट्टो (فاطمہ مُرتضیٰ بھُٹّو जन्म 29 मई 1982), एक पाकिस्तानी लेखिका और पत्रकार है। वे पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो की पोती और पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की भतीजी हैं। .

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फ़ारयाब प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का फ़ारयाब प्रांत (लाल रंग में) फ़ारयाब (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Faryab) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के उत्तरी भाग में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल २०,२९३ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००६ में लगभग ८.५ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी मेयमना शहर है। फ़ारयाब में बसने वाले ५३% लोग उज़बेक नस्ल के, २७% ताजिक (यानि फ़ारसी-भाषी) और १३% पश्तून हैं। इस प्रान्त कि उत्तरी सीमा तुर्कमेनिस्तान से लगती है। .

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फ़ारसी भाषा

फ़ारसी, एक भाषा है जो ईरान, ताजिकिस्तान, अफ़गानिस्तान और उज़बेकिस्तान में बोली जाती है। यह ईरान, अफ़ग़ानिस्तान, ताजिकिस्तान की राजभाषा है और इसे ७.५ करोड़ लोग बोलते हैं। भाषाई परिवार के लिहाज़ से यह हिन्द यूरोपीय परिवार की हिन्द ईरानी (इंडो ईरानियन) शाखा की ईरानी उपशाखा का सदस्य है और हिन्दी की तरह इसमें क्रिया वाक्य के अंत में आती है। फ़ारसी संस्कृत से क़ाफ़ी मिलती-जुलती है और उर्दू (और हिन्दी) में इसके कई शब्द प्रयुक्त होते हैं। ये अरबी-फ़ारसी लिपि में लिखी जाती है। अंग्रेज़ों के आगमन से पहले भारतीय उपमहाद्वीप में फ़ारसी भाषा का प्रयोग दरबारी कामों तथा लेखन की भाषा के रूप में होता है। दरबार में प्रयुक्त होने के कारण ही अफ़गानिस्तान में इस दारी कहा जाता है। .

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फ़ारसी साम्राज्य

६०० ईस्वी में फारस साम्राज्य फारसी साम्राज्य (ईसापूर्व 559-1935) फारस (आज का ईरान और उसके प्रभाव के इलाके) से शासन करने वाले विभिन्न वंशों के साम्राज्य को सम्मिलित रूप से कहा जाता है। फारस के शासकों ने अपना साम्राज्य आधुनिक ईरान के बाहर कई प्रदेशों तक फैला दिया था - इराक, अर्मेनिया, तुर्की, अज़रबैजान, अफ़गानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ताज़िकिस्तान, पाकिस्तान, मध्यपूर्व, मिस्र आदि। लेकिन ये सभी प्रदेश हमेशा फारस के नियंत्रण में नहीं रहे थे। खुद फारस सातवीं से दसवीं सदी तक अरबों के प्रभुत्व में रहा था। .

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फ़ारसी साहित्य

फारसी भाषा और साहित्य अपनी मधुरता के लिए प्रसिद्ध है। फारसी ईरान देश की भाषा है, परंतु उसका नाम फारसी इस कारण पड़ा कि फारस, जो वस्तुत: ईरान के एक प्रांत का नाम है, के निवासियों ने सबसे पहले राजनीतिक उन्नति की। इस कारण लोग सबसे पहले इसी प्रांत के निवासियों के संपर्क में आए अत: उन्होंने सारे देश का नाम 'पर्सिस' रख दिया, जिससे आजकल यूरोपीय भाषाओं में ईरान का नाम पर्शिया, पेर्स, प्रेज़ियन आदि पड़ गया। .

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फ़िरोज़कोह

फ़िरोज़कोह या फ़िरूज़कूह (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Fîrûzkûh या Turquoise Mountain) आधुनिक अफ़ग़ानिस्तान के ग़ोर प्रान्त में स्थित एक शहर था जो ग़ोरी राजवंश की प्रथम राजधानी थी। कहा जाता है कि अपने समय में यह विश्व के महान नगरों में से एक था लेकिन सन् १२२० के दशक में चंगेज़ ख़ान के पुत्र ओगताई ख़ान के नेतृत्व में मंगोल फ़ौजों ने इसपर धावा बोला और इसे तहस-नहस कर डाला। उसके बाद यह शहर इतिहास को खोया गया और इसका ठीक स्थान किसी को ज्ञात नहीं है।, Edgar Knobloch, Tempus, 2002, ISBN 978-0-7524-2519-1,...

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फ़ैज़ाबाद, बदख़्शान

बदख़्शान प्रान्त की राजधानी फ़ैज़ाबाद​ का एक नज़ारा फ़ैज़ाबाद​ (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Fayzabad) उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रान्त की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है। १,२०० मीटर की ऊंचाई पर कोकचा नदी के किनारे स्थित यह शहर पामीर क्षेत्र का एक मुख्य व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्र भी है। .

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फातमागुल

क्या क़ुसूर है फातमागुल का?(तुर्की भाषा:Fatmagül'ün Suçu ne?) तुर्की की एक अति लोकप्रिय टेलिविज़न शृंखला थी जिसका प्रसारण 16 सितंबर 2010 से 21 जून 2012 के बीच हुआ था। इस शृंखला में दिखाया गया है की कैसे एक बलात्कार पीड़िता विपरीत परिस्तिथियों से लड़कर एक शक्तिशाली लड़की में बदल जाती है और और उसकी नफरत कैसे प्यार में बदल जाती है। कार्यक्रम की लोकप्रियता को देखते हुए इस कार्यक्रम का प्रसारण भारत समेत 24 देशों में उनकी मातृभाषा में किया जा चुका है तथा प्राय हर देश में इसे अपार सफलता प्राप्त हुई है। भारत में इसे ज़िंदगी (टीवी चैनल) पर प्रसारित किया गया था। .

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फ्रांस का सैन्य इतिहास

फ्रांस के सैन्य इतिहास में आधुनिक फ्रांस, यूरोपीय महाद्वीप और दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों में 2,000 से अधिक वर्षों तक चले संघर्षों का एक विशाल काल शामिल है। आज आधुनिक फ्रांस के क्षेत्र में सबसे पहला बड़ा युद्ध गैलो-रोमन संघर्ष था, जो कि 60 ईसा पूर्व से 50 ईसा पूर्व तक लड़ा गया। अंततः रोमन,जूलियस सीज़र के अभियानों के माध्यम से विजयी हुए। रोमन साम्राज्य के पतन के बाद, एक जर्मनिक जनजाति,जिसे फ्रैंक्स के नाम से जाना जाता था, ने प्रतिस्पर्धा वाले जनजातियों को हराकर गॉल पर नियंत्रण कर लिया। "फ्रांसीया की भूमि", जिस से फ्रांस को अपना नाम मिला है, को राजा 'क्लोविस मैं' और 'शारलेमेन' ने विस्तरित किया। इन्होंने भविष्य के फ्रांसीसी राज्य के केंद्र का निर्माण किया था। मध्य युग में, इंग्लैंड के साथ प्रतिद्वंद्विता ने 'नोर्मन विजय' और;सौ साल के युद्ध' जैसे प्रमुख संघर्षों को प्रेरित किया। केंद्रीकृत राजतंत्र के साथ, रोमन काल के बाद पहली बड़ी पैदल सेना और तोपखाने का इस्तेमाल कर, फ्रांस ने अपने क्षेत्र से अंग्रेजो को निष्कासित कर दिया और मध्य युग में यूरोप के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में जाना गया। ये स्थिति रोमन साम्राज्य और 'स्पेन इतालवी युद्धों' में हार के बाद बदली। 16 वीं शताब्दी के अंत में धर्मयुद्धों ने फ्रांस को कमजोर किया, लेकिन 'तीस साल के युद्ध' में स्पेन पर एक बड़ी जीत ने फ्रांस को एक बार फिर महाद्वीप पर सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाया। समानांतर में, फ्रांस ने अपना पहला औपनिवेशिक साम्राज्य एशिया, अफ्रीका और अमेरिका में विकसित किया। फ्रांस ने,लुई XIV के तहत अपने प्रतिद्वंद्वियों पर सैन्य वर्चस्व हासिल किया, लेकिन तेजी से शक्तिशाली होते दुश्मन गठबंधनों और बढ़ते संघर्ष ने फ़्रांसिसी महत्वाकांक्षाओं को रोका और 18 वीं शताब्दी के प्रारम्भ में राज्य को दिवालिया कर दिया। फ्रांसीसी सेनाओं ने स्पेनिश, पोलिश और ऑस्ट्रियाई राजशाही के खिलाफ वंशवादी संघर्षों में जीत हासिल की। इसी समय, फ़्रांस अपनी उपनिवेशों पर हो रहे दुश्मनो के हमलों को रोक रहा था। 18 वीं शताब्दी में, ग्रेट ब्रिटेन के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा ने सात साल के युद्ध की शुरुआत की, जहां फ्रांस ने अपने उत्तरी अमेरिकी हिस्सेदारी खो दी। यूरोप और अमेरिकी क्रांतिकारी युद्ध में प्रभुत्व के रूप में फ्रांस को सफलता मिली, जहां धन और हथियारों के रूप में व्यापक फ्रेंच सहायता और अपनी सेना और नौसेना की प्रत्यक्ष भागीदारी ने अमेरिका की आजादी का नेतृत्व किया। अंततः आंतरिक राजनीतिक उथल-पुथल और फ्रांसीसी क्रांतिकारी युद्धों और नेपोलियन युद्धों में निरंतर संघर्ष के 23 साल गुजर गए। फ्रांस इस अवधि के दौरान अपनी शक्ति के चरम पर पहुंच गया, नेपोलियन बोनापार्ट के शासन काल में, एक अभूतपूर्व शक्ति के रूप में यूरोपीय महाद्वीप पर हावी रहा। हालांकि, 1815 तक, इसे उसी सीमा तक सीमित कर दिया गया था जो क्रांति से पहले नियंत्रित था। शेष 1 9वीं शताब्दी में दूसरी फ्रांसीसी औपनिवेशिक साम्राज्य के विकास के साथ ही बेल्जियम, स्पेन और मेक्सिको में फ्रांसीसी हस्तक्षेप हुआ। अन्य प्रमुख युद्ध,रूस के खिलाफ क्रिमिया में,इटली के खिलाफ ऑस्ट्रिया में और फ्रांस के भीतर प्रशिया के खिलाफ लड़े गए। फ्रेंको-प्रुसीयन युद्ध में हार के बाद, प्रथम विश्व युद्ध में फिर से फ्रेंको-जर्मन प्रतिद्वंद्विता उभर आयी। फ्रांस और उसके सहयोगी इस बार विजयी रहे थे। संघर्ष के मद्देनजर सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल द्वितीय विश्व युद्ध के रूप में परिणीत हुआ, जिसमें फ्रांस ने लड़ाई में एक्सिस राष्ट्रों को हराया गया और फ्रांसीसी सरकार ने जर्मनी के साथ एक युद्धविराम पर हस्ताक्षर किए। निर्वासन में एक मुक्त फ्रांसीसी सैनिक सरकार की अगुआई वाली मित्र राष्ट्रों की सेना ने अंततः एक्सिस पॉवर्स के ऊपर विजयी प्राप्त की। नतीजतन, फ्रांस ने जर्मनी में एक व्यवसाय क्षेत्र और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक स्थायी सीट हासिल की। पहले दो विश्व युद्धों के पैमाने पर तीसरे फ्रेंको-जर्मन संघर्ष से बचने की अनिवार्यता ने 1950 के दशक में शुरू होने वाले यूरोपीय एकीकरण के लिए मार्ग प्रशस्त किया। फ्रांस एक परमाणु शक्ति बन गया और 20 वीं शताब्दी के अंत तक, नाटो और उसके यूरोपीय सहयोगियों के साथ मिलकर सहयोग किया गया है। जुलाई में 1453 में फ्रांसीसी सेना ने अपने ब्रितानी विरोधियों को कैस्टिलो की लड़ाई में पराजित किया .

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बदख़्शान

ताजिकिस्तान का कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त अफ़ग़ानिस्तान का बदख़्शान प्रान्त अफ़ग़ानिस्तान में बदख़्शानी बच्चे बदख़्शान (फ़ारसी:, ताजिक: Бадахшон, अंग्रेजी: Badakhshan) पामीर पर्वतों के इलाक़े में स्थित मध्य एशिया का एक ऐतिहासिक क्षेत्र है जो आधुनिक अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वोत्तरी और आधुनिक ताजिकिस्तान के दक्षिणपूर्वी भागों पर विस्तृत था। अफ़ग़ानिस्तान के सुदूर उत्तरपूर्वी बदख़्शान प्रान्त (जिसमें प्रसिद्ध वाख़ान गलियारा भी आता है) और ताजिकिस्तान के दक्षिणपूर्वी कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त का नाम इसी पुराने नाम पर पड़ा है।, Svat Soucek, pp.

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बदख़्शान प्रान्त

बदख़्शान (फ़ारसी) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के उत्तर-पूर्वी भाग में हिन्दु कुश पर्वतों और आमू दरिया के बीच स्थित है। यह ऐतिहासिक बदख़्शान क्षेत्र का हिस्सा है। इसका क्षेत्रफल ४४,०५९ वग किमी है और इसकी आबादी सन् २०१२ में लगभग १० लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 अफ़्ग़ानिस्तान को चीन द्वारा नियंत्रित तिब्बत व शिंजियांग क्षेत्रों से जोड़ने वाला दुर्गम वाख़ान गलियारा भी इसी प्रान्त में आता है। .

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बदख़्शान भूस्खलन २०१४

२ मई २०१४ को अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रान्त के आर्गो जिले में मूसलाधार बारिश से भूस्खलन की घटना हुई। इस घटना में मारे गये लोगों की संख्या अलग-अलग स्रोतों से भिन्न प्राप्त हुई जो ३५० से २७०० तक है। लगभग ३०० मकान ध्वस्थ हो गये जबकि १४००० घर क्षतिग्रस्त हो गये। बचावकर्मियों को शुरुआत में अन्य भूस्खलन के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ा। .

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बनबेर

बनबेर या उन्नाव, बेर की जाति का पौधा है और पश्चिम हिमालय प्रदेश, पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत, अफगानिस्तान, बलोचिस्तान, ईरान इत्यादि में पाया जाता है। इसकी झाड़ी काँटेदार, पत्ते बेर के पत्तों से कुछ तथा नुकीले, फल छोटी बेर के बराबर और पकने पर लाल रंग के होते हैं। उत्तरी अफगानिस्तान का उन्नाव सर्वोत्कृष्ट होता है। इसका मराठी तथा उर्दू में भी 'उन्नाव' ही नाम है। संस्कृत में इसे सौबीर तथा लैटिन में जिजिफ़स सैटिवा (Ziziphus Sativa) कहते हैं। इस औषधि का उपयोग विशेषकर हकीम करते हैं। इनके मतानुसार इसके पत्ते विरेचक होते हैं तथा खाज, गले के भीतर के रोग और पुराने घावों में उपयोगी हैं। परंतु औषधि के काम में इसका फल ही मुख्यत: प्रयुक्त होता है जो स्वाद में खटमीठा होता है। यह कफ तथा मूत्रनिस्सारक, रक्तशोधन तथा रक्तवर्धक कहा गया है। और खाँसी, कफ और वायु से उत्पन्न ज्वर, गले के रोग, यकृत और प्लीहा (तिल्ली) की वृद्धि में विशेष लाभदायक माना गया है। .

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बन्नू ज़िला

ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत में बन्नू ज़िला (लाल रंग में) बन्नू शहर का एक दृश्य बन्नू शहर में बन्नू (उर्दू और पश्तो:, अंग्रेज़ी: Bannu) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत का एक ज़िला है। यह करक ज़िले के दक्षिण में, लक्की मरवत ज़िले के उत्तर में और उत्तर वज़ीरिस्तान नामक क़बाइली क्षेत्र के पूर्व में स्थित है। इस ज़िले के मुख्य शहर का नाम भी बन्नू है। यहाँ बहुत-सी शुष्क पहाड़ियाँ हैं हालांकि वैसे इस ज़िले में बहुत हरियाली दिखाई देती है और यहाँ की धरती बहुत उपजाऊ है। ब्रिटिश राज के ज़माने में यहाँ के क़ुदरती सौन्दर्य से प्रभावित होकर बन्नू की 'स्वर्ग' से तुलना भी की जाती थी। .

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बरोग़िल दर्रा

बरोग़िल (Baroghil) या बोरोग़िल या ब्रोग़िल या ब्रोग़ोल (Broghol) हिन्दु कुश पर्वतमाला में स्थित एक पहाड़ी दर्रा है जो पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त के चित्राल क्षेत्र की मस्तुज वादी को अफ़ग़ानिस्तान के वाख़ान गलियारे से जोड़ता है। अन्य क्षेत्रीय दर्रों की तुलना में इसकी ऊँचाई कम है। साल में तीन महीने बर्फ़ग्रस्त होने से यह बन्द रहता है लेकिन बाक़ी के नौ महीने खुला होता है।, Royal Geographical Society (Great Britain), pp.

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बल्लभगढ़

बल्लभगढ़ हरियाणा राज्य के फ़रीदाबाद ज़िले (लाल रंग) में है बल्लभगढ़ (Ballabhgarh) भारत के हरियाणा राज्य के दक्षिण-पूर्वी भाग के फ़रीदाबाद ज़िले में एक शहर और तहसील का नाम है। दिल्ली से लगभग ३० किमी दूर स्थित यह शहर भारत के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (ऍन सी आर) का हिस्सा है। बल्लभगढ़ में एक जाट रियासत थी जिसकी स्थापना सन् १७३९ में बलराम सिंह ने की थी। यहाँ पर प्रसद्ध नाहर सिंह महल भी खड़ा है और इसका निर्माण भी बलराम सिंह ने ही करवाया था। बल्लभगढ़ का राष्ट्रीय संग्रामों में एक विशेष स्थान रहा है। बलराम सिंह मुग़ल साम्राज्य को अक्सर छेड़ते रहते थे जिस से १७५३ में मुग़लों ने उन्हें मरवा दिया। उनके मित्र सूरज मल (भरतपुर राज्य के नरेश) ने उनके पुत्रों को फिर बल्लभगढ़ की गद्दी दिलवाई। बाद में जब अफ़ग़ानिस्तान से अहमद शाह अब्दाली ने हमला किया तो बल्लभगढ़ ने उसका सख़्त विरोध किया, लेकिन ३ मार्च १७५७ को हराया गया। और भी आगे चलकर बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह (१८२३-१८५८) ने १८५७ की आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा लिया और उसके लिए ब्रिटिश सरकार ने उन्हें विद्रोह कुचलने के बाद सन् १८५८ में फांसी दी।, Oswald Wood and R. Maconachie, Settlement Officer, Delhi Division, Government of India, Victoria Press, 1882,...

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बल्ख़ प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का बल्ख़ प्रांत (नीले रंग में) बल्ख़ (फ़ारसी:, संस्कृत: वाह्लिका, अंग्रेजी: Balkh) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के उत्तरी भाग में स्थित है। बल्ख़ की राजधानी प्रसिद्ध मज़ार-ए-शरीफ़ शहर है। इसका क्षेत्रफल १७,२४९ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००६ में लगभग ११.२ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त का नाम इसी नाम के एक शहर पर पड़ा है जो राजधानी से २५ किलोमीटर पश्चिम की ओर है और अठारहवीं सदी तक शासन का केन्द्र था। इस क्षेत्र को हिन्द-ईरानी पूर्व के आर्यों के आगमन का प्रमुख केन्द्र माना जाता है जहाँ वो क़रीब २००० ईसापूर्व में आए होंगे। ईसा के दो सदी पूर्व में यह इलाक़ा ऐतिहासिक बैक्ट्रिया संस्कृति के क्षेत्र का केन्द्र था और इसी के नाम को यवनों ने बदलकर बैक्ट्रा रखा था। .

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बलूचिस्तान मुक्ति सेना

पाकिस्तान के प्रांत बलूचिस्तान में सक्रिय एक गोरीला संगठन जो बलूचिस्तान के अलगाव के एजेंडे पर काम कर रही है। अपने निवास से ही यह बलूचिस्तान में गैस लाइनें उड़ाने, सेना और पुलिस पर हमले और गैर स्थानीय लोगों पर हमले में शामिल रही है। पाकिस्तान सरकार के अनुसार आतंकवादी संगठन के दांडी हिन्दुस्तान से जा मिलते हैं। मीर बालाच मेरी इसका पहला कमांडर था जो वर्ष २००८ में अफ़ग़ानिस्तान में गठबंधन वायुसेना के हमले में मारा गया। .

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बलूचिस्तान संघर्ष

पाकिस्तान के मुख्य जातीय समूह: बलूच (गुलाबी), पंजाबी (भूरा), पश्तून (हरा), सिन्धी (हरा) बलूचिस्तान संघर्ष, दक्षिण-पश्चिम एशिया के बलूचिस्तान क्षेत्र में जारी एक संघर्ष है जो बलूच राष्ट्रवादियों एवम पाकिस्तान एवं ईरान की सरकारों के बीच चल रहा है। बलूचिस्तान क्षेत्र के अन्तर्गत पाकिस्तान का 'बलूचिस्तान' नामक दक्षिण-पश्चिमी प्रान्त, दक्षिणी-पूर्वी ईरान का सिस्तान-बलूचिस्तान प्रान्त, और दक्षिणी अफगानिस्तान का बलूचिस्तान क्षेत्र आते हैं। .

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बलूचिस्तान का इतिहास

बलूचिस्तान का इतिहास ३५० ई पूर्व से माना जाता है। यह क्षेत्र पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान में है। .

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बलोच भाषा और साहित्य

बलोची या बलोच भाषा दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान, पूर्वी ईरान और दक्षिणी अफ़्ग़ानिस्तान में बसने वाले बलोच लोगों की भाषा है। यह ईरानी भाषा परिवार की सदस्य है और इसमें प्राचीन अवस्ताई भाषा की झलक नज़र आती है, जो स्वयं वैदिक संस्कृत के बहुत करीब मानी जाती है। उत्तरपश्चिम ईरान, पूर्वी तुर्की और उत्तर इराक़ में बोले जानी कुर्दी भाषा से भी बलोची भाषा की कुछ समानताएँ हैं। बलोची पाकिस्तान की नौ सरकारी भाषाओँ में से एक है। अनुमानतः इसे पूरे विश्व में लगभग ८० लाख लोग मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। पाकिस्तान में इसे अधिकतर बलोचिस्तान प्रान्त में बोला जाता है, लेकिन कुछ सिंध और पंजाब में बसे हुए बलोच लोग भी इसे उन प्रान्तों में बोलते हैं। ईरान में इसे अधिकतर सिस्तान व बलुचेस्तान प्रान्त में बोला जाता है। ओमान में बसे हुए बहुत से बलोच लोग भी इसे बोलते हैं। समय के साथ बलोची पर बहुत सी अन्य भाषाओँ का भी प्रभाव पड़ा है, जैसे की हिन्दी-उर्दू और अरबी। पाकिस्तान में बलोची की दो प्रमुख शाखाएँ हैं: मकरानी (जो बलोचिस्तान से दक्षिणी अरब सागर के तटीय इलाक़ों में बोली जाती है) और सुलेमानी (जो मध्य और उत्तरी बलोचिस्तान के सुलेमान श्रृंखला के पहाड़ी इलाक़ों में बोली जाती है)। ईरान के बलुचेस्तान व सिस्तान सूबे में भी इसकी दो उपशाखाएँ हैं: दक्षिण में बोले जानी वाली मकरानी (जो पाकिस्तान के बलोचिस्तान की मकरानी से मिलती है) और उत्तर में बोले जानी वाली रख़शानी। .

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बलोच लोग

बलोच लोगों का भौगोलिक फैलाव (गुलाबी रंग में) पारम्परिक बलोच पोशाक में ओमान की एक बलोच लड़की पारम्परिक बलोच स्त्रियों के ज़ेवर बलोच, बलौच या बलूच दक्षिणपश्चिमी पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रान्त और ईरान के सिस्तान व बलूचेस्तान प्रान्त में बसने वाली एक जाति है। यह बलोच भाषा बोलते हैं, जो ईरानी भाषा परिवार की एक सदस्य है और जिसमें अति-प्राचीन अवस्ताई भाषा की झलक मिलती है (जो स्वयं वैदिक संस्कृत की बड़ी क़रीबी भाषा मानी जाती है। बलोच लोग क़बीलों में संगठित हैं। वे पहाड़ी और रेगिस्तानी क्षेत्रों में रहते हैं और आसपास के समुदायों से बिलकुल भिन्न पहचान बनाए हुए हैं। एक ब्राहुई नामक समुदाय भी बलोच माना जाता है, हालांकि यह एक द्रविड़ भाषा परिवार की ब्राहुई नाम की भाषा बोलते हैं। सन् २००९ में बलोच लोगों की कुल जनसंख्या ९० लाख पर अनुमानित की गई थी।, Ethnologue.com., Ethnologue.com. Retrieved June 7, 2006., Library of Congress, Country Profile. Retrieved December 5, 2009. इसमें से लगभग ६०% पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रान्त में और २५% ईरान के सिस्तान व बलूचेस्तान प्रान्त में रहते हैं। पाकिस्तान के सिंध और पंजाब प्रान्त के दक्षिणी भाग में भी बहुत से बलोच रहते हैं। अफ़्ग़ानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ओमान, बहरीन, कुवैत और अफ़्रीका के कुछ भागों में भी बलोच मिलते हैं। बलोच लोग अधिकतर सुन्नी इस्लाम के अनुयायी होते हैं। ईरान में शियाओं की बहुतायत है, इसलिए वहाँ इनकी एक अलग धार्मिक पहचान है। .

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बादग़ीस प्रान्त

बादग़ीस (फ़ारसी) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के उत्तर-पश्चिमी भाग में मुरग़ाब नदी और हरी नदी के बीच स्थित है और उत्तर में सरख़्स के रेगिस्तान के छोर से लगता है।। इसका क्षेत्रफल २०,५९१ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २०१० में लगभग ५ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 बादग़ीस की राजधानी क़ला-ए-नौ नाम का शहर है। .

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बाब -ए- ख़ैबर

पश्चिम मुख करते हुए बाब ए'ख़ैबर की तसवीर बाब ए'ख़ैबर (باب خیبر) (या बाब ए-ख़ैबर या बाब-ए-ख़ैबर) Naveed Hussain 22 January 2012 Express Tribune Retrieved 29 May 2014 एक स्मारकनुमा द्वारगाह है जो पाकिस्तान के फाटा(संध-शासित क़बाइली इलाक़े) सूबे में विख्यात ख़ैबर दर्रे के प्रवेश स्थान पर स्थित है। यह जमरूद के क़िले के पास, दक्षीण-पूर्व की ओर जी॰टी॰ रोड(तेरख़म राजमार्ग वाले हिस्से) पर पेशावर से तक़रीबन 20 कि॰मी॰ की दूरी पर जमरूद कस्बे में स्थित है। .

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बाबरनामा

मुग़ल सम्राट बाबर की बाबरनामा नामक जीवनी में एक गेंडे के शिकार का चित्रण बाबरनामा से एक दृश्य बाबरनामा (चग़ताई/फ़ारसी) या तुज़्क-ए-बाबरी मुग़ल साम्राज्य के पहले सम्राट बाबर की आत्मलिखित जीवनी है। यह उन्होंने अपनी मातृभाषा चग़ताई तुर्की में लिखी थी। इसमें उन्होंने अपना उज़्बेकिस्तान की फ़रग़ना वादी में गुज़ारा हुआ बचपन और यौवन, बाद में अफ़्ग़ानिस्तान और भारतीय उपमहाद्वीप पर आक्रमण और क़ब्ज़ा और अन्य घटनाओं का विवरण दिया है। उन्होंने हर क्षेत्र की भूमि, राजनीति, अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक वातावरण, शहरों-इमारतों, फलों, जानवरों, इत्यादि का बखान किया है। इसमें कुछ फ़ारसी भाषा के छोटे-मोटे छंद भी आते हैं, हालांकि फ़ारसी बोलने वाले इसे समझने में अक्षम हैं। हालांकि चग़ताई भाषा विलुप्त हो चुकी है आधुनिक उज़बेक भाषा उसी की वंशज है और उसे बोलने वाले उज़बेक लोग बाबरनामा पढ़ सकते हैं। इस किताब को चग़ताई और उज़बेक भाषाओं के साहित्य का एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।, Calum MacLeod, Bradley Mayhew, Odyssey, 2008, ISBN 978-962-217-795-6,...

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बाबा (बहुविकल्पी)

बाबा और उस जैसे शब्दों का प्रयोग निम्नलिखित कारणों से किया जाता है: .

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बामयान

ध्वस्त बौद्ध प्रतिमाएँ बामयान अफ़्ग़ानिस्तान के मध्य भाग में स्थित एक प्रसिद्ध शहर है। जिस प्रान्त में यह है उसका नाम भी बामयान प्रान्त ही है। बामियाँ घाटी में 2001 में तालिबान ने दो विशालकाय बौद्ध प्रतिमाओं को गैर-इस्लामी कहकर डायनामाइट से उड़ा दिया था। हाल ही में हमयन स्थित ऑयल-पेंटिंग्स को दुनिया की सबसे पुरानी तेल-चकला का नमूना करार दिया गया। काबुल से उत्तर-पश्चिम में प्राचीन तक्षशिला-बैक्ट्रिया मार्ग पर बामियाँ के भग्नावशेष आज भी अपने गौरव के प्रतीक है। ह्वेन त्सांग ने फ़न-येन-न (बामियाँ) राज्य का उल्लेख किया है। उसके अनुसार इसका क्षेत्र पश्चिम से पूर्व 2000 ली (लगभग 334 मील) और उत्तर से दक्षिण 300 ली (50 मील.) था। इसकी राजधानी छह-सात ली अथवा एक मील के घेरे में थी। यहाँ के निवासियों की रहन सहन तुषार देशवासियों जैसी थी। उनकी रुचि मुख्यतया बौद्ध धर्म में थी। यहाँ पर कोई 10 विहार थे जिनमें 100 भिक्षु रहते थे जो लोकोत्तरवादी संप्रदाय से संबंधित थे। नगर के उत्तर-पूर्व में पहाड़ी की ढाल पर कोई 140-150 फी.

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बामयान प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का बामयान प्रांत (लाल रंग में) बामयान या बामियान (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Bamyan) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के मध्य भाग में स्थित है। बामयान में अधिकतर आबादी हज़ारा समुदाय की है, जो मंगोल नस्ल के वंशज हैं और शिया इस्लाम के अनुयायी हैं। बामियान प्रान्त का क्षेत्रफल १४,१७५ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००६ में लगभग ३.९ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी बामयान शहर है। .

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बामियान के बुद्ध

अलेक्जेंडर बर्नस द्वारा १८३२ में बना बामियान के बुद्ध का चित्रण। बामियान के बुद्ध चौथी और पांचवीं शताब्दी में बनी बुद्ध की दो खडी मूर्तियां थी जो अफ़ग़ानिस्तान के बामयान में स्थित थी। ये काबुल के उत्तर पश्चिम दिशामें २३० किलोमीटर (१४० मील) पर, २५०० मीटर (८२०० फीट) की ऊंचाई पर थे। इनमेंसे छोटी मूर्ति सन् ५०७ में और बडी मूर्ति सन् ५५४ में निर्मित थी। ये क्रमश: ३५ मीटर (११५ फीट) और ५३ मीटर (१७४ फीट) की ऊंचाई की थी। मार्च २००१ में अफ़ग़ानिस्तान के जिहादी संगठन तालिबान के नेता मुल्ला मोहम्मद उमर के कहने पर डाइनेमाइट से उडा दिया गया। कुछ हफ्तों में संयुक्त राज्य अमेरिका के दौरेपर अफगानिस्तान के इस्लामिक अमीरात के दूत सईद रहमतुल्लाह हाशमी ने बताया कि उन्होने विशेष रूप से मूर्तियोंके रखरखाव के लिए आरक्षित अंतर्राष्ट्रीय सहायता का विरोध किया था जबकि अफ़ग़ानिस्तान अकाल का सामना कर रहा था। .

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बाल्टिस्तान

अफगानिस्तान का मानचित्र बाल्टिस्तान अफगानिस्तान का एक शहर है। श्रेणी:अफ़्गानिस्तान के शहर.

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बाश्गल नदी

बाश्गल नदी (दरी फ़ारसी:, दरिया-ए-बाश्गल​; अंग्रेज़ी: Bashgal River; पश्तो: लंड​ई सींद) पूर्वोत्तरी अफ़्ग़ानिस्तान के नूरिस्तान प्रान्त में बाश्गल वादी में बहने वाली एक नदी है। यह हिन्दू-कुश पर्वतों की दक्षिणी ढलानों से शुरू होकर दक्षिण और दक्षिण-पश्चिमी दिशा में बहती है।, Ludwig W. Adamec, pp.

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बासमाची विद्रोह

ऍनवर पाशा एक तुर्की सिपहसालार थे जिन्होंने बासमाची विद्रोहियों को अपने नेतृत्व में संगठित करने का असफल प्रयास किया बासमाची विद्रोह (रूसी: Басмачество, बासमाचेस्त्वो, Basmachi) सोवियत संघ और, सोवियत संघ के बनने से पहले, रूस की शाही सरकार के विरुद्ध मध्य एशिया में बसने वाले तुर्की भाषाएँ बोलने वाले मुस्लिम समुदायों के विद्रोहों के एक सिलसिले को कहते हैं जो सन् १९१६ से १९३१ तक चले। 'बासमाची' शब्द उज़बेक भाषा से लिया गया है, जिसमें इसका अर्थ 'डाकू' होता है और यह हिन्दी भाषा में पाए जाने वाले 'बदमाश' शब्द का एक रूप है।, Dilip Hiro, Penguin, 2009, ISBN 978-1-59020-221-0,...

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बाज़ारक, पंजशीर

बाज़ारक (दरी फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Bazarak) उत्तर-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के पंजशीर प्रान्त की राजधानी है। यह १०० किमी लम्बी पंजशीर वादी के लगभग मध्य में स्थित है और यहाँ पर बसने वाले अधिकतर लोग ताजिक समुदाय के हैं। यह प्रसिद्ध अफ़ग़ान नेता अहमद शाह मसूद का जन्मस्थान है और उनका मकबरा भी यहीं स्थित है।, Susan Vollmer, pp.

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बाघ

बाघ जंगल में रहने वाला मांसाहारी स्तनपायी पशु है। यह अपनी प्रजाति में सबसे बड़ा और ताकतवर पशु है। यह तिब्बत, श्रीलंका और अंडमान निकोबार द्वीप-समूह को छोड़कर एशिया के अन्य सभी भागों में पाया जाता है। यह भारत, नेपाल, भूटान, कोरिया, अफगानिस्तान और इंडोनेशिया में अधिक संख्या में पाया जाता है। इसके शरीर का रंग लाल और पीला का मिश्रण है। इस पर काले रंग की पट्टी पायी जाती है। वक्ष के भीतरी भाग और पाँव का रंग सफेद होता है। बाघ १३ फीट लम्बा और ३०० किलो वजनी हो सकता है। बाघ का वैज्ञानिक नाम पेंथेरा टिग्रिस है। यह भारत का राष्ट्रीय पशु भी है। बाघ शब्द संस्कृत के व्याघ्र का तदभव रूप है। .

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बिहार का मध्यकालीन इतिहास

बिहार का मध्यकालीन इतिहास का प्रारम्भ उत्तर-पश्‍चिम सीमा पर तुर्कों के आक्रमण से होता है। मध्यकालीन काल में भारत में किसी की भी मजबूत केन्द्रीय सत्ता नहीं थी। पूरे देश में सामन्तवादी व्यवस्था चल रही थी। सभी शासक छोटे-छोटे क्षेत्रीय शासन में विभक्‍त थे। मध्यकालीन बिहार की इतिहास की जानकारी के स्त्रोतों में अभिलेख, नुहानी राज्य के स्त्रोत, विभिन्न राजाओं एवं जमींदारों के राजनीतिक जीवन एवं अन्य सत्ताओं से उनके संघर्ष, दस्तावेज, मिथिला क्षेत्र में लिखे गये ग्रन्थ, यूरोपीय यात्रियों द्वारा दिये गये विवरण इत्यादि महत्वपूर्ण हैं।.

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बग़लान प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का बग़लान प्रांत (नीले रंग में) बग़लान (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Baghlan) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्वोत्तरी भाग में स्थित है। बग़लान की राजधानी पुल-ए-ख़ुमरी शहर है। इसका क्षेत्रफल २१,११२ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००६ में लगभग ७.८ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 .

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बंसी लाल

चौधरी बंसीलाल (26 अगस्त 1927-28 मार्च 2006)(चौधरी बंसी लाल) एक भारयीय स्वतंत्रता सेनानी, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कई लोगों द्वारा आधुनिक हरियाणा के निर्माता माने जाते हैं। उनका जन्म हरियाणा के भिवानी जिले के गोलागढ़ गांव के जाट परिवार में हुआ था। उन्होंने तीन अलग-अलग अवधियों: 1968-197, 1985-87 एवं 1996-99 तक हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। बंसीलाल को 1975 में आपातकाल के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके पुत्र संजय गांधी का एक करीबी विश्वासपात्र माना जाता था। उन्होंने दिसंबर 1975 से मार्च 1977 तक रक्षा मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दी एवं 1975 में केंद्र सरकार में बिना विभाग के मंत्री के रूप में उनका एक संक्षिप्त कार्यकाल रहा। उन्होंने रेलवे और परिवहन विभागों का भी संचालन किया। लाल सात बार राज्य विधानसभा के लिए चुने गए, पहली बार 1967 में.

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बुरहानुद्दीन रब्बानी

बुरहानुद्दीन रब्बानी (برهان الدين رباني) (१९४०- २० सितंबर) अफगानिस्तान के १९९२ से १९९६ तक और २००१ मे दूसरे कार्यकाल के राष्ट्रपति थे। रब्बानी जमीयत - ए इस्लामी अफगानिस्तान (अफगानिस्तान के इस्लामिक सोसाइटी) के नेता थे। उन्होंने यूनाइटेड इस्लामिक फ्रंट (UIFSA) के राजनीतिक प्रमुख के रूप में भी काम किया। यह विभिन्न राजनीतिक दलो का एक गठबंधन था, जो अफगानिस्तान में तालिबान शासन खिलाफ लड़ा। वे १९९२-१९९६ से राष्ट्रपति थे, जब उन्हे तालिबान अधिग्रहण की वजह से काबुल शहर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। उनकी सरकार को कई देशों और संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त थी। २० सितंबर, २०११ को एक आत्मघाती हमलावर ने काबुल में पूर्व राष्ट्रपति के घर में प्रवेश कर रब्बानी हत्या कर दी। .

