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अनुसंधान

सूची अनुसंधान

जर्मनी का 'सोन' (Sonne) नामक अनुसन्धान-जलयान व्यापक अर्थ में अनुसंधान (Research) किसी भी क्षेत्र में 'ज्ञान की खोज करना' या 'विधिवत गवेषणा' करना होता है। वैज्ञानिक अनुसंधान में वैज्ञानिक विधि का सहारा लेते हुए जिज्ञासा का समाधान करने की कोशिश की जाती है। नवीन वस्तुओं कि खोज और पुराने वस्तुओं एवं सिद्धान्तों का पुन: परीक्षण करना, जिससे की नए तथ्य प्राप्त हो सके, उसे शोध कहते हैं। गुणात्मक तथा मात्रात्मक शोध इसके प्रमुख प्रकारों में से एक है। वैश्वीकरण के वर्तमान दौर में उच्च शिक्षा की सहज उपलब्धता और उच्च शिक्षा संस्थानों को शोध से अनिवार्य रूप से जोड़ने की नीति ने शोध की महत्ता को बढ़ा दिया है। आज शैक्षिक शोध का क्षेत्र विस्तृत और सघन हुआ है। .

114 संबंधों: टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान, ए हिस्ट्री ऑफ़ द्वैत स्कूल ऑफ़ वेदांत एंड इट्स लिटरेचर, डेनियल हिलाल, डेंगू बुख़ार, तांत्रिक वाङ्मय में शाक्त दृष्टि, देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय, दीनदयाल शोध संस्थान, नैदानिक परीक्षण, परमाणु भट्ठी, परखनली, पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय, प्यूज़ो, प्रणाली विज्ञान, प्रयोगशाला, प्रकाश परिमल, प्रौद्योगिकी हस्तान्तरण, पेट्रोलियम अनुसंधान एवं विकास केन्द्र, फरीदाबाद, फोरम, बाबा कर्तारसिंह, बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, ब्रेकथ्रू स्टारशॉट, बी.एन. कृष्णमूर्ति शर्मा, बीरबल साहनी पुरावनस्पतिविज्ञान संस्थान, भट्ट मथुरानाथ शास्त्री, भारत इतिहास संशोधक मंडल, भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान, भारतीय प्रबन्धन संस्थान, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) वाराणसी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पालक्काड, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुम्बई, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, भारतीय भाषा केन्द्र (जे॰एन॰यू॰), भारतीय भूचुम्बकत्व संस्थान, भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी, भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, भारतीय विचार केन्द्रम्, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, पुणे, भारतीय विज्ञान संस्थान, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद, भारतीय आविष्कारों की सूची, भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, भौतिकी संस्थान, भुवनेश्वर, महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, महाविद्यालय (कॉलेज), मुक्त अनुसन्धान, मेरिल लिंच, मेहदी ख्वाजा पीरी, मेकियावेलियनिस्म, ..., यूरोपीय नाभिकीय अनुसंधान संगठन, राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय रेडियो खगोल भौतिकी केन्द्र, राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, राष्ट्रीय समेकित नाशीजीव प्रबन्धन केन्द्र, राष्ट्रीय अंटार्कटिक एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र, रोमांच यात्रा, श्री कल्याण महाविद्यालय, सीकर, शैक्षिक मनोविज्ञान, शैक्षिक अनुसंधान, शोध-प्रबन्ध, सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरत, सारणी, सालिम अली पक्षिविज्ञान एवं प्रकृतिक इतिहास केंद्र, साहा नाभिकीय भौतिकी संस्थान, सांख्यिकी, संरक्षित जैवमंडल, स्टैटा, सैली राइड, हरि ठाकुर, हरीशचंद्र अनुसंधान संस्थान, हिन्दी पत्रिकाएँ, हिन्दी की साहित्यिक पत्रिकायें, होमी भाभा राष्ट्रीय संस्थान, जिमी वेल्स, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, जेन गुडाल, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्‍थान, देहरादून, विचारों का इतिहास, विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक अभियांत्रिकी की समयरेखा, विलियम हेनरी ब्रैग, विश्व-भारती विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय, विज्ञापन एजेंसी, विंडसर विश्वविद्यालय, विकि, विकोशिकीकरण, वैदिक विज्ञान और भारतीय संस्कृति, गिरधर शर्मा चतुर्वेदी, गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय, गूगल टूलबार, गोपाल बालकृष्ण कोल्हटकर, गोपीनाथ कविराज, आत्महत्या के तरीके, आय का परिपत्र प्रवाह, आयन रोपण, आविष्कार, आविष्कार (पत्रिका), आखन विश्वविद्यालय, आइ आइ आइ टी एम, इलेक्ट्रॉनिक नाक, इजरायली आविष्कार तथा शोध, इकोले पॉलीटेक्निक फेडरल डी लॉज़ेन, क मुं हिंदी विद्यापीठ आगरा, कण भौतिकी के त्वरकों की सूची, क्रांजबर्ग के प्रौद्योगिकी के नियम, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स, के के बिड़ला फाउंडेशन, केन्‍द्रीय कांच एवं सिरामिक अनुसन्धान संस्‍थान, अनुप्रयुक्त विज्ञान, अनुसन्धान संस्थान, उष्णकटिबन्धीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर, १९३५, ६ नवम्बर सूचकांक विस्तार (64 अधिक) »

टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान

टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (Tata Institute of Fundamental Research, TIFR) उच्च शिक्षा की महानतम् भारतीय संस्थाओं में से एक है। यहां मुख्यतः प्राकृतिक विज्ञान, गणित और कम्प्यूटर विज्ञान में अनुसंधान कार्य किया जा रहा है। यह मुम्बई के कोलाबा क्षेत्र में समुद्र के किनारे स्थित है। यहां का स्नातक कार्यक्रम अधोलिखित सभी विषयों में डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पी एच डी) की उपाधि प्रदान करता है। यह संस्थान होमी भाभा के निर्देशन में सन् १९४५ में स्थापित हुआ। इसे जून २००२ में समविश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ। .

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ए हिस्ट्री ऑफ़ द्वैत स्कूल ऑफ़ वेदांत एंड इट्स लिटरेचर

ए हिस्ट्री ऑफ़ द्वैत स्कूल ऑफ़ वेदांत एंड इट्स लिटरेचर विख्यात संस्कृत साहित्यकार बी.एन. कृष्णमूर्ति शर्मा द्वारा रचित एक शोध है जिसके लिये उन्हें सन् 1963 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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डेनियल हिलाल

डेनियल हिलाल (Daniel Hillel) इज़राइल के एक वैज्ञानिक हैं। १९३0 में लॉस एंजेल्स, कैलिफोर्निया में जन्मे हिलाल की ख्याति सूक्ष्म सिंचाई के क्षेत्र में उल्लेखनीय अनुसंधान के लिए है। जल और मृदा संबंधित इनके कार्यों के लिए खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा इन्हें २0१२ का विश्व खाद्य पुरस्कार प्रदान किया गया है। .

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डेंगू बुख़ार

डेंगू बुख़ार एक संक्रमण है जो डेंगू वायरस के कारण होता है। समय पर करना बहुत जरुरी होता हैं. मच्छर डेंगू वायरस को संचरित करते (या फैलाते) हैं। डेंगू बुख़ार को "हड्डीतोड़ बुख़ार" के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इससे पीड़ित लोगों को इतना अधिक दर्द हो सकता है कि जैसे उनकी हड्डियां टूट गयी हों। डेंगू बुख़ार के कुछ लक्षणों में बुखार; सिरदर्द; त्वचा पर चेचक जैसे लाल चकत्ते तथा मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द शामिल हैं। कुछ लोगों में, डेंगू बुख़ार एक या दो ऐसे रूपों में हो सकता है जो जीवन के लिये खतरा हो सकते हैं। पहला, डेंगू रक्तस्रावी बुख़ार है, जिसके कारण रक्त वाहिकाओं (रक्त ले जाने वाली नलिकाएं), में रक्तस्राव या रिसाव होता है तथा रक्त प्लेटलेट्स  (जिनके कारण रक्त जमता है) का स्तर कम होता है। दूसरा डेंगू शॉक सिंड्रोम है, जिससे खतरनाक रूप से निम्न रक्तचाप होता है। डेंगू वायरस चार भिन्न-भिन्न प्रकारों के होते हैं। यदि किसी व्यक्ति को इनमें से किसी एक प्रकार के वायरस का संक्रमण हो जाये तो आमतौर पर उसके पूरे जीवन में वह उस प्रकार के डेंगू वायरस से सुरक्षित रहता है। हलांकि बाकी के तीन प्रकारों से वह कुछ समय के लिये ही सुरक्षित रहता है। यदि उसको इन तीन में से किसी एक प्रकार के वायरस से संक्रमण हो तो उसे गंभीर समस्याएं होने की संभावना काफी अधिक होती है।  लोगों को डेंगू वायरस से बचाने के लिये कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। डेंगू बुख़ार से लोगों को बचाने के लिये कुछ उपाय हैं, जो किये जाने चाहिये। लोग अपने को मच्छरों से बचा सकते हैं तथा उनसे काटे जाने की संख्या को सीमित कर सकते हैं। वैज्ञानिक मच्छरों के पनपने की जगहों को छोटा तथा कम करने को कहते हैं। यदि किसी को डेंगू बुख़ार हो जाय तो वह आमतौर पर अपनी बीमारी के कम या सीमित होने तक पर्याप्त तरल पीकर ठीक हो सकता है। यदि व्यक्ति की स्थिति अधिक गंभीर है तो, उसे अंतः शिरा द्रव्य (सुई या नलिका का उपयोग करते हुये शिराओं में दिया जाने वाला द्रव्य) या रक्त आधान (किसी अन्य व्यक्ति द्वारा रक्त देना) की जरूरत हो सकती है। 1960 से, काफी लोग डेंगू बुख़ार से पीड़ित हो रहे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से यह बीमारी एक विश्वव्यापी समस्या हो गयी है। यह 110 देशों में आम है। प्रत्येक वर्ष लगभग 50-100 मिलियन लोग डेंगू बुख़ार से पीड़ित होते हैं। वायरस का प्रत्यक्ष उपचार करने के लिये लोग वैक्सीन तथा दवाओं पर काम कर रहे हैं। मच्छरों से मुक्ति पाने के लिये लोग, कई सारे अलग-अलग उपाय भी करते हैं।  डेंगू बुख़ार का पहला वर्णन 1779 में लिखा गया था। 20वीं शताब्दी की शुरुआत में वैज्ञानिकों ने यह जाना कि बीमारी डेंगू वायरस के कारण होती है तथा यह मच्छरों के माध्यम से संचरित होती (या फैलती) है। .