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बुज़कशी

बल्ख़ प्रांत में बुज़कशी कज़ाख़ नाम) बुज़कशी (दरी फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Buzkashi) या कोक-बोरू (उज़बेक: kökbörü, अंग्रेज़ी: Kok-boru) या वुज़लोबा (पश्तो:, अंग्रेज़ी: Wuzloba) मध्य एशिया में घोड़ों पर सवार होकर खेले जाने वाला एक खेल है। यह अफ़्ग़ानिस्तान, उज़बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, किरगिज़स्तान, तुर्कमेनिस्तान, कज़ाख़स्तान, पाकिस्तान के पठान इलाक़ों और चीन के उईग़ुर इलाक़ों में खेला जाता है। यह सदियों से स्तेपी के मैदानों पर रहने वाले क़बीलों द्वारा खेला जा रहा है जो घुड़सवारी में हुनरमंद होते हैं। इसमें खिलाड़ियों के दो गुट होते हैं और खेल के मैदान के बीच में एक सिर-कटा बकरा या बछड़ा रखा जाता है। खिलाड़ी अपने घोड़े दौड़ाते हुए उसे उठाने की कोशिश करते हैं। जो उसे उठा लेता है वह दुसरे गुट के खिलाड़ियों से बचकर उसे जीत की लकीर के पार फेंकने की कोशिश करता है, जबकि दूसरे खिलाड़ी उस लाश को उस से छीनने की कोशिश करते हैं।, Paul Connolly, Pier 9, 2011, ISBN 978-1-74266-513-9,...

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बुख़ारा

बुख़ारा के अमीर के महल का दरवाज़ा, यह यूनेस्को द्वारा पंजीकृत विश्व धरोहर स्थल है बुख़ारा में पाया गया यवन-बैक्ट्रियाई सम्राट युक्राटीडीस (१७०-१४५ ईसापूर्व) द्वारा ज़र्ब सिक्का जो प्राचीनकाल का सबसे बड़ा सोने का सिक्का है। इसका वज़न १६९.२ ग्राम और व्यास (डायामीटर) ५८ मिलीमीटर है। इसे फ़्रांसिसी सम्राट नेपोलियन तृतीय ने ले लिया था और अब यह पैरिस के एक संग्राहलय में है। अलीम ख़ान (१८८०-१९४४), बुख़ारा का अंतिम अमीर, जिसे १९२० में सिंहासन से हटा दिया गया कलाँ मीनार (यानि 'बड़ी मीनार') नादिर दीवान-बेग़ी मदरसे के दरवाज़े पर अमरपक्षी (काल्पनिक फ़ीनिक्स पक्षी), यह लब-ए-हौज़ स्थल का हिस्सा है बुख़ारा (रूसी: Бухара, फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Bokhara) मध्य एशिया में स्थित उज़बेकिस्तान देश के बुख़ारा प्रान्त की राजधानी है। यह उज़बेकिस्तान की पाँचवी सबसे बड़ी नगरी है। इसकी जनसंख्या २,३७,९०० है (सन् १९९९ अनुमानानुसार) और यह शहर लगभग पाँच हजार वर्षों से बसा हुआ है।, Europa Publications Limited, Taylor & Francis, 2002, ISBN 978-1-85743-137-7,...

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ब्रहमदग बुगती

ब्रहमदग खान बुगती (उर्दू: براہمدغ خان بگٹی‎), बलोच रिपब्लिकन पार्टी के संस्थापक तथा नेता हैं। वे अकबर ब्गती के नाती हैं। उन्होने २००८ में तलाल अकबर बुगती की जम्हूरी वतन पार्टी से अलग होकर यह पार्टी बनायी। पाकिस्तान सरकार उन पर आरोप लगाती है कि वे बलोच रिपब्लिकन आर्मी के भी नेता हैं जिसे पाकिस्तान सरकार ने आतंकवादी संस्था घोषित कर रखा है। सन २००६ से वे पाकिस्तान से निर्वासित जीवन बिता रहे हैं, पहले अफगानिस्तान में और अब स्विटजरलैण्ड में। .

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ब्राहुई भाषा

ब्राहुई (Urdu: براہوی) या ब्राहवी (براوی) एक द्रविड़ भाषा है। यह भाषा पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के ब्राहुई लोगों द्वारा तथा क़तर, संयुक्त अरब अमीरात, इराक़ व ईरान के आप्रवासी समुदायों द्वारा बोली जाती है। यह अपनी निकटतम द्राविड़-भाषी जनसंख्या से १५०० किमी से भी अधिक की दूरी से विलग है। .

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ब्रिटिश भारतीय सेना

भारतीय मुसलमान सैनिकों का एक समूह जिसे वॉली फायरिंग के आदेश दिए गए। ~1895 ब्रिटिश भारतीय सेना 1947 में भारत के विभाजन से पहले भारत में ब्रिटिश राज की प्रमुख सेना थी। इसे अक्सर ब्रिटिश भारतीय सेना के रूप में निर्दिष्ट नहीं किया जाता था बल्कि भारतीय सेना कहा जाता था और जब इस शब्द का उपयोग एक स्पष्ट ऐतिहासिक सन्दर्भ में किसी लेख या पुस्तक में किया जाता है, तो इसे अक्सर भारतीय सेना ही कहा जाता है। ब्रिटिश शासन के दिनों में, विशेष रूप से प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, भारतीय सेना न केवल भारत में बल्कि अन्य स्थानों में भी ब्रिटिश बलों के लिए अत्यधिक सहायक सिद्ध हुई। भारत में, यह प्रत्यक्ष ब्रिटिश प्रशासन (भारतीय प्रान्त, अथवा, ब्रिटिश भारत) और ब्रिटिश आधिपत्य (सामंती राज्य) के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी थी। पहली सेना जिसे अधिकारिक रूप से "भारतीय सेना" कहा जाता था, उसे 1895 में भारत सरकार के द्वारा स्थापित किया गया था, इसके साथ ही ब्रिटिश भारत की प्रेसीडेंसियों की तीन प्रेसिडेंसी सेनाएं (बंगाल सेना, मद्रास सेना और बम्बई सेना) भी मौजूद थीं। हालांकि, 1903 में इन तीनों सेनाओं को भारतीय सेना में मिला दिया गया। शब्द "भारतीय सेना" का उपयोग कभी कभी अनौपचारिक रूप से पूर्व प्रेसिडेंसी सेनाओं के सामूहिक विवरण के लिए भी किया जाता था, विशेष रूप से भारतीय विद्रोह के बाद.

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ब्रिटिश काउंसिल

लंदन में ब्रिटिश काउंसिल भवन ढाका, बांग्लादेश में ब्रिटिश काउंसिल कार्यालय ब्रिटिश काउंसिल, यूनाइटेड किंगडम में आधारित एक लघु निकाय है जो अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक और सांस्कृतिक अवसर प्रदान करने में विशेषज्ञ है। यह शाही चार्टर द्वारा निगमित किया गया है और इंग्लैंड और वेल्स दोनों जगहों और स्कॉटलैंड में एक धर्मार्थ संस्था के रूप में पंजीकृत है। 1934 में स्थापित, इसे 1940 में किंग जॉर्ज VI द्वारा एक शाही चार्टर प्रदान किया गया। यूनाइटेड किंगडम सरकार में इसके 'प्रायोजित विभाग', विदेश और राष्ट्रमंडल कार्यालय है, हालांकि इसे अपने रोज़ के परिचालन में स्वतंत्रता प्राप्त है। अप्रैल 2007 को, मार्टिन डेविडसन को इसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया। .

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बैसाखी

बैसाखी नाम वैशाख से बना है। पंजाब और हरियाणा के किसान सर्दियों की फसल काट लेने के बाद नए साल की खुशियाँ मनाते हैं। इसीलिए बैसाखी पंजाब और आसपास के प्रदेशों का सबसे बड़ा त्योहार है। यह रबी की फसल के पकने की खुशी का प्रतीक है। इसी दिन, 13 अप्रैल 1699 को दसवें गुरु गोविंद सिंहजी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। सिख इस त्योहार को सामूहिक जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं। .

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बैक्ट्रिया

बैक्ट्रिया के प्राचीन शहर बैक्ट्रिया या बाख़्तर (संस्कृत: वाह्लिका, फ़ारसी: बाख़्तर, यूनानी: Βακτριανή बाक्त्रिआई), जिसे तुषारिस्तान, तुख़ारिस्तान और तुचारिस्तान भी कहा जाता है, मध्य एशिया के उस ऐतिहासिक क्षेत्र का प्राचीन नाम है जो हिन्दु कुश पर्वत श्रंखला और अमू दरिया के बीच पड़ता है। आधुनिक राजनितिक इकाइयों के अनुसार यह अफ़ग़ानिस्तान, ताजिकिस्तान और पाकिस्तान में बँटा हुआ है। .

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बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रसारक है,जो सादृश और अंकीय लघु तरंगों (एनालॉग एंड डिजिटल शार्टवेव), इंटरनेट स्ट्रीमिंग और पॉडकास्टिंग, उपग्रह, एफएम और एमडब्ल्यू प्रसारणों के जरिये दुनिया के कई हिस्सों में 32 भाषाओं में प्रसारण करता है। यह राजनीतिक रूप से स्वतंत्र, (बीबीसी के घोषणपत्र में उल्लिखित विषयों का ब्यौरा उपलब्ध कराने के समझौते के आदेश द्वारा) गैर-लाभकारी और वाणिज्यिक विज्ञापनों से मुक्त है। अंग्रेजी भाषा की सेवा हर दिन 24 घंटे प्रसारित होती है। जून 2009 में बीबीसी की रिपोर्ट है कि विश्व सेवा के साप्ताहिक श्रोताओं का औसत 188 मिलियन लोगों तक पहुंच गया। वर्ल्ड सर्विस के लिए ब्रिटिश सरकार विदेशी और राष्ट्रमंडल कार्यालय द्वारा अनुदान सहायता के माध्यम से वित्तपोषित करती है। 2014 से यह अनिवार्य बीबीसी लाइसेंस शुल्क से वित्तपोषित होगा, जो ब्रिटेन में टेलीविजन पर प्रसा‍रित कार्यक्रमों को देखने वाले हर घर पर लगाया जायेगा.

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भरतपुर

भरतपुर राजस्थान का एक प्रमुख शहर होने के साथ-साथ देश का सबसे प्रसिद्ध पक्षी उद्यान भी है। 29 वर्ग कि॰मी॰ में फैला यह उद्यान पक्षी प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। विश्‍व धरोहर सूची में शामिल यह स्थान प्रवासी पक्षियों का भी बसेरा है। भरतपुर शहर की बात की जाए तो इसकी स्थापना जाट शासक राजा सूरजमल ने की थी और यह अपने समय में जाटों का गढ़ हुआ करता था। यहाँ के मंदिर, महल व किले जाटों के कला कौशल की गवाही देते हैं। राष्ट्रीय उद्यान के अलावा भी देखने के लिए यहाँ अनेक जगह हैं इसका नामकरण राम के भाई भरत के नाम पर किया गया है। लक्ष्मण इस राज परिवार के कुलदेव माने गये हैं। इसके पूर्व यह जगह सोगडिया जाट सरदार रुस्तम के अधिकार में था जिसको महाराजा सूरजमल ने जीता और 1733 में भरतपुर नगर की नींव डाली .

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भारत में आतंकवाद

भारत बहुत समय से आतंकवाद का शिकार हो रहा है। भारत के काश्मीर, नागालैंड, पंजाब, असम, बिहार आदि विशेषरूप से आतंक से प्रभावित रहे हैं। यहाँ कई प्रकार के आतंकवादी जैसे पाकिस्तानी, इस्लामी, माओवादी, नक्सली, सिख, ईसाई आदि हैं। जो क्षेत्र आज आतंकवादी गतिविधियों से लम्बे समय से जुड़े हुए हैं उनमें जम्मू-कश्मीर, मुंबई, मध्य भारत (नक्सलवाद) और सात बहन राज्य (उत्तर पूर्व के सात राज्य) (स्वतंत्रता और स्वायत्तता के मामले में) शामिल हैं। अतीत में पंजाब में पनपे उग्रवाद में आंतकवादी गतिविधियां शामिल हो गयीं जो भारत देश के पंजाब राज्य और देश की राजधानी दिल्ली तक फैली हुई थीं। 2006 में देश के 608 जिलों में से कम से कम 232 जिले विभिन्न तीव्रता स्तर के विभिन्न विद्रोही और आतंकवादी गतिविधियों से पीड़ित थे। अगस्त 2008 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के.

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भारत में इस्लाम

भारतीय गणतंत्र में हिन्दू धर्म के बाद इस्लाम दूसरा सर्वाधिक प्रचलित धर्म है, जो देश की जनसंख्या का 14.2% है (2011 की जनगणना के अनुसार 17.2 करोड़)। भारत में इस्लाम का आगमन करीब 7वीं शताब्दी में अरब के व्यापारियों के आने से हुआ था (629 ईसवी सन्‌) और तब से यह भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का एक अभिन्न अंग बन गया है। वर्षों से, सम्पूर्ण भारत में हिन्दू और मुस्लिम संस्कृतियों का एक अद्भुत मिलन होता आया है और भारत के आर्थिक उदय और सांस्कृतिक प्रभुत्व में मुसलमानों ने महती भूमिका निभाई है। हालांकि कुछ इतिहासकार ये दावा करते हैं कि मुसलमानों के शासनकाल में हिंदुओं पर क्रूरता किए गए। मंदिरों को तोड़ा गया। जबरन धर्मपरिवर्तन करा कर मुसलमान बनाया गया। ऐसा भी कहा जाता है कि एक मुसलमान शासक टीपू शुल्तान खुद ये दावा करता था कि उसने चार लाख हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करवाया था। न्यूयॉर्क टाइम्स, प्रकाशित: 11 दिसम्बर 1992 विश्व में भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां सरकार हज यात्रा के लिए विमान के किराया में सब्सिडी देती थी और २००७ के अनुसार प्रति यात्री 47454 खर्च करती थी। हालांकि 2018 से रियायत हटा ली गयी है। .

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भारत और अफगानिस्तान

अफगानिस्तान और भारत एक दूसरे के पड़ोस में स्थित दो प्रमुख दक्षिण एशिया देश हैं। दोनों दक्षिण एशियाई क्षेत्रिय सहयोग संगठन (दक्षेस) के भी सदस्य हैं। दोनों देशों के बीच प्राचीन काल से ही गहरे संबंध रहे हैं। महाभारत काल में अफगानिस्तान के गांधार जो वर्तमान समय में कंधार है, की राजकुमारी का विवाह हस्तिनापुर (वर्तमान दिल्ली) के राजा धृतराष्ट्र से हुआ था। 21वीं सदी में तालीबान के पतन के बाद दोनों देशों के संबंध फिर से काफी मजबूत हो गए हैं। भारत ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में रचनात्मक हिस्सेदारी की है। 4 अक्टूबर 2011 को अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई की भारत यात्रा के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुई बैठक में सामरिक मामले, खनिज संपदा की साझेदारी और तेल और गैस की खोज पर साझेदारी संबंधी तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। श्रेणी:भारत के द्विपक्षीय संबंध श्रेणी:अफगानिस्तान.

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भारत का भूगोल

भारत का भूगोल या भारत का भौगोलिक स्वरूप से आशय भारत में भौगोलिक तत्वों के वितरण और इसके प्रतिरूप से है जो लगभग हर दृष्टि से काफ़ी विविधतापूर्ण है। दक्षिण एशिया के तीन प्रायद्वीपों में से मध्यवर्ती प्रायद्वीप पर स्थित यह देश अपने ३२,८७,२६३ वर्ग किमी क्षेत्रफल के साथ विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है। साथ ही लगभग १.३ अरब जनसंख्या के साथ यह पूरे विश्व में चीन के बाद दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश भी है। भारत की भौगोलिक संरचना में लगभग सभी प्रकार के स्थलरूप पाए जाते हैं। एक ओर इसके उत्तर में विशाल हिमालय की पर्वतमालायें हैं तो दूसरी ओर और दक्षिण में विस्तृत हिंद महासागर, एक ओर ऊँचा-नीचा और कटा-फटा दक्कन का पठार है तो वहीं विशाल और समतल सिन्धु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान भी, थार के विस्तृत मरुस्थल में जहाँ विविध मरुस्थलीय स्थलरुप पाए जाते हैं तो दूसरी ओर समुद्र तटीय भाग भी हैं। कर्क रेखा इसके लगभग बीच से गुजरती है और यहाँ लगभग हर प्रकार की जलवायु भी पायी जाती है। मिट्टी, वनस्पति और प्राकृतिक संसाधनो की दृष्टि से भी भारत में काफ़ी भौगोलिक विविधता है। प्राकृतिक विविधता ने यहाँ की नृजातीय विविधता और जनसंख्या के असमान वितरण के साथ मिलकर इसे आर्थिक, सामजिक और सांस्कृतिक विविधता प्रदान की है। इन सबके बावजूद यहाँ की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक एकता इसे एक राष्ट्र के रूप में परिभाषित करती है। हिमालय द्वारा उत्तर में सुरक्षित और लगभग ७ हज़ार किलोमीटर लम्बी समुद्री सीमा के साथ हिन्द महासागर के उत्तरी शीर्ष पर स्थित भारत का भू-राजनैतिक महत्व भी बहुत बढ़ जाता है और इसे एक प्रमुख क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करता है। .

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भारत का इतिहास

भारत का इतिहास कई हजार साल पुराना माना जाता है। मेहरगढ़ पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है जहाँ नवपाषाण युग (७००० ईसा-पूर्व से २५०० ईसा-पूर्व) के बहुत से अवशेष मिले हैं। सिन्धु घाटी सभ्यता, जिसका आरंभ काल लगभग ३३०० ईसापूर्व से माना जाता है, प्राचीन मिस्र और सुमेर सभ्यता के साथ विश्व की प्राचीनतम सभ्यता में से एक हैं। इस सभ्यता की लिपि अब तक सफलता पूर्वक पढ़ी नहीं जा सकी है। सिंधु घाटी सभ्यता वर्तमान पाकिस्तान और उससे सटे भारतीय प्रदेशों में फैली थी। पुरातत्त्व प्रमाणों के आधार पर १९०० ईसापूर्व के आसपास इस सभ्यता का अक्स्मात पतन हो गया। १९वी शताब्दी के पाश्चात्य विद्वानों के प्रचलित दृष्टिकोणों के अनुसार आर्यों का एक वर्ग भारतीय उप महाद्वीप की सीमाओं पर २००० ईसा पूर्व के आसपास पहुंचा और पहले पंजाब में बस गया और यहीं ऋग्वेद की ऋचाओं की रचना की गई। आर्यों द्वारा उत्तर तथा मध्य भारत में एक विकसित सभ्यता का निर्माण किया गया, जिसे वैदिक सभ्यता भी कहते हैं। प्राचीन भारत के इतिहास में वैदिक सभ्यता सबसे प्रारंभिक सभ्यता है जिसका संबंध आर्यों के आगमन से है। इसका नामकरण आर्यों के प्रारम्भिक साहित्य वेदों के नाम पर किया गया है। आर्यों की भाषा संस्कृत थी और धर्म "वैदिक धर्म" या "सनातन धर्म" के नाम से प्रसिद्ध था, बाद में विदेशी आक्रांताओं द्वारा इस धर्म का नाम हिन्दू पड़ा। वैदिक सभ्यता सरस्वती नदी के तटीय क्षेत्र जिसमें आधुनिक भारत के पंजाब (भारत) और हरियाणा राज्य आते हैं, में विकसित हुई। आम तौर पर अधिकतर विद्वान वैदिक सभ्यता का काल २००० ईसा पूर्व से ६०० ईसा पूर्व के बीच में मानते है, परन्तु नए पुरातत्त्व उत्खननों से मिले अवशेषों में वैदिक सभ्यता से संबंधित कई अवशेष मिले है जिससे कुछ आधुनिक विद्वान यह मानने लगे हैं कि वैदिक सभ्यता भारत में ही शुरु हुई थी, आर्य भारतीय मूल के ही थे और ऋग्वेद का रचना काल ३००० ईसा पूर्व रहा होगा, क्योंकि आर्यो के भारत में आने का न तो कोई पुरातत्त्व उत्खननों पर अधारित प्रमाण मिला है और न ही डी एन ए अनुसन्धानों से कोई प्रमाण मिला है। हाल ही में भारतीय पुरातत्व परिषद् द्वारा की गयी सरस्वती नदी की खोज से वैदिक सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता और आर्यों के बारे में एक नया दृष्टिकोण सामने आया है। हड़प्पा सभ्यता को सिन्धु-सरस्वती सभ्यता नाम दिया है, क्योंकि हड़प्पा सभ्यता की २६०० बस्तियों में से वर्तमान पाकिस्तान में सिन्धु तट पर मात्र २६५ बस्तियां थीं, जबकि शेष अधिकांश बस्तियां सरस्वती नदी के तट पर मिलती हैं, सरस्वती एक विशाल नदी थी। पहाड़ों को तोड़ती हुई निकलती थी और मैदानों से होती हुई समुद्र में जाकर विलीन हो जाती थी। इसका वर्णन ऋग्वेद में बार-बार आता है, यह आज से ४००० साल पूर्व भूगर्भी बदलाव की वजह से सूख गयी थी। ईसा पूर्व ७ वीं और शुरूआती ६ वीं शताब्दि सदी में जैन और बौद्ध धर्म सम्प्रदाय लोकप्रिय हुए। अशोक (ईसापूर्व २६५-२४१) इस काल का एक महत्वपूर्ण राजा था जिसका साम्राज्य अफगानिस्तान से मणिपुर तक और तक्षशिला से कर्नाटक तक फैल गया था। पर वो सम्पूर्ण दक्षिण तक नहीं जा सका। दक्षिण में चोल सबसे शक्तिशाली निकले। संगम साहित्य की शुरुआत भी दक्षिण में इसी समय हुई। भगवान गौतम बुद्ध के जीवनकाल में, ईसा पूर्व ७ वीं और शुरूआती ६ वीं शताब्दि के दौरान सोलह बड़ी शक्तियां (महाजनपद) विद्यमान थे। अति महत्‍वपूर्ण गणराज्‍यों में कपिलवस्‍तु के शाक्‍य और वैशाली के लिच्‍छवी गणराज्‍य थे। गणराज्‍यों के अलावा राजतंत्रीय राज्‍य भी थे, जिनमें से कौशाम्‍बी (वत्‍स), मगध, कोशल, कुरु, पान्चाल, चेदि और अवन्ति महत्‍वपूर्ण थे। इन राज्‍यों का शासन ऐसे शक्तिशाली व्‍यक्तियों के पास था, जिन्‍होंने राज्‍य विस्‍तार और पड़ोसी राज्‍यों को अपने में मिलाने की नीति अपना रखी थी। तथापि गणराज्‍यात्‍मक राज्‍यों के तब भी स्‍पष्‍ट संकेत थे जब राजाओं के अधीन राज्‍यों का विस्‍तार हो रहा था। इसके बाद भारत छोटे-छोटे साम्राज्यों में बंट गया। आठवीं सदी में सिन्ध पर अरबी अधिकार हो गाय। यह इस्लाम का प्रवेश माना जाता है। बारहवीं सदी के अन्त तक दिल्ली की गद्दी पर तुर्क दासों का शासन आ गया जिन्होंने अगले कई सालों तक राज किया। दक्षिण में हिन्दू विजयनगर और गोलकुंडा के राज्य थे। १५५६ में विजय नगर का पतन हो गया। सन् १५२६ में मध्य एशिया से निर्वासित राजकुमार बाबर ने काबुल में पनाह ली और भारत पर आक्रमण किया। उसने मुग़ल वंश की स्थापना की जो अगले ३०० सालों तक चला। इसी समय दक्षिण-पूर्वी तट से पुर्तगाल का समुद्री व्यापार शुरु हो गया था। बाबर का पोता अकबर धार्मिक सहिष्णुता के लिए विख्यात हुआ। उसने हिन्दुओं पर से जज़िया कर हटा लिया। १६५९ में औरंग़ज़ेब ने इसे फ़िर से लागू कर दिया। औरंग़ज़ेब ने कश्मीर में तथा अन्य स्थानों पर हिन्दुओं को बलात मुसलमान बनवाया। उसी समय केन्द्रीय और दक्षिण भारत में शिवाजी के नेतृत्व में मराठे शक्तिशाली हो रहे थे। औरंगज़ेब ने दक्षिण की ओर ध्यान लगाया तो उत्तर में सिखों का उदय हो गया। औरंग़ज़ेब के मरते ही (१७०७) मुगल साम्राज्य बिखर गया। अंग्रेज़ों ने डचों, पुर्तगालियों तथा फ्रांसिसियों को भगाकर भारत पर व्यापार का अधिकार सुनिश्चित किया और १८५७ के एक विद्रोह को कुचलने के बाद सत्ता पर काबिज़ हो गए। भारत को आज़ादी १९४७ में मिली जिसमें महात्मा गाँधी के अहिंसा आधारित आंदोलन का योगदान महत्वपूर्ण था। १९४७ के बाद से भारत में गणतांत्रिक शासन लागू है। आज़ादी के समय ही भारत का विभाजन हुआ जिससे पाकिस्तान का जन्म हुआ और दोनों देशों में कश्मीर सहित अन्य मुद्दों पर तनाव बना हुआ है। .

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भारत के भाषाई परिवार

वृहद भारत के भाषा परिवार भारत में विश्व के सबसे चार प्रमुख भाषा परिवारों की भाषाएँ बोली जाती है। सामान्यत: उत्तर भारत में बोली जाने वाली भारोपीय परि वार की भाषाओं को आर्य भाषा समूह, दक्षिण की भाषाओं को द्रविड़ भाषा समूह, ऑस्ट्रो-एशियाटिक परिवार की भाषाओं को भुंडारी भाषा समूह तथा पूर्वोत्तर में रहने वाले तिब्बती-बर्मी, नृजातीय भाषाओं को चीनी-तिब्बती (नाग भाषा समूह) के रूप में जाना जाता है। .

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भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश

भारत राज्यों का एक संघ है। इसमें उन्तीस राज्य और सात केन्द्र शासित प्रदेश हैं। ये राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश पुनः जिलों और अन्य क्षेत्रों में बांटे गए हैं।.

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भारत-संयुक्त राज्य सम्बन्ध

भारत (हरा) तथा संयुक्त राज्य अमेरिका (केशरिया) भारत-संयुक्त राज्य सम्बन्ध से आशय भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्ध से है। यद्यपि भारत १९६१ में गुट निरपेक्ष आन्दोलन की स्थापना करने वाले देशों में प्रमुख था किन्तु शीत युद्ध के समय उसके अमेरिका के बजाय सोवियत संघ से बेहतर सम्बन्ध थे। .

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भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, भारत सरकार के संस्कृति विभाग के अन्तर्गत एक सरकारी एजेंसी है, जो कि पुरातत्व अध्ययन और सांस्कृतिक स्मारकों के अनुरक्षण के लिये उत्तरदायी होती है। इसकी वेबसाइट के अनुसार, ए.एस.

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भारतीय शिल्प

बीकानेर के जूनागढ़ दुर्ग के 'फूल महल' में स्थित एक झूला प्राचीन भारत से लेकर आधुनिक भारत के कालक्रम में शिल्पकार को बहुआयामी भूमिका का निर्वाह करने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है। शिल्पकार शिल्पवस्तुओं के निर्माता और विक्रेता के अलावा समाज में डिजाइनर, सर्जक, अन्वेषक और समस्याएं हल करने वाले व्यक्ति के रूप में भी कई भूमिकाएं निभाता है। अतः शिल्पकार केवल एक वस्तु निर्माता ही नहीं होता और शिल्पवस्तु (क्राफ्ट) केवल एक सुंदर वस्तु ही नहीं होती बल्कि इसका सृजन एक विशेष कार्य के लिए, ग्राहक की आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए किया जाता है। वस्तुतः शिल्पकार एक समस्या समाधानकर्ता के रूप में कुशल भूमिका निभाता है (विशेषतः ग्रामीण भारत में)। उदाहरण के लिए, उपभोक्ता या ग्राहक शिल्पकार से कह सकते हैं कि वह एक ऐसा प्याला बनाये, जिसे वे आसानी से पकड़ सकें और उससे गर्म पेय पी सकें। इस संबंध में शिल्पकार कुम्हार कप के हैंडल को इस तरह से डिजाइन करेगा कि उसे आसानी से पकड़ा जा सके और कप को इस प्रकार का आकार देगा कि न तो वह बहुत भारी हो और न ही बहुत बड़ा। इस तरह स्पष्ट है कि ग्राहक शिल्पकार को एक समस्या को हल करने के लिए देता है कि वह गर्म पेय के लिए कप बनाये। शिल्पकार जिस जीवंतता (vividity) के साथ कार्य करता है, वह उसे एक सांस्कृतिक प्राणी और सौन्दर्योपासक (वस्तु की सुंदरता की उपासना एवं आराधना करने वाला) बना देती है। विभिन्न वस्तु एवं उत्पाद का निर्माण उसके लिए एक साधना हो जाती है। अपनी इसी साधना को इन्द्रधनुषी आभा प्रदान करने में वह लगा रहता है। गहराई से देखें तो शिल्पकार द्वारा निर्मित उत्पाद उपयोगिता, सौन्दर्य, अंतसंपर्कों को बढ़ावा देने का उपादान (Tool) होता है। शिल्पकार कुम्हार की विशिष्टता उत्पाद की कलाकारी और सजावट नहीं बल्कि ग्राहक की समस्याओं हेतु उपयुक्त एवं कल्पनाशील हल ढूँढने में शिल्पकार का कौशल है। ऐसे में ग्राहक की जिम्मेदारी भी बनती है कि वह शिल्पकार को प्रोत्साहित करे जिससे वह हर समय नयी और उत्साहजनक वस्तु का सृजन एवं उत्पादन करे। इस दृष्टि से ग्राहक और शिल्पकार के मध्य संबंध और उपयोगी अंतसंपर्क ही शिल्पकला के सर्वोत्तम विकास में सहायक है। .

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भारतीय सेही

भारतीय सेही एक कृंतक जानवर है। इसका फैलाव तुर्की, भूमध्य सागर से लेकर दक्षिण-पश्चिम तथा मध्य एशिया (अफ़गानिस्तान और तुर्कमेनिस्तान सहित) एवं दक्षिण एशिया (पाकिस्तान, भारत, नेपाल तथा श्रीलंका) और चीन तक में है। हिमालय में यह २,४०० मी.

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भारतीय गणित का इतिहास

सभी प्राचीन सभ्यताओं में गणित विद्या की पहली अभिव्यक्ति गणना प्रणाली के रूप में प्रगट होती है। अति प्रारंभिक समाजों में संख्यायें रेखाओं के समूह द्वारा प्रदर्शित की जातीं थीं। यद्यपि बाद में, विभिन्न संख्याओं को विशिष्ट संख्यात्मक नामों और चिह्नों द्वारा प्रदर्शित किया जाने लगा, उदाहरण स्वरूप भारत में ऐसा किया गया। रोम जैसे स्थानों में उन्हें वर्णमाला के अक्षरों द्वारा प्रदर्शित किया गया। यद्यपि आज हम अपनी दशमलव प्रणाली के अभ्यस्त हो चुके हैं, किंतु सभी प्राचीन सभ्यताओं में संख्याएं दशमाधार प्रणाली पर आधारित नहीं थीं। प्राचीन बेबीलोन में 60 पर आधारित संख्या-प्रणाली का प्रचलन था। भारत में गणित के इतिहास को मुख्यता ५ कालखंडों में बांटा गया है-.

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भारतीय उपमहाद्वीप

भारतीय उपमहाद्वीप का भौगोलिक मानचित्र भारतीय उपमहाद्वीप, एशिया के दक्षिणी भाग में स्थित एक उपमहाद्वीप है। इस उपमहाद्वीप को दक्षिण एशिया भी कहा जाता है भूवैज्ञानिक दृष्टि से भारतीय उपमहाद्वीप का अधिकांश भाग भारतीय प्रस्तर (या भारतीय प्लेट) पर स्थित है, हालाँकि इस के कुछ भाग इस प्रस्तर से हटकर यूरेशियाई प्रस्तर पर भी स्थित हैं। .

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भोजन शिष्टाचार

भोजन शिष्टाचार खाते समय पालन किये जाने वाले शिष्टाचार के वे नियम हैं, जिनमें बर्तनों का सटीक उपयोग भी शामिल हो सकता है। विभिन्न संस्कृतियां भोजन शिष्टाचार के लिए अलग-अलग नियमों का पालन करती हैं। कई भोजन शिष्टाचारों का विकास व्यावहारिकता के तहत हुआ है। उदाहरण के तौर पर, मेज़ पर कुहनियों को टिकाना आम तौर पर अशिष्ट माना जाता है चूंकि ऐसा करने पर कटोरियों और कपों के ऊपर फिसलने का जोखिम बना रहता है। इन नियमों को कितनी कड़ाई से लागू करना है, इसके बारे में प्रत्येक परिवार या समूह अपने निजी मानक स्वयं तय करते हैं। .

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मध्य एशिया

मध्य एशिया एशिया के महाद्वीप का मध्य भाग है। यह पूर्व में चीन से पश्चिम में कैस्पियन सागर तक और उत्तर में रूस से दक्षिण में अफ़ग़ानिस्तान तक विस्तृत है। भूवैज्ञानिकों द्वारा मध्य एशिया की हर परिभाषा में भूतपूर्व सोवियत संघ के पाँच देश हमेशा गिने जाते हैं - काज़ाख़स्तान, किरगिज़स्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़बेकिस्तान। इसके अलावा मंगोलिया, अफ़ग़ानिस्तान, उत्तरी पाकिस्तान, भारत के लद्दाख़ प्रदेश, चीन के शिनजियांग और तिब्बत क्षेत्रों और रूस के साइबेरिया क्षेत्र के दक्षिणी भाग को भी अक्सर मध्य एशिया का हिस्सा समझा जाता है। इतिहास में मध्य एशिया रेशम मार्ग के व्यापारिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। चीन, भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच लोग, माल, सेनाएँ और विचार मध्य एशिया से गुज़रकर ही आते-जाते थे। इस इलाक़े का बड़ा भाग एक स्तेपी वाला घास से ढका मैदान है हालाँकि तियान शान जैसी पर्वत शृंखलाएँ, काराकुम जैसे रेगिस्तान और अरल सागर जैसी बड़ी झीलें भी इस भूभाग में आती हैं। ऐतिहासिक रूप मध्य एशिया में ख़ानाबदोश जातियों का ज़ोर रहा है। पहले इसपर पूर्वी ईरानी भाषाएँ बोलने वाली स्किथी, बैक्ट्रियाई और सोग़दाई लोगों का बोलबाला था लेकिन समय के साथ-साथ काज़ाख़, उज़बेक, किरगिज़ और उईग़ुर जैसी तुर्की जातियाँ अधिक शक्तिशाली बन गई।Encyclopædia Iranica, "CENTRAL ASIA: The Islamic period up to the Mongols", C. Edmund Bosworth: "In early Islamic times Persians tended to identify all the lands to the northeast of Khorasan and lying beyond the Oxus with the region of Turan, which in the Shahnama of Ferdowsi is regarded as the land allotted to Fereydun's son Tur.

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मरुस्थलीकरण

चिली के नोर्टे चिको में बकरी पालन आम है, लेकिन यह गंभीर कटाव और मरुस्थलीकरण पैदा करता है। लिमारी नदी की ऊपरी छवि मरुस्थलीकरण ज़मीन का क्षरण है, जो शुष्क और अर्द्ध-नम क्षेत्रों में विभिन्न कारकों की वजह से होता है: जिनमें विविध जलवायु और मानवीय गतिविधियांनिक मिडेलटन और डेविड थॉमस, वर्ल्ड एटलस ऑफ़ डिसर्टिफिकेशन: द्वितीय संस्करण, 1997 भी शामिल है। मरुस्थलीकरण मुख्यतः मानव निर्मित गतिविधियों के परिणाम स्वरूप होता है: विशेष तौर पर ऐसा अधिक चराई, भूमिगत जल के अत्यधिक इस्तेमाल और मानवीय एवं औद्योगिक कार्यों के लिए नदियों के जल का रास्ता बदलने की वजह से है और यह सारी प्रक्रियाएं मूलतः अधिक आबादी की वजह से संचालित होती हैं। मरुस्थलीकरण का सबसे गहरा प्रभाव है जैव विविधता और उत्पादक क्षमता में कमी, उदाहरण के लिए संक्रमण से झाड़ियों से भरे ज़मीनों के गैर देशीय चरागाह में तब्दील होना.

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मरी प्रान्त

तुर्कमेनिस्तान में मरी प्रान्त (हरे रंग में) मरी शहर में एक मस्जिद मरी प्रान्त (तुर्कमेनी: Mary welaýaty, Мары велаяты; अंग्रेज़ी: Mary Province; फ़ारसी:, मर्व) तुर्कमेनिस्तान की एक विलायत (यानि प्रान्त) है जो उस देश के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। इसकी सरहद अफ़्ग़ानिस्तान से लगती हैं। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ८७,१५० किमी२ है और सन् २००५ की जनगणना में इसकी आबादी १४,८०,४०० अनुमानित की गई थी।Statistical Yearbook of Turkmenistan 2000-2004, National Institute of State Statistics and Information of Turkmenistan, Ashgabat, 2005.

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मरी, तुर्कमेनिस्तान

प्राचीन मर्व शहर के कुछ खँडहर मरी (तुर्कमेनी: Mary, Мары; अंग्रेज़ी: Mary; फ़ारसी:, मर्व) तुर्कमेनिस्तान के मरी प्रांत की राजधानी है। इसके पुराने नाम 'मर्व' (Merv), 'मेरु' और 'मारजियाना' (Margiana) हुआ करते थे। यह काराकुम रेगिस्तान में मुरग़ाब नदी के किनारे बसा हुआ एक नख़लिस्तान (ओएसिस) है। सन् २००९ में इसकी आबादी १,२३,००० थी जो १९८९ में ९२,००० से बढ़ी हुई थी। .