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तांत्रिक वाङ्मय में शाक्त दृष्टि

तांत्रिक वाङ्मय में शाक्त दृष्टि विख्यात संस्कृत साहित्यकार महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज द्वारा रचित एक शोध है जिसके लिये उन्हें सन् 1964 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय

देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय (19 नवम्बर 1918 – 8 मई 1993) भारत के गणमान्य मार्क्सवादी दार्शनिक तथा इतिहासकार थे। उन्होने प्राचीन भारतीय दर्शन में भौतिकवादी संस्कृति की गवेषणा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होने प्राचीन भारतीय लोकायत दर्शन पर बहुत काम किया। प्राचीन भारतीय विज्ञान के इतिहास तथा प्राचीन भारत में वैज्ञानिक विधि के विषय में उनके कार्य भी बहुत महत्वपूर्ण हैं, विशेष रूप से प्राचीन भारत के चिकित्साशास्त्रियों चरक तथा सुश्रुत पर उनका अनुसंधान कार्य उच्च कोटि का है। उनको साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में सन १९९८ में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। .

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दीनदयाल शोध संस्थान

दीनदयाल शोध संस्थान नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित एक ग्रामीण विकास संस्था है। इसकी स्थापना सन् १९७२ में की गयी थी। इसका मुख्यालय दिल्ली में है। इसका मुख्य उद्देश्य दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को फलीभूत करना है। इसके द्वारा सबसे पहले उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले के जयप्रभा ग्राम में सन् १९७८ में कार्य आरम्भ किया गया। गोंडा में कार्य की सफलता के बाद इसे अन्य राज्यों बिहार, मध्यप्रदेश (चित्रकूट), महाराष्ट्र आदि में इसका प्रसार किया गया। संस्थान के दिल्ली मुख्यालय में बहुत सी गतिविधियाँ चलायी जाती हैं। वहाँ एक पुस्तकालय है, संदर्भ प्रभाग है। वे लोग राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर कार्यशालायें आयोजित करते हैं। विद्यार्थियों के लिये स्पर्धाएँ आयोजित की जातीं हैं। भविष्य में सम्यक प्रौद्योगिकी अनुसंधान केन्द्र खोलने की योजना है। .

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नैदानिक परीक्षण

अनुसन्धान के माध्यम से विकसित नई चिकित्सा पद्धतियों के सामान्य प्रयोग से पूर्व इनके प्रभाव व कुप्रभावों का अध्ययन करने के लिये किया गया शोध नैदानिक परीक्षण (क्लिनिकल ट्रायल) कहलाता है। चिकित्सा पद्धतियों के अन्तर्गत टीका, दवा, आहार संबंधी विकल्प, आहार की खुराक, चिकित्सीय उपकरण, जैव चिकित्सा आदि आते हैं। नैदानिक परीक्षण, नई पद्धतियों की सुरक्षा व दक्षता के संबंध में बेहतर आंकड़े प्रदान करता है। प्रत्येक अध्ययन वैज्ञानिक प्रश्नों का जवाब देता है और बीमारी को रोकने के, इसके परीक्षण के लिए, निदान, या उपचार के लिए बेहतर तरीके खोजने का प्रयास करता है। क्लीनिकल ट्रायल नए उपचार की पहले से उपलब्ध उपचार के साथ तुलना भी कर सकता है। हर क्लीनिकल ट्रायल में परीक्षण करने के लिए एक नियम (कार्य योजना) होती है। योजना बताती है कि अध्ययन में क्या-क्या किया जायेगा, यह कैसे पूरा होगा, और अध्ययन का प्रत्येक भाग आवश्यक क्यों है। प्रत्येक अध्ययन में हिस्सा लेने वाले लोगों के लिए इसके अपने नियम होते हैं। कुछ अध्ययनों के लिए किसी बीमारी से ग्रस्त स्वयंसेवकों की जरुरत होती है। कुछ के लिए स्वस्थ लोगों की आवश्यकता होती है। अन्य के लिए केवल पुरुष या केवल महिलाओं की जरुरत होती है। किसी देश या क्षेत्र विशेष में नैदानिक परीक्षण के लिये स्वास्थ्य एजेंसियों तथा अन्य सक्षम एजेंसियों की अनुमति लेना आवश्यक है। ये एजेंसियाँ परीक्षण के जोखिम/लाभ अनुपात का अध्ययन करने के लिये उत्तरदायी होती हैं। चिकित्सीय उत्पाद या पद्धति के प्रकार और उसके विकास के स्तर के अनुरूप ये एजेंसियाँ प्रारंभ में स्वयंप्रस्तुत व्यक्तियों (वालंटियर) या रोगियों के छोटे-छोटे समूहों पर पायलट प्रयोग के रूप में अध्ययन की अनुमति देती हैं और आगे उत्तरोत्तर बड़े पैमाने पर तुलनात्मक अध्ययन की अनुमति देती हैं। यूएसए में संस्थागत समीक्षा बोर्ड (आई.आर.बी.) कई क्लीनिकल ट्रायलों की समीक्षा, निरीक्षण करता है और उन्हें स्वीकार करता है। यह चिकित्सकों, सांख्यिकीविदों, और समुदाय के सदस्यों की एक स्वतंत्र समिति है। इसकी निम्न भूमिकाएं हैं-.

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परमाणु भट्ठी

'''परमाणु भट्ठी''' का योजनामूलक (स्कीमैटिक) चित्र1 — नियन्त्रण छड़ें (कन्ट्रोल रॉड); 2 — शिल्डिंग; 3 — उष्मा अवरोधक (इंसुलेटर); 4 — मंदक (मॉडरेटर); 5 — नाभिकीय ईंधन; 6 — शीतलक (कूलैंट) परमाणु भट्ठी या 'न्यूक्लियर रिएक्टर' (nuclear reactor) वह युक्ति है जिसके अन्दर नाभिकीय शृंखला अभिक्रियाएँ आरम्भ की जाती हैं तथा उन्हें नियंत्रित करते हुए जारी रखा जाता है। .

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परखनली

रासायनिक तत्व रखे दो परखनली परखनली प्रयोगशाला में तत्वों के मुख्यतः तरल अवस्था में परख ने हेतु उपयोग किया जाता है। यह सीसे अथवा साफ प्लास्टिक का बना होता है। इसके ऊपर का भाग खुला होता है और नीचे का भाग लैटिन लिपि के "U" आकार का होता है। इसे किसी भी प्रकार के तत्व के परीक्षण के लिए बनाया जाता है। चूँकि काँच अथवा साफ प्लास्टिक में अवलोकन करना सरल होता है और साथ ही कई प्रकार के अम्ल का प्रभाव भी नहीं पड़ता है। .

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पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय

पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय (अंग्रेज़ी: University of Pittsburgh) अमेरिका के पिट्सबर्ग में स्थित एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय है। इसे "पिट्" भी कहा जाता है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना १७८७ में हुई थी। अभी यहाँ विभिन्न पाठ्यक्रमों में २७,५६२ विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। "पिट्" दर्शनशास्त्र के लिए जाना जाता है। यहाँ शिक्षा ग्रहण करने के लिए पूरी दुनिया से विद्यार्थी आते हैं। यहाँ एक अस्पताल भी है जिसे "पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय आयुर्विज्ञान केन्द्र" (University of Pittsburgh Medical Center (UPMC)) कहा जाता है। यहाँ विभिन्न प्रकार के शोध कार्य भी होते रहते हैं। इसके अतिरिक्त यह यहाँ पर स्थित एक ऊँचे भवन "कथेड्रल ऑफ़ लर्निंग" के लिए भी प्रसिद्ध है। यह खेलकूद के क्षेत्र में भी अग्रणी है और यहाँ के सर्वश्रेष्ठ खेल हैं - अमेरिकी फुटबॉल और बास्केटबॉल। भारतीय कमरे.

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प्यूज़ो

प्यूज़ो एक प्रमुख फ्रांसीसी कार ब्रांड है, जो यूरोप में आधारित दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता PSA प्यूज़ो, सिट्रोएन का हिस्सा है। मौजूदा प्युजो कम्पनी से पहले जो पारिवारिक व्यवसाय था उसकी स्थापना 1810 को की गयी थी। 20 नवम्बर 1858 को, एमिल प्युजो ने शेर वाले ट्रेडमार्क के लिए आवेदन किया। 1891 में कम्पनी ने अपने पहले ऑटोमोबाइल का उत्पादन किया। परिवारिक कलह के कारण, आर्मंड प्यूज़ो ने 1896 में Société des ऑटोमोबाइल प्यूज़ो की स्थापना की.

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प्रणाली विज्ञान

प्रणाली विज्ञान (Methodology) व्यवस्थित रूप से किसी अध्ययन क्षेत्र में प्रयोग होने वाली विधियों के विश्लेषण को कहते हैं। इसमें वैज्ञानिक जानकारी पर नहीं बल्कि उस जानकारी को प्राप्त करने के लिये जिन सिद्धांतों, तकनीकों और प्रणालियों को प्रयोगित किया जाता है उनपर दृष्टि डाली जाती है। उदाहरण के लिये यदी पृथ्वी के वायुमण्डल में आर्गन गैस की मात्रा का अनुमान लगाना हो तो प्रणाली विज्ञान में इस मात्रा और उसके अर्थ पर केन्द्रित होने के स्थान पर इस मात्रा का अनुमान लगाने की विधियों और उपकरणों का अध्ययन करा जाता है। जब कोई नया वैज्ञानिक तथ्य घोषित होता है तो अक्सर उस तथ्य का पता लगाने में प्रयोग होने वाली प्रणालियों की भी परख की जाती है और यदी वे अपार्याप्त हों तो तथाकथित तथ्य को अमान्य भी समझा जा सकता है। .

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प्रयोगशाला

उन्नीसवीं शताब्दी के भौतिकशास्त्री एवं रसायनज्ञ माइकल फैराडे अपनी प्रयोगशाला में जैव रसायन प्रयोगशाला प्रयोगशाला एक ऐसी सुविधा (कक्ष, भवन या स्थान) को कहते हैं, जो वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रयोग एवं मापन के लिए आवश्यक माहौल प्रदान करता है। .

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प्रकाश परिमल

प्रकाश परिमल (जन्म- २८ नवम्बर १९३६, बीकानेर) एक हिन्दी-राजस्थानी लेखक, कला-समीक्षक, चित्रकार और अनुवादक हैं। इनके साहित्य, दर्शन, वैदिक-ज्ञान, कला विषयक कई ग्रन्थ प्रकाशित हुए हैं। .

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प्रौद्योगिकी हस्तान्तरण

किसी वैज्ञानिक अनुसंधान का कोई व्यावहारिक उपयोग सोचना और उस उपयोग को साकार करने के लिये आवश्यक सारी जानकारी और प्रशिक्षण किसी दूसरे व्यक्ति या संस्था को मुहैया कराना प्रौद्योगिकी हस्तान्तरण कहलाता है। तकनीकी हतान्तरण का उद्देश्य यह होता है कि कोई अन्य व्यक्ति इस प्रौद्योगिकी के साथ अपनी पूंजी एवं अन्य संसाधन लगाकर इसका व्यावसायिक उपयोग करे। प्राचीन काल से ही प्रौद्योगिकी का हस्तानान्तरण होता आया है किन्तु आजकल यह एक नारा बन गया है और इसे सरकारें एक अभियान के रूप में चला रहीं है> इसके पीछे चिन्तन यह है कि किसी देश में जितनी अधिक तकनीकी का विकास और उपयोग होगा, उस देश की आर्थिक समृद्धि उतनी ही अधिक बढेगी। .

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पेट्रोलियम अनुसंधान एवं विकास केन्द्र, फरीदाबाद

पेट्रोलियम अनुसंधान एवं विकास केन्द्र भारत का एक अनुसंधान संस्थान है। 22 जुलाई, 2017 को भारत के पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंन्द्र प्रधान ने इसका उद्घटन किया। यह फरीदाबाद (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में स्थित है और ईंधन परीक्षण हेतु अपनी तरह का पहला पेट्रोलियम अनुसंधान एवं विकास केन्द्र है। यहाँ बीएस-6 गुणवत्ता वाले ईंधन उत्सर्जन के परीक्षण के लिए सुविधा उपलब्ध होगी। यह इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन द्वारा संचालित है। यह अनुसंधान एवं विकास केंद्र पेट्रोल, डीजल, इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल, जैव डीजल, सीएनजी, एलएनजी, हाइड्रोजन सीएनजी और 2 जी-इथेनॉल मिश्रणों सहित सभी प्रकार के ईंधन की जांच करने हेतु डिजाइन किया गया है। श्रेणी:भारत के अनुसंधान संस्थान.

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फोरम

अपने गौरव के चरम पर रोमन '''फोरम''' फोरम (Forum, लैटिन भाषा का शब्द) व्यापार, न्यायालय, या राजनीतिक विचार संबंधी या विहार और भ्रमण के लिए बनाए हुए स्थान भी फ़ोरम कहलाते हैं। रोम में ऐसी अनेक खुली जगहें थीं जो इस प्रकार के सार्वजनिक कार्य के लिए बनाई गई थीं। रोमन लोगों का विशेष ख्यातिप्राप्त फ़ोरम वैलटाईन तथा कैपिटोलाइन पहाड़ों के बीच की खुली जगह पर स्थित था। यही रोम का राजनीतिक एवं व्यापारिक केंद्र था। इसके इर्द गिर्द सुविख्यात शनिदेव का मंदिर, 184 ई.पू.

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बाबा कर्तारसिंह

बाबा कर्तारसिंह (सन् 1886-1961) भारतीय रसायनज्ञ थे। विज्ञान के अतिरिक्त सामाजिक तथा धार्मिक क्षेत्र में भी आपने महत्व की सेवाएँ कीं। सन् 1936 से 41 तक आप सिख धर्म संस्थान, तख्त, हरमंदिर जी, पटना, की निरीक्षक समिति के अध्यक्ष रहे। .

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बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्

बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् भारतीय स्वाधीनता की सिद्धि के बाद की राज्य सरकार ने बिहार विधान सभा द्वारा सन् 1948 ई. में स्वीकृत एक संकल्प के परिणामस्वरूप बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् की स्थापना राष्ट्रभाषा हिंदी की सर्वांगीण समृद्धि की सिद्धि के पवित्र उद्देश्य से सन् 1950 ई. के जुलाई मास के मध्य में की और इसका उद्घाटन समारोह, 11 मार्च सन् 1951 ई. के दिन बिहार के तत्कालीन राज्यपाल, महामहिम माधव श्रीहरि अणे की गौरवपूर्ण अध्यक्षता में, संपन्न हुआ। हिंदी की आवश्यकताओं की पूर्ति की दिशा में बिहार राज्य सरकार के संकल्प का यह संस्थान मूर्तरूप है। .

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ब्रेकथ्रू स्टारशॉट

एक कल्पित सौर पाल ब्रेकथ्रू स्टारशॉट (Breakthrough Starshot) एक अनुसंधान और अभियान्त्रिकी परियोजना है जिसका ध्येय प्रकाश पाल (light sail) से चलने वाले अंतरिक्ष यानों का एक बेड़ा विकसित करना है जो पृथ्वी से ४.३७ प्रकाशवर्ष दूर स्थित मित्र तारे (Alpha Centauri) के बहु तारा मंडल तक पहुँच सके। इन परिकल्पित अंतरिक्ष यानों का नाम "स्टारचिप" (StarChip) रखा गया है और इन्हें प्रकाश की गति का १५% से २०% तक का वेग देने का प्रस्ताव है। इस रफ़्तार से वे लगभग २० से ३० वर्षों में मित्र तारे के मंडल तक पहुँच सकेंगे और वहाँ से पृथ्वी को सूचित करेंगे। इतनी दूरी पर उनसे प्रसारित संकेतों को पृथ्वी तक पहुँचने में लगभग ४ साल लगेंगे। यह यान इतनी तेज़ी से चल रहे होंगे की वे केवल कुछ देर के लिये मंडल में रहकर आगे अंतरिक्ष में निकल जाएँगे। प्रस्तावकों की चेष्टा है कि इस अंतराल में यह यान अगस्त २०१६ में मिले प्रॉक्सिमा सेन्टॉरी बी (Proxima Centauri b) नामक स्थलीय ग्रह (जो पृथ्वी से ज़रा बड़ा ग़ैर-सौरीय ग्रह है) के समीप से भी उड़ें और उसकी तस्वीरें खींचकर पृथ्वी भेजें। .

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बी.एन. कृष्णमूर्ति शर्मा

बी.एन.