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मलालई जोया

मलालई जोया (पश्तो ملالۍ جویا, जन्म: २५ अप्रैल १९७८) अफ़्ग़ानिस्तान से कार्यकर्ता, लेखिका, और एक पूर्व राजनेत्री हैं। .

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मस्तुज वादी

मस्तुज या मस्तूज (उर्दू:, अंग्रेज़ी: Mastuj Valley) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त के चित्राल ज़िले में स्थित एक वादी और तहसील का नाम है। यह २३५९ मीटर (७७४२ फ़ुट​) की ऊँचाई पर है और इसमें बूनी, मस्तुज, रेशुन, परवाक, कुराग़​ और चरुन ओवीर नाम के मुख्य गाँव आते हैं। चित्राल ज़िले में 'खो' नामक समुदाय सबसे शक्तिशाली है और कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इनकी मूल गृहभूमि मस्तुज का इलाक़ा ही था और यहाँ से वे फैलकर चित्राल के अन्य भागों में और अफ़ग़ानिस्तान के वाख़ान गलियारे में जा बसे।, Clare F. O'Leary, Calvin Ross Rensch, Sandra J. Decker, National Institute of Pakistan Studies, National Institute of Pakistan Studies, Quaid-i-Azam University, 1992,...

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मस्जिद

मुसलमानों की इबादत गाह को मस्जिद कहते हैं। इसे नमाज़ के लिए प्रयोग किया जाता है मुसलमानों के प्रारंभिक काल में मस्जिदे नबवी को विदेश से आने वाले ओफ़ोद से मुलाकात और चर्चा के लिए भी इस्तेमाल किया गया था। मस्जिद से मुसलमानों की पहली विश्वविद्यालयों (विश्वविद्यालयों) ने भी जन्म लिया है। इसके अलावा इस्लामी वास्तुकला भी मुख्य रूप से मस्जिदों से विकास हुई है। .

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महमूद-ए-राक़ी

महमूद-ए-राक़ी (दरी फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Mahmud-i-Raqi), जिसे अक्सर सिर्फ़ महमूद राक़ी कहा जाता है, पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के कापीसा प्रान्त की राजधानी है। .

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महाभारत कालीन जनपद

महाभारत कालीन जनपद .

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महाजनपद

महाजनपद, प्राचीन भारत में राज्य या प्रशासनिक इकाईयों को कहते थे। उत्तर वैदिक काल में कुछ जनपदों का उल्लेख मिलता है। बौद्ध ग्रंथों में इनका कई बार उल्लेख हुआ है। 6वीं-5वीं शताब्दी ईसापूर्व को प्रारंभिक भारतीय इतिहास में एक प्रमुख मोड़ के रूप में माना जाता है; जहाँ सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के बाद भारत के पहले बड़े शहरों के उदय के साथ-साथ श्रमण आंदोलनों (बौद्ध धर्म और जैन धर्म सहित) का उदय हुआ, जिसने वैदिक काल के धार्मिक कट्टरपंथ को चुनौती दी। पुरातात्विक रूप से, यह अवधि उत्तरी काले पॉलिश वेयर संस्कृति के हिस्सा रहे है। .

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मातृ दिवस

आधुनिक मातृ दिवस का अवकाश ग्राफटन वेस्ट वर्जिनिया में एना जार्विस के द्वारा समस्त माताओं तथा मातृत्व के लिए खास तौर पर पारिवारिक एवं उनके आपसी संबंधों को सम्मान देने के लिए आरम्भ किया गया था। यह दिवस अब दुनिया के हर कोने में अलग-अलग दिनों में मनाया जाता हैं। जैसे कि पिताओं को सम्मान देने के लिए पितृ दिवस की छुट्टी मनाई जाती हैं। यह छुट्टी अंततः इतनी व्यवसायिक बन गई कि इसकी संस्थापक, एना जार्विस, तथा कई लोग इसे एक "होलमार्क होलीडे", अर्थात् एक प्रचुर वाणिज्यिक प्रयोजन के रूप में समझने लगे। एना ने जिस छुट्टी के निर्माण में सहयोग किया उसी का विरोध करते हुए इसे समाप्त करना चाहा। .

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मातृवंश समूह जे

मध्य पूर्व के क़रीब १२% लोग मातृवंश समूह जे के वंशज होते हैं मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में मातृवंश समूह जे या माइटोकांड्रिया-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप J एक मातृवंश समूह है। मध्य पूर्व के १२% लोग, यूरोप के ११% लोग, कॉकस क्षेत्र के ८% लोग और उत्तरी अफ़्रीका के ६% लोग इस मातृवंश के वंशज पाए गए हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में पाकिस्तान में यह ५% लोगों में पाया गया है और उत्तरी पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की कलश जनजाति के ९% लोगों में। वैज्ञानिकों की मान्यता है के जिस स्त्री के साथ इस मातृवंश की शुरुआत हुई वह आज से क़रीब ४५,००० साल पहले पश्चिमी एशिया में कहीं रहती थी। ध्यान दें के कभी-कभी मातृवंशों और पितृवंशों के नाम मिलते-जुलते होते हैं (जैसे की पितृवंश समूह जे और मातृवंश समूह जे), लेकिन यह महज़ एक इत्तेफ़ाक है - इनका आपस में कोई सम्बन्ध नहीं है। यह पाया गया है कुछ मातृवंश समूह जे की उपशाखाओं में माइटोकांड्रिया के डी॰एन॰ए॰ में ऐसे उत्परिवर्तन (या म्युटेशन) मौजूद हैं जिनसे नौजवान आदमियों में "लॅबॅर की ऑप्टिक हॅरॅडिटरी न्यूरोपैथी" नाम की बिमारी की सम्भावनाएँ ज़्यादा होती हैं, जिसमें नज़र का केन्द्रीय अंधापन हो जाता है (यानि जहाँ सीधे देख रहें हो वो चीज़ नज़र नहीं आती लेकिन इर्द-गिर्द की चीजें नज़र आती हैं)। .

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मातृवंश समूह आर०

उत्तरी पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की कलश जनजाति के अनुमानित २३% लोग मातृवंश समूह आर० के वंशज होते हैं मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में मातृवंश समूह आर० या माइटोकांड्रिया-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप R0 एक मातृवंश समूह है। इसे पहले मातृवंश समूह एचवी-पूर्व या माइटोकांड्रिया-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप pre-HV के नाम से जाना जाता था। मातृवंश समूह एचवी इसी से उत्पन्न हुई एक बड़ी उपशाखा है। मातृवंश समूह आर० अरबी प्रायद्वीप पर बहुत देखा जाता है, जहाँ के यमन राष्ट्र के सुक़तरा द्वीप के ५०,००० निवासियों में से ३८% इसके वंशज हैं।Viktor Cerny et al.

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मानसेहरा ज़िला

मानसेहरा (उर्दू:, पश्तो:, अंग्रेज़ी: Mansehra) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत का एक ज़िला है। इसके उत्तर में शांगला, बट्टग्राम, कोहिस्तान ज़िले, दक्षिण में ऐब्टाबाद​ और हरिपुर ज़िले, पश्चिम में बुनेर ज़िला और पूर्व में जम्मू और कश्मीर पड़ते हैं। यह एक रमणीय पहाड़ी इलाक़ा है और इस ज़िले की काग़ान वादी पर्यटन के लिए लोकप्रीय है। चीन और पाकिस्तान के दरम्यान चलने वाला काराकोरम राजमार्ग भी इस ज़िले से गुज़रता है। .

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मानी

मानी मानी (सीरियाई: ܡܐܢܝ ܚܝܐ, मानी हय्या, अर्थ: जीवित मानी; अंग्रेज़ी: Mani; यूनानी: Μάνης, मानेश; जन्म: २१६ ईसवी अनुमानित; मृत्यु: २७६ ईसवी) एक ईरानी मूल का धर्म-संस्थापक था जिसने मानी धर्म की स्थापना करी। यह धर्म किसी ज़माने में मध्य एशिया, ईरान और अन्य क्षेत्रों में बहुत फैला हुआ था लेकिन समय के साथ-साथ पूरी तरह ख़त्म हो गया। मानी का जन्म पार्थिया के अधीन असुरिस्तान (असीरिया) क्षेत्र में हुआ था और मृत्यु सासानी साम्राज्य के गुंद-ए-शापूर (Gundeshapur) शहर में हुई। उसने सीरियाई भाषा में छह प्रमुख धार्मिक रचनाएँ लिखी और एक शापूरगान नामक कृति ईरान के शाह, शापूर प्रथम, को समर्पित करते हुए मध्य फ़ारसी में लिखी।, Gale Research, 1998, ISBN 978-0-7876-2550-4,...

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मारखोर

मारखोर मारखोर एक पाकिस्तानी टंदोह है जो आम बकरे से मिलता जुलता है। .

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मार्शल आर्ट

मार्शल आर्ट या लड़ाई की कलाएं विधिबद्ध अभ्यास की प्रणाली और बचाव के लिए प्रशिक्षण की परंपराएं हैं। सभी मार्शल आर्ट्स का एक समान उद्देश्य है: ख़ुद की या दूसरों की किसी शारीरिक ख़तरे से रक्षा । मार्शल आर्ट को विज्ञान और कला दोनों माना जाता है। इनमें से कई कलाओं का प्रतिस्पर्धात्मक अभ्यास भी किया जाता है, ज़्यादातर लड़ाई के खेल में, लेकिन ये नृत्य का रूप भी ले सकती हैं। मार्शल आर्ट्स का मतलब युद्ध की कला से है और ये लड़ाई की कला से जुड़ा पंद्रहवीं शताब्दी का यूरोपीय शब्द है जिसे आज एतिहासिक यूरोपीय मार्शल आर्ट्स के रूप में जाना जाता है। मार्शल आर्ट के एक कलाकार को मार्शल कलाकार के रूप में संदर्भित किया जाता है। मूल रूप से 1920 के दशक में रचा गया ये शब्द मार्शल आर्ट्स मुख्य तौर पर एशिया के युद्ध के तरीके के संदर्भ में था, विशेष तौर पर पूर्वी एशिया में जन्मे लड़ाई के तरीके के.

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मिर्ज़ा मोहम्मद हाकीम

मिर्ज़ा मोहम्मद हाकीम (उर्दू:مرزا محمد حکیم/अंग्रेजी:Mirza Mohammad Hakim) (जन्मकाल 09 अप्रैल 1553 - 10 अक्टूबर 1585), कभी कभी मिर्ज़ा हकीम, लघु रूप में भी जाने जाते थे, मिर्ज़ा मुगल सम्राट हुमायूं के दूसरे पुत्र थे।इन्होंने अफगानिस्तान में काबुल पर शासन किया था, और अक्सर उनके बड़े भाई सम्राट अकबर के साथ ही रहते थे ' मिर्ज़ा हाकीम ने सम्राट अकबर का काफी साथ दिया था ' ये माह चुचक बेगम का बेटे थे ' .

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मिस ऐनाक नाइट्स

मिस ऐनाक नाइट्स (مس عينک اتلان Mis Ainak Atalān) या मिस ऐनाक क्षेत्र अफगानिस्तान में छह प्रथम श्रेणी की क्रिकेट टीमों में से एक है। यह क्षेत्र अफगानिस्तान के पूर्व में राजधानी प्रांत काबुल: खोस्त, लोगार, पख्तिया और पख्तिका के दक्षिण में निम्नलिखित प्रांतों का प्रतिनिधित्व करता है। टीम का नाम लॉगर प्रांत में एक पुरातात्विक स्थल मिस एनाक के नाम पर रखा गया है। मिश एनाक क्षेत्र अहमद शाह अब्दली 4-दिवसीय टूर्नामेंट में प्रतिस्पर्धा करता है, जिसकी 2017 के बाद से प्रथम श्रेणी की स्थिति है। अक्टूबर 2017 में, उन्होंने 262 रनों से बैंड-ए-अमीर क्षेत्र के खिलाफ टूर्नामेंट का अपना पहला मैच जीता। वे मिस एनाक नाइट्स नाम का उपयोग करते हुए अफगान शापेजा क्रिकेट लीग ट्वेंटी-20 प्रतियोगिता (जिसमें 2017 से ट्वेंटी-20 स्थिति होगी) में भी प्रतिस्पर्धा करते हैं। वे गाज़ी अमानुल्ला खान क्षेत्रीय वनडे टूर्नामेंट में भी खेलते हैं, जिसे 2017 से लिस्ट ए स्टेटस दिया गया था। .

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मज़ार-ए-शरीफ़

मज़ार ए शरीफ़ पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में स्थित एक प्रसिद्ध इस्लामिक वास्तुकला का प्रतीक है। कहते हैं कि इसके नीचे इस्लामपूर्व ईरान के संत जरथुष्ट्र का मकबरा है। श्रेणी:अफ़्गानिस्तान के शहर.

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मजार शरीफ

अफगानिस्तान का मानचित्र मजार शरीफ अफगानिस्तान का एक शहर है। श्रेणी:अफ़्गानिस्तान के शहर.

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मई 2015 नेपाल भूकम्प

१२ मई २०१५ को दिन में १२ बजकर ३९ मिनट पर एक बार फिर ७.४ के परिमाण का भूकम्प आया। बजकर 9 मिनट पर भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। इसके बाद दोपहर 1 बजकर 44 मिनट पर फिर भूकंप का झटका आया। इसकी तीव्रता 4.4 थी। भूकम्प के ३ अभिकेन्द्रों में से २ नेपाल व १ अफगानिस्तान में है। नेपाल में इसकी तीव्रता ज्यादा है। नेपाल में एक केंद्र की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.3 और दूसरे की 6.2 मापी गई है। नेपाल के कोदारी में भूकंप का केंद्र जमीन से 18 किलोमीटर नीचे था। वहीं, अफगानिस्तान में भूकंप की तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर 6.9 मापी गई है। इन झटकों के बाद दिल्ली और कोलकाता में मेट्रो रेल सेवा रोक दी गई है। .

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मंगोल भाषा

मंगोल भाषा बोलने वाले क्षेत्र मंगोल भाषा अलताइक भाषाकुल की तथा योगात्मक बनावट की भाषा है। यह मुख्यत: अनतंत्र मंगोल, भीतरी मंगोल के स्वतंत्र प्रदेश, बुरयात (Buriyad) मंगोल राज्य में बोली जाती है। इन क्षेत्रों के अरिरिक्त इसके बोलनेवाले मंचूरिया, चीन के कुछ क्षेत्र और तिब्बत तथा अफगानिस्तान आदि में भी पाए जाते हैं। अनुमान है कि इन सब क्षेत्रों में मंगोल भाषा बोलनेवालों की संख्या कोई 40 लाख होगी। इन विशाल क्षेत्रों में रहनेवाले मंगोल जाति के सब लोगों के द्वारा स्वीकृत कोई एक आदर्श भाषा नहीं है। परंतु तथाकथित मंगोलिया के अंदर जनतंत्र मंगोल की हलहा (Khalkha) बोली धीरे-धीरे आदर्श भाषा का पद ग्रहण कर रही है। स्वयं मंगोलिया के लोग भी इस हलहा बोली को परिष्कृत बोली मानते हैं और इसी बोली के निकट भविष्य में आदर्श भाषा बनने की संभावना है। प्राचीन काल में मंगोल लिपि में लिखी जानेवाली साहित्यिक मंगोल पढ़े-लिखे लोगों में आदर्श भाषा मानी जाती थी। परंतु अब यह मंगोल लिपि जनतंत्र मंगोलिया द्वारा त्याग दी गई है और इसकी जगह रूसी लिपि से बनाई गई नई मंगोल लिपि स्वीकार की गई है। इस प्रकार अब मंगोल लिपि में लिखी जानेवाली साहित्यिक भाषा कम और नव मंगोल लिपि में लिखी जानेवाली हलहा बोली अधिक मान्य समझी जाने लगी है। .

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मुरग़ाब नदी

मुरग़ाब नदी पर सन् १९०९ में रूसी साम्राज्य द्वारा बनाया गया हिन्दू कुश जल-विद्युत् स्टेशन (Гиндукушская ГЭС) मुरग़ाब नदी (फ़ारसी/पश्तो:, अंग्रेज़ी: Murghab, रूसी: Мургаб) मध्य एशिया में एक ८५० किमी लम्बी नदी है। यह मध्य अफ़्ग़ानिस्तान में सफ़ेद कोह पर्वत-शृंखला में उत्पन्न होकर पश्चिमोत्तर दिशा में चलती है। यहाँ यह अफ़्ग़ानिस्तान के बादग़ीस प्रान्त के मुरग़ाब ज़िले से गुज़रती है जिसका नाम इसी नदी पर पड़ा है। वहाँ से यह तुर्कमेनिस्तान के काराकुम रेगिस्तान में जा पहुँचती है जहाँ मरी शहर के नख़लिस्तान (ओएसिस) में यह काराकुम नहर से जा मिलती है।, Andrew Petersen, Psychology Press, 1999, ISBN 978-0-415-21332-5,...

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मुहम्मद ज़िया-उल-हक़

मुहम्मद ज़िया उल हक़ (दाई तरफ़) जनरल मुहम्मद ज़िया उल हक़ (जन्म: १२ अगस्त १९२४, देहांत: १७ अगस्त १९८८) पाकिस्तान के चौथे फ़ौजी तानाशाह और छठे राष्ट्रपति थे। उनका शासन जुलाई १९७७ से अगस्त १९८८ में हवाई जहाज़ दुर्घटना में हुई उनकी मृत्यु तक चला। उन्हें १९७६ में तब के प्रधानमन्त्री ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो ने सेनाधाक्ष बनाया था लेकिन उन्होंने तख़्ता पलटकर शासन पर सैनिक क़ब्ज़ा जमा लिया और भुट्टो को फांसी दिलवा दी। उनके शासनकाल में पाकिस्तान में गहरे इस्लामीकरण की नीतियाँ चलीं। उन्होने आर्थिक विकास के लिए पूंजीवादी नीतियाँ अपनाई जिस से पाकिस्तान की आर्थिक व्यवस्था में बहुत सुधार हुआ और वह भारतीय उपमहाद्वीप के सब से तेज़ी से बढ़ने वाले देशों में आ गया। सन् १९७९ में शुरू हुए अफ़्ग़ानिस्तान में सोवियत संघ के हस्तक्षेप के खिलाफ़ उन्होने अमेरिका की सहायता से एक गुप्त युद्ध चलाया जिस से आगे चलकर सोवियत संघ को अफ़्ग़ानिस्तान छोड़ना पड़ा, लेकिन साथ-ही-साथ पाकिस्तान और उसके पड़ौसी इलाक़ों में कट्टरवादी उग्रवाद भी बढ़ गया। .

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मुहम्मद जौनपुरी

सय्यद मुहम्मद जौनपुरी (سید محمد جونپورى) (सितम्बर 9, 1443 – अप्रेल 23, 1505 ई) ने मक्का में हिजरी वर्ष 901 में स्वयं को इमाम महदी घोषित किया। इसके कारण महदविया में उन्हे आदरपूर्वक देखा जाता है। उनका जन्म जौनपुर, उत्तरप्रदेश, भारत हुआ था तथा उन्होंने पूरे भारत, अरबी प्रायद्वीप और प्राचीन ख़ुरासान का भ्रमण किया था, जहाँ 63 वर्ष की आयु में फ़राह, अफ़ग़ानिस्तान में उनका निधन हो गया। .

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मुहम्मद इक़बाल

मुहम्मद इक़बाल (محمد اقبال) (जीवन: 9 नवम्बर 1877 – 21 अप्रैल 1938) अविभाजित भारत के प्रसिद्ध कवि, नेता और दार्शनिक थे। उर्दू और फ़ारसी में इनकी शायरी को आधुनिक काल की सर्वश्रेष्ठ शायरी में गिना जाता है। इकबाल के दादा सहज सप्रू हिंदू कश्मीरी पंडित थे जो बाद में सिआलकोट आ गए। इनकी प्रमुख रचनाएं हैं: असरार-ए-ख़ुदी, रुमुज़-ए-बेख़ुदी और बंग-ए-दारा, जिसमें देशभक्तिपूर्ण तराना-ए-हिन्द (सारे जहाँ से अच्छा) शामिल है। फ़ारसी में लिखी इनकी शायरी ईरान और अफ़ग़ानिस्तान में बहुत प्रसिद्ध है, जहाँ इन्हें इक़बाल-ए-लाहौर कहा जाता है। इन्होंने इस्लाम के धार्मिक और राजनैतिक दर्शन पर काफ़ी लिखा है। इकबाल पाकिस्तान का जनक बन गए क्योंकि वह "पंजाब, उत्तर पश्चिम फ्रंटियर प्रांत, सिंध और बलूचिस्तान को मिलाकर एक राज्य बनाने की अपील करने वाले पहले व्यक्ति थे", इंडियन मुस्लिम लीग के २१ वें सत्र में,उनके अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने इस बात का उल्लेख किया था जो २९ दिसंबर,१९३० को इलाहाबाद में आयोजित की गई थी। भारत के विभाजन और पाकिस्तान की स्थापना का विचार सबसे पहले इक़बाल ने ही उठाया था। 1930 में इन्हीं के नेतृत्व में मुस्लिम लीग ने सबसे पहले भारत के विभाजन की माँग उठाई। इसके बाद इन्होंने जिन्ना को भी मुस्लिम लीग में शामिल होने के लिए प्रेरित किया और उनके साथ पाकिस्तान की स्थापना के लिए काम किया। इन्हें पाकिस्तान में राष्ट्रकवि माना जाता है। इन्हें अलामा इक़बाल (विद्वान इक़बाल), मुफ्फकिर-ए-पाकिस्तान (पाकिस्तान का विचारक), शायर-ए-मशरीक़ (पूरब का शायर) और हकीम-उल-उम्मत (उम्मा का विद्वान) भी कहा जाता है। .

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मुग़ल साम्राज्य

मुग़ल साम्राज्य (फ़ारसी:, मुग़ल सलतनत-ए-हिंद; तुर्की: बाबर इम्परातोरलुग़ु), एक इस्लामी तुर्की-मंगोल साम्राज्य था जो 1526 में शुरू हुआ, जिसने 17 वीं शताब्दी के आखिर में और 18 वीं शताब्दी की शुरुआत तक भारतीय उपमहाद्वीप में शासन किया और 19 वीं शताब्दी के मध्य में समाप्त हुआ। मुग़ल सम्राट तुर्क-मंगोल पीढ़ी के तैमूरवंशी थे और इन्होंने अति परिष्कृत मिश्रित हिन्द-फारसी संस्कृति को विकसित किया। 1700 के आसपास, अपनी शक्ति की ऊँचाई पर, इसने भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश भाग को नियंत्रित किया - इसका विस्तार पूर्व में वर्तमान बंगलादेश से पश्चिम में बलूचिस्तान तक और उत्तर में कश्मीर से दक्षिण में कावेरी घाटी तक था। उस समय 40 लाख किमी² (15 लाख मील²) के क्षेत्र पर फैले इस साम्राज्य की जनसंख्या का अनुमान 11 और 13 करोड़ के बीच लगाया गया था। 1725 के बाद इसकी शक्ति में तेज़ी से गिरावट आई। उत्तराधिकार के कलह, कृषि संकट की वजह से स्थानीय विद्रोह, धार्मिक असहिष्णुता का उत्कर्ष और ब्रिटिश उपनिवेशवाद से कमजोर हुए साम्राज्य का अंतिम सम्राट बहादुर ज़फ़र शाह था, जिसका शासन दिल्ली शहर तक सीमित रह गया था। अंग्रेजों ने उसे कैद में रखा और 1857 के भारतीय विद्रोह के बाद ब्रिटिश द्वारा म्यानमार निर्वासित कर दिया। 1556 में, जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर, जो महान अकबर के नाम से प्रसिद्ध हुआ, के पदग्रहण के साथ इस साम्राज्य का उत्कृष्ट काल शुरू हुआ और सम्राट औरंगज़ेब के निधन के साथ समाप्त हुआ, हालाँकि यह साम्राज्य और 150 साल तक चला। इस समय के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने में एक उच्च केंद्रीकृत प्रशासन निर्मित किया गया था। मुग़लों के सभी महत्वपूर्ण स्मारक, उनके ज्यादातर दृश्य विरासत, इस अवधि के हैं। .

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मुंशी नवल किशोर

मुंशी नवल किशोर अंग्रेजी शासन के समय के भारत के उद्यमी, पत्रकार एवं साहित्यकार थे। इनकी जिन्दगी का सफर कामयाबियों की दास्तान हैं। शिक्षा, साहित्य से लेकर उद्योग के क्षेत्र में उन्होंने सफलता पायी और जो बात सबसे उल्लेखनीय थी वह यह कि उन्होंने हमेशा मानव मूल्यों का सम्मान किया। .

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मौलाना मसूद अज़हर

मसूद अज़हर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का स्थापक और नेता है। जैश-ए-मोहम्मद जिसे संक्षेप में जैश भी कहते हैं पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय एक आतंकी संगठन है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने भारत में हुए पठानकोट हमले के बाद उसे हिरासत में ले लिया था। भारत ने मसूद अजहर को उसकी आतंकी गतिविधियों की वजह से उसे अपने सबसे वांक्षित आतंकवादियों की सूची में रखा हुआ है। .

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मैदान शहर

मैदान शहर (दरी फ़ारसी), जिसे पश्तो लहजे में मैदान शार (पश्तो:, अंग्रेज़ी: Maidan Shar) कहते हैं, दक्षिण-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के मैदान वरदक प्रान्त की राजधानी है। .

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मैदान वरदक प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का मैदान वरदक प्रान्त (लाल रंग में) मैदान वरदक, मैदान वरदग या केवल वरदक (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Maidan Wardak) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ९,९३४ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग ५.४ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी मैदान शहर नामक नगर है। यहाँ के अधिकतर लोग पश्तून हैं और पश्तूनों के वरदक क़बीले के ऊपर ही इस प्रान्त का नाम रखा गया है। यहाँ की ज़्यादातर आबादी यहाँ से निकलने वाले काबुल-कंदहार के आसपास के इलाक़े में बस्ती है और बाक़ी पहाड़ी स्थानों पर आबादी बहुत कम घनी है। .

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मेयमना

मेयमना​ (दरी फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Maymana) उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के फ़ारयाब प्रान्त की राजधानी है। यह तुर्कमेनिस्तान के साथ लगी अंतर्राष्ट्रीय सीमा के काफ़ी पास है और अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के लगभग ४०० किमी पश्चिमोत्तर में स्थित है। .

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मेरीलेबोन क्रिकेट क्लब

Club house occupied since 1814 | ground .

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मेहतर लाम

मेहतर लाम या मिहतर लाम (पश्तो:, अंग्रेज़ी: Mihtarlam) दक्षिण-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के लग़मान प्रान्त की राजधानी है। यह उस प्रान्त का इकलौता बड़ा क़स्बा है। .

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मेहमान ख़ाना

मेहमान ख़ाना या बैठक उत्तर भारत, पाकिस्तान व बांग्लादेश के पारम्परिक घरों में वह कमरा होता है जहाँ अतिथियों को बैठाकर उनका सत्कार किया जाता है। इसे संस्कृत में अतिथि कक्ष कहा जाता था। पाकिस्तान व अफ़ग़ानिस्तान के पश्तून इलाक़ों में इसे हुजरा भी कहते हैं। इन कमरों में बैठने के लिए अक्सर मूढ़े और तख़्त / तख़्तपोश रखे होते हैं और व्यवस्था आधुनिक भारतीय शहरों के घरों के 'ड्राइंग रूम' से भिन्न होती है। .

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मोहन लाल ज़ुत्शी

मोहन लाल ज़ुत्शी (Mohan Lal Zutshi), जिन्हें मोहन लाल कश्मीरी भी कहते थे, 19वीं शताब्दी में एक यात्री, राजनयिक और लेखक थे। उन्होंने 1838–1842 के प्रथम आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध में एक अहम भूमिका निभाई थी। उनके द्वारा लिखी काबुल के अमीर दोस्त मुहम्मद ख़ान की जीवनी उस युद्ध का प्राथमिक वर्णन स्रोत है। इसके अलावा उन्होंने भारत से लेकर कैस्पियन सागर तक के कई क्षेत्रों का भ्रमण करा और जानकारी एकत्रित कर के ब्रिटिश राज की सरकार को उपलब्ध करी। इन क्षेत्रों में अफ़्ग़ानिस्तान, बल्ख़, बुख़ारा और ख़ोरासान शामिल थे। प्रसिद्ध ब्रिटिश यात्री व जासूस अलेक्ज़ेंडर बर्न्स का मार्गदर्शन उन्होंने ही करा था। .

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मोहम्मद शहज़ाद

मोहम्मद शहज़ाद मोहम्मदी (जन्म ३१ जनवरी १९८८) एक अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम के खिलाड़ी है जो दाएं हाथ से बल्लेबाजी करते है और विकेट-कीपर की भूमिका निभाते है। इन्होंने एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय किकेट का पदार्पण साल २००९ में ३० अगस्त को नीदरलैंड क्रिकेट टीम के खिलाफ किया था जिसमें इन्होंने १६ रनों की पारी खेली थी। इस मैच में नीदरलैंड की टीम ८ विकेटों से जीती थी। शहजाद ने अपने कैरियर में पहला टी२० अंतर्राष्ट्रीय मैच आयरलैंड क्रिकेट टीम के खिलाफ १ फरवरी २०१० को खेला था जिसमें सिर्फ १० रनों की पारी खेली थी। ये पाकिस्तान सुपर लीग में २०१८ के सीजन में पेशावर ज़ल्मी के लिए खेले थे। .

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मोहम्मद हामिद अंसारी

मोहम्मद हामिद अंसारी (जन्म १ अप्रैल १९३४), भारत के उपराष्ट्रपति थे। वे भारतीय अल्पसंख्यक आयोग के भूतपूर्व अध्यक्ष भी हैं। वे एक शिक्षाविद, तथा प्रमुख राजनेता हैं, एवं अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उपकुलपति भी रह चुके हैं। वे 10 अगस्त 2007 को भारत के 13वें उपराष्ट्रपति चुने गये। .

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मीनार

ईराक़ के सामर्रा शहर की मलवीया नामक मीनार मीनार (अरबी: या, मनारह; अर्थ: दीपगृह) ऊँचा स्तंभ-नुमा स्थापत्य होता है जो देखने में किसी आम बुर्ज से अधिक लम्बा और खिंचा हुआ दिखता है। सामान्यतः मीनार बेलनाकार, लम्बे और ऊपर प्याज़-नुमा मुकुट से सुसज्जित होते हैं। वे आसपास की इमारतों से अधिक ऊँचे होते हैं और अक्सर मुस्लिम मस्जिदों के साथ लगे हुए पाए जाते हैं। .

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मीनार-ए-जाम

मीनार-ए-जाम मीनार-ए-जाम (फ़ारसी) या जाम की मीनार (अंग्रेज़ी: Minaret of Jam) पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान के ग़ोर प्रांत के शहरक ज़िले में हरी नदी (हरीरूद) के किनारे खड़ी एक प्रसिद्ध ईंटों की बनी मीनार है। यह ६५ मीटर ऊँची मीनार दिल्ली के क़ुतुब मीनार के बाद दुनिया की दूसरी सबसे ऊँची मीनार है, हालांकि क़ुतुब मीनार वास्तव में इसी मीनार से प्रेरित होकर बनवाया गया था। मीनार-ए-जाम जाम नदी और हरी नदी के संगम के पास है और चारों तरफ़ से २,४०० मीटर ऊँचे पहुँचने वाले पहाड़ों से घिरी हुई है। सन् ११९० के दशक में बनी इस मीनार पर ईंट, गच पलस्तर (स्टक्को) और टाइलें लगी हुई हैं जिनपर क़ुरान की आयतें और आकर्षक लकीरें व आकृतियाँ बनी हुई हैं। .

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मीर प्रकाशन

मीर प्रकाशन का चिह्न मोस्को में मीर प्रकाशन का कार्यालय मीर प्रकाशन (रूसी: Издательство "Мир", इज़दातेल्स्त्वो मीर; अंग्रेज़ी: Mir Publishers) सोवियत संघ के ज़माने में वहाँ का एक मुख्य किताबों का प्रकाशक था। सोवियत संघ के १९९१ में टूट जाने के बाद भी यह रूस में चलता रहा है। इसकी स्थापना सन् १९४६ में सोवियत संघ के मंत्री-परिषद् में लिए गए एक निर्णय से हुई थी और इसका पूरा ख़र्चा सोवियत संघ की सरकार उठाती थी, जिस वजह से इसकी पुस्तकें बहुत ही कम दाम में मिला करती थीं। मीर विशेष रूप से तकनीकी और वैज्ञानिक किताबें और पाठ्यपुस्तकें छापता था जिनमें से अधिकतर उच्च दर्जे के सोवियत वैज्ञानिक, गणितज्ञ, इंजिनियर और अध्यापकों द्वारा लिखी जाती थीं। मूल रूप से रूसी और सोवियत संघ की अन्य भाषाओँ में छपने वाली मीर की किताबें अक्सर अंग्रेज़ी और अन्य ग़ैर-सोवियत भाषाओँ में अनुवादित हुआ करती थीं। भारत, अफ़्ग़ानिस्तान, मिस्र और सोवियत संघ से मित्रता रखने वाले अन्य देशों में यह अपने उच्च स्तर और कम दाम के कारण बहुत लोकप्रीय थीं और कई कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में औपचारिक रूप से शामिल की जाती थीं। अध्ययन की किताबों के अलावा मीर विज्ञान कथा (साइंस फ़िक्शन) संकलन और उपन्यास भी छापता था और वह भी बहुत लोकप्रीय थे।, Ministerstvo vneshneĭ torgovli (U.S.S.R. Ministry of Foreign Trade), 1984,...

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यामीन अहमदजई

मोहम्मद यामीन अहमदजई (जन्म २५ जुलाई १९९२) एक अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम के खिलाड़ी है । अहमदजई एक दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं जो मुख्य रूप से दाएं हाथ से मध्यम-तेज गति से गेंदबाजी करते हैं। उनका जन्म लग़मान प्रान्त में हुआ था। यामीन अहमदजई ने २५ दिसंबर २०१५ को न्यूज़ीलैंड क्रिकेट टीम के खिलाफ अपना पहला एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैच खेला था। जबकि पहला टी२० अंतररष्ट्रीय मैच २९ नवम्बर २०१५ को ओमान क्रिकेट टीम के खिलाफ खेला था। इसके बाद इन्हें २०१८ में अफगानिस्तान के पहले टेस्ट मैच के लिए भारत के खिलाफ १६ सदस्यीय टीम में मौका दिया गया है। .

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यारकन्द ज़िला

चीन के शिंजियांग प्रांत के काश्गर विभाग (पीला रंग) के अन्दर स्थित यारकन्द ज़िला (गुलाबी रंग) यारकन्द शहर में एक सड़क यारकन्द ज़िला (उइग़ुर:, चीनी: 莎车县, अंग्रेज़ी: Yarkand) चीन के शिंजियांग प्रांत के काश्गर विभाग में स्थित एक ज़िला है। इसका क्षेत्रफल ८,९६९ वर्ग किमी है और सन् २००३ की जनगणना में इसकी आबादी ३,७३,४९२ अनुमानित की गई थी। इसकी राजधानी यारकंद नाम का ही एक ऐतिहासिक शहर है जिसका भारतीय उपमहाद्वीप के साथ गहरा सांस्कृतिक और व्यापारिक सम्बन्ध रहा है। यारकन्द तारिम द्रोणी और टकलामकान रेगिस्तान के दक्षिणी छोर पर स्थित एक नख़लिस्तान (ओएसिस) क्षेत्र है जो अपना जल कुनलुन पर्वतों से उत्तर की ओर उतरने वाली यारकन्द नदी से प्राप्त करता है। इसके मरूद्यान (ओएसिस) का क्षेत्रफल लगभग ३,२१० वर्ग किमी है लेकिन कभी इस से ज़्यादा हुआ करता था। तीसरी सदी ईस्वी में यहाँ रेगिस्तान के फैलने से यह उपजाऊ इलाक़ा थोड़ा घट गया। यारकन्द में अधिकतर उइग़ुर लोग बसते हैं। यहाँ कपास, गेंहू, मक्की, अनार, ख़ुबानी, अख़रोट और नाशपाती उगाए जाते हैं। इस ज़िले के ऊँचे इलाक़ों में याक और भेड़ पाले जाते हैं। यहाँ की धरती के नीचे बहुत से मूल्यवान खनिज मौजूद हैं, जैसे की पेट्रोल, प्राकृतिक गैस, सोना, ताम्बा, सीसा और कोयला। .

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यासीन वादी

यासीन (Yasin) या वोरशीगूम (Worshigum) पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बलतिस्तान क्षेत्र के ग़िज़र ज़िले की एक घाटी है। प्रशासनिक दृष्टि से यह ग़िज़र ज़िले की एक तहसील भी है। यासीन वादी हिन्दु कुश पर्वतों में स्थित है और यहाँ से पूर्व में इश्कोमन वादी पहुँचने के लिए असम्बर दर्रे नामक एक पर्वतीय दर्रे से गुज़रना पड़ता है।, Robert W. Bradnock, Trade & Travel Publications, 1994,...

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यूटीसी+०४:३०

यूटीसी+४:३० (UTC+04:30) यूटीसी से +04:30 घंटे आगे का समय मंडल है। इसका निम्न तरीकों से उपयोग होता है। .