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बीरबल साहनी पुरावनस्पतिविज्ञान संस्थान

बीरबल साहनी पुरावनस्पतिविज्ञान संस्थान लखनऊ का एक पुरावनस्पतिविज्ञान पर अनुसंधान संस्थान है। यह भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है। से बीरबल साहनी: संस्थापक एवं प्रथम मानित निदेशक यह ५३, विश्वविद्यालय मार्ग, लखनऊ पर स्थित है। इसका नाम इसके संस्थापक श्री बीरबल साहनी, प्रसिद्ध परावनस्पति वैज्ञानिक के नाम पर रखा गया है। सितंबर, १९३९ में इनको अध्यक्ष बनाकर एक पुरावनस्पतिज्ञों की समिति अनुसंधान हेतु गठित हुई थी। इसकी प्रथम रिपोर्ट १९४० एवं अंतिम रिपोर्ट १९५० में प्रकाशित हुई। ३ जून, १९५३ को आठ वैज्ञानिकों के नाम से एक न्यास की स्थापना भारतीय सोसायटी पंजीकरण धारा-२१ (१८६०) के अंतर्गत हुई। इसका उद्देश्य पुरावनस्पति विज्ञान पर प्रो॰ बीरबल साहनी एवं सावित्री साहनी के मूल शोध में एकत्रित किए गये जीवाश्म संग्रह एवं एक सन्दर्भ पुस्त्तकालय के गठन हेतु फंड जुटाना था। और अंततः इस संस्थान की स्थापना १० सितंबर, १९४६ को हुई। इसके प्रथम मानित निदेशक बीरबल साहनी को बनाया गया। सरकार ने इसके लिए ३.५ एकड़ भूमि भी आवंटित की। संस्थान की इमारत ३ अप्रैल, १९४९ को इसकी नींव प्रथम प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू ने रखी। हालाँकि दुर्भाग्य से बीरबल साहनी की मृत्यु १० अप्रैल, १९४९ को ही हो गयी। किंतु १९५२ के अंत तक इसकी इमारत भी बनकर तैयार हो गयी। १९५१ में यूनेस्को ने इसे अपने तकनीकी सहयोग कार्यक्रम में भी सम्मिलित कर लिया। इतिहास .

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भट्ट मथुरानाथ शास्त्री

कवि शिरोमणि भट्ट श्री मथुरानाथ शास्त्री कविशिरोमणि भट्ट मथुरानाथ शास्त्री (23 मार्च 1889 - 4 जून 1964) बीसवीं सदी पूर्वार्द्ध के प्रख्यात संस्कृत कवि, मूर्धन्य विद्वान, संस्कृत सौन्दर्यशास्त्र के प्रतिपादक और युगपुरुष थे। उनका जन्म 23 मार्च 1889 (विक्रम संवत 1946 की आषाढ़ कृष्ण सप्तमी) को आंध्र के कृष्णयजुर्वेद की तैत्तरीय शाखा अनुयायी वेल्लनाडु ब्राह्मण विद्वानों के प्रसिद्ध देवर्षि परिवार में हुआ, जिन्हें सवाई जयसिंह द्वितीय ने ‘गुलाबी नगर’ जयपुर शहर की स्थापना के समय यहीं बसने के लिए आमंत्रित किया था। आपके पिता का नाम देवर्षि द्वारकानाथ, माता का नाम जानकी देवी, अग्रज का नाम देवर्षि रमानाथ शास्त्री और पितामह का नाम देवर्षि लक्ष्मीनाथ था। श्रीकृष्ण भट्ट कविकलानिधि, द्वारकानाथ भट्ट, जगदीश भट्ट, वासुदेव भट्ट, मण्डन भट्ट आदि प्रकाण्ड विद्वानों की इसी वंश परम्परा में भट्ट मथुरानाथ शास्त्री ने अपने विपुल साहित्य सर्जन की आभा से संस्कृत जगत् को प्रकाशमान किया। हिन्दी में जिस तरह भारतेन्दु हरिश्चंद्र युग, जयशंकर प्रसाद युग और महावीर प्रसाद द्विवेदी युग हैं, आधुनिक संस्कृत साहित्य के विकास के भी तीन युग - अप्पा शास्त्री राशिवडेकर युग (1890-1930), भट्ट मथुरानाथ शास्त्री युग (1930-1960) और वेंकट राघवन युग (1960-1980) माने जाते हैं। उनके द्वारा प्रणीत साहित्य एवं रचनात्मक संस्कृत लेखन इतना विपुल है कि इसका समुचित आकलन भी नहीं हो पाया है। अनुमानतः यह एक लाख पृष्ठों से भी अधिक है। राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली जैसे कई संस्थानों द्वारा उनके ग्रंथों का पुनः प्रकाशन किया गया है तथा कई अनुपलब्ध ग्रंथों का पुनर्मुद्रण भी हुआ है। भट्ट मथुरानाथ शास्त्री का देहावसान 75 वर्ष की आयु में हृदयाघात के कारण 4 जून 1964 को जयपुर में हुआ। .

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भारत इतिहास संशोधक मंडल

भारत इतिहास संशोधक मंडल, पुणे भारत इतिहास संशोधक मंडल पुणे में स्थित एक संस्थान है जो इतिहास से संबन्धित अनुसंधान के लिये प्रशिक्षण एवं सामग्री प्रदान करता है। इसकी स्थापना सन् १९१0 में प्रसिद्ध इतिहासकार विश्वनाथ काशीनाथ राजवाड़े तथा के सी महेंदले ने कि थी.

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भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान

भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (Indian Veterinary Research Institute या IVRI) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बरेली जिले में इज्जतनगर में स्थित है। यह पशुचिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की प्रमुख संस्था है। इसकी स्थापना सन् 1889 में हुई थी। .

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भारतीय प्रबन्धन संस्थान

भारतीय प्रबन्धन संस्थान (आई आई एम) भारत के सर्वोत्तम प्रबंधन संस्थान हैं। प्रबन्धन की शिक्षा के अतिरिक्त ये अनुसंधान व सलाह (कांसल्टेंसी) का कार्य भी करते हैं। वर्तमान में ६ भारतीय प्रबन्धन संस्थान हैं जो बंगलुरू, अहमदाबाद, कोलकाता, लखनऊ, इन्दौर तथा कोझीकोड में स्थित हैं। ये प्रबन्धन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा की उपाधि प्रदान करते हैं जो एम बी ए के समतुल्य है। इन संस्थानों में प्रवेश अखिल भारतीय स्तर पर होने वाली प्रवेश परीक्षा कामन ऐडमिशन टेस्ट (सी ए टी) के आधार पर होता है। यह परीक्षा दुनिया की सर्वाधिक प्रतिस्पर्धी परिक्षाओं में से है। .

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) वाराणसी

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) वाराणसी भारत का विज्ञान एवं अभियान्त्रिकी में शोध तथा स्नातक शिक्षा पर केंद्रित संस्थान है। संक्षिप्त में, यह 'आई.आई.टी.

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पालक्काड

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पालक्काड (आईआईटी पालक्काड) केरल के पलक्कड़ में स्थित एक सार्वजनिक स्वायत्त  अभियांत्रिकी और अनुसंधान संस्थान है। यह भारत के २०१४ के केंद्रीय बजट में प्रस्तावित पांच नए आईआईटी में से एक है। इसके परिसर का उद्घाटन ३ अगस्त २०१५ को पलक्कड़ में स्थित अस्थायी परिसर स्थान, अहिल्या एकीकृत परिसर पर हुआ था। भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा आईआईटी पलक्कड़ के प्रोफेसर-इन-इंचार्ज पी बी सुनील कुमार को निदेशक के रूप में नियुक्त किये जाने तक, आईआईटी मद्रास के निदेशक डॉ भास्कर राममूर्ति को मैनेटर निदेशक बनाया गया था। शिक्षण के स्तर को आईआईटी के अनुकूल रखने के लिए, आईआईटी मद्रास ने हाल ही में सेवानिवृत्त, पूर्व अध्यक्ष और विभिन्न विभागों के प्रमुख  एवं अनुभवी प्रोफेसरों के एक समूह को नए परिसर में स्थायी और अस्थायी प्रोफेसरों दोनों के रूप में नियुक्त किया है। .

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुम्बई

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई मुम्बई शहर के उत्तर-पश्चिम में पवई झील के किनारे स्थित भारत का अग्रणी स्वशासी अभियांत्रिकी विश्वविद्यालय है। यह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान श्रृंखला का दूसरा सबसे बड़ा परिसर और महाराष्ट्र राज्य का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है। आई.