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यूनाइटेड किंगडम

वृहत् ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैण्ड का यूनाइटेड किंगडम (सामान्यतः यूनाइटेड किंगडम, यूके, बर्तानिया, UK, या ब्रिटेन के रूप में जाना जाने वाला) एक विकसित देश है जो महाद्वीपीय यूरोप के पश्चिमोत्तर तट पर स्थित है। यह एक द्वीपीय देश है, यह ब्रिटिश द्वीप समूह में फैला है जिसमें ग्रेट ब्रिटेन, आयरलैंड का पूर्वोत्तर भाग और कई छोटे द्वीप शामिल हैं।उत्तरी आयरलैंड, UK का एकमात्र ऐसा हिस्सा है जहां एक स्थल सीमा अन्य राष्ट्र से लगती है और यहां आयरलैण्ड यूके का पड़ोसी देश है। इस देश की सीमा के अलावा, UK अटलांटिक महासागर, उत्तरी सागर, इंग्लिश चैनल और आयरिश सागर से घिरा हुआ है। सबसे बड़ा द्वीप, ग्रेट ब्रिटेन, चैनल सुरंग द्वारा फ़्रांस से जुड़ा हुआ है। यूनाइटेड किंगडम एक संवैधानिक राजशाही और एकात्मक राज्य है जिसमें चार देश शामिल हैं: इंग्लैंड, उत्तरी आयरलैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स. यह एक संसदीय प्रणाली द्वारा संचालित है जिसकी राजधानी लंदन में सरकार बैठती है, लेकिन इसमें तीन न्यागत राष्ट्रीय प्रशासन हैं, बेलफ़ास्ट, कार्डिफ़ और एडिनबर्ग, क्रमशः उत्तरी आयरलैंड, वेल्स और स्कॉटलैंड की राजधानी.जर्सी और ग्वेर्नसे द्वीप समूह, जिन्हें सामूहिक रूप से चैनल द्वीप कहा जाता है और मैन द्वीप (आईल ऑफ मान), यू के की राजत्व निर्भरता हैं और UK का हिस्सा नहीं हैं। इसके इलावा, UK के चौदह समुद्रपार निर्भर क्षेत्र हैं, ब्रिटिश साम्राज्य, जो १९२२ में अपने चरम पर था, दुनिया के तकरीबन एक चौथाई क्षेत्रफ़ल को घेरता था और इतिहास का सबसे बड़ा साम्रज्य था। इसके पूर्व उपनिवेशों की भाषा, संस्कृति और कानूनी प्रणाली में ब्रिटिश प्रभाव अभी भी देखा जा सकता है। प्रतीकत्मक सकल घरेलू उत्पाद द्वारा दुनिया की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था और क्रय शक्ति समानता के हिसाब से सातवाँ बड़ा देश होने के साथ ही, यूके एक विकसित देश है। यह दुनिया का पहला औद्योगिक देश था और 19वीं और 20वीं शताब्दियों के दौरान विश्व की अग्रणी शक्ति था, लेकिन दो विश्व युद्धों की आर्थिक लागत और 20 वीं सदी के उत्तरार्ध में साम्राज्य के पतन ने वैश्विक मामलों में उसकी अग्रणी भूमिका को कम कर दिया फिर भी यूके अपने सुदृढ़ आर्थिक, सांस्कृतिक, सैन्य, वैज्ञानिक और राजनीतिक प्रभाव के कारण एक प्रमुख शक्ति बना हुआ है। यह एक परमाणु शक्ति है और दुनिया में चौथी सर्वाधिक रक्षा खर्चा करने वाला देश है। यह यूरोपीय संघ का सदस्य है, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक स्थायी सीट धारण करता है और राष्ट्र के राष्ट्रमंडल, जी8, OECD, नाटो और विश्व व्यापार संगठन का सदस्य है। .

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यूनाइटेड किंगडम के सशस्त्र बाल

HMS "उत्कृष्ट"- शाही नौसेना का एक "अपराजय" वर्ग का विमान वाहकएक रॉयल नौसेना का "सेनाग्र" वर्ग की पनडुब्बियों में से ट्रिडेंट II MIRV SLBM का परीक्षण प्रक्षेपणशाही वायु सेना के यूरो फाईटर टाईफून - एक उन्नत लड़ाकू विमान ब्रिटिश सशस्त्र बल, यूनाइटेड किंगडम के सैन्य बल हैं, जिनका कार्य ब्रिटेन, उसी मुकुटिया निर्भर्ताओं और समुद्रपार प्रदेशों की रक्षा और अन्य क्षेत्रों में ब्रिटेन के हितों की रक्षा व पूर्ती करना, तथा शांति-बहाली और मानवी कार्यों में यूके का प्रतिनिधित्व करना है। इनकी स्थापना सन् १७०७ में ऍक्ट्स ऑफ़ यूनियन के पारित होने के बाद होआ था, जब इंग्लैंड राज्य और स्कॉटलैंड राज्य का विलय कर, संयुक्त ग्रेट ब्रिटेन राजशाही स्थापित की गयी थी, साथ ही दोनों राज्यों के सैन्य बलों को भी एकीकृत किया गया था। स्थापना-पश्चात्, अपने ३०० वर्षों के इतिहास में ब्रिटिश बलों ने अनेक सैन्य कार्रवाईयों में भाग लिया है, जिनमें सप्तवर्षीय युद्ध, नेपोलियाई युद्ध, क्रीमियन युद्ध, तथा प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध भी शामिल हैं। बीती सदियों में इन बलों की लगातार विजेलीलाओं ने वैश्विक मंच पर ब्रिटेन को विश्व के महत्वपूर्णतम् सैन्य महाशक्तियों में से एक के रूप में स्थापित कर दिया है। इन बालों के बदौलत १८वीं शताब्दी से २०वीं शताब्दी के बीच, संयुक्त राजशाही ने इतिहास के सबसे बड़े औपनिवेशिक साम्राज्य पर राज किया और १९वीं शताब्दी के एकमात्र वैश्विक परमशक्ति बन कर उबरी। आज यह विश्व के कई क्षेत्रों में शांति-बहाली और मानवीय कार्यों में शरीक है, तथा विश्व-विस्तृत सैन्य ठिकानें प्रबंधित करती है। .

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यूसुफ़ज़ई

यूसुफ़ज़ई पश्तून लोग का एक क़बीला है। यह लोग आम तौर पर पाकिस्तान के सूबे ख़ैबर पख़्तूनख़्वा और अफ़्ग़ानिस्तान के पूर्वी इलाक़ों में आबाद हैं, लेकिन इसके अतिरिक्त यह लोग भारत के ऐतिहासिक क्षेत्र रोहिलखंड और दक्कन में भी आबाद हैं। श्रेणी:पश्तून लोग.

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रबातक शिलालेख

रबातक शिलालेख के अनुसार भारतीय उपमहाद्वीप में कनिष्क का साम्राज्य रबातक शिलालेख अफ़ग़ानिस्तान के बग़लान प्रान्त में सुर्ख़ कोतल के पास स्थित रबातक (Rabatak) नामक पुरातन स्थल पर एक शिला पर बाख़्तरी भाषा और यूनानी लिपि में कुषाण वंश के प्रसिद्ध सम्राट कनिष्क के वंश के बारे में एक २३ पंक्तियों का लेख है। यह इतिहासकारों को सन् १९९३ में मिला था और इस से कनिष्क के पूर्वजों के बारे में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारी मिलती है। इसमें कनिष्क ने कहा है कि वह एक नाना नमक देवी का वंशज है और उसने अपने साम्राज्य में यूनानी भाषा को हटाकर आर्य भाषा चला दी है। उसने इसमें अपने पड़-दादा कुजुल कडफिसेस, दादा सद्दाशकन, पिता विम कडफिसेस और स्वयं अपना ज़िक्र किया है।, Upinder Singh, Pearson Education India, 2008, ISBN 978-81-317-1120-0,...

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रहमत शाह

कोई विवरण नहीं।

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राशिद खान (अफ़ग़ान क्रिकेटर)

राशिद खान अरमान (راشد خان ارمان) (जन्म 20 सितंबर 1998), आमतौर पर रशीद खान के नाम से जाने जाते हैं, वह एक अफगान क्रिकेट खिलाड़ी है जो राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करते है। रशीद सनराइजर्स हैदराबाद के लिए २०१७ इंडियन प्रीमियर लीग में खेले थे जो वर्तमान में भी सनराइजर्स हैदराबाद टीम में शामिल है। जून 2017 में, उन्होंने एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय (एकदिवसीय) मैच में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी की। फरवरी 2018 में, वह आईसीसी प्लेयर वनडे रैंकिंग में गेंदबाजों में सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए। बाद में उसी महीने, उन्होंने टी ट्वेंटी में गेंदबाजों की आईसीसी प्लेयर रैंकिंग में भी शीर्ष स्थान हासिल किया। .

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राष्ट्रपिता

राष्ट्रपिता दो शब्दों "राष्ट्र" अर्थात - देश या वतन और "पिता" अर्थात जनक शब्दों को समन्वय है, जिसका अंग्रेजी अनुवाद 'father of the nation' है। विश्व के कुछ देशों के राष्ट्रपिता हैं.

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राष्ट्रीय हित

राष्ट्रीय हित (national interest, फ्रेंच: raison d'État) से आशय किसी देश के आर्थिक, सैनिक, साम्स्कृतिक लक्ष्यों एवं महत्वाकाक्षाओं से है। राष्ट्रीय हित अंतरराष्ट्रीय राजनीति में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है, क्योंकि राज्यों के आपसी संबंधों को बनाने में इनकी विशेष भूमिका होती है। किसी भी राष्ट्र की विदेश नीति मूलतः राष्ट्रीय हितों पर ही आधारित होती है, अतः उसकी सफलताओं एवं असफलताओं का मूल्यांकन भी राष्ट्रीय हितों में परिवर्तन आता है जिसके परिणामस्वरूप विदेश नीति भी बदलाव के दौर से गुजरती है। .

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राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति

राष्ट्रीय ओलम्पिक समितियाँ (या NOCs) दुनिया भर में ओलम्पिक आंदोलन के राष्ट्रीय घटक हैं। अन्तर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति के नियंत्रण में रहते हुए, वे ओलम्पिक खेलों में अपने लोगों की भागीदारी के आयोजन के लिए उत्तरदायी हैं। वे भविष्य के ओलम्पिक खेलों के लिए प्रत्याशी के रूप में अपने स्वायत्त क्षेत्रों के नगरों को मनोनीत कर सकते है। राओस भी अपने भौगोलिक सीमाओं के भीतर राष्ट्रीय स्तर पर अपने खिलाड़ियों के विकास और कोचों और अधिकारियों को प्रशिक्षण दे सकते हैं। वर्ष २००८ तक कुल २०५ रा.ओ.स. है जो प्रभुसत्ता संपन्न और अन्य भौगोलिक क्षेत्रों दोनों का प्रतिनिधित्व कर रहीं हैं। सयुंक्त राष्ट्र के सभी १९२ सदस्यों और १३ अन्य क्षेत्रों की ओलम्पिक समितियां हैं.

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राजा महेन्द्र प्रताप सिंह

महान क्रांतिकारी राजा महेन्द्र प्रताप सिंह राजा महेन्द्र प्रताप सिंह (1 दिसम्बर 1886 – 29 अप्रैल 1979) भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, पत्रकार, लेखक, क्रांतिकारी और समाज सुधारक थे। वे 'आर्यन पेशवा' के नाम से प्रसिद्ध थे। .

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राव तुला राम

राव तुलाराम सिंह (09 दिसम्बर 1825 -23 सितम्बर 1863) 1857 का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्हे हरियाणा राज्य में " राज नायक" माना जाता है। विद्रोह काल मे, हरियाणा के दक्षिण-पश्चिम इलाके से सम्पूर्ण बिटिश हुकूमत को अस्थायी रूप से उखाड़ फेंकने तथा दिल्ली के ऐतिहासिक शहर में विद्रोही सैनिको की, सैन्य बल, धन व युद्ध सामाग्री से सहता प्रदान करने का श्रेय राव तुलाराम को जाता है। अंग्रेजों से भारत को मुक्त कराने के उद्देश्य से एक युद्ध लड़ने के लिए मदद लेने के लिए उन्होंने भारत छोड़ा तथा ईरान और अफगानिस्तान के शासकों से मुलाकात की, रूस के ज़ार के साथ सम्पर्क स्थापित करने की उनकी योजनाएँ थीं। इसी मध्य 37 वर्ष की आयु में 23 सितंबर 1863 को काबुल में पेचिश से उनकी मृत्यु हो गई। .

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राखीगढ़ी

हारियाणा हरियानणा राखीगढ़ी हरियाणा के हिसार ज़िले में सरस्वती तथा दृषद्वती नदियों के शुष्क क्षेत्र में स्थित एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थान है। राखीगढ़ी सिन्धु घाटी सभ्यता का भारतीय क्षेत्रों में धोलावीरा के बाद दूसरा विशालतम ऐतिहासिक नगर है। राखीगढ़ी का उत्खनन व्यापक पैमाने पर 1997-1999 ई. के दौरान अमरेन्द्र नाथ द्वारा किया गया। राखीगढ़ी से प्राक्-हड़प्पा एवं परिपक्व हड़प्पा युग इन दोनों कालों के प्रमाण मिले हैं। राखीगढ़ी से महत्त्वपूर्ण स्मारक एवं पुरावशेष प्राप्त हुए हैं, जिनमें दुर्ग-प्राचीर, अन्नागार, स्तम्भयुक्त वीथिका या मण्डप, जिसके पार्श्व में कोठरियाँ भी बनी हुई हैं, ऊँचे चबूतरे पर बनाई गई अग्नि वेदिकाएँ आदि मुख्य हैं। .

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रिचर्ड होलब्रूक

रिचर्ड चार्ल्स अल्बर्ट होलब्रूक (जन्म २४ अप्रैल १९४१), अफ़्गानिस्तान एवं पाकिस्तान को बराक ओबामा सरकार की ओर से विशेष राजनयिक हैं।।। बोर्न १९४१ अन्द दिएद १३थ देचेम्बेर २०१०।.

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रियाद प्रान्त

रियाद प्रान्त, जिसे औपचारिक अरबी में मिन्तक़ाह​ आर-रियाद कहते हैं, सउदी अरब के मध्य नज्द क्षेत्र में स्थित प्रान्त है। यह जनसँख्या के आधार पर (मक्का प्रान्त के बाद) दूसरा सबसे बड़ा प्रान्त है और क्षेत्रफल के हिसाब से भी (पूर्वी प्रान्त के बाद) दूसरा सबसे बड़ा प्रान्त है। सउदी अरब की राष्ट्रीय राजधानी रियाद शहर भी इसी प्रान्त में स्थित है और ७५% प्रांतीय आबादी इसी शहर में रहती है। २००४ की जनगणना के अनुसार प्रान्त की ३१% आबादी (यानि १७,२८,८४० लोग) ग़ैर-सउदी विदेशी थे और इनमें से अधिकतर रियाद शहर में ही बसे हुए थे। .

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रैम्बो (फ़िल्म)

रेम्बो (रेम्बो चतुर्थ या जॉन रेम्बो के रूप में भी जानी जाती है) रैम्बो (रैम्बो IV, जाॅन रैम्बो या रैम्बो: द फाइट कंटिन्युस) वर्ष 2008 की अमेरिकी-जर्मन भाषी एक स्वतंत्र एक्शन फ़िल्म हैं, जिसे बतौर निर्देशन, सह-लेखन के साथ सिल्वेस्टर स्टलोन ने मशहूर शीत युद्ध/वियतनाम युद्ध के पूर्व सिपाही जाॅन रैम्बो की शीर्षक भूमिका की है। यह रैम्बो फ्रैंचाइज़ी की चौथी और अंतिम संस्करण है, जो रैम्बो III के बीस साल बाद रिलीज हुई है। यह फ़िल्म रिचर्ड क्रेना को बतौर श्रद्धांजलि है, जिन्होंने पिछली तीन सिरिज में कर्नल सैम ट्राउटमैन का किरदार निभाया था, साल 2003 को उनकी हृदय नाकाम होने की वजह से देहांत हो गया। फ़िल्म एक पूर्व अमेरिकी विशेष सैन्य दस्ते के फौजी, जाॅन रैम्बो के इर्द-गिर्द है, जो एक चर्च पादरी के कहने पर मिशनरियों के समूह को बचाने निकल पड़ता है जिनको बर्मा के क्रुर शासित मिलिट्री के आदमियों ने अगवा कर लिया है। पूरी रेम्बो श्रृंखला में 236 हत्याओं के साथ, सर्वाधिक हत्याओं का रिकार्ड रेम्बो के नाम है। फ़िल्म ने अंतर्राष्ट्रीय बाॅक्स-ऑफिस में $113,244,290 मिलियन से अधिक की कमाई की। इसके बाद इसने होम विडियो रिलीज की, जिसमें उन्होंने $41,500,683 मिलियन की डीवीडी बिक्री की। फ़िल्म को केबल टेलीविजन के माध्यम से स्पाईक टीवी पर जुलाई 11, 2010 को प्रिमियर किया गया। जिसमें थियटरों में काटे गए अतिरिक्त दृश्यों को ब्रोडकास्ट किया। दो हफ्तों बाद उन्हीं अतिरिक्त दृश्यों को ब्लू-रे कैसेटों के साथ रिलीज किया गया। .

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रूस का इतिहास

आधुनिक रूस का इतिहास पूर्वी स्लाव जाति से शुरू होता है। स्लाव जाति जो आज पूर्वी यूरोप में बसती है का सबसे पुराना गढ़ कीव था जहाँ ९वीं सदी में स्थापित कीवी रुस साम्राज्य आधुनिक रूस की आधारशिला के रूप में माना जाता है। हाँलांकि उस क्षेत्र में इससे पहले भी साम्राज्य रहे थे पर वे दूसरी जातियों के थे और उन जातियों के लोग आज भी रूस में रहते हैं - ख़ज़र और अन्य तुर्क लोग। कीवि रुसों को मंगोलों के महाभियान में १२३० के आसपास परास्त किया गया लेकिन १३८० के दशक में मंगोलों का पतन आरंभ हुआ और मॉस्को (रूसी भाषा में मॉस्कवा) का उदय एक सैन्य राजधानी के रूप में हुआ। १७वीं से १९वीं सदी के मध्य में रूसी साम्रज्य का अत्यधिक विस्तार हुआ। यह प्रशांत महासागर से लेकर बाल्टिक सागर और मध्य एशिया तक फैल गया। प्रथम विश्वयुद्ध में रूस को ख़ासी आंतरिक कठिनाइयों का समना करना पड़ा और १९१७ की बोल्शेविक क्रांति के बाद रूस युद्ध से अलग हो गया। द्वितीय विश्वयुद्ध में अपराजेय लगने वाली जर्मन सेना के ख़िलाफ अप्रत्याशित अवरोध तथा अन्ततः विजय प्रदर्शित करन के बाद रूस तथा वहाँ के साम्यवादी नायक जोसेफ स्टालिन की धाक दुनिया की राजनीति में बढ़ी। उद्योगों की उत्पादक क्षमता और देश की आर्थिक स्थिति में उतार चढ़ाव आते रहे। १९३० के दशके में ही साम्यवादी गणराज्यों के समूह सोवियत रूस का जन्म हुआ था। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद शीत युद्ध के काल के गुजरे इस संघ का विघटन १९९१ में हो गया। .

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रूज़ा शरीफ

रोज़ा शरीफ या शेख अहमद फारुकी सरहिंद (दरियाह के मुजदाद, अल्फ-सानी) के रूप में जाना जाता हैगुरुद्वारा फतेहगढ़ साहिब के उत्तर में एक छोटे से दूरी पर सरहिंद -बस्सी पठाना रोड पर स्थित है। शेख अहमद फारूकी 1563 से 1624 तक अकबर और जहांगीर के समय इस स्थान पर रहते थे। .

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रोबोट

एक कारखाने में चीजों को उठाने और सही स्थान पर रखने वाला रोबोट रोबोट एक आभासी (virtual) या यांत्रिक (mechanical)कृत्रिम (artificial) एजेंट है व्यवहारिक रूप से, यह प्रायः एक विद्युत यांत्रिकी निकाय (electro-mechanical system) होता है, जिसकी दिखावट और गति ऐसी होती है की लगता है जैसे उसका अपना एक इरादा (intent) और अपना एक अभिकरण (agency) है।रोबोट शब्द भौतिक रोबोट और आभासी (virtual) सॉफ्टवेयर एजेंट (software agent), दोनों को ही प्रतिबिंबित करता है लेकिन प्रायः आभासी सॉफ्टवेयर एजेंट को बोट्स (bots) कहा जाता है। ऐसी कोई भी सर्वसम्मति नहीं बन पाई है की मशीन रोबोटों के रूप में योग्य हैं, लेकिन एक विशेषज्ञों और जनता के बीच आम सहमति है कि कुछ या सभी निम्न कार्य कर सकता है जैसे: घूमना, यंत्र या कल सम्बन्धी अवयव को संचालित करना, वातावरण की समझ और उसमें फेर बदल करना और बुद्धिमानी भरे व्यवहार को प्रधार्षित करना जो की मानव और पशुओं के व्यवहारों की नक़ल करना। कृत्रिम सहायकों और साथी की कहानिया और और उन्हें बनाने के प्रयास का एक लम्बा इतिहास है लेकिन पूरी तरह से स्वायत्त (autonomous) मशीने केवल 20 वीं सदी में आए डिजिटल (digital) प्रणाली से चलने वाला प्रोग्राम किया हुआ पहला रोबोट युनिमेट (Unimate), १९६१ में ठप्पा बनाने वाली मशीन से धातु के गर्म टुकड़ों को उठाकर उनके ढेर बनाने के लिए लगाया गया था। आज, वाणिज्यिक और औद्योगिक रोबोट (industrial robot) व्यापक रूप से सस्ते में और अधिकसे अधिक सटीकता और मनुष्यों की तुलना में ज्यादा विश्वसनीयता के साथ प्रयोग में आ रहे हैं उन्हें ऐसे कार्यों के लिए भी नियुक्त किया जाता है जो की मानव लिहाज़ से काफी खतरनाक, गन्दा और उबाऊ कार्य होता है रोबोट्स का प्रयोग व्यापक रूप से विनिर्माण (manufacturing), सभा और गठरी लादने, परिवहन, पृथ्वी और अन्तरिक्षीय खोज, सर्जरी, हथियारों के निर्माण, प्रयोगशाला अनुसंधान और उपभोक्ता और औद्योगिक उत्पादन के लिए किया जा रहा है आमतौर पर लोगों का जिन रोबोटों से सामना हुआ है उनके बारे में लोगों के विचार सकारात्मक हैं घरेलू रोबोट (Domestic robot) सफाई और रखरखाव के काम के लिए घरों के आस पास आम होते जा रहे हैंबहरहाल रोबोटिक हथियारों और स्वचालन के आर्थिक प्रभाव को लेकर चिंता बनी हुई है, ऐसी चिंता जिसका समाधान लोकप्रिय मनोरंजन में वर्णित खलनायकी, बुद्धिमान, कलाबाज़ रोबोट के सहारे नहीं होता अपने काल्पनिक समकक्षों की तुलना में असली रोबोट्स अभी भी सौम्य, मंद बुद्धि और स्थूल हैं .

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रोमा (लोग)

रोमा लोगों का ध्वज रोमा एक मानव-समुदाय है जो यूरोप के विभिन्न भागों में पाये जाते हैं किन्तु इनका मूल दक्षिण एशिया (भारत) है। इन्हें रोमानी भी कहते हैं। रोमानी लोग विश्व के भिन्न-भिन्न भागों में बिखरे हुए हैं किन्तु अधिकांश यूरोप में हैं (और यूरोप में भी मध्य व पूर्वी यूरोप में अधिक हैं)। रोमा लोगों की भाषा रोमानी (भाषा) कहलाती है जिसकी अनेक बोलियाँ हैं। इसके बोलने वालों की संख्या कोई २० लाख है जबकि रोमा लोगों की कुल संख्या ४० लाख के उपर है। .

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लश्कर गाह

लश्कर गाह मस्जिद लश्कर गाह (पश्तो:, फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Lashkar Gah), जिसे इतिहास में बोस्त (Bost) के नाम से भी जाना जाता था, दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद प्रान्त की राजधानी है। हेलमंद नदी और अर्ग़नदाब नदी के बीच बसा यह शहर राजमार्ग द्वारा पूर्व में कंदहार से, पश्चिम में ज़रंज से और पश्चिमोत्तर में हेरात से जुड़ा हुआ है। .

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लश्कर गाह मस्जिद

लश्करगह मस्जिद; Lashkargah Mosque: (पश्तो: د لښکرګاه جومات) दक्षिण-पश्चिमी अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत के, लशकार्गा शहर में मस्जिद स्थित है। .

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लश्कर-ए-तैयबा

लश्कर-ए-तैयबा लश्कर-ए-तैयबा (उर्दू: لشكرِ طيبه लश्कर-ए-तोएबा, अर्थात शुद्धों की सेना) दक्षिण एशिया के सबसे बडे़ इस्लामी आतंकवादी संगठनों में से एक है। हाफिज़ मुहम्मद सईद ने इसकी स्थापना अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में की थी। वर्तमान में यह पाकिस्तान के लाहौर से अपनी गतिविधियाँ चलाता है, एवं पाक अधिकृत कश्मीर में अनेकों आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर चलाता है। इस संगठन ने भारत के विरुद्ध कई बड़े हमले किये हैं और अपने आरंभिक दिनों में इसका उद्येश्य अफ़ग़ानिस्तान से सोवियत शासन हटाना था। अब इसका प्रधान ध्येय कश्मीर से भारत का शासन हटाना है। इसकी स्थापना में अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआइए का योगदान था। .

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लश्करगढ़ मस्जिद

लश्करगढ़ मस्जिद; Lashkargah Mosque: (د لښکرګاه جومات) लश्करगढ़ मस्जिद दक्षिण-पश्चिमी अफगानिस्तान के हेलमंड प्रांत के लशकार्गा शहर में एक मस्जिद है। .

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लाल कुर्ती आन्दोलन

ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान (बायीं ओर) महात्मा गांधी (दायीं ओर) के साथ (1940 का चित्र) लाल कुर्ती आन्दोलन भारत में पश्चिमोत्तर सीमान्त प्रान्त में ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के समर्थन में खुदाई ख़िदमतगार के नाम से चलाया गया एक ऐतिहासिक आन्दोलन था। खुदाई खिदमतगार एक फारसी शब्द है जिसका हिन्दी में अर्थ होता है ईश्वर की बनायी हुई दुनिया के सेवक। .

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लाजवर्द

लाजवर्द का एक नमूना - प्राचीन भारतीय सभ्यता में यह नवरत्नों में से एक था लाजवर्द या राजावर्त (अंग्रेज़ी: Lapis lazuli, लैपिस लैज़्यूली) एक मूल्यवान नीले रंग का पत्थर है जो प्राचीनकाल से अपने सुन्दर नीले रंग के लिए पसंद किया जाता है। कई स्रोतों के अनुसार प्राचीन भारतीय संस्कृति में जिन नवरत्नों को मान्यता दी गई थी उनमें से एक लाजवर्द था। भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लाजवर्द शुक्र ग्रह का प्रतीक है।, William Goonetilleke, pp.

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लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम

कोई विवरण नहीं।

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लग़मान प्रान्त

लग़मान प्रान्त का एक नज़ारा लग़मान (पश्तो:, अंग्रेजी: Laghman) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ३,८४३ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००८ में लगभग ३.८ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी मेहतर लाम शहर है। इस प्रान्त में पश्तून लोगों की बहुसंख्या है और वे कुल जनसँख्या का ५८% हैं। यहाँ नूरिस्तानी लोग और पाशाई लोग भी रहते हैं और कम संख्या में फ़ारसी-भाषी ताजिक लोगों के भी समुदाय हैं। लग़मान में अरामाई भाषा में लिखी अशोक के आदेश वाली दो शिलाएँ भी मौजूद हैं।, Niharranjan Ray, Brajadulal Chattopadhyaya, Orient Blackswan, 2000, ISBN 978-81-250-1871-1,...

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लंबाई के आधार पर नदियों की सूची

एक जलपोत से नील नदी का दृश्य, मिस्र में लक्सर और असवान के बीच. यह पृथ्वी पर सबसे लंबी नदियों की सूची है। इसमें 1,000 किलोमीटर से अधिक वाले नदी तंत्र शामिल हैं। .

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लोया पकतिया

ख़ोस्त प्रान्त और कुछ पड़ोसी इलाक़े लोया पकतिया में शामिल माने जाते हैं लोया पकतिया (पश्तो:; अंग्रेज़ी: Loya Paktia), जिसका मतलब 'महा-पकतिया' होता है, अफ़्ग़ानिस्तान का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक क्षेत्र है जिसमें उस देश के पकतिया, पकतीका और ख़ोस्त के सम्पूर्ण प्रान्त और लोगर और ग़ज़नी प्रान्तों के कुछ भाग शामिल हैं। इसमें कभी-कभी पाकिस्तान की कुर्रम एजेंसी भी शामिल की जाती है। लोया पकतिया के पश्तून क़बीलों की एक सांझी संस्कृति है जो उनकी वेशभूषा, पगड़ी की शैली और रंगों, पश्तो बोलने के लहजों और अन्य चीज़ों से प्रकट होती है। यहाँ मुख्यतर ग़िलज़​ई और करलानी गुटों के क़बीले रहते हैं जिनमें ख़रोटी, ज़ाज़ी, ज़दराण और सुलयमानख़ेल शामिल हैं। यहाँ ख़ानाबदोश कूची क़बीले भी रहते हैं।, Andrew Krepinevich, Random House Digital, Inc., 2010, ISBN 978-0-553-38472-7,...

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लोगर प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का लोगर प्रान्त (लाल रंग में) लोगर (पश्तो:, अंग्रेजी: Logar) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ३,८८० वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००८ में लगभग ३.३ से ५.५ लाख के बीच अनुमानित की गई थी (ठीक संख्या पर मतभेद है)।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी पुल-ए-आलम शहर है। इस प्रान्त के ६०% निवासी पश्तून और ४०% फ़ारसी-भाषी ताजिक लोग है। .

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शतरंज

शतरंज (चैस) दो खिलाड़ियों के बीच खेला जाने वाला एक बौद्धिक एवं मनोरंजक खेल है। किसी अज्ञात बुद्धि-शिरोमणि ने पाँचवीं-छठी सदी में यह खेल संसार के बुद्धिजीवियों को भेंट में दिया। समझा जाता है कि यह खेल मूलतः भारत का आविष्कार है, जिसका प्राचीन नाम था- 'चतुरंग'; जो भारत से अरब होते हुए यूरोप गया और फिर १५/१६वीं सदी में तो पूरे संसार में लोकप्रिय और प्रसिद्ध हो गया। इस खेल की हर चाल को लिख सकने से पूरा खेल कैसे खेला गया इसका विश्लेषण अन्य भी कर सकते हैं। शतरंज एक चौपाट (बोर्ड) के ऊपर दो व्यक्तियों के लिये बना खेल है। चौपाट के ऊपर कुल ६४ खाने या वर्ग होते है, जिसमें ३२ चौरस काले या अन्य रंग ओर ३२ चौरस सफेद या अन्य रंग के होते है। खेलने वाले दोनों खिलाड़ी भी सामान्यतः काला और सफेद कहलाते हैं। प्रत्येक खिलाड़ी के पास एक राजा, वजीर, दो ऊँट, दो घोडे, दो हाथी और आठ सैनिक होते है। बीच में राजा व वजीर रहता है। बाजू में ऊँट, उसके बाजू में घोड़े ओर अंतिम कतार में दो दो हाथी रहते है। उनकी अगली रेखा में आठ पैदल या सैनिक रहते हैं। चौपाट रखते समय यह ध्यान दिया जाता है कि दोनो खिलाड़ियों के दायें तरफ का खाना सफेद होना चाहिये तथा वजीर के स्थान पर काला वजीर काले चौरस में व सफेद वजीर सफेद चौरस में होना चाहिये। खेल की शुरुआत हमेशा सफेद खिलाड़ी से की जाती है। .

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शफी मुहम्मद बरफात

शफ़ी मुहम्मद बुरफ़त (सिन्धी भाषा: شفيع محمد برفت); जन्म: 25 नवम्बर, 1965), जीयै सिंध मुत्ताहिदा महाज़ के संस्थापक अध्यक्ष हैं। यह पाकिस्तान के सिन्ध प्रान्त का एक उदार राजनैतिक दल है जो पाकिस्तान से स्वतंत्र सिन्धुदेश का समर्थक है। शफ़ी बराफात १९८८ से ही छिपकर (अज्ञातवास में) रह रहे हैं। समाचार माध्यमों के अनुसार शफ़ी मुहम्मद, अफगानिस्तान चले गए हैं और वहीं काबुल में अपना नियंत्रण केन्द्र स्थापित कर लिया है। जिनेवा में एक सम्मेलन में शफ़ी मुहम्मद बुरफ़त .

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शबरग़ान

शबरग़ान में चुनावों में मतदान देते कुछ नागरिक शबरग़ान (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Sheberghan) उत्तरी अफ़्ग़ानिस्तान के जोज़जान प्रान्त की राजधानी है। यह शहर सफ़ीद नदी के किनारे मज़ार-ए-शरीफ़ से लगभग १३० किलोमीटर दूर स्थित है। सन् २००६ में इसकी जनसँख्या १,४८,३२९ अनुमानित की गई थी। .

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शरना, अफ़्ग़ानिस्तान

शरना​ (पश्तो:, अंग्रेज़ी: Sharana) दक्षिणपूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के पकतीका प्रान्त की राजधानी है। यह २,२०० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। .

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शापेजा क्रिकेट लीग

शापेजा क्रिकेट लीग (شپږیزه کريکټ لیګ), शास्त्रीय और एससीएल के रूप में भी जाना जाता है, अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) द्वारा प्रत्येक वर्ष अलोकोज़े काबुल अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैदान, काबुल, अफगानिस्तान में आयोजित एक क्रिकेट टूर्नामेंट है। एसीबी ने छह फ्रेंचाइजी के साथ शेंपेजा टूर्नामेंट की स्थापना की, जिसमें राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों, विदेशी, खिलाड़ियों को 'ए' टीम से खिलाया गया और 19 टीमों के खिलाड़ियों के साथ-साथ इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाले संबंधित क्षेत्रों से विशिष्ट कलाकार भी शामिल थे। इसके अलावा, एसीबी ने सभी टीमों को फ्रेंचाइजी द्वारा लीग की पहचान प्रदान की है जबकि खिलाड़ियों को प्रत्येक टीम के लिए ड्राफ्ट के माध्यम से चुना जाएगा। इस 12-दिवसीय टूर्नामेंट का अंतिम लक्ष्य अफगानिस्तान में क्रिकेट और खेल को बढ़ावा देने और खेल के माध्यम से शांति स्थापित करना है। टूर्नामेंट एचडी गुणवत्ता के उत्पादन मानकों का उपयोग करते हुए अफगानिस्तान के प्रमुख टीवी चैनल (1TV) पर लाइव प्रसारित होता है, और टूर्नामेंट फ्रैंचाइज़िंग और प्रत्येक टीम को कंपनी / संगठन को विपणन के रूप में व्यावसायीकरण किया जाता है। इस टूर्नामेंट के डिजाइन और प्रसारण के माध्यम से, अफगानिस्तान अपने घर के मैदान में अपने राष्ट्रीय खिलाड़ियों को देखने के लिए पहले से पहुंच पाएंगे। .

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शाह

भारत के मुग़ल शहनशाह शाह जहान ईरान के अंतिम शहनशाह मुहम्मद रेज़ा पहलवी (१९४१-१९७९) शाह (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: shah) ईरान, मध्य एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप में 'राजा' के लिए प्रयोग होने वाला एक और शब्द है। यह फ़ारसी भाषा से लिया गया है और पुरानी फ़ारसी में इसका रूप 'ख़्शायथ़ीय​' (xšathiya) था। .

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शिया चंद्र

मध्य पूर्व में शिया चंद्र की भौगोलिक अवस्थिति का काल्पनिक मानचित्रशिया चंद्र (Shia Crescent), मध्य-पूर्व में शिया मुस्लिम अवस्थिति को व्याख्यायित करने वाली, एक भू-राजनैतिक अवधारणा है। इस पद का प्रयोग मध्य-पूर्व की राजनीति में शिया दृष्टिकोण से क्षेत्रीय सहयोग की क्षमता को दर्शाने के लिए किया जाता रहा है। जर्मनों में अवधारणा के तौर पर इस पद का प्रयोग आम है। जर्मन भाषा में इसे शिया अर्द्धचंद्र कहते हैं। शिया चंद्र नामक पद गढ़ने का श्रेय जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय को जाता है, जिसके बाद यह शब्द राजनीतिक बहसों में लोकप्रिय हो गया। अज़रबेजान, ईरान, ईराक, बहरीन तथा लेबनान आदि देशों में शिया बहुसंख्यक हैं। सम्मिलित तौर पर इन देशों से एक अर्द्धचंद्राकार आकृति बनती है। तुर्की, यमन, अफ़गानिस्तान, कुवैत, पाकिस्तान, सउदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, भारत तथा सीरिया में भी शिया अल्पसंख्यकों की एक बड़ी मात्रा निवास करती है। .

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शिया इस्लाम

अरबी लिपि में लिखा शब्द-युग्म "मुहम्मद अली" इस शिया विश्वास को दिखाता है कि मुहम्मद और अली में निष्ठा दिखाना एक समान ही है। इसको उलटा घुमा देने पर यह "अली मुहम्मद" बन जाता है। शिया एक मुसलमान सम्प्रदाय है। सुन्नी सम्प्रदाय के बाद यह इस्लाम का दूसरा सबसे बड़ा सम्प्रदाय है जो पूरी मुस्लिम आबादी का केवल १५% है। सन् ६३२ में हजरत मुहम्मद की मृत्यु के पश्चात जिन लोगों ने अपनी भावना से हज़रत अली को अपना इमाम (धर्मगुरु) और ख़लीफा (नेता) चुना वो लोग शियाने अली (अली की टोली वाले) कहलाए जो आज शिया कहलाते हैं। लेकिन बहोत से सुन्नी इन्हें "शिया" या "शियाने अली" नहीं बल्कि "राफज़ी" (अस्वीकृत लोग) नाम से बुलाते हैं ! इस धार्मिक विचारधारा के अनुसार हज़रत अली, जो मुहम्मद साहब के चचेरे भाई और दामाद दोनों थे, ही हजरत मुहम्मद साहब के असली उत्तराधिकारी थे और उन्हें ही पहला ख़लीफ़ा (राजनैतिक प्रमुख) बनना चाहिए था। यद्यपि ऐसा हुआ नहीं और उनको तीन और लोगों के बाद ख़लीफ़ा, यानि प्रधान नेता, बनाया गया। अली और उनके बाद उनके वंशजों को इस्लाम का प्रमुख बनना चाहिए था, ऐसा विशवास रखने वाले शिया हैं। सुन्नी मुसलमान मानते हैं कि हज़रत अली सहित पहले चार खलीफ़ा (अबु बक़र, उमर, उस्मान तथा हज़रत अली) सतपथी (राशिदुन) थे जबकि शिया मुसलमानों का मानना है कि पहले तीन खलीफ़ा इस्लाम के गैर-वाजिब प्रधान थे और वे हज़रत अली से ही इमामों की गिनती आरंभ करते हैं और इस गिनती में ख़लीफ़ा शब्द का प्रयोग नहीं करते। सुन्नी मुस्लिम अली को (चौथा) ख़लीफ़ा भी मानते है और उनके पुत्र हुसैन को मरवाने वाले ख़लीफ़ा याजिद को कई जगहों पर पथभ्रष्ट मुस्लिम कहते हैं। इस सम्प्रदाय के अनुयायियों का बहुमत मुख्य रूप से इरान,इराक़,बहरीन और अज़रबैजान में रहते हैं। इसके अलावा सीरिया, कुवैत, तुर्की, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, ओमान, यमन तथा भारत में भी शिया आबादी एक प्रमुख अल्पसंख्यक के रूप में है। शिया इस्लाम के विश्वास के तीन उपखंड हैं - बारहवारी, इस्माइली और ज़ैदी। एक मशहूर हदीस मन्कुनतो मौला फ़ हा जा अली उन मौला, जो मुहम्मद साहब ने गदीर नामक जगह पर अपने आखरी हज पर खुत्बा दिया था, में स्पष्ट कह दिया था कि मुसलमान समुदाय को समुदाय अली के कहे का अनुसरण करना है। .

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शिंजियांग

चीन का नक़्शा, शिंजियांग गहरे लाल रंग में शिन्जियांग में काराकोरम राजमार्ग के नज़दीक का दृश्य तियांची सरोवर बुरचिन ज़िले में एक नदी शिंजियांग (उइग़ुर:, अंग्रेज़ी: Xinjiang, चीनी: 新疆) जनवादी गणराज्य चीन का एक स्वायत्तशासी क्षेत्र है। ये एक रेगिस्तानी और शुष्क इलाक़ा है इसलिए इस की आबादी बहुत कम है। शिंजियांग की सरहदें दक्षिण में तिब्बत और भारत, दक्षिण-पूर्व में चिंग हई और गांसू, पूर्व में मंगोलिया, उत्तर में रूस और पश्चिम में क़ाज़क़स्तान, किरगिज़स्तान, ताजिकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से मिलती हैं। भारत का अक्साई चिन का इलाका भी, जिसपर चीन का क़ब्ज़ा है, प्रशासनिक रूप से शिंजियांग में शामिल है।, S. Frederick Starr, M.E. Sharpe, 2004, ISBN 978-0-7656-1318-9 शिंजियांग की राजधानी उरुमची नाम का शहर है, जबकि इसका सबसे बड़ा नगर काश्गर है। .

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शक

सरमतिया मध्य एशिया का भौतिक मानचित्र, पश्चिमोत्तर में कॉकस से लेकर पूर्वोत्तर में मंगोलिया तक स्किथियों के सोने के अवशेष, बैक्ट्रिया की तिलिया तेपे पुरातन-स्थल से ३०० ईसापूर्व में मध्य एशिया के पज़ियरिक क्षेत्र से शक (स्किथी) घुड़सवार शक प्राचीन मध्य एशिया में रहने वाली स्किथी लोगों की एक जनजाति या जनजातियों का समूह था। इनकी सही नस्ल की पहचान करना कठिन रहा है क्योंकि प्राचीन भारतीय, ईरानी, यूनानी और चीनी स्रोत इनका अलग-अलग विवरण देते हैं। फिर भी अधिकतर इतिहासकार मानते हैं कि 'सभी शक स्किथी थे, लेकिन सभी स्किथी शक नहीं थे', यानि 'शक' स्किथी समुदाय के अन्दर के कुछ हिस्सों का जाति नाम था। स्किथी विश्व के भाग होने के नाते शक एक प्राचीन ईरानी भाषा-परिवार की बोली बोलते थे और इनका अन्य स्किथी-सरमती लोगों से सम्बन्ध था। शकों का भारत के इतिहास पर गहरा असर रहा है क्योंकि यह युएझ़ी लोगों के दबाव से भारतीय उपमहाद्वीप में घुस आये और उन्होंने यहाँ एक बड़ा साम्राज्य बनाया। आधुनिक भारतीय राष्ट्रीय कैलंडर 'शक संवत' कहलाता है। बहुत से इतिहासकार इनके दक्षिण एशियाई साम्राज्य को 'शकास्तान' कहने लगे हैं, जिसमें पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, सिंध, ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा और अफ़्ग़ानिस्तान शामिल थे।, Vesta Sarkhosh Curtis, Sarah Stewart, I.B.Tauris, 2007, ISBN 978-1-84511-406-0,...

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शकुनि

शकुनि गंधार साम्राज्य का राजा था। यह स्थान आज के अफ़्ग़ानिस्तान में है। वह हस्तिनापुर महाराज और कौरवों के पिता धृतराष्ट्र का साला था और कौरवों का मामा। दुर्योधन की कुटिल नीतियों के पीछे शकुनि का हाथ माना जाता है और वह कुरुक्षेत्र के युद्ध के लिए दोषियों में प्रमुख माना जाता है। उसने कई बार पाण्डवों के साथ छल किया और अपने भांजे दुर्योधन को पाण्डवों के प्रति कुटिल चालें चलने के लिए उकसाया। .

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शक्‍ति-संतुलन

शक्‍ति-संतुलन का सिद्धान्त (balance of power theory) यह मानता है कि कोई राष्ट्र तब अधिक सुरक्षित होता है जब सैनिक क्षमता इस प्रकार बंटी हुई हो कि कोई अकेला राज्य इतना शक्तिशाली न हो कि वह अकेले अन्य राज्यों को दबा दे। .

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शुमश्ती भाषा

शुमश्ती (Shumashti), जिसे शुमश्त भी कहते हैं, कुनर (कुनड़) शाखा की एक दार्दी भाषा है जो अफ़ग़ानिस्तान​ के कुनर प्रान्त में बोली जाती है। यह कुनर नदी के पश्चिमी किनारे पर ग्वार-बती बोलने वाले इलाक़े से लगभग ६० किमी दूर बोली जाती है। १९९४ में अनुमान लगाया गया कि इसे केवल १,००० लोग बोलते हैं। अनुमान लगाया गया है कि शुमश्ती के लगभग ६३% शब्द​ नंगलामी भाषा से और ४७% ग्वार-बती भाषा से मिलते हैं। इस भाषा पर पाशाई भाषा का भारी प्रभाव पड़ा है। .

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शुग़नी भाषा

शुग़नी भाषा एक पामीरी भाषा-परिवार की बोली है जो मध्य एशिया में ताजिकिस्तान के कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त और अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रान्त में बोली जाती है।Karamšoev, Dodchudo K. (1988-99).

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शेर शाह सूरी

शेरशाह सूरी (1472-22 मई 1545) (फारसी/पश्तो: فريد خان شير شاہ سوري, जन्म का नाम फ़रीद खाँ) भारत में जन्मे पठान थे, जिन्होनें हुमायूँ को 1540 में हराकर उत्तर भारत में सूरी साम्राज्य स्थापित किया था। शेरशाह सूरी ने पहले बाबर के लिये एक सैनिक के रूप में काम किया था जिन्होनें उन्हे पदोन्नति कर सेनापति बनाया और फिर बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया। 1537 में, जब हुमायूँ कहीं सुदूर अभियान पर थे तब शेरशाह ने बंगाल पर कब्ज़ा कर सूरी वंश स्थापित किया था। सन् 1539 में, शेरशाह को चौसा की लड़ाई में हुमायूँ का सामना करना पड़ा जिसे शेरशाह ने जीत लिया। 1540 ई. में शेरशाह ने हुमायूँ को पुनः हराकर भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया और शेर खान की उपाधि लेकर सम्पूर्ण उत्तर भारत पर अपना साम्रज्य स्थापित कर दिया। एक शानदार रणनीतिकार, शेर शाह ने खुद को सक्षम सेनापति के साथ ही एक प्रतिभाशाली प्रशासक भी साबित किया। 1540-1545 के अपने पांच साल के शासन के दौरान उन्होंने नयी नगरीय और सैन्य प्रशासन की स्थापना की, पहला रुपया जारी किया है, भारत की डाक व्यवस्था को पुनः संगठित किया और अफ़गानिस्तान में काबुल से लेकर बांग्लादेश के चटगांव तक ग्रांड ट्रंक रोड को बढ़ाया। साम्राज्य के उसके पुनर्गठन ने बाद में मुगल सम्राटों के लिए एक मजबूत नीव रखी विशेषकर हुमायूँ के बेटे अकबर के लिये। .

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शेर सिंह राणा

समशेर सिंह राणा उर्फ़ पंकज सिंह (जन्म:17 मई 1976) डकैत से सांसद बनी फूलन देवी की हत्या की। शेर सिंह राणा का जन्म 17 मई 1976 को उत्तराखंड के रुड़की में हुआ था। .

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शोरतुग़ई

शोरतुग़​ई (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Shortugai) उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रान्त में कोकचा नदी और आमू दरिया के विलय क्षेत्र के पास २००० ईसापूर्व में स्थापित सिन्धु घाटी सभ्यता की एक व्यापारिक बस्ती थी। यह पास में स्थित सर-ए-संग की खानों से लाजवर्द (लैपिस लैज़्यूली) आगे पहुँचाने के लिए स्थापित की गई थी। इतिहासकार समझते हैं कि इसमें वह सभी चिह्न हैं जो सिन्धु घाटी के सम्बंधित बस्तियों में हुआ करते हैं।, Jane McIntosh, pp.

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शीतयुद्ध

नाटो तथा वार्सा संधि के देश द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के काल में संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत रूस के बीच उत्पन्न तनाव की स्थिति को शीत युद्ध के नाम से जाना जाता है। कुछ इतिहासकारों द्वारा इसे 'शस्त्र सज्जित शान्ति' का नाम भी दिया गया है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन और रूस ने कंधे से कन्धा मिलाकर धूरी राष्ट्रों- जर्मनी, इटली और जापान के विरूद्ध संघर्ष किया था। किन्तु युद्ध समाप्त होते ही, एक ओर ब्रिटेन तथा संयुक्त राज्य अमेरिका तथा दूसरी ओर सोवियत संघ में तीव्र मतभेद उत्पन्न होने लगा। बहुत जल्द ही इन मतभेदों ने तनाव की भयंकर स्थिति उत्पन्न कर दी। रूस के नेतृत्व में साम्यवादी और अमेरिका के नेतृत्व में पूँजीवादी देश दो खेमों में बँट गये। इन दोनों पक्षों में आपसी टकराहट आमने सामने कभी नहीं हुई, पर ये दोनों गुट इस प्रकार का वातावरण बनाते रहे कि युद्ध का खतरा सदा सामने दिखाई पड़ता रहता था। बर्लिन संकट, कोरिया युद्ध, सोवियत रूस द्वारा आणविक परीक्षण, सैनिक संगठन, हिन्द चीन की समस्या, यू-2 विमान काण्ड, क्यूबा मिसाइल संकट कुछ ऐसी परिस्थितियाँ थीं जिन्होंने शीतयुद्ध की अग्नि को प्रज्वलित किया। सन् 1991 में सोवियत रूस के विघटन से उसकी शक्ति कम हो गयी और शीतयुद्ध की समाप्ति हो गयी। .

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शीर ख़ुर्मा

शीर ख़ुर्मा या शीर खोरमा (फ़ारसी / उर्दू - شیر خرما) फारसी में "सेवियों के साथ दूध", ईद उल-फ़ित्र और ईद अल-अज़हा के दिन अफ़गानिस्तान में मुस्लिमों द्वारा तैयार एक सेवियों का पकवान (व्यंजन) है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और मध्य एशिया के कुछ हिस्सों में यह एक पारंपरिक मुस्लिम त्यौहार का नाश्ता, और समारोह के लिए मिठाई है। यह पकवान सूखे खजूरों से बना है। ईद की नमाज़ के बाद परिवार में नाश्ते के दौरान सभी अतिथि मेहमानों के लिए यह विशेष पकवान परोसा जाता है। यह दक्षिण एशिया और मध्य एशिया में बहुत लोकप्रिय है। .

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सफ़्फ़ारी राजवंश

सफ़्फ़ारी राजवंश (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Saffarids) सीस्तान क्षेत्र से उत्पन्न एक मध्यकालीन राजवंश था जिसने पूर्वी ईरान, ख़ुरासान, अफ़ग़ानिस्तान व बलोचिस्तान पर ८६१ ईसवी से १००२ ईसवी तक राज किया। इस राजवंश की नीव याक़ूब बिन लैथ़ अस-सफ़्फ़ार ने रखी जो एक स्थानीय अय्यार (लड़ाका) था। उसके पिता लैथ़ ताम्बे का काम करते था जिसे व्यवसाय को फ़ारसी भाषा में 'सफ़्फ़ार' कहते हैं, लेकिन उसने यह पारिवारिक पेशा छोड़कर अय्यारी शुरू कर दी। उसने इस्लाम के नाम पर पहले सीस्तान क्षेत्र और फिर अफ़ग़ानिस्तान पर क़ब्ज़ा कर लिया। .

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सफ़ेद कोह

अफ़्ग़ानिस्तान के नंगरहार प्रान्त के ख़ोगयानी ज़िले से दक्षिण में स्थित सफ़ेद कोह पर्वतों का नज़ारा सफ़ेद कोह (Safed Koh), जिन्हें पश्तो में स्पीन ग़र कहते हैं और जिन्हें १९वीं सदी तक हिन्दुस्तानी पर्वत (Indian Caucasus) भी कहा जाता था, पूर्वी अफ़्ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के पश्चिमोत्तरी संघ-शासित जनजातीय क्षेत्र के ख़ैबर और कुर्रम विभागों में स्थित एक पर्वत शृंखला है। हिन्दु कुश पर्वतों की इस उपशाखा का सबसे बुलंद शिखर ४,७६१ मीटर (१५,६२० फ़ुट) ऊँचा सिकराम पर्वत (Sikaram) है।, Asiatic Society of Bengal, The Society, 1879,...

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सफ़ी एयरवेज़

सफ़ी एयरवेज़ कं. (خطوط هوایی صافی) अफ़्गानिस्तान की एक वायुसेवा है। इस कंपनी की स्थापना २००६ में गुलाम हजरत सफ़ी (अध्यक्ष), एक अफ़्गान व्यापारी द्वारा की गई थी। इस निजी वायुसेवा का मुख्यालय सफ़ी एयरलाइन सेंटर, शहर-ए-नाव, काबुल एवं प्रशासनिक कार्यालय डियरा, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात में स्थित है। .

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सफ़ीद नदी

सफ़ीद नदी (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Safid) उत्तरी अफ़्ग़ानिस्तान की एक नदी है जो सर-ए-पोल प्रान्त से शुरू होती है। यह फिर उत्तर को बहकर जोज़जान प्रान्त में दाख़िल होती है। उस प्रांत की राजधानी शबरग़ान से गुज़रकर यह काराकुम रेगिस्तान के छोर पर पहुँच कर सूख जाती है। भूवैज्ञानिकों और इतिहासकारों को कुछ सुराग़ मिलें हैं कि अति-प्राचीन काल में यह आगे चलकर आमू दरिया में विलय हो जाती थी। सफ़ीद नदी का पानी बहुत सी सिंचाई नहरों द्वारा शबरग़ान की आसपास की ज़मीनों में कृषि के लिए प्रयोग होता है। .

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सबवे (रेस्तरां)

सबवे एक अमेरिकी रेस्तरां फ़्रैन्चाइज़ है जो मुख्यतः सबमरीन सैंडविच (सब्स), सलाद और व्यक्तिगत पिज़्ज़ा बेचता है। यह डॉक्टर्स एसोसिएट्स, इंक. के स्वामित्व में और उसके द्वारा संचालित है। (DAI).

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समंगान प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का समंगान प्रान्त (लाल रंग में) विलायत-ए-समंगान) का सविस्तार नक़्शा समंगान (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Samangan) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के उत्तर-पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ११,२६२ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग ३.५ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी समंगान शहर है। यहाँ के तीन-चौथाई लोग फ़ारसी बोलने वाले ताजिक लोग हैं और लगभग एक-चौथाई लोग उज़बेक हैं। यहाँ बहुत से पुरातन स्थल हैं, जैसे कि तख़्त-ए-रुस्तम, लेकिन तालिबान और अन्य फ़ौजों के बीच में लड़ाई के कारण इतिहासकारों के लिए यहाँ अनुसंधान करना फ़िलहाल असंभव है। .

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समकालीन

समकालीन इतिहास के उस अवधि के बारे में बताता है जो आज के लिए एकदम प्रासंगिक है तथा आधुनिक इतिहास के कुछ निश्चित परिप्रेक्ष्य से संबंधित है। हाल के समकालीन इतिहास की कमजोर परिभाषा विश्व युद्ध-II जैसी घटनाओं को शामिल करती है, लेकिन उन घटनाओं को शामिल नहीं करती जिनके प्रभाव को समाप्त किया जा चुका है। .

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सम्पर्क भाषा

उस भाषा को सम्पर्क भाषा (lingua franca) कहते हैं जो किसी क्षेत्र में सामान्य रूप से किसी भी दो ऐसे व्यक्तियों के बीच प्रयोग हो जिनकी मातृभाषाएँ अलग हैं। इसे कई भाषाओं में 'लिंगुआ फ़्रैंका' (lingua franca) कहते हैं। इसे सेतु-भाषा, व्यापार भाज़ा, सामान्य भाषा या वाहन-भाषा भी कहते हैं। मानव इतिहास में सम्पर्क भाषाएँ उभरती रही हैं। .

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सर-ए-पोल प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का सर-ए-पोल प्रान्त (लाल रंग में) सर-ए-पोल या सर-ए-पुल (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Sar-e Pol) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के मध्य-उत्तर में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल १६,३६० वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग ५ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी सर-ए-पोल शहर है। यहाँ के ५६% लोग फ़ारसी बोलने वाले ताजिक हैं और लगभग १९% लोग उज़बेक हैं। सर-ए-पोल एक पहाड़ी इलाक़ा है, विशेषकर प्रान्त के दक्षिणी भाग में। .

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सर-ए-पोल शहर

सर-ए-पोल (दरी फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Sar-e-Pol) उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के सर-ए-पोल प्रान्त की राजधानी है। यह शहर २,९१३ फ़ुट (८८८ मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है। सर-ए-पोल राजमार्ग द्वारा उत्तर में जोज़जान प्रान्त की राजधानी शबरग़ान और पश्चिम में फ़ारयाब प्रान्त की राजधानी मेयमना से जुड़ा हुआ है। .

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सर-ए-संग

सर-ए-संग (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Sar-i Sang) उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रान्त के कूरान व मुन्जान ज़िले में कोकचा नदी की घाटी में स्थित एक बस्ती है। यह अपनी लाजवर्द (लैपिस लैज़्यूली) की खान के लिए मशहूर है जहाँ से हज़ारों सालों से यह मूल्यवान पत्थर निकाला जा रहा है। प्राचीन दुनिया में साइबेरिया की छोटी-मोटी दो-एक खानों को छोड़कर यह विश्व का एकमात्र लाजवर्द का स्रोत होता था। सर-ए-संग का लाजवर्द दुनिया का सब से उत्तम कोटि का लाजवर्द माना जाता है। २००० ईसापूर्व में अपने चरम पर सिन्धु घाटी सभ्यता ने भी यहाँ के शोरतुगई इलाक़े के पास एक व्यापारिक बस्ती बनाई थी जिसके ज़रिये लाजवर्द भारतीय उपमहाद्वीप के अलावा प्राचीन मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यताओं तक भी पहुँचाया जाता था।, Peter Roger Moorey, Eisenbrauns, pp.

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सरहद-ए-ब्रोग़िल

सरहद-ए-ब्रोग़िल या सरहद-ए-वाख़ान, जिसे कभी-कभी सिर्फ़ सरहद भी कहा जाता है, पूर्वोत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रान्त के वाख़ान गलियारे क्षेत्र में बरोग़िल दर्रे के चरणों में स्थित एक गाँव है। यह हिन्दु कुश पर्वतों में ३,४०० मीटर की ऊँचाई पर वाख़ान नदी के किनारे बसा हुआ है और यहाँ के अधिकतर निवासी वाख़ी मातृभाषी हैं। यह एक कच्ची सड़क द्वारा इशकाशिम बस्ती से और फिर आगे अफ़ग़ानिस्तान के अन्य भागों से जुड़ा हुआ है। दक्षिण में बरोग़िल दर्रे को पार करके पाकिस्तान के चित्राल ज़िले की मस्तुज वादी है।, International Association of Academies, E. J. Brill ltd., 1934,...

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सरिकोली भाषा

शिंजियांग प्रान्त - हल्के नीले इलाक़ों में सरिकोली बोली जाती है सरिकोली भाषा, जिसे ताशक़ूरग़ानी भाषा भी कहते हैं, एक पामीरी भाषा-परिवार की बोली है जो चीन द्वारा नियंत्रित शिनजियांग प्रान्त के ताशक़ुरग़ान​ क्षेत्र में बोली जाती है। यह इलाक़े ताजिकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान के वाख़ान​ गलियारे और पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र के पास स्थित हैं। अन्य पामीरी भाषाओं की तरह यह भी एक पूर्वी ईरानी भाषा है। इसे चीन में अक्सर 'ताजिक भाषा' कहा जाता है हालांकि यह ताजीकिस्तान व अफ़ग़ानिस्तान में बोली जाने वाली ताजिक भाषा के काफ़ी भिन्न है। यह पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान की वाख़ी भाषा में मिलती-जुलती है हालांकि इन दोनों भाषाओं के बोलने वाले आसानी से एक-दूसरे को समझ नहीं पाते।Outline of the Tajik language (塔吉克语简志/Tǎjíkèyǔ Jiǎnzhì), Gawarjon (高尔锵/Gāo Ěrqiāng), Nationalities Publishing House, Beijing, 1985 .

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सरेपोल

अफगानिस्तान का मानचित्र सरेपोल अफगानिस्तान का एक शहर है। श्रेणी:अफ़्गानिस्तान के शहर.

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सरीसृप

सरीसृप (Reptiles) प्राणी-जगत का एक समूह है जो कि पृथ्वी पर सरक कर चलते हैं। इसके अन्तर्गत साँप, छिपकली,मेंढक, मगरमच्छ आदि आते हैं। .

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सलमान रुश्दी

सर अहमद सलमान रुश्दी (जन्म 19 जून 1947) एक ब्रिटिश भारतीय उपन्यासकार और निबंधकार हैं। उन्होंने अपने दूसरे उपन्यास मिडनाइट्स चिल्ड्रन (1981) से प्रसिद्धि प्राप्त की, जिसे 1981 में बुकर पुरस्कार मिला। उनके अधिकांश प्रारंभिक उपन्यास भारतीय उप-महाद्वीप पर आधारित हैं। उनकी शैली का वर्गीकरण अक्सर ऐतिहासिक कल्पना के साथ संयोजित जादुई यथार्थवाद के रूप में किया जाता है और उनकी कृतियों की प्रमुख विषय-वस्तु, पूर्वी और पश्चिमी दुनिया के बीच कई रिश्तों के जुड़ने, अलग होने और देशांतरणों की कहानी रही है। उनका चौथा उपन्यास सेटेनिक वर्सेज़ (1988), "द सेटेनिक वर्सेज" विवाद के केंद्र में था, जिसके तहत मुसलमानों की ओर से (पहले कैट स्टीवेन्स के नाम से ज्ञात यूसुफ इस्लाम सहित) कई देशों में इसका विरोध हुआ। कुछ विरोध प्रदर्शन हिंसक थे, जिसके दौरान रुश्दी को मौत की धमकी और फरवरी, 1989 में तत्कालीन ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमैनी द्वारा जारी किए गए फतवे (धार्मिक आज्ञापत्र) का सामना करना पड़ा। उनकी हत्या करने के एलान की प्रतिक्रिया के रूप में, रुश्दी ने लगभग एक दशक, मुख्यतः भूमिगत होकर बिताया, जिसके दौरान कभी-कभार ही वे सार्वजनिक रूप से प्रकट होते थे, लेकिन उन पर एक लेखक के रूप में नियंत्रणकारी प्रभाव डालने वाले और सन्निहित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ख़तरे के रूप में फतवे के खिलाफ़ वे मुखर रहे। "साहित्य की सेवाओं" के लिए जून 2007 में उन्हें एक नाइट बैचलर नियुक्त किया गया। उन्होंने फ्रांस का सर्वोच्च पद - Commandeur - in the Ordre des Arts et des Lettres भी हासिल किया। 2007 में एमोरी विश्वविद्यालय में उन्होंने विशिष्ट लेखक के रूप में पांच साल का कार्यकाल शुरू किया। मई 2008 में वे अमेरिकन एकेडमी ऑफ़ आर्ट्स एंड लेटर्स के लिए चुने गए। उनका नवीनतम उपन्यास द एन्चेंट्रेस ऑफ़ फ्लॉरेंस जून 2008 में प्रकाशित हुआ। जुलाई 2008 को सार्वजनिक वोट जीतते हुए मिडनाइट्स चिल्ड्रन को सर्वश्रेष्ठ बुकर घोषित किया गया, पुरस्कार के 40 साल के इतिहास में बुकर पुरस्कार जीतने वाला सर्वश्रेष्ठ उपन्यास। .

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सलमान ख़ान

अब्दुल रशीद सलीम सलमान खान (سلمان خان. उच्चारण:, जन्म: २७ दिसम्बर १९६५) एक भारतीय फ़िल्म अभिनेता हैं, जो बॉलीवुड की फिल्मों में दिखाई देते हैं। इन्होंने सन १९८८ में अभिनय की दुनिया में अपनी पहली फिल्म बीवी हो तो ऐसी से शुरूआत की। सलमान को अपनी पहली बड़ी व्यावसायिक सफलता १९८९ में रिलीज़ हुई मैंने प्यार किया से मिली, जिसके लिए इन्हें फिल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ नवीन पुरूष अभिनेता पुरस्कार भी दिया गया। वे बॉलीवुड की कुछ सफल फिल्मों में स्टार कलाकार की भूमिका करते रहे, जैसे साजन (१९९१), हम आपके हैं कौन (१९९४) व बीवी नं. १ (१९९९) और ये ऐसी फिल्में थीं जिन्होंने उनके करियर में पाँच अलग सालों में सबसे अधिक कमाई की। १९९९ में खान ने १९९८ की फिल्म कुछ कुछ होता है में उनकी अतिथि-भूमिका के लिए फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार जीता और तब से इन्होंने कई आलोचनात्मक और व्यावसायिक फिल्मों में स्टार के रूप में सफलता प्राप्त की है, जिनमें हम दिल दे चुके सनम (१९९९), तेरे नाम (२००३), नो एन्ट्री (२००५) और पार्टनर (२००७) शामिल हैं। २०१७ में टाईगर जिंदा ने कमाई के मामले मे नया इतिहास बनाया इस तरह खान ने खुद को हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं में सबसे महान अभिनेता की छवि बनाई। बाद में बनी फ़िल्में, वांटेड (२००९), दबंग (२०१०), रेड्डी (२०११) और बॉडीगार्ड (२०११) उनकी हिन्दी सिने जगत में सर्वाधिक कमाई वाली फ़िल्में रही। किक (२०१४ फिल्म) सलमान की पहली फिल्म है जो 200 करोड़ के क्लब में शामिल हुई है। किक सलमान की सातवीं फिल्म है जो 100 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस कर चुकी है। इससे पहले 6 फिल्में 100 करोड़ क्लब में शामिल हो चुकी हैं एक था टाइगर - 198 करोड़, दबंग-2 - 158 करोड़, बॉडीगार्ड - 142 करोड़, दबंग - 145 करोड़, Ready (2011 film) - 120 करोड़, जय हो (फ़िल्म) - 111 करोड़ है। (मुख्य सूचना सलमान खान एक भारतीय अभिनेता के साथ एक गायक भी है. जिन्होंने कई सुरीली आवाजो में गाने भी गाए हैं।) .

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सलजूक़ साम्राज्य

'बुर्ज तोग़रोल​' ईरान की राजधानी तेहरान के पास तुग़रिल बेग़​ के लिए १२वीं सदी में बना एक स्मारक बुर्ज है सलजूक़​ साम्राज्य या सेल्जूक साम्राज्य(तुर्की: Büyük Selçuklu Devleti; फ़ारसी:, दौलत-ए-सलजूक़ियान​; अंग्रेज़ी: Seljuq Empire) एक मध्यकालीन तुर्की साम्राज्य था जो सन् १०३७ से ११९४ ईसवी तक चला। यह एक बहुत बड़े क्षेत्र पर विस्तृत था जो पूर्व में हिन्दू कुश पर्वतों से पश्चिम में अनातोलिया तक और उत्तर में मध्य एशिया से दक्षिण में फ़ारस की खाड़ी तक फैला हुआ था। सलजूक़ लोग मध्य एशिया के स्तेपी क्षेत्र के तुर्की-भाषी लोगों की ओग़ुज़​ शाखा की क़िनिक़​ उपशाखा से उत्पन्न हुए थे। इनकी मूल मातृभूमि अरल सागर के पास थी जहाँ से इन्होनें पहले ख़ोरासान​, फिर ईरान और फिर अनातोलिया पर क़ब्ज़ा किया। सलजूक़ साम्राज्य की वजह से ईरान, उत्तरी अफ़्ग़ानिस्तान​, कॉकस और अन्य इलाक़ों में तुर्की संस्कृति का प्रभाव बना और एक मिश्रित ईरानी-तुर्की सांस्कृतिक परम्परा जन्मी।, Jamie Stokes, Anthony Gorman, pp.

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साधारण छिपकली

साधारण छिपकली (Hemidactylus flaviviridis, Yellow-bellied House Gecko) एक प्रकार की छिपकली है जो भारतीय उपमहाद्वीप, अफ़्ग़ानिस्तान, ईरान, इराक़, ओमान, क़तर, साउदी अरब, इथियोपिया, इत्यादि में आम पाई जाती है। .

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सारगढ़ी का युद्ध

सारगढ़ी युद्ध १२ सितम्बर १८९७ को ब्रिटिश भारतीय सेना और अफ़्ग़ान ओराक्ज़ई जनजातियों के मध्य तिराह अभियान से पहले लड़ा गया। यह उत्तर-पश्चिम फ्रण्टियर प्रान्त (वर्तमान खैबर-पखतुन्खवा, पाकिस्तान में) में हुआ। ब्रितानी भारतीय सैन्यदल में ३६ सिखों (सिख पलटन की चौथी बटालियन) के २१ सिख थे, जिन पर १०,००० अफ़्ग़ानों ने हमला किया। सिखों का नेतृत्व कर रहे हवालदार ईशर सिंह ने मृत्यु पर्यन्त युद्ध करने का निर्णय लिया। इसे सैन्य इतिहास में इतिहास के सबसे महान अन्त वाले युद्धों में से एक माना जाता है। युद्ध के दो दिन बाद अन्य ब्रिटिश भारतीय सैना द्वारा उस स्थान पर पुनः अधिकार प्राप्त किया गया। सिख सैन्य कर्मियों द्वारा इस युद्ध की याद में १२ सितम्बर को सारगढ़ी दिवश के रूप में मनाते हैं। .

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सार्क

कोई विवरण नहीं।

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सालंग सुरंग

सालंग सुरंग (फ़ारसी: تونل سالنگ) एक 2.6 किमी लम्बी सुरंग है जो अफ़्गानिस्तान में हिन्दू कुश पर्वत में स्थित सालंग दर्रे में पारवान और बघलान प्रान्तों के मध्य में स्थित है। इसका निर्माण सोवियत संघ द्वारा 1960 के दशक में किया गया था और इसका उपयोग राजधानी काबुल को अफ़्गानिस्तान के उत्तरी नगरों से जोड़ने के लिए किया जाता है। अभी इस सुरंग का निर्माण और सुधार किया जा रहा है। प्रतिदिन सात से दस हज़ार वाहन इस सुरंग से होकर गुजरते हैं। सालंग सुरंग एकमात्र मार्ग है जो उत्तर-दक्षिण दिशा में वर्षभर खुला रहता है। इसे नवम्बर 1982 में घटित एक विनाशकारी अग्निकाण्ड और बहुत सी हिमस्खलन की घटनाओं के लिए भी जाना जाता है। फ़रवरी 2010 में घटित एक हिमस्खलन में 172 लोग परोक्ष या अपरोक्ष रूप से मारे गए थे। .

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सियालकोट ज़िला

पाकिस्तानी पंजाब प्रांत में सियालकोट ज़िला (लाल रंग में) सियालकोट (उर्दू:, अंग्रेज़ी: Sialkot) पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का एक ज़िला है। सियालकोट ज़िले की राजधानी सियालकोट शहर है। इस ज़िले की चार तहसीलें हैं - डसका, पसरूर, सम्बड़ियाल और सियालकोट। यह ज़िला पाकिस्तानी पंजाब प्रान्त के पूर्वोत्तर में स्थित है। इसकी सीमाएँ पश्चिमोत्तर में गुजरात ज़िले से, पूर्वोत्तर में भारत के जम्मू ज़िले से, दक्षिण पूर्व में नारोवाल ज़िले सेऔर दक्षिण-पश्चिम में गुजराँवाला ज़िले से लगतीं हैं। .

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सिंधु घाटी सभ्यता

सिंधु घाटी सभ्यता अपने शुरुआती काल में, 3250-2750 ईसापूर्व सिंधु घाटी सभ्यता (3300 ईसापूर्व से 1700 ईसापूर्व तक,परिपक्व काल: 2600 ई.पू. से 1900 ई.पू.) विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता है। जो मुख्य रूप से दक्षिण एशिया के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में, जो आज तक उत्तर पूर्व अफगानिस्तान,पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम और उत्तर भारत में फैली है। प्राचीन मिस्र और मेसोपोटामिया की प्राचीन सभ्यता के साथ, यह प्राचीन दुनिया की सभ्यताओं के तीन शुरुआती कालक्रमों में से एक थी, और इन तीन में से, सबसे व्यापक तथा सबसे चर्चित। सम्मानित पत्रिका नेचर में प्रकाशित शोध के अनुसार यह सभ्यता कम से कम 8000 वर्ष पुरानी है। यह हड़प्पा सभ्यता और 'सिंधु-सरस्वती सभ्यता' के नाम से भी जानी जाती है। इसका विकास सिंधु और घघ्घर/हकड़ा (प्राचीन सरस्वती) के किनारे हुआ। मोहनजोदड़ो, कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी और हड़प्पा इसके प्रमुख केन्द्र थे। दिसम्बर २०१४ में भिर्दाना को सिंधु घाटी सभ्यता का अब तक का खोजा गया सबसे प्राचीन नगर माना गया है। ब्रिटिश काल में हुई खुदाइयों के आधार पर पुरातत्ववेत्ता और इतिहासकारों का अनुमान है कि यह अत्यंत विकसित सभ्यता थी और ये शहर अनेक बार बसे और उजड़े हैं। 7वी शताब्दी में पहली बार जब लोगो ने पंजाब प्रांत में ईटो के लिए मिट्टी की खुदाई की तब उन्हें वहां से बनी बनाई इटे मिली जिसे लोगो ने भगवान का चमत्कार माना और उनका उपयोग घर बनाने में किया उसके बाद 1826 में चार्ल्स मैसेन ने पहली बार इस पुरानी सभ्यता को खोजा। कनिंघम ने 1856 में इस सभ्यता के बारे में सर्वेक्षण किया। 1856 में कराची से लाहौर के मध्य रेलवे लाइन के निर्माण के दौरान बर्टन बंधुओं द्वारा हड़प्पा स्थल की सूचना सरकार को दी। इसी क्रम में 1861 में एलेक्जेंडर कनिंघम के निर्देशन में भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना की। 1904 में लार्ड कर्जन द्वारा जॉन मार्शल को भारतीय पुरातात्विक विभाग (ASI) का महानिदेशक बनाया गया। फ्लीट ने इस पुरानी सभ्यता के बारे में एक लेख लिखा। १९२१ में दयाराम साहनी ने हड़प्पा का उत्खनन किया। इस प्रकार इस सभ्यता का नाम हड़प्पा सभ्यता रखा गया व दयाराम साहनी को इसका खोजकर्ता माना गया। यह सभ्यता सिन्धु नदी घाटी में फैली हुई थी इसलिए इसका नाम सिन्धु घाटी सभ्यता रखा गया। प्रथम बार नगरों के उदय के कारण इसे प्रथम नगरीकरण भी कहा जाता है। प्रथम बार कांस्य के प्रयोग के कारण इसे कांस्य सभ्यता भी कहा जाता है। सिन्धु घाटी सभ्यता के १४०० केन्द्रों को खोजा जा सका है जिसमें से ९२५ केन्द्र भारत में है। ८० प्रतिशत स्थल सरस्वती नदी और उसकी सहायक नदियों के आस-पास है। अभी तक कुल खोजों में से ३ प्रतिशत स्थलों का ही उत्खनन हो पाया है। .

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सिकरम पर्वत

सिकरम पर्वत (Sikaram) या सिकाराम पर्वत अफ़ग़ानिस्तान​-पाकिस्तान की सरहद पर स्थित एक पहाड़ है जो हिन्दू कुश पर्वतमाला की सफ़ेद कोह (स्पीन ग़र) शाखा का सबसे ऊँचा पर्वत भी है। यह काबुल नदी और ख़ैबर दर्रे से दक्षिण में स्थित है।, pp.