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर भारत सरकार द्बारा १९५१ में स्थापित अभियांत्रिकी (इंजीनियरिंग) और प्रौद्योगिकी -उन्मुख एक स्वायत्त उच्च शिक्षा संस्थान है। सात आईआईटी में यह सबसे पुरानी है। भारत सरकार ने इसे आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान माना है और इसकी गणना भारत के सर्वोत्तम इंजीनियरिंग संस्थानों में होती है। आई आई टी खड़गपुर को विभिन्न इंजीनियरिंग शिक्षा सर्वेक्षणों जैसे कि इंडिया टुडे और आउटलुक में सर्वोच्च इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक का स्थान दिया गया है। १९४७ में भारत की स्वाधीनता के बाद आई आई टी खड़गपुर की स्थापना उच्च कोटि के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को प्रसिक्षित करने के लिए हुई थी। इसका संस्थागत ढांचा दूसरी IITओं की ही तरह है और इसकी प्रवेश की विधि भी बाकी IITओं के साथ ही होती है। आई आई टी खड़गपुर के छात्रों को अनौपचारिक तौर पर केजीपिअन् (KGPians) कहा जाता है। सभी IITओं में इसका कैम्पस क्षेत्रफल सबसे ज्यादा (२१०० एकड़) है और साथ ही विभाग और छात्रों की संख्या भी सर्वाधिक है। आई आई टी खड़गपुर, इल्लुमिनेशन, रंगोली, क्षितिज और स्प्रिन्ग्फेस्ट जैसे अपने वार्षिक उत्सवों के कारण जाना जाता है। .

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर की स्थापना २००९ में हुई थी। यह मध्य प्रदेश के इन्दौर में स्थित है। आरम्भ में इसकी कक्षाएँ देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के इंजीनियरी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान में लगीं किन्तु २०१६ से इसके अपने कैम्पस में लग रहीं हैं जो इन्दौर से लगभग २५ किमी पूरब में सिमरौल नामक स्थान में स्थित है। .

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भारतीय भाषा केन्द्र (जे॰एन॰यू॰)

https://commons.wikimedia.org/wiki/ भारतीय भाषा केन्द्र जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भाषा, साहित्य और संस्कृति अध्ययन संस्थान में भारतीय भाषाओं के अध्ययन का एक विभाग है। वर्तमान में इसके अंतर्गत हिन्दी, उर्दू और हिन्दी अनुवाद से संबंधित अध्ययन-अध्यापन और शोध किया जाता है। .

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भारतीय भूचुम्बकत्व संस्थान

'''भारतीय भूचुम्बकत्व संस्थान''' का नवी मुम्बई (पनवेल) स्थित नया प्रांगण भारतीय भूचुम्बकत्व संस्थान (Indian Institute of geomagnetism, IIG, आई आई जी) भारत का एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है जो भूचुम्बकत्व, वायुमण्डलीय भौतिकी, अंतरिक्ष भौतिकी तथा प्लाज्मा भौतिकी जैसे परस्पर सम्बन्धित क्षेत्रों में मूलभूत एवं अनुप्रयुक्त अनुसंधान में संलग्न है। यह भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आधीन एक स्वतंत्र (आटोनॉमस) संस्था है। http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid.

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भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली का एक घटक संस्थान है। सब्जियों की महत्ता को देखते हुए वर्ष 1992 में सातवीं पंचवर्षीय योजना के अंतगर्त सब्जी अनुसंधान परियोजना निदेशालय के रूप में इसकी स्थापना वाराणसी में की गई। निदेशालय के वृहद कार्य क्षेत्र, उपलब्धियां एवं सब्जी पर अनुसंधान की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, 17 अगस्त, 1999 को इसे राष्ट्रीय संस्थान “भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान” के रूप में मान्यता प्रदान की गई। यह संस्थान, 150 एकड़ में वाराणसी से दक्षिण-पश्चिम दिशा में शहँशाह पुर (अदलपुरा के निकट) में वाराणसी स्टेशन से 20 तथा बाबतपुर हवाई अड्डे से लगभग 40 कि॰मी॰ की दूरी पर स्थित है। .

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भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद

भारतीय सामाजिक अनुसंधान परिषद (Indian Council of Social Science Research/आईसीएसएसआर) भारत कि एक परिषद है जो सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देती है। इसकी स्‍थापना सामाजिक विज्ञान अनुसंधान को विकसित करने, विभिन्‍न शाखाओं को सुदृढ़ करने, सामाजिक विज्ञान अनुसंधान की गुणवत्‍ता एवं मात्रा में सुधार लाने तथा राष्‍ट्रीय नीति निर्माण में इसका उपयोग करने के लिए वर्ष 1969 में की गयी थी। इन लक्ष्‍यों को साकार करने के लिए आईसीएसएसआर ने सांस्‍थानिक बुनियादी ढांचे के विकास, अनुसंधान प्रतिभाओं का पता लगाने, अनुसंधान कार्यक्रमों को तैयार करने, व्‍यावसायिक संगठनों को सहायता प्रदान करने तथा विदेशों में सामाजिक वैज्ञानिकों के साथ संपर्क स्‍थापित करने पर विचार किया था। आईसीएसएसआर देश भर के विभिन्‍न सामाजिक विज्ञान अनुसंधान संस्‍थानों तथा इसके क्षेत्रीय केन्‍द्रों को रखरखाव एवं विकास अनुदान मुहैया कराता है। स्‍थानीय प्रतिभाओं संबंधी शोध एवं विकास को समर्थन देने और विकेन्‍द्रीकृत तरीके से इसके कार्यक्रमों तथा कार्यकलापों को समर्थन देने के लिए क्षेत्रीय केन्‍द्रों की स्‍थापना आईसीएसएसआर की विस्‍तारित शाखाओं के रूप में की गई है। वर्ष 1976 से ही आईसीएसएसआर सामाजिक विज्ञान के विभिन्‍न विषयों में शोध संबंधी सर्वेक्षण करता रहा है। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में सामाजिक विज्ञान संबंधी शोध को बढ़ावा देने के लिए विशेष बल देने के मद्देनजर आईसीएसएसआर में कई पहलें की गई हैं ताकि शोध प्रस्‍तावों और अन्‍य कार्यकलापों को समर्थन दिया जा सके। .

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भारतीय विचार केन्द्रम्

भारतीय विचार केन्द्रम् भारतीय विचार केन्द्रम् भारत का एक सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान है। इसका मुख्यालय तिरुवनन्तपुरम में है। इसकी स्थापना १९८२ में श्री पी परमेश्वरन् द्वारा की गयी थी। यह त्रावणकोर-कोच्चि की साहित्यिक, वैज्ञानिक तथा परमार्थ सोसायटीज अधिनियम १९९१ के आधीन पंजीकृत है। इस संस्था का उद्देश्य राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिये अनुसंधान करना है। लेखक, विचारक तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बहुत पुराने प्रचारक श्री पी परमेश्वरन् इसके संस्थापक-निदेशक हैं। अजमेर (राजस्थान) के प्रसिद्ध महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने भारतीय विचार केन्द्रम् को अनुसंधान हेतु मान्यता भी प्रदान की है। .

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भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, पुणे

भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, पुणे (आईआईएसईआर, पुणे, Indian Institute of Science Education and Research, Pune) भारत के पुणे में स्थित एक वैज्ञानिक शिक्षण और शोध संस्थान है। .

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भारतीय विज्ञान संस्थान

भारतीय विज्ञान संस्थान का प्रशासकीय भवन भारतीय विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Science) भारत का वैज्ञानिक अनुसंधान और उच्च शिक्षा के लिये अग्रगण्य शिक्षा संस्थान है। यह बंगलुरु में स्थित है। इस संस्थान की गणना भारत के इस तरह के उष्कृष्टतम संस्थानों में होती है। संस्थान ने प्रगत संगणन, अंतरिक्ष, तथा नाभिकीय प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान किया है।  2016 तक यह संस्थान दुनिया के सर्वश्रेष्ठ 250 संस्थानों में से एक था .

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भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आई.सी.एम.आर), नई दिल्ली, भारत में जैव-चिकित्सा अनुसंधान हेतु निर्माण, समन्वय और प्रोत्साहन के लिए शीर्ष संस्था है। यह विश्व के सबसे पुराने आयुर्विज्ञान संस्थानों में से एक हैं। इस परिषद को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त होती है। .

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भारतीय आविष्कारों की सूची

यहाँ पर भारत के दीर्घ सांस्कृतिक एवं प्रौद्योगिकीय इतिहास में भारत में की गयी खोजों, नवाचारों एवं अनुसंधानों की सूची एकत्र की गयी है। भारत में विकसित या आविष्कृत कुछ वस्तुएँ निम्नलिखित हैं- .

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भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला

भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (Physical Research Laboratory (PRL)) भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अन्तर्गत एक अनुसंधान संस्थान है। यहाँ अंतरिक्ष एवं इससे सम्बन्धित विज्ञानों पर अनुसंधान किया जाता है। इसकी स्थापना १९४७ में विक्रम साराभाई ने की थी। यहाँ भौतिकी, अन्तरिक्ष एवं वायुमण्डलीय विज्ञान, खगोल विज्ञान, खगोल भौतिकी, ग्रहीय एवं भूविज्ञान के चुनिन्दा क्षेत्रों में मूलभूत अनुसन्धान किया जाता है। जून 2018 में, भौतिक अनुसन्धान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से 600 प्रकाश वर्ष दूर स्थित हमारे सौर मंडल से बाहर के एक ग्रह ईपीआईसी 211945201 बी या 2के-236बी की खोज की। .

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भौतिकी संस्थान, भुवनेश्वर

भौतिकी संस्थान का पुस्तकालय भुवनेश्वर स्थित भौतिकी संस्थान भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग का एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान है। .