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सिक्खों की मिसलें

मिसलें (1716-1799) छोटे राजनीतिक सिख्ख क्षेत्र थे। मुगल बादशाह बहादुशाह (1707-1712) की 10 दिसम्बर 1710 को प्रसारित एक राजाज्ञा से बड़े पैमाने पर सिक्खों का उत्पीड़न आरंभ हुआ। फर्रुखसियर ने भी इस आदेश को दोहरा दिया। लाहौर के गवर्नर अब्दुस्समद खाँ और उसके पुत्र तथा उत्तराधिकारी जकरिया खाँ (1726-45) ने भी सिक्खों को पीड़ित करने के लिये अनेक उपाय किए। अतएव सिक्खों ने अपने को दो दलों में संगठित किया- (1) बुड्ढा दल और (2) तरुण दल। बुड्ढा दल का नेतृत्व कपूर सिंह और तरुणदल का नेतृत्व दीपसिंह के हाथों में था। ये दोनों दल जब तब अपने छिपने के स्थानों से निकलकर स्थानीय अधिकारियों को परेशान करते थे। इन्होंने अपनी बिखरी हुई शक्ति को संगठित किया। तरुण दल पाँच जत्थों में विभाजित किया गया जिनके निम्नलिखित नेता थे- (1) दीपसिंह शहीद (2) करमसिंह और धरमसिंह, अमृतसर (3) खानसिंह और विनोद सिंह, गोइंदवाल (4) दसौंधा सिंह, कोट बुड्ढा (5) बीरू सिंह और जीवनसिंह। जब अफगानिस्तान से अहमदशाह दुर्रानी के पंजाब पर आक्रमण हुए तो सिक्खों को अपने को दृढ़तर आधार पर संगठित करने का अच्छा अवसर मिल गया। उन्होंने सरहिंद (जनवरी 14, 1764) और लाहौर (अप्रैल 16,1765) पर अधिकार कर लिया। 1748 और 1765 के बीच बुड्ढा और तरुण दलों के पाँचों जत्थों ने द्रुत गति से अपना प्रसार किया और अनेक राज्यसंघ बने जो मिसलें कहलाई। निम्नलिखित 12 मिसलें मुख्य थीं: (1) भंगी- इसे छज्जासिंह ने स्थापित किया, बाद में भन्नासिंह और हरिसिंह ने भंगी मिसल का नेतृत्व किया। इसके केन्द्र अमृतसर, रावलपिंडी और मुलतान आदि स्थानों में थे। (2) अहलूवालिया- जस्सासिहं अहलूवालिया के नेतृत्व में स्थापित हुई। इसका प्रधान केंद्र कपूरथला था। (3) रामगढ़िया- इस समुदाय को नंदसिंह संघानिया ने स्थापित किया। बाद में इसका नेतृत्व जस्सासिंह रामगढ़िया ने किया इसके क्षेत्र बटाला, दीनानगर तथा जालंधर दोआब के कुछ गाँव थे। (4) नकई- लाहौर के दक्षिण-पश्चिम में नक्का के हरिसिंह द्वारा स्थापित। (5) कन्हैया- कान्ह कच्छ के जयसिंह के नेतृत्व में गठित इस मिसलश् के क्षेत्र गुरदासपुर, बटाला, दीनानगर थे। यह रामगढ़िया मिसल में मिला जुला था। (6) उल्लेवालिया- गुलाबसिंह और तारासिंह गैवा के नेतृत्व में यह मिसल थी। राहों तथा सतलुज के उत्तर-दक्षिण के इलाके इसके मुख्य क्षेत्र थे। (7) निशानवालिया- इसके मुखिया संगतसिंह और मोहरसिंह थे। इसके मुख्य क्षेत्र अंबाला तथा सतलुज के दक्षिण और दक्षिण पूर्व के इलाके थे। (8) फ़ैजुल्लापुरिया (सिंहपुरिया)- नवाब कपूर सिंह द्वारा स्थापित, जालंधर और अमृतसर जिले इसके क्षेत्र थे। (9) करोड़सिंहिया- 'पंज गाई' के करोड़ सिंह द्वारा स्थापित। बाद में बघेलसिंह इसके मुखिया हुए। कलसिया के निकट यमुना के पश्चिम और होशियारपुर जिले में इस मिसल के क्षेत्र थे। (10) शहीद- दीपसिंह इस मिसल के अगुआ थे। बाद में गुरुबख्शसिंह ने उत्तराधिकार ग्रहण किया। दमदमा साहब और तलवंडी साबो इस मिसल के मुख्य केन्द्र थे। (11) फूलकियाँ- पटियाला, नाभा और जींद के सरदारों के पूर्वज फूल के नाम पर स्थापित। ये सरदार इसके तीन गुटों के मुखिया थे। (12) सुक्करचक्किया- चढ़तसिंह ने अपने पूर्वजों के निवास ग्राम सुक्करचक के नाम पर स्थापित किया। महत्व में चढ़तसिंह का स्थान नवाब कपूरसिंह और जस्सासिंह अहलूवालिया के स्थानों के बाद आता था। उसका मुख्य क्षेत्र गुजराँवाला और आसपास के इलाके थे। चढ़तसिंह के पुत्र महासिंह ने अपने पिता का उत्तराधिकार संभाला और उसके बाद उसके पुत्र शेरेपंजाब रणजीतसिंह ने। मिसलों का संविधान बिल्कुल सरल था। मिसल के सरदार के नीचे पट्टीदार होते थे जो अपने अनुयायियों के भरण-पोषण के लिये सरदार के साथ गाँवों और भूमि का प्रबंध करते थे। घुड़सवारी और अस्त्रशस्त्रों के प्रयोग में दक्षता सरदारों, पट्टीदारों और उनके सहायकों की मुख्य योग्ताएँ मानी जाती थीं। मिसलों का रूप गणतंत्रवादी था। जीत और लूट की सामग्री का दशम भाग सरदार के लिये नियत रहता था। शेष उसी अनुपात में छोटे सरदारों और उनके अनुयायियों में बाँटा जाता था। एक सरदार से प्राप्त गाँव और भूमि छोड़कर अन्य मिसल में सम्मिलित होना संभव था। सरदार से भूमि प्राप्त करनेवाले जागीरदारों को जागीर की सुरक्षा के लिये एक निश्चित संख्या में घोड़े और सिपाही उपलब्ध थे। छोटे सरदारों या जागीरदारों की मिसल विरुद्ध गतिविधियों पर उनकी संपत्ति जब्त करने का अधिकार सरदार को होता था। सरदारों के निजी नौकर तावेदार कहे जाते थे और अवज्ञा या विद्रोह करने पर उनकी भूमि जब्त हो सकती थी। सभी मिसलों का समूह दल 'खालसा' कहलाता था। वे गुरु के नाम पर युद्ध करते थे और सरबत्त खालसा के नाम पर संधियाँ करते थे। मिसलों की व्यापक समस्याओं पर पंथ की साधारण सभा द्वारा विचार किया जाता था। यह अमृतसर में वर्ष भर में दो बार वैशाखी और दीवाली के अवसरों पर बैठती थी। गुरु ग्रंथ साहब की उपस्थिति में बहुमत से प्रस्ताव (गुरुमत) पारित करके निर्णय लिया जाता था। न्याय बहुत जल्दी होता था। कानून और व्यवस्था कायम रखने का उत्तरदायित्व छोटे सरदारों पर था और न्याय की व्यवस्था पंचायतों के माध्यम से होती थी। पंचायतों के विरुद्ध निर्णय सुनने का अधिकार सरदार को था और अंत में, पर प्राय: बहुत कम, पंथ या साधारण सभा में अपील की जाती थी। उनके यहाँ मृत्युदंड का विधान नहीं था। चोरियों के मामलों में पदचिह्‌नान्वेषक जिस गाँव में चोरों के पदचिह्‌नों को खोज लेते थे, उस गाँव के मुखिया को या तो वे पदचिह्‌न गाँव के बाहर की ओर जाते हुए दिखाने पड़ते थे या हानि के बराबर द्रव्य देना पड़ता था। .

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सईद शिरजाद

सईद शिरजाद (जन्म २ अक्टूबर १९९४) अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम के क्रिकेट खिलाड़ी है। सईद बाएं हाथ के बल्लेबाज है और बाएं ही हाथ से मध्यम तेज गेंदबाजी भी करते है। .

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संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध

संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध (अंग्रेजी: United Provinces of Agra and Oudh; उच्चारण: यूनाईटेड प्राॅविन्सेज़ ऑफ ऐग्रा ऐण्ड औध) ब्रिटिश भारत में स्वाधीनता से पूर्व एकीकृत प्रान्त का नाम था जो 22 मार्च 1902 को आगरा व अवध नाम की दो प्रेसीडेंसी को मिलाकर बनाया गया था। उस समय सामान्यतः इसे संयुक्त प्रान्त (अंग्रेजी में यू॰पी॰) के नाम से भी जानते थे। यह संयुक्त प्रान्त लगभग एक शताब्दी 1856 से 1947 तक अस्तित्व में बना रहा। इसका कुल क्षेत्रफल वर्तमान भारतीय राज्यों उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड के संयुक्त क्षेत्रफल के बराबर था। जिसे आजकल उत्तर प्रदेश या अंग्रेजी में यू॰पी॰ कहते हैं उसमें ब्रिटिश काल के दौरान रामपुर व टिहरी गढ़वाल जैसी स्वतन्त्र रियासतें भी शामिल थीं। 25 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान की घोषणा से एक दिन पूर्व सरदार बल्लभ भाई पटेल ने इन सभी रियासतों को मिलाकर इसे उत्तर प्रदेश नाम दिया था। 3 जनवरी 1921 को जो राज्य पूर्णत: ब्रिटिश भारत का अंग बन गया था उसे स्वतन्त्र भारत में 20वीं सदी के जाते-जाते सन् 2000 में पुन: विभाजित कर उत्तरांचल (और बाद में उत्तराखण्ड) राज्य को स्थापित किया गया। .

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संयुक्त भूयोजना एशिया के लिए

दक्षिणी एशिया .

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संस्कृत मूल के अंग्रेज़ी शब्दों की सूची

यह संस्कृत मूल के अंग्रेजी शब्दों की सूची है। इनमें से कई शब्द सीधे संस्कृत से नहीं आये बल्कि ग्रीक, लैटिन, फारसी आदि से होते हुए आये हैं। इस यात्रा में कुछ शब्दों के अर्थ भी थोड़े-बहुत बदल गये हैं। .

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संघ-शासित जनजातीय क्षेत्र

संघीय शासित कबायली इलाका (फाटा) पाकिस्तान का एक सूबा या क्षेत्र है। पाकिस्तान का नक़्शा, क़बायली इलाका जात सुर्ख़ रंग में नुमायां हैं पाकिस्तान के क़बायली इलाका जात चारों सओ-बूं से अलिहदा हैसीयत रखते हैं और ये वफ़ाक़ के ज़ेर इंतिज़ाम हैं। क़बायली इलाका जात 27 हज़ार 220 मरब्बा किलोमीटर के इलाके पर फैले हुऐ हैं जो सूबा सरहद से मुनसलिक हैं। मग़रिब में क़बायली इलाका जात की सरहद अफ़ग़ानिस्तान से मिलती हैं जहां डीवरुणड लाइन उन्हें अफ़ग़ानिस्तान से जुदा करती है। क़बायली इलाका जात के मशरिक़ में पंजाब और सूबा सरहद और जनूब में सूबा ब्लोचिस्तान है। 2000ए के मुताबिक क़बायली इलाका जात की कुल आबादी 33लाख 41 हज़ार 70 है जो पाकिस्तान की कुल आबादी का तक़रीबअ 2 फ़ीसद बनता है। क़बायली इलाका इन 7 एजैंसीओ-ं/अज़ला पर मुशतमिल है.

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संगलाख़

अफ़्ग़ानिस्तान के नक़्शे पर उनई दर्रा संगलाख़ (Sanglakh) हिन्दु कुश पर्वत शृंखला की एक शाखा है। इस से अफ़्ग़ानिस्तान की दो महत्वपूर्ण नदियाँ - हेलमंद नदी और काबुल नदी - उत्पन्न होती हैं। संगलाख़ शृंखला के सब से प्रमुख दर्रे का नाम 'उनई दर्रा' या 'उनई कोतल' है।, Cambridge University Press, 1911,...

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सुभाष चन्द्र बोस

सुभाष चन्द्र बोस (बांग्ला: সুভাষ চন্দ্র বসু उच्चारण: शुभाष चॉन्द्रो बोशु, जन्म: 23 जनवरी 1897, मृत्यु: 18 अगस्त 1945) जो नेता जी के नाम से भी जाने जाते हैं, भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी नेता थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान, अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिये, उन्होंने जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फौज का गठन किया था। उनके द्वारा दिया गया जय हिन्द का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया है। "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा" का नारा भी उनका था जो उस समय अत्यधिक प्रचलन में आया। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जब नेता जी ने जापान और जर्मनी से मदद लेने की कोशिश की थी तो ब्रिटिश सरकार ने अपने गुप्तचरों को 1941 में उन्हें ख़त्म करने का आदेश दिया था। नेता जी ने 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने 'सुप्रीम कमाण्डर' के रूप में सेना को सम्बोधित करते हुए "दिल्ली चलो!" का नारा दिया और जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश व कामनवेल्थ सेना से बर्मा सहित इम्फाल और कोहिमा में एक साथ जमकर मोर्चा लिया। 21 अक्टूबर 1943 को सुभाष बोस ने आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपींस, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी। जापान ने अंडमान व निकोबार द्वीप इस अस्थायी सरकार को दे दिये। सुभाष उन द्वीपों में गये और उनका नया नामकरण किया। 1944 को आजाद हिन्द फौज ने अंग्रेजों पर दोबारा आक्रमण किया और कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त भी करा लिया। कोहिमा का युद्ध 4 अप्रैल 1944 से 22 जून 1944 तक लड़ा गया एक भयंकर युद्ध था। इस युद्ध में जापानी सेना को पीछे हटना पड़ा था और यही एक महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हुआ। 6 जुलाई 1944 को उन्होंने रंगून रेडियो स्टेशन से महात्मा गांधी के नाम एक प्रसारण जारी किया जिसमें उन्होंने इस निर्णायक युद्ध में विजय के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनायें माँगीं। नेताजी की मृत्यु को लेकर आज भी विवाद है। जहाँ जापान में प्रतिवर्ष 18 अगस्त को उनका शहीद दिवस धूमधाम से मनाया जाता है वहीं भारत में रहने वाले उनके परिवार के लोगों का आज भी यह मानना है कि सुभाष की मौत 1945 में नहीं हुई। वे उसके बाद रूस में नज़रबन्द थे। यदि ऐसा नहीं है तो भारत सरकार ने उनकी मृत्यु से सम्बंधित दस्तावेज़ अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किये? 16 जनवरी 2014 (गुरुवार) को कलकत्ता हाई कोर्ट ने नेताजी के लापता होने के रहस्य से जुड़े खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की माँग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के लिये स्पेशल बेंच के गठन का आदेश दिया। .

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सुलयमान पर्वत

अंतरिक्ष से सुलयमान पर्वतों के एक अंश की तस्वीर इस तस्वीर में सुलयमान पर्वत नामांकित हैं सुलयमान पर्वत या कोह-ए-सुलयमान (फ़ारसी:; पश्तो:; अंग्रेज़ी: Sulaiman Mountains), जिन्हें केसई पर्वत (पश्तो:; अंग्रेज़ी: Kesai Mountains) भी कहा जाता है, दक्षिणपूर्वी अफ़्ग़ानिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रान्त के उत्तर भाग में स्थित एक प्रमुख पर्वत शृंखला है। अफ़्ग़ानिस्तान में यह ज़ाबुल, लोया पकतिया और कंदहार (उत्तर-पूर्वी भाग) क्षेत्रों में विस्तृत हैं। सुलयमन पर्वत ईरान के पठार का पूर्वी छोर हैं और भौगोलिक रूप से उसे भारतीय उपमहाद्वीप से विभाजित करते हैं। इस शृंखला के सबसे प्रसिद्ध शिखर बलोचिस्तान में स्थित ३,४८७ मीटर ऊँचा तख़्त​-ए-सुलयमान, ३,४४४ मीटर ऊँचा केसई ग़र और क्वेटा के पास स्थित ३,५७८ मीटर ऊँचा ज़रग़ुन ग़र हैं।, William Wilson Hunter, Trubner & Co, London, 1881,...

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सुष्मिता बनर्जी

सुष्मिता बनर्जी, (सुष्मिता बंधोपाध्याय और सईदा कमाल भी) (1963/1964 – 4/5 सितम्बर 2013), भारत की एक लेखिका एवं बुद्धिजीवी थी। उनका संस्मरण काबुलीवालार बंगाली बौ (एक काबुलीवाला की बंगाली पत्नी; 1997) उनके एक अफगान से विवाह और तालिबान शासन के दौरान अफ़गानिस्तान में उनके अनुभवों पर आधारित है। उनके इस संस्मरण पर आधारित एक बॉलीवुड फ़िल्म एस्केप फ्रॉम तालिबान भी बन चुकी है। संदिग्ध तालिबानी आतंकवादियों ने ४ सितम्बर शाम के बाद और ५ सितम्बर २०१३ की सुबह से पूर्व किसी समय उनके पकतीका प्रान्त, अफ़्ग़ानिस्तान में स्थित घर के बाहर पर उनकी हत्या कर दी। .

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सुखोई एसयू-25

सुखोई एसयू-25 ग्रेच (Sukhoi Su-25 Grach) (नाटो रिपोर्टिंग का नाम: फ्रॉगफूट) एक सिंगल सीट वाला सोवियत संघ में सुखोई द्वारा विकसित दो इंजन वाला जेट विमान है। यह सोवियत ग्राउंड बलों के लिए करीब हवाई समर्थन प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया था। सुखोई एसयू-25 के पहले प्रोटोटाइप की 22 फरवरी 1975 को पहली उड़ान की। परीक्षण के बाद, विमान की श्रृंखला उत्पादन का जॉर्जियाई सोवियत समाजवादी गणराज्य में 1978 में शुरू हुआ था। शुरुआती प्रकार में सुखोई एसयू-25यूबी के दो-सीट ट्रेनर, सुखोई एसयू-25बीएम और निर्यात ग्राहकों के लिए सुखोई एसयू-25क्यू शामिल थे। कुछ विमानों को 2012 में सुखोई एसयू-25एम मानक में अपग्रेड किया जा रहा था। सुखोई एसयू-25टी और सुखोई एसयू-25टीएम (जिसे सुखोई एसयू-39 भी कहा जाता है) आगे के विकासाधीन विमान थे लेकिन इनका बड़ी संख्याओं में नहीं उत्पन्न किया गया था। सुखोई एसयू-25, और सुखोई एसयू-34, 2007 तक उत्पादन में एकमात्र बख़्तरबंद, फिक्स्ड-विंग विमान थे।Gordon and Dawes 2004.

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स्प्रिंग टैम्पल बुद्ध

स्प्रिंग टैम्पल बुद्ध (तथा), वैरोचन बुद्ध की एक सबसे विशालकाय बुद्ध प्रतिमा है, जो कि हेनान के जाओकुन कस्बे (लुशान काउन्टी) में, चीन में स्थित है। यह फ़ोदुशान सीनिक एरिया में, नेश्नल फ़्रीवे नम्बर ३११ में स्थित है। यह बुद्ध मूर्ती १२८ मीटर (४२० फुट) ऊँची है जिसमें कि २० मीटर (६६ फुट) ऊँचा कमल-सिंहासन भी शामिल है, तथा यह संसार की सबसे ऊँची प्रतिमा है। यदि इसके २५ मीटर (८२ फुट) ऊँचे आधार/भवन को भी गिन लिया जाये तो इसकी कुल ऊँचाई १५३ मीटर (५५२ फुट) हो जाती है। अक्टूबर २००८ की स्थिति के अनुसार इसके आधार को नई शक्ल दी जा चूँकी है और अब इसकी ऊँचाई २०८ मीटर (६८२ फुट) हो गई है। इस प्रतिमा के नीचे बौद्ध मठ - विहार है। स्प्रिंग टैम्पल बुद्ध के निर्माण की योजना की घोषणा अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान द्वारा बामियान के बुद्ध प्रतिमाओं के ध्वंस के तुरंत बाद की गयी थी। चीन ने अफ़ग़ानिस्तान में बौद्ध धरोहर के योजनाबद्ध विनाश की भर्त्सना की थी। .

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स्पीन घर टाइगर्स

स्पीन घर टाइगर्स (سپين غر زمريان Spīn Ghar Zmaryān) या स्पीन घर क्षेत्र अफगानिस्तान में छह प्रथम श्रेणी क्रिकेट टीमों में से एक है। यह क्षेत्र अफगानिस्तान के पूर्व में राजधानी प्रांत काबुल: नंगारहर, लागमान, कुनार और नूरिस्तान के पूर्व में निम्नलिखित प्रांतों का प्रतिनिधित्व करता है। इस क्षेत्र का नाम स्पिन घर के नाम पर रखा गया है, जो इस क्षेत्र में पर्वत श्रृंखला है। स्पीन घर क्षेत्र अहमद शाह अब्दली 4 दिवसीय टूर्नामेंट में प्रतिस्पर्धा करता है, जिसकी 2017 के बाद से प्रथम श्रेणी की स्थिति थी। अक्टूबर 2017 में, उन्होंने एक पारी और 46 रनों से, एमो क्षेत्र के खिलाफ टूर्नामेंट का अपना पहला मैच जीता। वे स्पीन घर टाइगर्स नाम का उपयोग करते हुए अफगान शापेजा क्रिकेट लीग ट्वेंटी-20 प्रतियोगिता (जिसमें 2017 से ट्वेंटी-20 स्थिति होगी) में भी प्रतिस्पर्धा करते हैं। वे गाज़ी अमानुल्ला खान क्षेत्रीय वनडे टूर्नामेंट में भी खेलते हैं, जिसे 2017 से लिस्ट ए स्टेटस दिया गया था। .

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स्वर्ण मंदिर मेल

फ्रंटियर मेल जिसे अब स्वर्ण मंदिर मेल के नाम से जाना जाता है, भारत की सबसे पुरानी रेलगाड़ियों में से एक है, जिसका परिचालन आज तक किया जा रहा है। अपने शुरुआती दौर में, फ्रंटियर मेल बंबई (अब मुंबई) को पेशावर से जोड़ती थी जो कि अविभाजित भारत के पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में स्थित था और इसी से इसका नाम फ्रंटियर (सीमांत) पड़ा था। इस रेलगाड़ी का जिक्र हिंदी फिल्म नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉरगॉटन हीरो में किया गया है: कहते हैं कि नेताजी 1944 में फ्रंटियर मेल से पेशावर गये थे और वहाँ से अफगानिस्तान के काबुल को चले गये थे। भारत के विभाजन के बाद, फ्रंटियर मेल मुंबई और अमृतसर के बीच चलने लगी जो इस रेलमार्ग पर भारत का अंतिम शहर है। 1996 में इसका नाम बदलकर सिखों के पवित्रतम स्थल स्वर्ण मंदिर के नाम पर स्वर्ण मंदिर मेल (12903UP/12904DN) कर दिया गया। .

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सैन्य और अर्धसैनिक बलों की संख्या के आधार पर देशों की सूची

विश्व के देशों में २००९ तक सक्रीय बल इस सूची में विश्व के देशों के संख्या के आधार पर सेना और अर्धसैनिक बल है । इसमें पूर्णकालिक सेना और अर्धसैनिक बल सम्मिलित है । .

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सूखा

अकाल भोजन का एक व्यापक अभाव है जो किसी भी पशुवर्गीय प्रजाति पर लागू हो सकता है। इस घटना के साथ या इसके बाद आम तौर पर क्षेत्रीय कुपोषण, भुखमरी, महामारी और मृत्यु दर में वृद्धि हो जाती है। जब किसी क्षेत्र में लम्बे समय तक (कई महीने या कई वर्ष तक) वर्षा कम होती है या नहीं होती है तो इसे सूखा या अकाल कहा जाता है। सूखे के कारण प्रभावित क्षेत्र की कृषि एवं वहाँ के पर्यावरण पर अत्यन्त प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था डगमगा जाती है। इतिहास में कुछ अकाल बहुत ही कुख्यात रहे हैं जिसमें करोंड़ों लोगों की जाने गयीं हैं। अकाल राहत के आपातकालीन उपायों में मुख्य रूप से क्षतिपूरक सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे कि विटामिन और खनिज पदार्थ देना शामिल है जिन्हें फोर्टीफाइड शैसे पाउडरों के माध्यम से या सीधे तौर पर पूरकों के जरिये दिया जाता है।, बीबीसी न्यूज़, टाइम सहायता समूहों ने दाता देशों से खाद्य पदार्थ खरीदने की बजाय स्थानीय किसानों को भुगतान के लिए नगद राशि देना या भूखों को नगद वाउचर देने पर आधारित अकाल राहत मॉडल का प्रयोग करना शुरू कर दिया है क्योंकि दाता देश स्थानीय खाद्य पदार्थ बाजारों को नुकसान पहुंचाते हैं।, क्रिश्चियन साइंस मॉनिटर लंबी अवधि के उपायों में शामिल हैं आधुनिक कृषि तकनीकों जैसे कि उर्वरक और सिंचाई में निवेश, जिसने विकसित दुनिया में भुखमरी को काफी हद तक मिटा दिया है।, न्यूयॉर्क टाइम्स, 9 जुलाई 2009 विश्व बैंक की बाध्यताएं किसानों के लिए सरकारी अनुदानों को सीमित करते हैं और उर्वरकों के अधिक से अधिक उपयोग के अनापेक्षित परिणामों: जल आपूर्तियों और आवास पर प्रतिकूल प्रभावों के कारण कुछ पर्यावरण समूहों द्वारा इसका विरोध किया जाता है।, न्यूयॉर्क टाइम्स, 2 दिसम्बर 2007, दी अटलांटिक .

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सेलिना जेटली

सेलिना जेटली (जन्म २४ नवम्बर १९८१), एक भारतीय अभिनेत्री और पूर्व सुंदरी है। उन्हें २००१ में फेमिना मिस इंडिया का ताज पहनाया गया था। .

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सेल्युकसी साम्राज्य

सेल्युकसी साम्राज्य (Βασιλεία τῶν Σελευκιδῶν, बैसिलिया टोन सेल्युकिडोन) हेलिनिस्टिक काल का एक साम्राज्य है, जिसपर सेल्युकसी वंश ने शासन किया। इस साम्राज्य का कालखंड 312 ईसा पूर्व से 63 ईसा पूर्व तक रहा। इसकी स्थापना सेल्युकस प्रथम निकेटर ने मेसिडोनियाई साम्राज्य, जिसका सिकंदर महान ने अत्यधिक विस्तार किया था, के विभाजन के पश्चात की थी। साम्राज्य के अधिकतम विस्तार के समय यह अनातोलिया, फ़ारस (पर्शिया), लेवांट, मेसोपोटामिया तथा वर्तमान में कुवैत, अफ़ग़ानिस्तान तथा आंशिक रूप से पाकिस्तान तथा तुर्कमेनिस्तान तक विस्तृत था। .

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सोहन हलवा

सोहन हलवा एक मिठाई है जो भारत, पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान में बहुत लोकप्रिय है। यह एक प्रकार का पकवान है जो मैदा, घी तथा चीनी से बनाया जाता है। .

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सोवियत संघ

सोवियत संघ (रूसी भाषा: Сове́тский Сою́з, सोवेत्स्की सोयूज़; अंग्रेज़ी: Soviet Union), जिसका औपचारिक नाम सोवियत समाजवादी गणतंत्रों का संघ (Сою́з Сове́тских Социалисти́ческих Респу́блик, Union of Soviet Socialist Republics) था, यूरेशिया के बड़े भूभाग पर विस्तृत एक देश था जो १९२२ से १९९१ तक अस्तित्व में रहा। यह अपनी स्थापना से १९९० तक साम्यवादी पार्टी (कोम्युनिस्ट पार्टी) द्वारा शासित रहा। संवैधानिक रूप से सोवियत संघ १५ स्वशासित गणतंत्रों का संघ था लेकिन वास्तव में पूरे देश के प्रशासन और अर्थव्यवस्था पर केन्द्रीय सरकार का कड़ा नियंत्रण रहा। रूसी सोवियत संघीय समाजवादी गणतंत्र (Russian Soviet Federative Socialist Republic) इस देश का सबसे बड़ा गणतंत्र और राजनैतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र था, इसलिए पूरे देश का गहरा रूसीकरण हुआ। यही कारण रहा कि विदेश में भी सोवियत संघ को अक्सर गलती से 'रूस' बोल दिया जाता था। .

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सोवियत संघ का विघटन

सोवियत संघ के विघटन को दिखाने वाला चल-मानचित्र सोवियत संघ, 26 दिसम्बर 1991 को विघटित घोषित हुआ। इस घोषणा में सोवियत संघ के भूतपूर्व गणतन्त्रों को स्वतन्त्रत मान लिया गया। विघटन के पूर्व मिखाइल गोर्वाचेव, सोवियत संघ के राष्ट्रपति थे। विघटन की घोषणा के एक दिन पूर्व उन्होने पदत्याग दिया था। विघटन की इस प्रक्रिया आरम्भ आम तौर पर गोर्वाचेव के सत्ता ग्रहण करने के साथ जोड़ा जाता है। वास्तव में सोवियत संघ के विघटन की प्रक्रिया बहुत पहले शुरू हो चुकी थी। सोवियत संघ के निपात के अनेक बुनियादी एवं ऐतिहासिक कारण हैं जो सतही नजर डालने पर नहीं दिखते। .

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सी-सी तीतर

सी-सी तीतर (See-see Partridge) (Ammoperdix griseogularis) फ़ीज़ैन्ट कुल का एक पक्षी है जो कि सीरिया, अज़रबैजान, अफ़्गानिस्तान, ईरान, ईराक़, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कज़ाख़िस्तान, उज़बेकिस्तान, पाकिस्तान तथा भारत में पाया जाता है। .

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सीएसआई (CSI) मियामी

सीएसआई (CSI): मियामी (क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन: मियामी) अमेरिकी पुलिस की कार्यप्रणाली दर्शाने वाली टेलिविज़न श्रंखला है, जिसका प्रथम प्रदर्शन 23 सितंबर 2002 को सीबीएस (CBS) पर हुआ था। यह श्रंखला CSI: Crime Scene Investigation का एक स्पिन ऑफ है। यह श्रंखला होरैटियो केन के नेतृत्व में काम करने वाले मियामी फोरेंसिक दल पर आधारित है। धीरे धीरे उग्र होते हुए जातीय और सांस्कृतिक तनावों के विरोध की पृष्ठभूमि में, केन का दल अपने लॉस वेगास के समकक्षों jके सामान ही मामलों की जांच करता है। इसकी आरंभिक कड़ी का प्रसारण संयुक्त राज्य में 9 मई 2002 को सीएसआई (CSI) की एक कड़ी के रूप में हुआ था और संयुक्त राज्य में इसके आठ सत्रों का प्रसारण हो चुका है। इस श्रंखला का निर्माण कनाडा की मीडिया कंपनी एलायंस एटलांटिस और सीबीएस (CBS) टेलिविज़न स्टूडियोज़ की सांझेदारी से हुआ था। 19 मई 2010 को, सीबीएस (CBS) ने नौवें सत्र के लिए कार्यक्रम को फिर से शुरू किया। 3 अक्टूबर 2010 को प्रथम प्रदर्शन के बाद कार्यक्रम सोमवार रात्रि 10 बजे के समय से हटकर रविवार रात्रि 10 बजे के समय पर प्रसारित होगा.

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सीस्तान द्रोणी

सीस्तान द्रोणी क्षेत्र सीस्तान क्षेत्र का अंतरिक्ष से नज़ारा - एक रेतीला तूफ़ान चलता हुआ दिख रहा है सीस्तान द्रोणी या सीस्तान बेसिन (अंग्रेज़ी: Sistan Basin) दक्षिण-पश्चिमी अफ़्ग़ानिस्तान और दक्षिण-पूर्वी ईरान में स्थित एक बंद जलसंभर इलाका है। यह दुनिया के सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक है और यहाँ अक्सर सूखा पड़ता है। यहाँ पर अफ़्ग़ानिस्तान के पर्वती क्षेत्रों से बहुत से नदी-झरने पानी लाते हैं तो अफ़्ग़ानिस्तान की गोदज़रेह द्रोणी में जाते हैं (यह सीस्तान द्रोणी का एक धंसा हुआ क्षेत्र है)। यहाँ पर हिन्दु कुश पर्वतों से उभरने वाली हेलमंद नदी भी अपना पानी लाती है।, World Book, Inc, World Book.com, 2002, ISBN 978-0-7166-1295-7,...

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हदरामौत प्रान्त

हदरामौत प्रान्त या हज़रामौत प्रान्त (अरबी:, अंग्रेज़ी: Hadramaut) यमन का एक प्रान्त है। यह देश का सबसे बड़ा प्रान्त है और ऐतिहासिक 'हदरामौत' क्षेत्र का भाग है जहाँ प्राचीनकाल में कई शक्तिशाली यमनी राज्य उभरे थे। सन् २००४ में सुक़ूत्रा का द्वीप समूह भी अदन प्रान्त से हटाकर हदरामौत प्रान्त का भाग बना दिया गया। हदरामौत प्रान्त की संस्कृति पड़ोसी ओमान देश के ज़ोफ़ार प्रान्त से मिलती है। इन दोनों क्षेत्रों के लोगों को 'हदरामौती' बुलाया जाता है और यह दक्षिणी अरबी भाषा की हदरामौती उपभाषा बोलते हैं। .

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हनफ़ी पन्थ

हनफ़ी (अरबी الحنفي) सुन्नी इस्लाम के चार पन्थों में से सबसे पुराना और सबसे ज़्यादा अनुयायियों वाला पन्थ है। अबु खलीफ़ा, तुर्क साम्राज्य और मुगल साम्राज्य के शासक हनाफी पन्थ के अनुयायी थे। आज हनाफी स्कूल लिवैन्ट, इराक, अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भारत, चीन, मारीशस, तुर्की, अल्बानिया, मैसेडोनिया में बाल्कन में प्रमुख है। .

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हराएवा

अफगानिस्तान का मानचित्र हराएवा अफगानिस्तान का एक शहर है। श्रेणी:अफ़्गानिस्तान के शहर.

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हरिपुर ज़िला

हरिपुर (उर्दू:, पश्तो:, अंग्रेज़ी: Mansehra) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत का एक ज़िला है। इसके पश्चिम में स्वाबी ज़िला, पश्चिमोत्तर में बुनेर ज़िला, उत्तर में मानसेहरा ज़िला, पूर्वोत्तर में ऐब्टाबाद ज़िला और दक्षिण में पंजाब प्रांत पड़ता है। हरिपुर ज़िला ऐतिहासिक हज़ारा क्षेत्र का हिस्सा है, जो ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा में होने के बावजूद एक पंजाबी प्रभावित क्षेत्र माना जाता है। .

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हरीरूद

हरीरूद के किनारे खड़ी जाम की मीनार हेरात शहर में हरीरूद पर बने पुल से नदी में नहाते लोगों का दृश्य हरीरूद (फ़ारसी) या हरी नदी (अंग्रेज़ी: Hari River) मध्य एशिया की एक महत्वपूर्ण नदी है। यह १,१०० किमी लम्बी नदी मध्य अफ़ग़ानिस्तान के पहाड़ों से शुरू होकर तुर्कमेनिस्तान जाती है जहाँ यह काराकुम रेगिस्तान की रेतों में जाकर सोख ली जाती है। तुर्कमेनिस्तान में इसे तेजेन या तेदझ़ेन के नाम से जाना जाता है (इसमें बिंदु-वाले 'झ़' के उच्चारण पर ध्यान दें क्योंकि यह टेलिविझ़न के 'झ़' जैसा है)। .

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हलवा

पिस्ता के साथ बाल्कन शैली में ताहिनी आधारित हलवा हलवा (या हलावा, हलेवेह, हेलवा, हलवाह, हालवा, हेलावा, हेलवा, हलवा, अलुवा, चालवा, चलवा) कई प्रकार की घनी, मीठी मिठाई को संदर्भित करता है, जिसे पूरे मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया, मध्य एशिया, पश्चिम एशिया, उत्तरी अफ्रीका, अफ्रीका का सींग, बाल्कन, पूर्वी यूरोप, माल्टा और यहूदी जगत में खाने के लिए पेश किया जाता है। शब्द हलवा (अरबी हलवा حلوى से) का प्रयोग दो प्रकार की मिठाई के वर्णन के लिए किया जाता है.

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हश्मतुल्लाह शहीदी

हश्मतुल्लाह शहीदी (जन्म; ४ नवम्बर १९९४) अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम के युवा खिलाड़ी है जिन्होंने साल २०१३ में केन्या क्रिकेट टीम के खिलाफ एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत की थी। इन्हें भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ अफगानिस्तान के पहले टेस्ट मैच में भी शामिल किया गया। .

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हाफिज़ मुहम्मद सईद

हाफिज मुहम्मद सईद (जन्म: 10 मार्च 1950) आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक और वर्तमान में जमात-उद-दावा से सम्बंधित है। यह भारत की सर्वाधिक वांछित अपराधियों की सूची में शामिल है। मुंबई के 26/11 हमले में उसका हाथ होने की बात सामने आई थी जिसमें छह अमेरिकी नागरिक समेत 166 लोग मारे गए थे। उस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से उसे सौंपने को कहा था। अमेरिकी सरकार की ‘रिवाडर्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम की वेबसाइट पर बताया गया कि हाफिज़ सईद प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा का प्रमुख और चरमपंथी गुट लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है। अमेरिका द्वारा जारी, दुनिया में 'आंतकवाद के लिए जिम्मेदार' लोगों की सूची में हाफिज सईद का भी नाम है। 2012 से इसके ऊपर अमेरिका ने एक हजार करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है। - दैनिक जागरण - 31 अगस्त 2015 .

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हामिद मीर

हामिद मीर पाकिस्तान के एक प्रमुख पत्रकार, समाचार एंकर, आतंकवाद विशेषज्ञ और सुरक्षा विश्लेषक हैं। वे जियो टीवी से संपादक हैं तथा राजनीतिक टॉक शो कैपिटल टॉक ऑन जियो टीवी की मेजबानी करते हैं। इनको पाकिस्तान के मुक्त पत्रकारों में से एक माना जाता है, जियो टीवी एक अर्से से चले आ रहे अख़बार जंग का टीवी चैनल है। सन् २०११ में तालिबान की धमकी के बाद इनका बयान प्रसिद्ध हुआ था कि वो उनसे मिलने सिर्फ़ एक क़लम लेकर आएंगे। इन्होने ओसामा बिन लादेन, कोलिन पॉवेल और लाल कृष्ण आडवाणी का साक्षात्कार लिया हैं। .

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हामिद करज़ई

हामिद करज़ई (जन्म: २४ दिसम्बर १९५७) 2014 तक अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति रह चुके हैं। उनके पश्चात् अशरफ़ ग़नी अहमदज़ई ने यह पद संभाला। इनका जन्म दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में कंदहार में हुआ था। उनके पिता पोपलज़ई कबीले के पश्तून (पठान) थे और ज़ाहिर शाह मंत्रीमंडल के सदस्य थे। करज़ई ने स्नातकोत्तर की डिग्री १९७९-८३ के बीच राजनीति शास्त्र में भारत के हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से ली थी। .

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हामून

सन् १९७६ में अंतरिक्ष से ली गई इस तस्वीर में हेलमंद नदी द्वारा दश्त-ए-मारगो रेगिस्तान से गुज़रते हुए बनाए गए तीन हामून नज़र आ रहे हैं - ऊपर-दाएँ में हामून-ए-पुज़क, बाएँ में हामून-ए-सबरी, नीचे-बाएँ में हामून-ए-हेलमंद हामून (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Hamun) ईरान के पठार पर मौसमी तौर पर चाँद महीनों के लिए बन जाने वाली झीलों और दलदलों को कहा जाता है। यह ईरान और अफ़ग़ानिस्तान में और पाकिस्तान के पश्चिमी बलोचिस्तान प्रांत में बन जाते हैं। यह हामून क्षेत्रीय जानवरों, मछलियों और पक्षियों के जीवनक्रम में बहुत ही महत्वपूर्ण जगह रखते हैं। जब आम-तौर पर शुष्क रेगिस्तान में यह हामून बनते हैं तो कुछ अरसे के लिए वहाँ एक नख़लिस्तान (ओएसिस​) का वातावरण बन जाता है।, John Whitney, U.S. Geological Survey, 2006, Accessed 2010-08-31 कुछ मशहूर हामून इस प्रकार हैं -.

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हामून-ए-हेलमंद

सन् १९७६ में अंतरिक्ष से ली गई तस्वीर जिसमें ऊपर-दाएँ में हामून-ए-पुज़क, बाएँ में हामून-ए-सबरी, नीचे-बाएँ में हामून-ए-हेलमंद नज़र आ रहे हैं सन् २००१ में ली गई तस्वीर में तीनों हामून सूखे पड़े हैं हामून-ए-हेलमंद (अंग्रेज़ी: Hamun-e Helmand), जिसे दरियाचेह-ए-हामून (फ़ारसी) भी कहते हैं, पूर्वी ईरान के सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत में अफ़ग़ानिस्तान की सरहद के नज़दीक मौसमी तौर पर बन जानी वाली एक कम गहराई की दलदली झील है। यह हेलमंद नदी के पानी से बनती है जो अफ़ग़ानिस्तान के हिन्दू कुश पर्वतों से शुरू होती है। ईरान के पठार पर ऐसी अधिक प्रवाह वाले मौसम में भर जाने वाली झीलों को हामून कहा जाता है। १९७६ में अफ़ग़ानिस्तान से नदियाँ पूरे प्रवाह पर चला करती थी, जिस से यह झील भी फैलकर लगभग ४,००० वर्ग किमी तक विस्तृत हो जाया करती थी। १९९९ से २००१ के काल में सूखा पड़ा और झील क़रीब-क़रीब ग़ायब ही हो गई। उसके बाद से कभी बन जाती है और कभी नहीं। जब अफ़ग़ानिस्तान में सूखा पड़ता है या वहाँ हेलमंद का पानी रोक देने से प्रवाह कम होता है जो यहाँ रेत के बड़े टीले बन जाते हैं और पूरा रेगिस्तान लौट आता है। इस झील के किनारे कुछ मछुआरे गाँव हैं और इसके सूख जाने पर वह भी कभी-कभी रेत से ढके जाते हैं।, John Whitney, U.S. Geological Survey, 2006, Accessed 2010-08-31 .

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हारमोनियम

भारत-पाकिस्तान-अफ़्ग़ानिस्तान में लोकप्रीय हस्त-चालित शैली का एक हारमोनियम हारमोनियम (Harmonium) एक संगीत वाद्य यंत्र है जिसमें वायु प्रवाह किया जाता है और भिन्न चपटी स्वर पटलों को दबाने से अलग-अलग सुर की ध्वनियाँ निकलती हैं। इसमें हवा का बहाव पैरों, घुटनों या हाथों के ज़रिये किया जाता है, हालाँकि भारतीय उपमहाद्वीप में इस्तेमाल होने वाले हरमोनियमों में हाथों का प्रयोग ही ज़्यादा होता है। हारमोनियम का आविष्कार यूरोप में किया गया था और १९वीं सदी के बीच में इसे कुछ फ़्रांसिसी लोग भारत-पाकिस्तान क्षेत्र में लाए जहाँ यह सीखने की आसानी और भारतीय संगीत के लिए अनुकूल होने की वजह से जड़ पकड़ गया। हारमोनियम मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं। ये विभाजन संभवता उनके निर्माण स्थान अथवा निर्माण में पर्युक्त सामिग्री की गुणवत्ता के आधार पर होता है। इसके प्रकार है - १.ब्रिटिश २.जर्मन ३.खरज। अपने निर्माण की शैली या स्थान के अनुसार इनके स्वरों की मिठास में अंतर होता है जिसे योग्य संगीतज्ञ ही पहचान सकता है। हारमोनियम भारतीय शास्त्रीय संगीत का अभिन्न हिस्सा है। हारमोनियम को सरल शब्दों में "पेटी बाजा" भी कहा जाता है। .

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हार्ट ऑफ एशिया

हार्ट अॉफ एशिया: इसकी स्थापना 2 नंवबर 2011 को इस्तांबुल तुर्की में हुई थी इसका उद्देश्य अफगानिस्तान को स्थिरता व समृध्दि प्रदान करना और अफगानिस्तान के सहयोग के लिए स्थापित हार्ट ऑफ एशिया के सदस्य देशों की संख्ता 14 है यह संगठन क्षेत्रीय देशों के बीच संतुलन साधने तथा आपसी सहयोग बढ़ाने का काम भी करता है।17 सहयोगी देश और 12 सहायक और अंतरराष्ट्रीय संगठन भी सामिल है। वर्ष 2016 का उद्देश्यछठी हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन अमृतसर भारत में हुआ था इसका मुख्य उद्देश्य आंतकवाद को खत्म करना है। .

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हिन्द-पहलव साम्राज्य

हिन्द-पहलव साम्राज्य (Indo-Parthian Kingdom) गॉन्डोफर्नी वंश तथा अन्य शासकों, जो कि मुख्यतः मध्य एशिया के शासकों का समूह था, द्वारा प्रथम शताब्दी ईस्वी में शासित एक साम्राज्य था। इस साम्राज्य का विस्तार क्षेत्र वर्तमान में उत्तर-पश्चिमी भारत, पाकिस्तान तथा अफ़ग़ानिस्तान के हिस्सों में था। गॉन्डोफर्नी राजाओं ने अधिकांश समय तक्षशिला को अपनी राजधानी बनाया, मगर शासन के अंतिम समय में उनकी राजधानी काबुल व पेशावर के मध्य स्थानांतरित हो गयी। इनके सिक्के पहलवी साम्राज्य से प्रभावित थे इस कारण से इन्हें हिन्द-पहलव नाम से जाना गया। .

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हिन्द-आर्य भाषाएँ

हिन्द-आर्य भाषाएँ हिन्द-यूरोपीय भाषाओं की हिन्द-ईरानी शाखा की एक उपशाखा हैं, जिसे 'भारतीय उपशाखा' भी कहा जाता है। इनमें से अधिकतर भाषाएँ संस्कृत से जन्मी हैं। हिन्द-आर्य भाषाओं में आदि-हिन्द-यूरोपीय भाषा के 'घ', 'ध' और 'फ' जैसे व्यंजन परिरक्षित हैं, जो अन्य शाखाओं में लुप्त हो गये हैं। इस समूह में यह भाषाएँ आती हैं: संस्कृत, हिन्दी, उर्दू, बांग्ला, कश्मीरी, सिन्धी, पंजाबी, नेपाली, रोमानी, असमिया, गुजराती, मराठी, इत्यादि। .

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हिन्दको भाषा

हिन्दको (Hindko) पश्चिमोत्तरी पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत के हिन्दकोवी लोगों और अफ़ग़ानिस्तान के कुछ भागों में हिन्दकी लोगों द्वारा बोली जाने वाली एक हिंद-आर्य भाषा है। कुछ भाषावैज्ञानिकों के अनुसार यह पंजाबी की एक पश्चिमी उपभाषा है हालांकि इसपर कुछ विवाद भी रहा है। कुछ पश्तून लोग भी हिन्दको बोलते हैं। पंजाबी के मातृभाषी बहुत हद तक हिन्दको समझ-बोल सकते हैं।, Aydin Yücesan Durgunoğlu, Ludo Th Verhoeven, pp.

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हिन्दु कुश

हिन्दु कुश उत्तरी पाकिस्तान के विवादीत भाग से मध्य अफ़्ग़ानिस्तान तक विस्तृत एक ८०० किमी चलने वाली पर्वत शृंखला है। इसका सबसे ऊँचा पहाड़ पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त के चित्राल ज़िले में स्थित ७,७०८ मीटर (२५,२८९ फ़ुट) लम्बा तिरिच मीर पर्वत है।, Michael Palin, Basil Pao, Macmillan, 2005, ISBN 978-0-312-34162-6,...

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हिन्दुओं का उत्पीड़न

हिन्दुओं का उत्पीडन हिन्दुओं के शोषण, जबरन धर्मपरिवर्तन, सामूहिक नरसहांर, गुलाम बनाने तथा उनके धर्मस्थलो, शिक्षणस्थलों के विनाश के सन्दर्भ में है। मुख्यतः भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा मलेशिया आदि देशों में हिन्दुओं को उत्पीडन से गुजरना पड़ा था। आज भी भारतीय उपमहाद्वीप के कुछ हिस्सो में ये स्थिति देखने में आ रही है। .

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हिन्दी

हिन्दी या भारतीय विश्व की एक प्रमुख भाषा है एवं भारत की राजभाषा है। केंद्रीय स्तर पर दूसरी आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है। यह हिन्दुस्तानी भाषा की एक मानकीकृत रूप है जिसमें संस्कृत के तत्सम तथा तद्भव शब्द का प्रयोग अधिक हैं और अरबी-फ़ारसी शब्द कम हैं। हिन्दी संवैधानिक रूप से भारत की प्रथम राजभाषा और भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। हालांकि, हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है क्योंकि भारत का संविधान में कोई भी भाषा को ऐसा दर्जा नहीं दिया गया था। चीनी के बाद यह विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा भी है। विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार यह विश्व की दस शक्तिशाली भाषाओं में से एक है। हिन्दी और इसकी बोलियाँ सम्पूर्ण भारत के विविध राज्यों में बोली जाती हैं। भारत और अन्य देशों में भी लोग हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं। फ़िजी, मॉरिशस, गयाना, सूरीनाम की और नेपाल की जनता भी हिन्दी बोलती है।http://www.ethnologue.com/language/hin 2001 की भारतीय जनगणना में भारत में ४२ करोड़ २० लाख लोगों ने हिन्दी को अपनी मूल भाषा बताया। भारत के बाहर, हिन्दी बोलने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका में 648,983; मॉरीशस में ६,८५,१७०; दक्षिण अफ्रीका में ८,९०,२९२; यमन में २,३२,७६०; युगांडा में १,४७,०००; सिंगापुर में ५,०००; नेपाल में ८ लाख; जर्मनी में ३०,००० हैं। न्यूजीलैंड में हिन्दी चौथी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसके अलावा भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों में १४ करोड़ १० लाख लोगों द्वारा बोली जाने वाली उर्दू, मौखिक रूप से हिन्दी के काफी सामान है। लोगों का एक विशाल बहुमत हिन्दी और उर्दू दोनों को ही समझता है। भारत में हिन्दी, विभिन्न भारतीय राज्यों की १४ आधिकारिक भाषाओं और क्षेत्र की बोलियों का उपयोग करने वाले लगभग १ अरब लोगों में से अधिकांश की दूसरी भाषा है। हिंदी हिंदी बेल्ट का लिंगुआ फ़्रैंका है, और कुछ हद तक पूरे भारत (आमतौर पर एक सरल या पिज्जाइज्ड किस्म जैसे बाजार हिंदुस्तान या हाफ्लोंग हिंदी में)। भाषा विकास क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी हिन्दी प्रेमियों के लिए बड़ी सन्तोषजनक है कि आने वाले समय में विश्वस्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व की जो चन्द भाषाएँ होंगी उनमें हिन्दी भी प्रमुख होगी। 'देशी', 'भाखा' (भाषा), 'देशना वचन' (विद्यापति), 'हिन्दवी', 'दक्खिनी', 'रेखता', 'आर्यभाषा' (स्वामी दयानन्द सरस्वती), 'हिन्दुस्तानी', 'खड़ी बोली', 'भारती' आदि हिन्दी के अन्य नाम हैं जो विभिन्न ऐतिहासिक कालखण्डों में एवं विभिन्न सन्दर्भों में प्रयुक्त हुए हैं। .

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हिम तेन्दुआ

हिम तेन्दुआ (Uncia uncia) एक विडाल प्रजाति है जो मध्य एशिया में रहती है। यद्यपि हिम तेन्दुए के नाम में "तेन्दुआ" है लेकिन यह एक छोटे तेन्दुए के समान दिखता है और इनमें आपसी सम्बन्ध नहीं है। .

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हिमालय का रामचकोर

हिमालय का रामचकोर (Himalayan Snowcock) (Tetraogallus himalayensis) फ़ैज़ैन्ट कुल का एक पक्षी है। यह हिमालय पर्वतमाला में व्यापक रूप से और पामीर पर्वतमाला में कुछ जगहों में पाया जाता है। यह वृक्ष रेखा से ऊपर अल्पाइन चारागाह तथा खड़ी ढाल वाली चट्टानों में पाया जाता है जहाँ से ख़तरा होने पर यह नीचे की ओर लुढ़क जाता है। तिब्बती रामचकोर इससे कुछ छोटा होता है और हिमालय के कुछ इलाकों में यह दोनों परस्पर व्याप्त हैं। विभिन्न इलाकों में इनकी रंगत कुछ भिन्न होती है और इस आधार पर इनको चार उपजातियों में विभाजित किया गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के नेवाडा राज्य में इनको प्रचलित किया गया था जहाँ इन्होंने अपने पैर जमा लिए हैं। .

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हिमालयी मोनाल

हिमालयी मोनाल (Himalayan monal) (Lophophorus impejanus) जिसे नेपाल और उत्तराखंड में डाँफे के नाम से जानते हैं। यह पक्षी हिमालय पर पाये जाते हैं। यह नेपाल का राष्ट्रीय पक्षी और उत्तराखण्ड का "राज्य पक्षी" है। .

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हज़ारा लोग

हज़ारा (Hazara) मध्य अफ़्ग़ानिस्तान में बसने वाला और दरी फ़ारसी की हज़ारगी उपभाषा बोलने वाला एक समुदाय है। यह लगभग सारे शिया इस्लाम के अनुयायी होते हैं और अफ़्ग़ानिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा समुदाय हैं। अफ़्ग़ानिस्तान में इनकी जनसँख्या को लेकर विवाद है और यह २६ लाख से ५४ लाख के बीच में मानी जाती है। कुल मिलकर यह अफ़्ग़ानिस्तान की कुल आबादी का लगभग १८% हिस्सा हैं। पड़ोस के ईरान और पाकिस्तान देशों में भी इनके पाँच-पाँच लाख लोग बसे हुए हैं। पाकिस्तान में यह अधिकतर शरणार्थी के रूप में जाने पर मजबूर हो गए थे और अधिकतर क्वेट्टा शहर में बसे हुए हैं। जब अफ़्ग़ानिस्तान में तालिबान सत्ता में थी तो उन्होने हज़ारा लोगों पर उनके शिया होने की वजह से बड़ी कठोरता से शासन किया था, जिस से बामियान प्रान्त और दायकुंदी प्रान्त जैसे हज़ारा-प्रधान क्षेत्रों में भुखमरी और अन्य विपदाएँ फैली थीं।, Tom Lansford, Ashgate Publishing, Ltd., 2003, ISBN 978-0-7546-3615-1,...

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हज़ाराजात

हज़ाराजात (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Hazarajat, हज़ारगी), जिसे हज़ारिस्तान भी कहा जाता है, हज़ारा लोगों की मध्य अफ़ग़ानिस्तान में स्थित मातृभूमि है। यह हिन्दू कुश पर्वतों के पश्चिमी भाग में कोह-ए-बाबा श्रृंखला में विस्तृत है। उत्तर में बामयान द्रोणी, दक्षिण में हेलमंद नदी, पश्चिम में फिरूज़कुह पहाड़ और पूर्व में उनई दर्रा इसकी सरहदें मानी जाती हैं। पश्तून क़बीलों द्वारा हमलों के कारण इसकी सरहदें समय-समय पर बदलती रहीं हैं।, Arash Khazeni, Encyclopedia Iranica, Accessed September 15, 2011 बामयान और दायकुंदी प्रांत लगभग पूरे-के-पूरे हज़ाराजात में आते हैं, जबकि बग़लान, हेलमंद, ग़ज़नी, ग़ोर, ओरूज़्गान, परवान, समंगान, सर-ए-पोल और मैदान वरदक प्रान्तों के बड़े हिस्से भी इसका भाग माने जाते हैं।, Indiana University, 1997 .

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हज़ारगी भाषा

हज़ारगी में हज़ारगी भाषा का नाम, जो 'आज़रगी' लिखा जाता है हज़ारगी अफ़ग़ानिस्तान में हज़ारा लोगों द्वारा बोली जाने वाली फ़ारसी भाषा का एक रूप है। यह सब से ज़्यादा मध्य अफ़ग़ानिस्तान के हज़ाराजात नामक क्षेत्र में बोली जाती है। हज़ारा लोग इस भाषा को आम तौर पर आज़रगी बोलते हैं। हज़ारगी बोलने वालों की संख्या १८ से २२ लाख अनुमानित की गई है।, Franz Schurmann, pp.

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हजारा लोगों का उत्पीड़न

हजारा लोगों के उत्पीड़न से आशय हजारा लोगों के विरुद्ध भाँतिभांति के भेदभाव से है। हजारा लोग मुख्यतः अफगानिस्तान के हज़ाराजात के निवासी हैं किन्तु एक बड़ी संख्या पाकिस्तान के क्वेटा में तथा इरान के मसाद में भी रहती है। हजारा लोगों का उत्पीदन का इतिहास बहुत पुराना है और यह १६वीं शताब्दी में बाबर से आरम्भ होता है जो काबुलिस्तान का निवासी था। .

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हुन्ज़ा

हुन्ज़ा (ہنزہ) पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्र के उत्तरतम भाग में स्थित १९७४ तक एक रजवाड़ा था। इस रजवाड़े के दक्षिण में गलगत एजेंसी, पूर्व में नागर रजवाड़ा, उत्तर में चीनी तुर्किस्तान और उत्तर पश्चिम में अफगानिस्तान है। राज्य की राजधानी बाल्तित है (जिसे करीमाबाद भी कहा जाता है)। .

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हुन्ज़ा-नगर ज़िला

हुन्ज़ा-नगर ज़िला​ पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बलतिस्तान क्षेत्र का एक ज़िला है। इसकी राजधानी अलियाबाद शहर है। २०१० तक यह ज़िला गिलगित ज़िले का हिस्सा हुआ करता था। यह हुन्ज़ा रियासत और नगर रियासत नामक दो भूतपूर्व रियासतों को मिलाकर बना है। .

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हुमायूँ

मिर्जा मुहम्मद हाकिम, पुत्र अकीकेह बेगम, पुत्री बख्शी बानु बेगम, पुत्री बख्तुन्निसा बेगम, पुत्री | --> हुमायूँ एक मुगल शासक था। प्रथम मुग़ल सम्राट बाबर के पुत्र नसीरुद्दीन हुमायूँ (६ मार्च १५०८ – २२ फरवरी, १५५६) थे। यद्यपि उन के पास साम्राज्य बहुत साल तक नही रहा, पर मुग़ल साम्राज्य की नींव में हुमायूँ का योगदान है। बाबर की मृत्यु के पश्चात हुमायूँ ने १५३० में भारत की राजगद्दी संभाली और उनके सौतेले भाई कामरान मिर्ज़ा ने काबुल और लाहौर का शासन ले लिया। बाबर ने मरने से पहले ही इस तरह से राज्य को बाँटा ताकि आगे चल कर दोनों भाइयों में लड़ाई न हो। कामरान आगे जाकर हुमायूँ के कड़े प्रतिद्वंदी बने। हुमायूँ का शासन अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तर भारत के हिस्सों पर १५३०-१५४० और फिर १५५५-१५५६ तक रहा। भारत में उन्होने शेरशाह सूरी से हार पायी। १० साल बाद, ईरान साम्राज्य की मदद से वे अपना शासन दोबारा पा सके। इस के साथ ही, मुग़ल दरबार की संस्कृति भी मध्य एशियन से इरानी होती चली गयी। हुमायूँ के बेटे का नाम जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर था। .

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हुमायूँ का मकबरा

हुमायूँ का मकबरा इमारत परिसर मुगल वास्तुकला से प्रेरित मकबरा स्मारक है। यह नई दिल्ली के दीनापनाह अर्थात् पुराने किले के निकट निज़ामुद्दीन पूर्व क्षेत्र में मथुरा मार्ग के निकट स्थित है। गुलाम वंश के समय में यह भूमि किलोकरी किले में हुआ करती थी और नसीरुद्दीन (१२६८-१२८७) के पुत्र तत्कालीन सुल्तान केकूबाद की राजधानी हुआ करती थी। यहाँ मुख्य इमारत मुगल सम्राट हुमायूँ का मकबरा है और इसमें हुमायूँ की कब्र सहित कई अन्य राजसी लोगों की भी कब्रें हैं। यह समूह विश्व धरोहर घोषित है- अभिव्यक्ति। १७ अप्रैल २०१०।, एवं भारत में मुगल वास्तुकला का प्रथम उदाहरण है। इस मक़बरे में वही चारबाग शैली है, जिसने भविष्य में ताजमहल को जन्म दिया। यह मकबरा हुमायूँ की विधवा बेगम हमीदा बानो बेगम के आदेशानुसार १५६२ में बना था। इस भवन के वास्तुकार सैयद मुबारक इब्न मिराक घियाथुद्दीन एवं उसके पिता मिराक घुइयाथुद्दीन थे जिन्हें अफगानिस्तान के हेरात शहर से विशेष रूप से बुलवाया गया था। मुख्य इमारत लगभग आठ वर्षों में बनकर तैयार हुई और भारतीय उपमहाद्वीप में चारबाग शैली का प्रथम उदाहरण बनी। यहां सर्वप्रथम लाल बलुआ पत्थर का इतने बड़े स्तर पर प्रयोग हुआ था। १९९३ में इस इमारत समूह को युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। इस परिसर में मुख्य इमारत मुगल सम्राट हुमायूँ का मकबरा है। हुमायूँ की कब्र के अलावा उसकी बेगम हमीदा बानो तथा बाद के सम्राट शाहजहां के ज्येष्ठ पुत्र दारा शिकोह और कई उत्तराधिकारी मुगल सम्राट जहांदर शाह, फर्रुख्शियार, रफी उल-दर्जत, रफी उद-दौलत एवं आलमगीर द्वितीय आदि की कब्रें स्थित हैं। देल्ही थ्रु एजेज़। एस.आर.बख्शी। प्रकाशक:अनमोल प्रकाशन प्रा.लि.। १९९५।ISBN 81-7488-138-7। पृष्ठ:२९-३५ इस इमारत में मुगल स्थापत्य में एक बड़ा बदलाव दिखा, जिसका प्रमुख अंग चारबाग शैली के उद्यान थे। ऐसे उद्यान भारत में इससे पूर्व कभी नहीं दिखे थे और इसके बाद अनेक इमारतों का अभिन्न अंग बनते गये। ये मकबरा मुगलों द्वारा इससे पूर्व निर्मित हुमायुं के पिता बाबर के काबुल स्थित मकबरे बाग ए बाबर से एकदम भिन्न था। बाबर के साथ ही सम्राटों को बाग में बने मकबरों में दफ़्न करने की परंपरा आरंभ हुई थी। हिस्ट‘ओरिक गार्डन रिव्यु नंबर १३, लंदन:हिस्टॉरिक गार्डन फ़ाउडेशन, २००३ अपने पूर्वज तैमूर लंग के समरकंद (उज़्बेकिस्तान) में बने मकबरे पर आधारित ये इमारत भारत में आगे आने वाली मुगल स्थापत्य के मकबरों की प्रेरणा बना। ये स्थापत्य अपने चरम पर ताजमहल के साथ पहुंचा। .

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हुविष्क

हुविष्क की स्वर्ण मुद्राएँ हुविष्क कुषाण वंश का शासक था जो कनिष्क की मृत्यु के बाद सिंहासन पर बैठा (लगभग १४० ई)। .

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हेरात

हेरात हेरात (पश्तो:, अंग्रेजी: Herat) अफ़्ग़ानिस्तान का एक नगर है और हेरात प्रान्त की राजधानी भी है। यह देश के पश्चिम में है और ऐतिहासिक महत्व के शहर है। यह वृहत ख़ोरासान क्षेत्र का हिस्सा है और सबसे बड़ा शहर भी। रेशम मार्ग पर स्थित होने के कारण यह वाणिज्य का केन्द्र रहा है जहाँ से भारत और चीन से पश्चिमी देशों का व्यापार होता रहा है। पारसी ग्रंथ अवेस्ता में इसका ज़िक्र मिलता है। ईसा के पूर्व पाँचवीं सदी के हख़ामनी काल से ही यह एक संपन्न शहर रहा है। यहाँ इस्लाम सातवीं सदी के मध्य में आया जिसके बाद कई विद्रोह हुए। हेरात हरी नदी (हरीरूद) के किनारे बसा हुआ है। .

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हेरात प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का हेरात प्रान्त (लाल रंग में) हेरात प्रान्त में कुछ बच्चियाँ हेरात (पश्तो:, अंग्रेजी: Herat) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पश्चिम में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ५४,७७८ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००६ में लगभग १७.६ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी ऐतिहासिक हेरात शहर है। अफ़्ग़ानिस्तान के अन्य प्रान्तों के अलावा, हेरात प्रान्त की सरहदें ईरान और तुर्कमेनिस्तान को भी लगती हैं। इस प्रान्त के लगभग ६०% लोग फ़ारसी-भाषी ताजिक समुदाय से हैं। यहाँ पश्तून लोग भी हैं, जिनमें से बहुत से ख़ानाबदोश चरवाहे हैं।, Neamatollah Nojumi, Dyan E. Mazurana, Elizabeth Stites, Rowman & Littlefield, 2009, ISBN 978-0-7425-4032-3,...

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हेलमंद नदी

हेलमंद नदी के मार्ग का मानचित्र अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद प्रान्त में हेलमंद नदी एक तंग घाटी से गुज़रती हुई हेलमंद नदी पर लगा कजकी बाँध हेलमंद नदी (पश्तो: हीरमंद दरिया या हेलमंद दरिया) अफ़्गानिस्तान की सबसे लम्बी नदी है.

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हेलमंद प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का हेलमंद प्रान्त (लाल रंग में) हेलमंद प्रान्त में कुछ बच्चे हेलमंद (पश्तो:, अंग्रेजी: Helmand) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ५८,५८४ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००६ में लगभग १४.४ लाख अनुमानित की गई थी। हेलमंद के लगभग ९०% लोग पश्तून समुदाय के हैं।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी लश्कर गाह शहर है। वैसे तो यह इलाक़ा रेगिस्तानी है लेकिन हेलमंद नदी यहाँ से निकलती है और उसका पानी फ़सलों के लिए बहुत लाभदायक होता है। यह ग़ैर-क़ानूनी अफ़ीम की पैदावार का भी बहुत बड़ा केंद्र है और विश्व की ७५% अफ़ीम यहीं पैदा होती है। .

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जनसंख्या घनत्व के अनुसार देशों की सूची

जनसँख्या घनत्व2006 के अनुसार जनसँख्या घनत्व के अनुसार देश एवं उनके निर्भर क्षेत्रों की सूची निवासी/वर्ग किमी में। स्त्रोत:.

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जमरूद किला

जमरूद किला ख़ैबर दर्रे के मुख पर स्थित बाब-ए-ख़ैबर के पास स्थित एक क़िला है। प्रशासनिक रूप से यह पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा के संघ-शासित जनजातीय क्षेत्र में पड़ता है। .

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जम्मू और कश्मीर

जम्मू और कश्मीर भारत के सबसे उत्तर में स्थित राज्य है। पाकिस्तान इसके उत्तरी इलाके ("पाक अधिकृत कश्मीर") या तथाकथित "आज़ाद कश्मीर" के हिस्सों पर क़ाबिज़ है, जबकि चीन ने अक्साई चिन पर कब्ज़ा किया हुआ है। भारत इन कब्ज़ों को अवैध मानता है जबकि पाकिस्तान भारतीय जम्मू और कश्मीर को एक विवादित क्षेत्र मानता है। राज्य की आधिकारिक भाषा उर्दू है। जम्मू नगर जम्मू प्रांत का सबसे बड़ा नगर तथा जम्मू-कश्मीर राज्य की जाड़े की राजधानी है। वहीं कश्मीर में स्थित श्रीनगर गर्मी के मौसम में राज्य की राजधानी रहती है। जम्मू और कश्मीर में जम्मू (पूंछ सहित), कश्मीर, लद्दाख, बल्तिस्तान एवं गिलगित के क्षेत्र सम्मिलित हैं। इस राज्य का पाकिस्तान अधिकृत भाग को लेकर क्षेत्रफल 2,22,236 वर्ग कि॰मी॰ एवं उसे 1,38,124 वर्ग कि॰मी॰ है। यहाँ के निवासियों अधिकांश मुसलमान हैं, किंतु उनकी रहन-सहन, रीति-रिवाज एवं संस्कृति पर हिंदू धर्म की पर्याप्त छाप है। कश्मीर के सीमांत क्षेत्र पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सिंक्यांग तथा तिब्बत से मिले हुए हैं। कश्मीर भारत का महत्वपूर्ण राज्य है। .

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जलालाबाद

जदीद जलाल आबाद की एक निशानी जलाल आबाद- मशरक़ी अफ़ग़ानिस्तान का एक शहर (अंग्रेज़ी: Jalal Abad, पश्तो:جلال ابادजलाल अब्बाद) ये शहर अफ़ग़ानिस्तान में दरयाऐ काबुल और दरयाऐ किनार या कन्नड़ के संगम पर वाक़िअ है। वादी लग़मान में ये शहर अफ़ग़ानिस्तान के सूबा ननिग्रहअर का सदर मुक़ाम भी है। जलाल आबाद काबुल से मशरिक़ की जानिब 95 मेल के फ़ासले पर वाक़िअ है, इतना ही फासला पिशावर (पाकिस्तान) से जलाल आबाद की तरफ़ मग़रिब की जानिब है। जलाल आबाद मशरक़ी अफ़ग़ानिस्तान में वाक़िअ सब से बड़ा शहर है और इसी लिहाज़ से इस इलाके का समाजी ओ- तिजारती मरकज़ भी है। काग़ज़ की सनअत, फलों की पैदावार, चावल और गिने की पैदावार के लिए ये शहर शौहरत रखता है। पाकिस्तान और भारत के साथ वुस़्त एशियाई रियासतों की तिजारत के लिए जलाल आबाद कलीदी एहमीयत रखता है। .

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जलालाबाद, अफगानिस्तान

अफगानिस्तान का मानचित्र जलालाबाद, अफगानिस्तान अफगानिस्तान का एक शहर है। .

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जलालुद्दीन ख्वारिज्म शाह

उरगेन्च में जलालुद्दीन का स्मारक जलालुद्दीन ख्वारिज़्म शाह ख्वारिज्मी साम्राज्य का अन्तिम शासक था। .

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ज़रंज

ईरान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा के नज़दीक ज़रंज-देलाराम राजमार्ग पर ज़रंज (बलोच, पश्तो, फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Zaranj) दक्षिण-पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान के नीमरूज़ प्रान्त की राजधानी है। यह ईरान की सरहद के बहुत पास है और ईरान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर एक महत्वपूर्ण चौकी है। यह राजमार्गों द्वारा पूर्व में लश्कर गाह से, उत्तर में फ़राह से और पश्चिम में ईरान के ज़ाबोल नगर से जुड़ा हुआ है। भारत ने अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए ज़रंज से देलाराम के बीच एक राजमार्ग बनाया था। .

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ज़ाबुल प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का ज़ाबुल प्रान्त (लाल रंग में) ज़ाबुल (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Zabul) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के दक्षिण में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल १७,३४३ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग २.८ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी क़लात नामक शहर है। यहाँ के अधिकतर लोग पश्तून हैं। ज़ाबुल प्रान्त सन् १९६३ में पड़ोसी कंदहार प्रान्त को बांटकर बनाया गया था। इसकी दक्षिणी सरहद पाकिस्तान से लगती है। .

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ज़ेवियर पेरिज डी कुईयार

ज़ेवियर पेरिज डी कुईयार (जन्म: 19 जनवरी 1920) पेरू के राजनयिक हैं, जिन्होने संयुक्त राष्ट्र के पांचवें महासचिव के रूप में संयुक्त राष्ट्र की 1 जनवरी 1982 से 31 दिसम्बर 1991 तक सेवा की। 1995 में वे पेरू के राष्ट्रपति के पद के चुनाव में अल्बर्टो फुजीमोरी से हार गए थे। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे फुजीमोरी के इस्तीफे के बाद के अशांत माहौल में वे मंत्रिपरिषद के अध्यक्ष होने के साथ-साथ नवंबर 2000 से जुलाई 2001 तक विदेश मंत्री का भी दायित्व संभाला। सितम्बर 2004 में उन्होंने फ्रांस (जहां वे आधिकारिक रूप से रहते थे) में पेरू के राजदूत के रूप में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जून 2007 में कुर्त वॉल्डहाइम की मौत के बाद वे सबसे अधिक उम्र के संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बन गए। वर्ष 1987 में इन्हें जवाहर लाल नेहरू पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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ज़ोफ़ार मुहाफ़ज़ाह

ज़ोफ़ार मुहाफ़ज़ाह (अरबी:, अंग्रेज़ी: Dhofar) ओमान का एक मुहाफ़ज़ाह (उच्च-स्तरीय प्रशासनिक विभाग) है।, Ministry of Information, Government of Oman, Accessed: 11 नवम्बर 2012 .

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ज़ोरकुल सरोवर

थोमस एडवर्ड गार्डन द्वारा १८७४ में बनाया गया ज़ोरकुल सरोवर का एक दृश्य ज़ोरकुल सरोवर, जिसे सर-ए-कोल सरोवर भी कहते हैं, पामीर पर्वतमाला में अफ़्गानिस्तान और ताजिकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित एक झील है। पूर्व से पश्चिम तक फैली इस झील की लम्बाई लगभग २५ किमी है। मध्य एशिया की प्रसिद्ध नदी आमू दरिया इसी सरोवर से शुरू होती है।, Lev Semenovich Berg, Macmillan, 1950,...

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जातीय समूह

जातीय समूह मनुष्यों का एक ऐसा समूह होता है जिसके सदस्य किसी वास्तविक या कल्पित सांझी वंश-परंपरा के माध्यम से अपने आप को एक नस्ल के वंशज मानते हैं।1987 स्मिथ यह सांझी विरासत वंशक्रम, इतिहास, रक्त-संबंध, धर्म, भाषा, सांझे क्षेत्र, राष्ट्रीयता या भौतिक रूप-रंग (यानि लोगों की शक्ल-सूरत) पर आधारित हो सकती है। एक जातीय समूह के सदस्य अपने एक जातीय समूह से संबंधित होने से अवगत होते हैं; इसके अलावा जातीय पहचान दूसरों द्वारा उस समूह की विशिष्टता के रूप में पहचाने जाने से भी चिह्नित होती है।"एन्थ्रोपोलोजी.

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जावेद अहमदी

जावेद अहमदी अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम के एक खिलाड़ी है जिनका जन्म २ जनवरी १९९२ में कुंदूज़ में हुआ था। ये मुख्य रूप से ऊपरी क्रम के बल्लेबाजों में गिने जाते है। जावेद अहमदी ने अपने एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कैरियर की शुरुआत साल २०१० में स्कॉटलैंड क्रिकेट टीम के खिलाफ की थी जबकि पहला ट्वेन्टी ट्वेन्टी १४ मार्च २०१२ में नीदरलैंड क्रिकेट टीम के खिलाफ खेला था। इन्हें २०१८ के अफगानिस्तान के भारत दौरे पर टेस्ट क्रिकेट टीम में भी शामिल किया है जो अफगानिस्तान का पहला टेस्ट होगा। .

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जिमी कार्टर

जिमी कार्टर (Jimmy Carter) (पूरा नाम जेम्स अर्ल कार्टर जूनियर (अंग्रेज़ी: James Earl Jr.)) (जन्म अक्टूबर 1, 1924) एक अमेरिकी राजनेता हैं जो 1976 से 1980 तक संयुक्त राज्य अमेरिका के 39वें राष्ट्रपति रहे। राष्ट्रपति बनने से पहले वे संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना में कार्यरत रहे, जॉर्जिया में सेनेटर रहे और जॉर्जिया के गवर्नर भी रहे। राष्ट्रपति कार्यकाल के बाद वे मानव अधिकार संस्थाओं एवं परोपकारी संस्थाओं के साथ जुड़े रहे। उन्हें 2002 में नोबेल शान्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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जुमा मस्जिद हैरात

जुमा मस्जिद है रात जामा मस्जिद, जिसे हैरात की मस्जिद-आई जामी के नाम से भी जाना जाता है, और हेरात की महान मस्जिद हेरात शहर में स्थित है हेरात प्रांत में मस्जिद महान शासक ग्यासउद्दीन गोरी द्वारा बनायी गयी थी, जिन्होंने 1200 ईस्वी में इसकी नींव रखी और बाद में कई शासकों द्वारा विस्तारित किया क्योंकि हेरात ने सदियों तक हेरात अलग अलग साम्राज्यो का केन्द्र रहा है। .