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महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ

महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी में स्थित एक विश्वविद्यालय है। पहले इसे केवल काशी विद्यापीठ के नाम से ही जाना जाता था किन्तु बाद में इसे भारत के महान नेता महात्मा गाँधी को पुनः समर्पित किया गया और उनका नाम इसके साथ जोड़ दिया गया (११ जुलाई १९९५)। इस विश्वविद्यालय में स्नातक, परास्नातक एवं अनुसंधान स्तर की शिक्षा उपलब्ध है। विश्वविद्यालय ने देश के प्रतिष्ठित पत्रिका इंडिया टुडे के सर्वे में देश भर में 13वां स्थान अर्जित किया। .

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महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय

महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय (MGCGV) मध्य प्रदेश के सतना जिले में मन्दाकिनी नदी के किनारे चित्रकूट में स्थित है। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य महात्मा गांधी के ग्रामीण विकास के स्वप्न को साकार कर ग्राम स्वराज्य की स्थापना है। अत: सम्यक तकनीक की शिक्षा और इसका प्रसार करना इसका प्रमुख लक्ष्य है। इसकी स्थापना १२ फ़रवरी सन् १९९१ को महाशिवरात्रि के दिन मध्यप्रदेश सरकार के अधिनियम (९, १९९१) के द्वारा हुई। .

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महाविद्यालय (कॉलेज)

सेंट एन्सेल्म कॉलेज, एक अमेरिकी कॉलेज. वर्तमान में कॉलेज (लैटिन: कॉलीजियम (collegium)) शब्द का संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रयोग डिग्री प्रदान करने वाले तृतीयक शैक्षणिक संस्थान के लिये किया जाता है एवं अन्य अंग्रेजी भाषी देशों में निजी शैक्षणिक प्रणाली में द्वितीयक या माध्यमिक स्कूल के लिये किया जाता है। अधिक विस्तृत रूप में, यह किसी भी कॉलेज समूह का नाम हो सकता है, उदाहरण के लिए एक निर्वाचन कॉलेज, हथियारों का कॉलेज, कार्डिनलों का कॉलेज.

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मुक्त अनुसन्धान

मुक्त अनुसन्धान (Open research) का ध्येय अनुसन्धान को और अधिक पारदर्शी बनाना, और अधिक सहकारी (कोलैबोरेटिव) बनाना, तथा और अधिक दक्ष बनाना है। इसका मुख्य मुद्दा वैज्ञानिक सूचना तक मुक्त पहुँच प्रदान करना है, विशेष रूप से बड़े-बड़े विद्वतापूर्ण जर्नलों तथा उनसे सम्बन्धित आंकड़ों तक जिनको परम्परागत विज्ञान छिपाने की कोशिश करता है। मुक्त अनुसन्धान उसी भावना से किया जाता है जिस भावना से निःशुल्क तथा मुक्तस्रोत सोफ्टवेयर (FOSS)। .

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मेरिल लिंच

बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच बैंक ऑफ अमेरिका के निवेश बैंकिंग और धन प्रबंधन प्रभाग का हैं। 20,000 से ज्यादा दलालों और 2.2 ट्रिलियन परिसंपत्तियों के साथ यह दुनिया का सबसे बड़ा ब्रोकरेज है। 2009 से पहले मेरिल लिंच एण्ड कं, इंक.

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मेहदी ख्वाजा पीरी

मेहदी ख्वाजा पीरी (फ़ारसी), नूर अंतर्राष्ट्रीय माइक्रोफिल्म केन्द्र, नई दिल्ली के संस्थापक है। इनका जन्म (1955) में तेहरान में स्थित याहिया मज़ार (इमाम जादा) के पास एक धार्मिक परिवार में हुआ। मरम्मत, पेस्टिंग और एक ही पाण्डुलिपि (हस्तलिपि) की दूसरी प्रतिलिपियों के प्रिंट के नए तरीको का अविष्कार किया जो प्राचीन ग्रंथो के संरक्षण में एक अभिनव कदम है। उन्होंने भारत में पुस्तको के पुनरुद्धार (पुनर्जीवन) में अपने जीवन के 35 वर्ष बिताये। इस अवधि के दौरान वह भारत की विविध संस्कृतियों से परिचित हुए। और इसके अलावा हिंदी, अंग्रेजी, और अरबी में भी महारत हासिल की। .

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मेकियावेलियनिस्म

निकोलो मेकियवेली ओक्सवोर्ड अंग्रेजी शब्दकोश के अनुसार मेकियावेलियनिस्म का अर्थ "शासन कला में या सामान्य आचरण में चालाक और कपट होना" है। यह इताल्वि रजनयिक निकोलो मेकियवेलि के प्रसिद्ध किताब "द प्रिंस" के मध्यम से प्राप्त हुआ है। इस शब्द का समान उपयोग आधुनिक मनोविज्ञान में भी किया जाता है, जहां यह अंधेरे त्रय हस्तियों का वर्णन करता है। जो विशेषता से निंदक विश्वासों और व्यावहारिक नैतिकता के साथ जुड़े एक duplicitous पारस्परिक शैली है। "मेकियावेलियनिस्म" एक शब्द के रूप में पहली बार १६२६ को ओक्स्वोर्ड अंग्रेजी शब्द्कोश में प्रकाशित हुआ था। .

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यूरोपीय नाभिकीय अनुसंधान संगठन

सर्न (Organisation Européenne pour la Recherche Nucléaire या CERN (फ़्रान्सीसी में) .

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राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान

राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान (National Dairy Research Institute (NDRI)) करनाल में स्थित भारत का प्रमुख डेरी अनुसंधान संस्थान है। १९८९ में इसे समविश्वविद्यालय (डॅऍम्ड यूनिवर्सिटी) का दर्जा प्राप्त हुआ था। .

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राष्ट्रीय रेडियो खगोल भौतिकी केन्द्र

भारत का राष्ट्रीय रेडियो खगोल भौतिकी केन्द्र (एन सी आर ए), पुणे विश्वविद्यालय परिसर में स्थित है। यह टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान का ही एक भाग है। खोडद में, पुणे से ८० कि.मी दूर, वृहत मीटरवेव रेडियो टेलिस्कोप (जी एम आर टी), विश्व का सबसे बड़ा रेडियो दूरदर्शी निर्माण एवं स्थापित किया है। यह मीटर तरंगदैर्घ्य पर संचालित है। इसमें ३० पूर्णतया घुमाने लायक डिश लगी हैं, जिसमे से हर डिश का व्यास ४५ मीटर हैं। एवं पूरी स्थापना २५ वर्ग कि॰मी॰ के क्षेत्र में फैली हुई है। .

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राष्ट्रीय शर्करा संस्थान

राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (National Sugar Institute) भारत सरकार का शर्करा से संबन्धित अनुसंधान का संस्थान है। यह उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित है। .

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राष्ट्रीय समेकित नाशीजीव प्रबन्धन केन्द्र

राष्ट्रीय समेकित नाशीजीव प्रबन्धन केन्द्र (नेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेन्ट / NCIPM) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का अनुसंधान केन्द्र है। फरवरी 1988 में इसकी स्थापना की गयी थी, जिसका मुख्य उदेश्य था की भारत में पौध सुरक्षा के लिऎ एक अलग से केन्द्र का स्थापित करना। इस केन्द्र के कार्यक्रम विस्तार रूप से सभी केन्द्र, संस्थान, किसानो के साथ, तथा देश व किसानो के हित से जुडे हुऎ हैं! राष्ट्रीय समेकित नाशीजीव प्रबंधन (आई.पी. एम.) एक ऐसी प्रणाली है जिसमें फसल उत्पादन एवं पादप संरक्षण सम्बन्धी उन्नत विधियों को शामिल किया जाता है जिससे नाशीजीवों (कीट रोगों, सूत्रकृमियों, खरपतवार, पक्षियों, इत्यादि) से होने वाली आर्थिक हानि को कम किया जा सके। आई.

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राष्ट्रीय अंटार्कटिक एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र

राष्ट्रीय अंटार्कटिक एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र (National Centre for Antarctic & Ocean Research / एनसीएओआर) भारतीय ध्रुवीय (आर्कटिक, अंटार्कटिक और दक्षिणी महासागर) कार्यक्रम को समन्वित करने और लागू करने वाली केंद्रीय एजेंसी है। भारत में यह एकमात्र ऐसा संस्थान है जिसके पास ध्रुवीय प्रदेशों से हिमखंड के संग्रहण और प्रसंस्करण की क्षमता है। अब तक भारत सफलतापूर्वक अंटार्कटिका के लिए 30 वैज्ञानिक अभियानों और आर्कटिक तथा दक्षिणी महासागर प्रत्येक के लिए पांच अभियानों को प्रारंभ कर चुका है। एनसीएओआर की स्थापना २५ मई, १९९८ में डॉ॰ प्रेम चंद पाण्डेय के निदेशक पद पर बने रहते हुए हुई थी जबकि पूर्व में इसे अंटार्कटिक अध्ययन केंद्र के नाम से जाना जाता था जिसकी नीव डॉ॰ प्रेम चंद पाण्डेय की नियुक्ति के साथ १२ मई, १९९७ पडी और इस प्रकार इसका अस्तित्व १२ मई, १९९७ से माना जा सकता है। वर्ष 2010-11 में, एनसीएओआर ने दक्षिण ध्रुव के लिए सर्वप्रथम भारतीय अभियान की शुरुआत की। अंटार्कटिका में 'मैत्री' के अलावा भारत के पास अब आर्कटिक में अनुसंधान बेस 'हिमाद्रि' है। पूर्वी अंटार्कटिका में नवीन अनुसंधान बेस 'भारती' के निर्माण का प्रथम चरण पूरा हो चुका है और संभावना है कि 2012-13 में स्टेशन को अधिकृत कर दिया जाएगा। बर्फ तोड़ने वाले एक नए ध्रुवीय अनुसंधान पोत के अधिग्रहण की प्रक्रिया उन्नत चरण में है। .