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जुलाई २०१०

भारतीय रुपये का नया प्रतीक-चिह्न.

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जुलाई २०१६ काबुल हमला

२३ जुलाई २०१६ को अफ़्गानिस्तान की राजधानी काबुल में दो बम धमाके हुए जिसमें तकरीबन ८० लोग मारे गए। यह हमले देहमजांग चौक पर हुए जहां हज़ारा समुदाय के लोग प्रदर्शन कर रहे थे। हमले में कुल ८० लोगों के मरने के अलावा २६० लोग घायल भी हुए हैं। हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने अपने ऊपर ली है। .

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जॉन रॉबर्ट्स

जॉन ग्लोवर रॉबर्ट्स, जूनियर (जन्म 27 जनवरी 1955) संयुक्त राज्य अमेरिका के 17वें और वर्तमान मुख्य न्यायाधीश हैं। मुख्य न्यायाधीश विलियम रैनक्विस्ट की मृत्यु के पश्चात राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश द्वारा नामित किये जाने के बाद से वे वर्ष 2005 से सेवारत हैं। अपने न्यायशास्त्र में वे रूढ़िवादी न्यायिक दर्शन शास्त्र के पक्षधर माने जाते हैं। रॉबर्ट्स उत्तरी इंडियाना में पले-बढ़े हैं एवं हार्वर्ड कॉलेज एवं हार्वर्ड लॉ स्कूल में प्रवेश के पूर्व, जहां वे हार्वर्ड लॉ रिव्यू के प्रबंध संपादक थे, उन्होंने निजी विद्यालय में शिक्षा ग्रहण की है। रीगन प्रशासन के दौरान महान्यायवादी (अटार्नी जनरल) कार्यालय में सेवा के पूर्व बार में प्रवेश लेने के बाद उन्होंने विलियम रेनक्विस्ट के लॉ क्लर्क के रूप में कार्य किया। 14 वर्ष तक निजी रूप से कानून का अभ्यास करने के पूर्व उन्होंने रीगन प्रशासन और जॉर्ज एच.डब्ल्यू.

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जोज़जान प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का जोज़जान प्रान्त (लाल रंग में) जोज़जान (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Jowzjan) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के उत्तर में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ११,७९८ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग ४.९ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी शबरग़ान शहर है। इस प्रान्त के लगभग ४०% लोग उज़बेक जाति के हैं और वही सबसे बड़ा समुदाय हैं। उनके अलावा यहाँ तुर्कमेनी (२९%), पश्तून (१७%) और ताजिक (१२%) भी बसते हैं। उत्तर में जोज़जान की तुर्कमेनिस्तान के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा है। .

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ईरान

ईरान (جمهوری اسلامی ايران, जम्हूरीए इस्लामीए ईरान) जंबुद्वीप (एशिया) के दक्षिण-पश्चिम खंड में स्थित देश है। इसे सन १९३५ तक फारस नाम से भी जाना जाता है। इसकी राजधानी तेहरान है और यह देश उत्तर-पूर्व में तुर्कमेनिस्तान, उत्तर में कैस्पियन सागर और अज़रबैजान, दक्षिण में फारस की खाड़ी, पश्चिम में इराक और तुर्की, पूर्व में अफ़ग़ानिस्तान तथा पाकिस्तान से घिरा है। यहां का प्रमुख धर्म इस्लाम है तथा यह क्षेत्र शिया बहुल है। प्राचीन काल में यह बड़े साम्राज्यों की भूमि रह चुका है। ईरान को १९७९ में इस्लामिक गणराज्य घोषित किया गया था। यहाँ के प्रमुख शहर तेहरान, इस्फ़हान, तबरेज़, मशहद इत्यादि हैं। राजधानी तेहरान में देश की १५ प्रतिशत जनता वास करती है। ईरान की अर्थव्यवस्था मुख्यतः तेल और प्राकृतिक गैस निर्यात पर निर्भर है। फ़ारसी यहाँ की मुख्य भाषा है। ईरान में फारसी, अजरबैजान, कुर्द और लूर सबसे महत्वपूर्ण जातीय समूह हैं .

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ईरान का पठार

ईरान का पठार पश्चिमी एशिया और मध्य एशिया का एक भौगोलिक क्षेत्र है। यह पठार अरबी प्लेट और भारतीय प्लेट के बीच में स्थित यूरेशियाई प्लेट के एक कोने पर स्थित है। इसके पश्चिम में ज़ाग्रोस पर्वत, उत्तर में कैस्पियन सागर व कोपेत दाग़ (पर्वतमाला), पश्चिमोत्तर में आर्मेनियाई उच्चभूमि व कॉकस पर्वतमाला, दक्षिण में होरमुज़ जलसन्धि व फ़ारस की खाड़ी और पूर्व में सिन्धु नदी है। पश्चिमोत्तर में कैस्पियन सागर से लेकर दक्षिणपश्चिम में बलोचिस्तान तक ईरान का पठार लगभग २,००० किमी तक विस्तृत है। ईरान व अफ़्ग़ानिस्तान का अधिकतर भाग और पाकिस्तान का सिन्धु नदी से पश्चिम का भाग इसी पठार का हिस्सा है। पठार को एक चकोर के रूप में देखा जाये तो तबरेज़, शिराज़, पेशावर और क्वेटा उसके चार कोनों पर हैं और इसमें कुल मिलाकर ३७,००,००० वर्ग किमी क्षेत्रफल है। पठार कहलाये जाने के बावजूद इस पठार पर वास्तव में कई पर्वतमालाएँ हैं जिनका सबसे ऊँचा शिखर अल्बोर्ज़ पर्वतमाला का ५,६१० मीटर लम्बा दामावन्द पर्वत है और सब्से निचला बिन्दु मध्य ईरान में कर्मान नगर से पूर्व लूत द्रोणी में ३०० मीटर से नीचे स्थित है। .

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ईरान का इतिहास

सुसा में दारुश (दारा) के महल के बाहर बने "अमर सेनानी"। यह उपाधि कुछ चुनिन्दा सैनिकों को दी जाती थी जो महल रक्षा तथा साम्राज्य विस्तार में प्रमुख माने जाते थे। ईरान का पुराना नाम फ़ारस है और इसका इतिहास बहुत ही नाटकीय रहा है जिसमें इसके पड़ोस के क्षेत्र भी शामिल रहे हैं। इरानी इतिहास में साम्राज्यों की कहानी ईसा के ६०० साल पहले के हख़ामनी शासकों से शुरु होती है। इनके द्वारा पश्चिम एशिया तथा मिस्र पर ईसापूर्व 530 के दशक में हुई विजय से लेकर अठारहवीं सदी में नादिरशाह के भारत पर आक्रमण करने के बीच में कई साम्राज्यों ने फ़ारस पर शासन किया। इनमें से कुछ फ़ारसी सांस्कृतिक क्षेत्र के थे तो कुछ बाहरी। फारसी सास्कृतिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में आधुनिक ईरान के अलावा इराक का दक्षिणी भाग, अज़रबैजान, पश्चिमी अफगानिस्तान, ताजिकिस्तान का दक्षिणी भाग और पूर्वी तुर्की भी शामिल हैं। ये सब वो क्षेत्र हैं जहाँ कभी फारसी सासकों ने राज किया था और जिसके कारण उनपर फारसी संस्कृति का प्रभाव पड़ा था। सातवीं सदी में ईरान में इस्लाम आया। इससे पहले ईरान में जरदोश्त के धर्म के अनुयायी रहते थे। ईरान शिया इस्लाम का केन्द्र माना जाता है। कुछ लोगों ने इस्लाम कबूल करने से मना कर दिया तो उन्हें यातनाएं दी गई। इनमें से कुछ लोग भाग कर भारत के गुजरात तट पर आ गए। ये आज भी भारत में रहते हैं और इन्हें पारसी कहा जाता है। सूफ़ीवाद का जन्म और विकास ईरान और संबंधित क्षेत्रों में ११वीं सदी के आसपास हुआ। ईरान की शिया जनता पर दमिश्क और बग़दाद के सुन्नी ख़लीफ़ाओं का शासन कोई ९०० साल तक रहा जिसका असर आज के अरब-ईरान रिश्तों पर भी देखा जा सकता है। सोलहवीं सदी के आरंभ में सफ़वी वंश के तुर्क मूल लोगों के सत्ता में आने के बाद ही शिया लोग सत्ता में आ सके। इसके बाद भी देश पर सुन्नियों का शासन हुआ और उन शासकों में नादिर शाह तथा कुछ अफ़ग़ान शासक शामिल हैं। औपनिवेशक दौर में ईरान पर किसी यूरोपीय शक्ति ने सीधा शासन तो नहीं किया पर अंग्रेज़ों तथा रूसियों के बीच ईरान के व्यापार में दखल पड़ा। १९७९ की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान की राजनैतिक स्थिति में बहुत उतार-चढ़ाव आता रहा है। ईराक के साथ युद्ध ने भी देश को इस्लामिक जगत में एक अलग जगह पर ला खड़ा किया है। २३ जनवरी २००८ .

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ईरानी पञ्चांग

ईरानी पंचांग लगभग दो सहस्त्राब्दियों से ईरान, अफगानिस्तान और आस-पास के ईलाकों में उपयोग में लाया जाता है।.

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ईरानी भाषा परिवार

ईरानी भाषाओँ का वृक्ष, जिसमें उसकी उपशाखाएँ दिखाई गई हैं आधुनिक ईरानी भाषाओँ का फैलाव ईरानी भाषाएँ हिन्द-ईरानी भाषा परिवार की एक उपशाखा हैं। ध्यान रहे कि हिन्द-ईरानी भाषाएँ स्वयं हिन्द-यूरोपीय भाषा परिवार की एक उपशाखा हैं। आधुनिक युग में विश्व में लगभग १५-२० करोड़ लोग किसी ईरानी भाषा को अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं और ऍथ़नॉलॉग भाषाकोष में सन् २०११ तक ८७ ईरानी भाषाएँ दर्ज थीं।, Gernot Windfuhr, Routledge, 2009, ISBN 978-0-7007-1131-4, Raymond Gordon, Jr.

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ईसा खां नियाज़ी

ईसा खां नियाज़ी का मकबरा, १५४७ ईसा खां की मस्जिद, मकबरे के परिसर में ही स्थित है। ईसा खां नियाज़ी (عیسی خان نيازي) मुगलों के विरुद्ध लड़ने वाला सूर वंश के शासक शेरशाह सूरी के दरबार का एक अफ़्गान नवाब था। ईसा खां का मकबरा हुमायुं का मकबरा परिसर में उसके के जीवनकाल में ही बना था और उसके बाद उसके पूरे परिवार के लिये ही काम आया। मकबरे के पश्चिम में एक तीन आंगन चौड़ी लाल बलुआ पत्थर की मस्जिद है। यह अठमुखा मकबरा सूर वंश के लोधी मकबरे परिसर स्थित अन्य मकबरों से बहुत मेल खाता है। श्रेणी:मुगल श्रेणी:दिल्ली की इमारतें.

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वटापूर ज़िला

वटापूर ज़िला या वोटापूर ज़िला (Watapur District) अफ़ग़ानिस्तान के कुनर प्रान्त के मध्य भाग में स्थित एक ज़िला है। इसका क्षेत्र कभी असदाबाद ज़िले का भाग हुआ करता था। .

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वनोन्मूलन

वनोन्मूलन का अर्थ है वनों के क्षेत्रों में पेडों को जलाना या काटना ऐसा करने के लिए कई कारण हैं; पेडों और उनसे व्युत्पन्न चारकोल को एक वस्तु के रूप में बेचा जा सकता है और मनुष्य के द्वारा उपयोग में लिया जा सकता है जबकि साफ़ की गयी भूमि को चरागाह (pasture) या मानव आवास के रूप में काम में लिया जा सकता है। पेडों को इस प्रकार से काटने और उन्हें पुनः न लगाने के परिणाम स्वरुप आवास (habitat) को क्षति पहुंची है, जैव विविधता (biodiversity) को नुकसान पहुंचा है और वातावरण में शुष्कता (aridity) बढ़ गयी है। साथ ही अक्सर जिन क्षेत्रों से पेडों को हटा दिया जाता है वे बंजर भूमि में बदल जाते हैं। आंतरिक मूल्यों के लिए जागरूकता का अभाव या उनकी उपेक्षा, उत्तरदायी मूल्यों की कमी, ढीला वन प्रबन्धन और पर्यावरण के कानून, इतने बड़े पैमाने पर वनोन्मूलन की अनुमति देते हैं। कई देशों में वनोन्मूलन निरंतर की जाती है जिसके परिणामस्वरूप विलोपन (extinction), जलवायु में परिवर्तन, मरुस्थलीकरण (desertification) और स्वदेशी लोगों के विस्थापन जैसी प्रक्रियाएं देखने में आती हैं। .

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वफ़ादार

वफ़ादार (जन्म १ फरवरी २०००) अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम के खिलाड़ी है। उन्होंने ११ अगस्त २०१७ को २०१७ गाज़ी अमानुल्ला खान क्षेत्रीय वनडे टूर्नामेंट में बूस्ट क्षेत्र के लिए अपना पहला लिस्ट ए क्रिकेट मैच खेला था। इन्हें अफगानिस्तान के उदघाटन टेस्ट मैच में १६ सदस्यीय टीम में शामिल किया गया। .

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वसन्त पञ्चमी

वसंत पंचमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू त्योहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन स्त्रियाँ पीले वस्त्र धारण करती हैं। प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था। जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती, यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है। .

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वायस ऑफ जेहाद

वायस ऑफ जेहाद अफगानिस्तान में सक्रिय संगठन तालिबान का आधिकारिक अंग्रेजी अंतर्जाल पृष्ठ है। इसपर वे अपनी बुनियादी नीतियों एवं विचारधारा से संबंधित लेख तथा वैश्विक परिदृश्य पर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। .

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वाख़ान

वाख़ान का एक नज़ारा वाख़ान, स्थानीय नक़्शे में वाख़ान (पश्तो और फ़ारसी) सुदूर उत्तर-पूर्वी अफ़्ग़ानिस्तान में एक अत्यंत पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्र है जहाँ काराकोरम और पामीर पर्वत शृंखलाएं आकर मिलती हैं। वाख़ान अफ़्ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रांत में एक ज़िले का नाम भी है। नक़्शे पर वाख़ान अफ़्ग़ानिस्तान के मुख्य भाग से एक ऊँगली की तरह पूर्व को निकलकर चीन के शिनजियांग प्रान्त को छूता है। यह तंग सा इलाका प्राचीनकाल में तारिम द्रोणी जाने वाले यात्रियों का मार्ग हुआ करता था। इसी क्षेत्र में उन धाराओं की भी शुरुआत होती है जो आगे चलकर मशहूर आमू दरिया बन जाती हैं।, David Loyn, Macmillan, 2009, ISBN 978-0-230-61403-1,...

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वाख़ान नदी

वाख़ान गलियारे का नक़्शा जिसमें वाख़ान नदी देखी जा सकती है वाख़ान नदी, जिसे आब-ए-वाख़ान (फ़ारसी) भी कहा जाता है, अफ़्ग़ानिस्तान के वाख़ान क्षेत्र से निकलने वाली एक नदी का नाम है। यह पंज नदी की एक उपनदी है। वाख़ान नदी हिन्दु कुश पर्वतों की हिमानियों (ग्लेशियर) में उत्पन्न होती है और नीचे उतरती है। लंगर और क़िला-ए-पंज नामक गाँवों के पास इसका विलय पामीर नदी से होता है और इस संगम के बाद यह पंज नदी के नाम से जानी जाती है।, World Bank Publications, ISBN 978-0-8213-5890-0,...

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वाख़ी भाषा

वाख़ी भाषा वाख़ान क्षेत्र में बोली जाती है वाख़ी (वाख़ी: ख़ीक ज़िक; फ़ारसी:; अंग्रेज़ी: Wakhi) पूर्वी ईरानी भाषा-परिवार की पामीरी उपशाखा की एक भाषा है। इसे पूर्वोत्तरी अफ़्ग़ानिस्तान के वाख़ान क्षेत्र और उसे से लगे चीन, पाकिस्तान और ताजिकिस्तान के इलाकों में बोला जाता है। इसे बोलने वालों की संख्या लगभग ३०,००० है। .

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विम कडफिसेस

विम कडफिसेस (बाख़्त्री में Οοημο Καδφισης) लगभग 90-100 सी.ई. में कुषाण वंश का शासक था। रबातक शिलालेख के अनुसार वह विम ताकतू का पुत्र तथा कनिष्क का पिता था। उसे कडफिसेस द्वितीय भी कहा जाता है। .

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विश्व में बौद्ध धर्म

बौद्ध धर्म विश्व के प्रमुख धर्मों में से एक है, और इसके संस्थापक गौतम बुद्ध (ईसवी पूर्व ५६३ - ईसवी पूर्व ४८३) थे। विश्व में करीब १९२ करोड़ (२८.७८%) लोक बौद्ध धर्म को माननेवाले है। दुसरे सर्वेक्षण के अनुसार १.६ अरब से १.८ अरब लोक (२३% से २५%) प्रतिनिधित्व बौद्ध करते है। बौद्ध धर्म एक धर्म और दर्शन है। संसार में ईसाई धर्म धर्म के बाद सबसे अधिक बौद्ध धर्म के ही अनुयायि पाये जाते। हालांकि कुछ सर्वेक्षणों के अनुसार बौद्ध धर्म आबादी ४८.८ करोड़ से ५३.५ करोड़ (विश्व की जनसंख्या में ९% से १०%) भी बताई जाती है। विश्व के सभी महाद्विपों में बौद्ध धर्म के अनुयायि रहते है। बौद्ध धर्म दुनिया का पहला विश्व धर्म है, जो अपने जन्मस्थान से निकलकर विश्व में दूर दूर तक फैला। आज दुनिया में बौद्ध धर्म की आबादी हिन्दू धर्म से अधिक और इस्लाम धर्म के बराबर या इस्लाम धर्म से भी अधिक है। भारत में बौद्ध धर्म अल्पसंख्यक है, जबकि भारत में इस विश्व धर्म का उदय हुआ था। परंतु एशिया में बौद्ध धर्म प्रमुख धर्म बना रहा। २०१० में १.०७ अरब से १.२२ अरब जनसंख्या के साथ चीन बौद्धों की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है, चीन की कुल आबादी में ८०% से ९१% बौद्ध अनुयायि है। ज्यादातर चीनी बौद्ध महायान सम्प्रदाय के अनुयायि है। दुनिया की ६५% से ७०% बौद्ध आबादी चीन में रहती है। .

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विश्व व्यापार संगठन

विश्व व्यापार संगठन का प्रतीक चिन्ह विश्व व्यापार संगठन (वर्ल्द ट्रेड ऑर्गनाइजेशन/डब्ल्यूटीओ) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो विश्व व्यापार के लिए नियम बनाता है। इसकी स्थापना १९९५ में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनाए गए गैट (GATT) के स्थान पर लाने के लिए की गई थी। वर्तमान समय में इसके १६४ सदस्य हैं। डब्ल्यूटीओ के सचिव और महानिदेशक जेनेवा में निवास करते हैं। सचिवालय जिसमें अब केवल ५५० लोग काम करते हैं और संगठन के सभी पहलुओं के संचालन का प्रशासनिक कार्य संभालते हैं। सचिवालय के पास कानूनी निर्णय लेने की कोई शक्ति नहीं है लेकिन ऐसा करने वालों को यह महत्वपूर्ण सेवाएं और परामर्श प्रदान करता है। .

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विश्व के देशों में शहरों की सूचियाँ

This is a list of articles on the cities of contemporary countries, states and dependencies.

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विश्व के सभी देश

यह विश्व के देशों की सूची, एक सिंहावलोकन कराती है, विश्व के राष्ट्रों का, जो कि देवनागरी वर्णक्रमानुसार व्यवस्थित है। इसमें स्वतंत्र राज्य भी सम्मिलित हैं। (जो कि अन्तराष्ट्रीय मान्यताप्राप्त हैं और जो अमान्यता प्राप्त), हैं, बसे हुए हैंपरतंत्र क्षेत्र, एवं खास शासकों के क्षेत्र भी। ऐसे समावेश मानदण्ड अनुसार यह सूची शब्द `देश' एवं `सार्वभौम राष्ट्र' को पर्यायवाची नहीं मानती। जैसा कि प्रायः साधारण बोलचाल में प्रयोग किया जाता है। कृप्या ध्यान रखें कि किन्हीं खास परिस्थितिवश एवं किन्हीं खास भाषाओं में 'देश' शब्द को सर्वथा प्रतिबंधात्मक अर्थ समझा जाता है। अतः केवल 193 निम्नलिखित प्रविष्टियाँ ही प्रथम शब्द (देश या राष्ट्र) में समझे जाएं। यह सूची दिए गए देशों के क्षेत्राधिकार में आने वाले सभी क्षेत्रों को आवृत्त करती है, अर्थात क्षेत्र, जलीय क्षेत्र (जिसमें जलीय आंतरिक क्षेत्र एवं थल से लगे जलीय क्षेत्र भी आते हैं), विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र, कॉण्टीनेण्टल शैल्फ, एवं हवाई क्षेत्र.

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विश्व के सर्वोच्च पर्वतों की सूची

पृथ्वी पर कम-से-कम 109 पर्वत हैं जिनकि ऊँचाई समुद्रतल से 7,200 मीटर (23,622 फ़ुट) से अधिक है। इनमें से अधिकांश भारतीय उपमहाद्वीप और तिब्बत की सीमा पर स्थित हैं, और कुछ मध्य एशिया में हैं। इस सूचि में केवल ऐसे ही शिखर सम्मिलित हैं जिन्हें अकेला खड़ा पर्वत माना जा सकता है, यानि एक ही पर्वत के अलग-अलग शिखरों को नहीं गिना गया है। .

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विश्व की मुद्राएँ

विश्व की कुछ प्रमुख मुद्राएँ निम्नलिखित हैं:-.

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विकासशील देश

012 अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और संयुक्त राष्ट्र द्वारा किया गया वर्गीकरण 2009 तक नव औद्योगीकृत देश क्वॉरटाइल (2010 के आंकड़े पर आधारित, 4 नवम्बर 2010 को प्रकाशित के आधार पर) के आधार पर विश्व बैंक द्वारा विकसित मानव विकास रिपोर्ट सांखियकी. मानव विकास रिपोर्ट (एचडीआर). संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) विकासशील देश शब्द का प्रयोग किसी ऐसे देश के लिए किया जाता है जिसके भौतिक सुखों का स्तर निम्न होता है (इस शब्द को लेकर तीसरी दुनिया के देशों के साथ भ्रमित नहीं होना चाहिए).

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वख़जीर दर्रा

वख़जीर दर्रा (Wakhjir Pass), जिसे फ़ारसी में कोतल-ए-वख़जीर कहते हैं, अफ़ग़ानिस्तान के वाख़ान गलियारे और चीन-नियंत्रित शिंजियांग प्रान्त के ताशक़ुरग़ान​ ताजिक स्वशासित ज़िले के बीच हिन्दु कुश या पामीर पर्वतों में एक ४,९२३ मीटर (१६,१५२ फ़ुट) ऊँचा पहाड़ी दर्रा है। यह वाख़ान गलियारे के सुदूर पूर्वी छोर पर स्थित है जहाँ अफ़ग़ानिस्तान की चीन के साथ एक छोटी-सी सरहद है। इस दर्रे से कोई सड़क नहीं गुज़रती और यह आम-यातायात के लिए बंद है। .

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वृहद भारत

'''वृहद भारत''': केसरिया - भारतीय उपमहाद्वीप; हल्का केसरिया: वे क्षेत्र जहाँ हिन्दू धर्म फैला; पीला - वे क्षेत्र जिनमें बौद्ध धर्म का प्रसार हुआ वृहद भारत (Greater India) से अभिप्राय भारत सहित उन अन्य देशों से है जिनमें ऐतिहासिक रूप से भारतीय संस्कृति का प्रभाव है। इसमें दक्षिणपूर्व एशिया के भारतीकृत राज्य मुख्य रूप से शामिल है जिनमें ५वीं से १५वीं सदी तक हिन्दू धर्म का प्रसार हुआ था। वृहद भारत में मध्य एशिया एवं चीन के वे वे भूभाग भी सम्मिलित किये जा सकते हैं जिनमे भारत में उद्भूत बौद्ध धर्म का प्रसार हुआ था। इस प्रकार पश्चिम में वृहद भारत कीघा सीमा वृहद फारस की सीमा में हिन्दुकुश एवं पामीर पर्वतों तक जायेगी। भारत का सांस्कृतिक प्रभाव क्षेत्र .

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वेद प्रताप वैदिक

डॉ॰ वेद प्रताप वैदिक (जन्म: 30 दिसम्बर 1944, इंदौर, मध्य प्रदेश) भारतवर्ष के वरिष्ठ पत्रकार, राजनैतिक विश्लेषक, पटु वक्ता एवं हिन्दी प्रेमी हैं। हिन्दी को भारत और विश्व मंच पर स्थापित करने की दिशा में सदा प्रयत्नशील रहते हैं। भाषा के सवाल पर स्वामी दयानन्द सरस्वती, महात्मा गांधी और डॉ॰ राममनोहर लोहिया की परम्परा को आगे बढ़ाने वालों में डॉ॰ वैदिक का नाम अग्रणी है। वैदिक जी अनेक भारतीय व विदेशी शोध-संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों में ‘विजिटिंग प्रोफेसर’ रहे हैं। भारतीय विदेश नीति के चिन्तन और संचालन में उनकी भूमिका उल्लेखनीय है। अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने लगभग 80 देशों की यात्रायें की हैं। अंग्रेजी पत्रकारिता के मुकाबले हिन्दी में बेहतर पत्रकारिता का युग आरम्भ करने वालों में डॉ॰ वैदिक का नाम अग्रणी है। उन्होंने सन् 1958 से ही पत्रकारिता प्रारम्भ कर दी थी। नवभारत टाइम्स में पहले सह सम्पादक, बाद में विचार विभाग के सम्पादक भी रहे। उन्होंने हिन्दी समाचार एजेन्सी भाषा के संस्थापक सम्पादक के रूप में एक दशक तक प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया में काम किया। सम्प्रति भारतीय भाषा सम्मेलन के अध्यक्ष तथा नेटजाल डाट काम के सम्पादकीय निदेशक हैं। .

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वेल्स के प्रिंस हेनरी

वेल्स के राजकुमार हेनरी,(पूरा नाम:हेनरी चार्ल्स ऐल्बर्ट डेविड) जन्हें आम तौर पर राजकुमार हैरी के नाम से जाना जाता है, राजकुमार चार्ल्स, वेल्स के राजकुमार और स्व॰ डायना, वेल्स की राजकुमारी के अनुज पुत्र हैं। वे राजकुमार विलियम, कैम्ब्रिज के ड्यूक के छोटे भाई हैं। उनका जन्म १५ सितंबर १९८४ को सेंट मैरी अस्पताल, लंदन में हुआ था। अपने जन्म के समय वे अपनी दादी, रानी एलिज़ाबेथ द्वि॰ के उत्तराधिकार के क्रम में तीसरे स्थान पर थे, जबकि आज वे पांचवे स्थान पर हैं। उनकी पर्वरिश ब्रिटेन में ही हुई, और वे ईटन कॉलेज के छात्र थे। पढाई पूरी करने और तत्पश्चात्, कुछ समय ऑस्ट्रेलिया और लेसोथो में बिताने के बाद, उन्होंने सैन्य पेश अपनाने का निर्णय किया, और शाही वायु सेना में अपनी सेवा शुरू की। अपने सेवा काल के दौरान उन्हें अफ़ग़ानिस्तान में भी तैनात किया गया था। .

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वोटापूरी-कटारक़लाई भाषा

वोटापूरी-कटारक़लाई (Wotapuri-Katarqalai) कोहिस्तानी उपशाखा की एक दार्दी भाषा है जो अफ़ग़ानिस्तान के नूरिस्तान प्रान्त की वोटापूरी और कटारक़लाई नामक बस्तियों में बोली जाती थी। सन् १९३५ में कटारक़लाई में इसे ६० घरों में बोला जाता था लेकिन १९५५ में इसे बोलने वाला एक ही व्यक्ति मिला। भाषावैज्ञानिक अनुमान लगते हैं कि यह भाषा विलुप्त हो चुकी है। .

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ख़तलोन प्रान्त

ताजिकी में लिखा है 'ख़ुश-ओमादीद' (हिन्दी के 'ख़ुशआमदीद' के बराबर) ख़तलोन (ताजिकी: Хатлон) या विलोयत-इ-ख़तलोन ताजिकिस्तान की एक विलायत (प्रान्त) है। यह ताजिकिस्तान के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। इसका कुल क्षेत्रफल २४,८०० वर्ग किमी है और सन् २००८ में इसकी आबादी २५.८ लाख अनुमानित की गई थी। ख़तलोन प्रान्त की राजधानी क़ुरग़ोनतेप्पा शहर है जिसका पुराना नाम कुर्गान-त्युबे था।, Bradley Mayhew, Greg Bloom, Paul Clammer, Lonely Planet, 2010, ISBN 978-1-74179-148-8 .

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ख़ान (उपाधि)

ओगदाई ख़ान, चंग़ेज़ ख़ान का तीसरा पुत्र ख़ान या ख़ाँ (मंगोल: хан, फ़ारसी:, तुर्की: Kağan) मूल रूप से एक अल्ताई उपाधि है तो शासकों और अत्यंत शक्तिशाली सिपहसालारों को दी जाती थी। यह समय के साथ तुर्की-मंगोल क़बीलों द्वारा पूरे मध्य एशिया में इस्तेमाल होने लगी। जब इस क्षेत्र के सैन्य बलों ने भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान, अफ़्ग़ानिस्तान और अन्य क्षेत्रों पर क़ब्ज़ा कर के अपने साम्राज्य बनाने शुरू किये तो इसका प्रयोग इन क्षेत्रों की कई भाषाओँ में आ गया, जैसे कि हिन्दी-उर्दू, फ़ारसी, पश्तो, इत्यादि। इसका एक और रूप 'ख़ागान' है जिसका अर्थ है 'ख़ानों का ख़ान' या 'ख़ान-ए-ख़ाना', जो भारत में कभी प्रचलित नहीं हुआ। इसके बराबरी की स्त्रियों की उपाधियाँ ख़ानम और ख़ातून हैं।, Elena Vladimirovna Boĭkova, R. B. Rybakov, Otto Harrassowitz Verlag, 2006, ISBN 978-3-447-05416-4 .

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ख़ालेद हुसैनी

ख़ालेद हुसैनी (خالد حسینی;; जन्म 4 मार्च, 1965) अफ़्ग़ान मूल के अमेरिकी उपन्यासकार और चिकित्सक है। .

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ख़ुदा

ख़ुदा ख़ुदा (फ़ारसी) बहुत सी भाषाओं में पाया जाने वाला 'ईश्वर' के लिए एक शब्द है। इसका अर्थ कभी-कभी 'मालिक' और 'मार्गदर्शक' भी निकाला जाता है। ये शब्द फारसी या पश्तून भाषा का है। ये मुख्य तौर पर ईस्लाम ओर पारसी धर्म में भगवान के लिये उपयोग होता है। .

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ख़ुर्द और कलाँ

ख़ुर्द और कलाँ फ़ारसी भाषा के शब्द हैं जो हिन्दी में और भारतीय उपमहाद्वीप में कई सन्दर्भों में पाए जाते हैं, विशेषकर जगहों के नामों में। "ख़ुर्द" का मतलब "छोटा" होता है और "कलाँ" का मतलब बड़ा होता है। इन नामों को मुग़लिया ज़माने से प्रयोग किया जा रहा है। छोटी आबादी वाले गांवों-कस्बों के पीछे खुर्द शब्द लगाया गया। फ़ारसी के इस शब्द का अर्थ होता है छोटा। यह खुर्द संस्कृत के क्षुद्र से ही बना है जिसमें लघु, छोटा या सूक्ष्मता का भाव है। देश भर में खुर्द धारी गांवों की तादाद हजारों में है। इसी तरह कई गांवों के साथ कलां शब्द जुड़ा मिलता है जैसे कोसी कलां , बामनियां कलां । जिस तरह खुर्द शब्द छोटे या लघु का पर्याय बना उसी तरह कलां शब्द बड़े या विशाल का पर्याय बना। कलां का प्रयोग लगभग उसी अर्थ में होता था जैसे भारत के लिए प्राचीनकाल में बृहत्तर भारत शब्द का प्रयोग होता था जिसमें बर्मा से लेकर ईरान तक का समूचा भूक्षेत्र आता था।  हालांकि किसी यात्रावृत्त में हिन्दुस्तान कलां जैसा शब्द नहीं मिलता।  ग्रेटर ब्रिटेन की बात चलती थी तो उसके उपनिवेशों का संदर्भ निहित होता था। इसी तरह कलां शब्द की अर्थवत्ता भी ग्रामीण आबादियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। कलां मूलतः फ़ारसी  का शब्द है जिसका मतलब होता है वरिष्ठ, बड़ा, दीर्घ या विशाल। वैसे इसकी व्युत्पत्ति अज्ञात है। कुछ संदर्भों में इसे सेमेटिक भाषा परिवार का बताया जाता है और इसे ईश्वर की महानता से जोड़ा जाता है। कलां की अर्थवत्ता के आधार पर यह ठीक है मगर इसकी पुष्टि किसी सेमेटिक धातु से नहीं होती। कलां शब्द का प्रयोग सिर्फ स्थानों का रुतबा बताने के लिए ही नहीं होता था बल्कि व्यक्तियों के नाम भी होते थे जैसे मिर्जा कलां या अमीर कलां अल बुखारी जिसका मतलब बुखारा का महान अमीर होता है। जाहिर है यहां कलां शब्द का अर्थ महान है।   मुस्लिम शासनकाल में बसाहटों के नामकरण की महिमा यहीं खत्म नहीं होती। कई गांवों के नामों के साथ बुजुर्ग शब्द लगा मिलता है जैसे सोनपिपरी बुजुर्ग । जाहिर है हमनाम गांव से फर्क करने के लिए एक बसाहट को वरिष्ठ मानते हुए उसके आगे बुजुर्ग लगा दिया गया और दूसरा हुआ सोनपिपरी खुर्द । ऐसी कई ग्रामीण बस्तियां हजारों की संख्या में हैं। इसी तरह किसी गांव के विशिष्ट दर्जे को देखते हुए उसके साथ जागीर शब्द लगा दिया जाता था। इसका अर्थ यह हुआ कि सालाना राजस्व वसूली से उस गांव का हिस्सा सरकारी ख़जाने में नहीं जाएगा अथवा उसे आंशिक छूट मिलेगी। मुग़लों के दौर में प्रभावी व्यक्तियों को अथवा पुरस्कार स्वरूप सामान्य वर्ग के लोगो को भी गांव जागीर में दिये जाते थे। मगर उसी नाम के अन्य गांवों से फ़र्क करने के लिए नए बने जागीरदार उसके आगे जागीर जोड़ देते थे जैसे हिनौतियाऔर हिनौतिया जागीर । .

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ख़ैबर दर्रा

ख़ैबर दर्रा ख़ैबर दर्रा ख़ैबर दर्रा या दर्र-ए-ख़ैबर (Khyber Pass) उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान की सीमा और अफगानिस्तान के काबुलिस्तान मैदान के बीच हिंदुकुश के सफेद कोह पर्वत शृंखला में स्थित एक प्रख्यात ऐतिहासिक दर्रा है। यह दर्रा ५० किमी लंबा है और इसका सबसे सँकरा भाग केवल १० फुट चौड़ा है। यह सँकरा मार्ग ६०० से १००० फुट की ऊँचाई पर बल खाता हुआ बृहदाकार पर्वतों के बीच खो सा जाता है। इस दर्रे के ज़रिये भारतीय उपमहाद्वीप और मध्य एशिया के बीच आया-जाया सकता है और इसने दोनों क्षेत्रों के इतिहास पर गहरी छाप छोड़ी है। ख़ैबर दर्रे का सबसे ऊँचा स्थान पाकिस्तान के संघ-शासित जनजातीय क्षेत्र की लंडी कोतल (لنڈی کوتل, Landi Kotal) नामक बस्ती के पास पड़ता है। इस दर्रे के इर्द-गिर्द पश्तून लोग बसते हैं। पेशावर से काबुल तक इस दर्रे से होकर अब एक सड़क बन गई है। यह सड़क चट्टानी ऊसर मैदान से होती हुई जमरूद से, जो अंग्रेजी सेना की छावनी थी और जहाँ अब पाकिस्तानी सेना रहती है, तीन मील आगे शादीबगियार के पास पहाड़ों में प्रवेश करती है और यहीं से खैबर दर्रा आरंभ होता है। कुछ दूर तक सड़क एक खड्ड में से होकर जाती है फिर बाई और शंगाई के पठार की ओर उठती है। इस स्थान से अली मसजिद दुर्ग दिखाई पड़ता है जो दर्रे के लगभग बीचोबीच ऊँचाई पर स्थित है। यह दुर्ग अनेक अभियानों का लक्ष्य रहा है। पश्चिम की ओर आगे बढ़ती हुई सड़क दाहिनी ओर घूमती है और टेढ़े-मेढ़े ढलान से होती हुई अली मसजिद की नदी में उतर कर उसके किनारे-किनारे चलती है। यहीं खैबर दर्रे का सँकरा भाग है जो केवल पंद्रह फुट चौड़ा है और ऊँचाई में २,००० फुट है। ५ किमी आगे बढ़ने पर घाटी चौड़ी होने लगती है। इस घाटी के दोनों और छोटे-छोटे गाँव और जक्काखेल अफ्रीदियों की लगभग साठ मीनारें है। इसके आगे लोआर्गी का पठार आता है जो १० किमी लंबा है और उसकी अधिकतम चौड़ाई तीन मील है। यह लंदी कोतल में जाकर समाप्त होता है। यहाँ अंगरेजों के काल का एक दुर्ग है। यहाँ से अफगानिस्तान का मैदानी भाग दिखाई देता है। लं