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रोमांच यात्रा

रोमांच यात्रा (adventure travel) या साहसिक पर्यटन एक प्रकार का पर्यटन होता है जिसमें यात्री रोमांच के लिए खोजयात्रा करता है या जोखिम अनुभव करने की चेष्टा में संकटजनक (वास्तविक या प्रतीत होने वाले) गतिविधियों में भाग लेता है। इस श्रेणी में पर्वतारोहण, कुछ प्रकार के वनभ्रमण, गहरी-अंधेरी गुफ़ाओं में प्रवेश, युद्धग्रस्त क्षेत्रों का भ्रमण, इत्यादि शामिल हैं। .

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श्री कल्याण महाविद्यालय, सीकर

श्री कल्याण महाविद्यालय, (Shri Kalyan Government PG College) संक्षेप में एस.

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शैक्षिक मनोविज्ञान

गिनतारा, अमूर्त वस्तुओं वस्तुओं को मूर्त बनाकर गणित की मूलभूत बातें सिखाने की युक्ति है। शैक्षिक मनोविज्ञान (Educational psychology), मनोविज्ञान की वह शाखा है जिसमें इस बात का अध्ययन किया जाता है कि मानव शैक्षिक वातावरण में सीखता कैसे है तथा शैक्षणिक क्रियाकलाप अधिक प्रभावी कैसे बनाये जा सकते हैं। 'शिक्षा मनोविज्ञान' दो शब्दों के योग से बना है - ‘शिक्षा’ और ‘मनोविज्ञान’। अतः इसका शाब्दिक अर्थ है - शिक्षा संबंधी मनोविज्ञान। दूसरे शब्दों में, यह मनोविज्ञान का व्यावहारिक रूप है और शिक्षा की प्रक्रिया में मानव व्यवहार का अध्ययन करने वाला विज्ञान है। शिक्षा के सभी पहलुओं जैसे शिक्षा के उद्देश्यों, शिक्षण विधि, पाठ्यक्रम, मूल्यांकन, अनुशासन आदि को मनोविज्ञान ने प्रभावित किया है। बिना मनोविज्ञान की सहायता के शिक्षा प्रक्रिया सुचारू रूप से नहीं चल सकती। शिक्षा मनोविज्ञान से तात्पर्य शिक्षण एवं सीखने की प्रक्रिया को सुधारने के लिए मनोवैज्ञानिक सिद्धान्तों का प्रयोग करने से है। शिक्षा मनोविज्ञान शैक्षिक परिस्थितियों में व्यक्ति के व्यवहार का अध्ययन करता है। इस प्रकार शिक्षा मनोविज्ञान में व्यक्ति के व्यवहार, मानसिक प्रक्रियाओं एवं अनुभवों का अध्ययन शैक्षिक परिस्थितियों में किया जाता है। शिक्षा मनोविज्ञान मनोविज्ञान की वह शाखा है जिसका ध्येय शिक्षण की प्रभावशाली तकनीकों को विकसित करना तथा अधिगमकर्ता की योग्यताओं एवं अभिरूचियों का आंकलन करना है। यह व्यवहारिक मनोविज्ञान की शाखा है जो शिक्षण एवं सीखने की प्रक्रिया को सुधारने में प्रयासरत है। .

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शैक्षिक अनुसंधान

शैक्षिक अनुसंधान (Educational research) छात्र अध्ययन, शिक्षण विधियों, शिक्षक प्रशिक्षण और कक्षा गतिकी जैसे विभिन्न पहलुओं के मुल्यांकन को सन्दर्भित करने वाली विधियों को कहा जाता है। शैक्षिक अनुसंधान से तात्पर्य उस अनुसंधान से होता है जो शिक्षा के क्षेत्र में किया जाता है। उसका उद्देश्य शिक्षा के विभिन्न पहलुओं, आयामों, प्रक्रियाओं आदि के विषय में नवीन ज्ञान का सृजन, वर्तमान ज्ञान की सत्यता का परीक्षण, उसका विकास एवं भावी योजनाओं की दिशाओं का निर्धारण करना होता है। टैंवर्स ने शिक्षा-अनुसंधान को एक ऐसी क्रिया माना है जिसका उद्देश्य शिक्षा-संबंधी विषयों पर खोज करके ज्ञान का विकास एवं संगठन करना होता है। विशेष रूप से छात्रों के उन व्यवहारों के विषय में ज्ञान एकत्र करना, जिनका विकास किया जाना शिक्षा का धर्म समझा जाता है, शिक्षा-अनुसंधान में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण समझा जाता है। ट्रैवर्स के अनुसार, शिक्षा के विभिन्न पहलुओं के विषय में संगठित वैज्ञानिक ज्ञान-पुंज का विकास अत्यन्त आवश्यक है, क्योंकि उसी के आधार पर शिक्षक के लिए यह निर्धारित करना संभव होता है कि छात्रों में वांछनीय व्यवहारों के विकास हेतु किस प्रकार की शिक्षण एवं अधिगम परिस्थितियों का निर्माण करना आवश्यक होगा। .

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शोध-प्रबन्ध

वह दस्तावेज जो किसी शोधार्थी द्वारा किये गये शोध को विधिवत प्रस्तुत करता है, शोध-प्रबन्ध (dissertation या thesis) कहलाता है। इसके आधार पर शोधार्थी को कोई डिग्री या व्यावसायिक सर्टिफिकेट प्रदान की जाती है। यह विश्वविद्यालय से शोध-उपाधि प्राप्त करने के लिए लिखा जाता है। इसे एक ग्रंथ के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। सरल भाषा में कहें तो एम फिल अथवा पी एच डी की डिग्री के लिए किसी स्वीकृत विषय पर तैयार की गई किताब जिसमें तथ्य संग्रहित रहते हैं तथा उनके आधार पर किसी निष्कर्ष तक पहुँचने की कोशिश की जाती है। यह आलोचनात्मक तो होता है किंतु उससे थोड़ा भिन्न भी होता है। डॉ नगेन्द्र के शब्दों के सहारे कहें तो एक अच्छा शोध प्रबंध एक अच्छी आलोचना भी होती है। मनुष्य की आंतरिक जिज्ञासा सदा से ही अनुसंधान का कारण बनती रही है। अनुसंधान, खोज, अन्वेषण एवं शोध पर्यायवाची है। शोध में उपलब्ध विषय के तथ्यों में विद्यमान सत्य को नवरूपायित कर पुनरोपलब्ध किया जाता है। शोध में शोधार्थी के सामने तथ्य मौजूद होते है, उसे उसमें से अपनी सूझ व ज्ञान द्वारा नवीन सिद्धियों को उद्घाटित करना होता है। .

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सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरत

सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरत जिसे 'एन आई टी सूरत' के नाम से भी जाना जाता है, प्रौद्योगिकी एवम अभियांत्रिकी का राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है। यह भारत के लगभग तीस राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एन आई टी) में से एक है। इसे भारत सरकार ने १९६१ में स्थापित किया था। इसकी संगठनात्मक संरचना एवम स्नातक प्रवेश प्रक्रिया शेष सभी एन आई टी की तरह ही है। संस्थान में इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी, विज्ञान मानविकी और प्रबंधन में स्नातक, पूर्व स्नातक एवम डॉक्टरेट के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। .

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सारणी

वेब ब्राउजर में प्रदर्शित एक सारणी सारणी (table) आंकड़ों को पंक्ति (rows) तथा खाना (columns) में व्यवस्थित करने का एक साधन है। इसका उपयोग संचार, अनुसंधान तथा आंकड़ा-विश्लेषण में बहुतायत में होता है। सारणी प्रिंट मिडिया, हस्तलिखित नोट, कंप्युटर सॉफ्टवेयर, ट्रैफिक संकेतों, तथा अनेकानेक जगहों पर देखने को मिल जाती है। .

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सालिम अली पक्षिविज्ञान एवं प्रकृतिक इतिहास केंद्र

सालिम अली पक्षिविज्ञान एवं प्रकृतिक इतिहास केंद्र का प्रतीक चिंह सालिम अली पक्षिविज्ञान एवं प्रकृतिक इतिहास केंद्र (Sálim Ali Centre for Ornithology and Natural History (SACON)) भारत में पक्षिविज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास से सम्बन्धित सूचना, शिक्षा एवं अनुसंधान का राष्ट्रीय केन्द्र है। इसका नामकरण प्रसिद्ध पक्षिविज्ञानी सालिम अली के नाम पर किया गया है। यह तमिलनाडु के योयम्बत्तूर नगर में स्थित है। .

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साहा नाभिकीय भौतिकी संस्थान

कोई विवरण नहीं।

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सांख्यिकी

एक ग्राफ जिसमें सामान्य वितरण (Normal distribution) प्रदर्शित है। सांख्यिकी, गणित की वह शाखा है जिसमें आँकड़ों का संग्रहण, प्रदर्शन, वर्गीकरण और उसके गुणों का आकलन का अध्ययन किया जाता है। सांख्यिकी एक गणितीय विज्ञान है जिसमें किसी वस्तु/अवयव/तंत्र/समुदाय से सम्बन्धित आकड़ों का संग्रह, विश्लेषण, व्याख्या या स्पष्टीकरण और प्रस्तुति की जाती है। यह विभिन्न क्षेत्रों में लागू है - अकादमिक अनुशासन (academic disciplines), इस से प्राकृतिक विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, मानविकी, सरकार और व्यापार आदि। सांख्यिकीय तरीकों को डेटा के संग्रह के संग्रहण अथवा वर्णन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे वर्णनात्मक सांख्यिकी (descriptive statistics) कहा जाता है। इसके अतिरिक्त, डेटा में पैटर्न को इस तरह से मॉडल किया जा सकता है कि वह निष्कर्षों की यादृच्छिकता और अनिश्चितता का कारण बने और फिर इस प्रक्रिया को उस विधि, या जिस जनसंख्या का अध्ययन किया जा रहा हो, उसके बारे में अनुमान लगाने के लिए किया जाता है। इसे अनुमानित सांख्यिकी (inferential statistics) कहा जाता है। वर्णनात्मक तथा अनुमानित सांख्यिकी, दोनों में व्यावहारिक सांख्यिकी सम्मिलित है। एक और विद्या है - गणितीय सांख्यिकी (mathematical statistics), जो विषय के सैद्धान्तिक आधार से सम्बन्ध रखती है। आप किरण किसी श्रेणी में पदों के बेकरार को प्रदर्शित करता है जबकि विषमता का संबंध उसकी आकृति की विशिष्टताओं से होता है अन्य शब्दों में अवकरण हमें श्रेणी की संरचना के बारे में बताता है जबकि विषमता हमें वक्र की आकृति के बारे में बताता है अपकिरण हमें श्रेणी के पदों के मानक रूप में स्वीकृत अन्य किसी पद के व्यक्तिगत अंतरों की ओर संकेत करता है विषमता विचलनों की दशा की ओर संकेत करता है अब करण द्वितीय श्रेणी के माध्यम पर आधारित है .

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संरक्षित जैवमंडल

संरक्षित जैवमंडल (कई स्थानों पर आरक्षित जैवमंडल भी कहा जाता है) या बायोस्फेयर रिज़र्व, यूनेस्को द्वारा अपने कार्यक्रम मैन एंड द बाओस्फेयर (मानव और जैवमंडल) (MAB) के अंतर्गत दिया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय संरक्षण उपनाम है। संरक्षित जैवमंडलों का विश्व नेटवर्क, विश्व के 107 देशों के सभी 533 संरक्षित जैवमंडलों का एक संग्रह है (मई, 2009 तक)।संरक्षित जैवमंडल के रूप में मान्यता प्राप्त स्थल, किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते का विषय नहीं है बस इनके लिए एक समान मानदंडों का पालन करना होता है। यह उस देश के संप्रभु अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं जहाँ पर यह स्थित हैं, हालांकि, यह विचारों और अनुभवों को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित जैवमंडलों का विश्व नेटवर्क के अंतर्गत साझा करते हैं। संरक्षित जैवमंडलों का विश्व नेटवर्क के वैधानिक ढाँचे के अनुसार जैवमंडलों का निर्माण उद्देश्य “मानव और जैवमंडल के बीच एक संतुलित संबंध का प्रदर्शन करना और इसे बढ़ावा देना है”। अनुच्छेद 4 के अंतर्गत, किसी भी संरक्षित जैवमंडल के अंतर्गत सभी उपस्थित पारिस्थितिक तंत्रों का समावेश होना चाहिए यानि इसे तटीय, पार्थिव या समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों के संयोजन से मिलकर बना होना चाहिए। उपयुक्त अंचलों के निर्माण और प्रबंधन के माध्यम से, इन पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण और उनमें जैव विविधता को बनाए रखा जा सकता है। संरक्षित जैवमंडल का डिजाइन के अनुसार किसी भी जैवमंडल को तीन क्षेत्रों मे विभाजित होना चाहिए जिनमे पहला है एक कानूनी रूप से सुरक्षित प्रमुख क्षेत्र, दूसरा एक बफर क्षेत्र जहां गैर संरक्षण गतिविधियाँ निषिद्ध हों और तीसरा एक संक्रमण क्षेत्र जहां स्वीकृत प्रथाओं की सीमित अनुमति दी गयी हो। यह स्थानीय समुदायों के लाभों को ध्यान मे रख कर किया जाता है ताकि यह समुदाय प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग स्थाई रूप से (एक लंबे समय तक) कर सकें। इस प्रयास के लिए प्रासंगिक अनुसंधान, निगरानी, शिक्षा और प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। उपरोक्त सुझाई सभी बातों पर अमल कर जैव विविधता समझौते की कार्यसूची 21 (एजेंडा 21) को लागू किया जाता है। 2007 में संरक्षित जैवमंडलों का विश्व नेटवर्क को दर्शाता मानचित्र। .

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स्टैटा

स्टैटा के साधारण उद्देश्यों की पूर्ति के लिए तय्यार किया गया सांख्यिकी विश्लेषण से जुड़ा सॉफ्टवेयर पैकेज है। इसे 1985 में स्टैटाकॉर्प ने तय्यार किया था। इसके अधिकांश उपयोगकर्ता शोध करते हैं, विशेष रूप से अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, चिकित्सा जीवविज्ञान और महामारी विज्ञान के क्षेत्रों में। .

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सैली राइड

सैली क्रिस्टेन राइड एक अमेरिकी भौतिक विज्ञानी और अंतरिक्ष यात्री थी। उनका जन्म 26 मई, १९५१ को लॉस एंजेलिस में हुआ था। वह १९७८ में NASA में शामिल हुई और १९८३ में वह पहली अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री बनी। परन्तु अंतरिक्ष में जाने वाली वह तीसरी महिला थी। सैली राइड सबसे कम उम्र की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री थी जो मात्र 32 साल की उम्र में ही अंतरिक्ष की यात्रा की थी। नेत्र-कक्षीय चुनौती में दो बार उड़ान भरने के बाद १९८७ में सैली राइड ने नासा छोड़ दिया था। उसके बाद उन्होंने दो साल भौतिक विज्ञान की प्रोफेसर के रूप में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और शस्त्र नियंत्रण, कैलिफोर्निया में, सैन डिएगो विश्वविद्यालय में और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के सेंटर में काम किया और फिर मुख्य रूप से प्रकाशिक विषम दैशिकता और त्रिज्या या थॉमसन बिखरने शोध पर अनुसंधान किया। .

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हरि ठाकुर

हरि_ठाकुर हरि ठाकुर का जन्मः १६ अगस्त १९२७, में रायपुर में हुआ उन्होंने बी.ए., एल एल.

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हरीशचंद्र अनुसंधान संस्थान

हरीशचंद्र अनुसंधान संस्थान (अंग्रेज़ी: हरीशचंद्र रिसर्च इंस्टीट्यूट) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में इलाहाबाद में स्थित एक अनुसंधान संस्थान है। इसका नाम प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ हरीशचन्द्र के नाम पर रखा गया है। यह एक स्वायत्त संस्थान है, जिसका वित्तपोषण परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरका द्वारा किया जाता है। यहां विभिन्न संकायों के ३० के लगभग सदस्य हैं। इस संस्थान में गणित एवं सैद्धांतिक भौतिकी पर अनुसंधान के विशेष प्रबंध हैं। इसकी स्थापना १९६६ में बी.एस.

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हिन्दी पत्रिकाएँ

हिन्दी पत्रिकाएँ सामाजिक व्‍यवस्‍था के लिए चतुर्थ स्‍तम्‍भ का कार्य करती हैं और अपनी बात को मनवाने के लिए एवं अपने पक्ष में साफ-सूथरा वातावरण तैयार करने में सदैव अमोघ अस्‍त्र का कार्य करती है। हिन्दी के विविध आन्‍दोलन और साहित्‍यिक प्रवृत्तियाँ एवं अन्‍य सामाजिक गतिविधियों को सक्रिय करने में हिन्दी पत्रिकाओं की अग्रणी भूमिका रही है।; प्रमुख हिन्दी पत्रिकाएँ- .

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हिन्दी की साहित्यिक पत्रिकायें

हिंदी की साहित्यिक पत्रिकाएँ, हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं के विकास और संवर्द्धन में उल्लेखनीय भूमिका निभाती रहीं हैं। कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध, नाटक, आलोचना, यात्रावृत्तांत, जीवनी, आत्मकथा तथा शोध से संबंधित आलेखों का नियमित तौर पर प्रकाशन इनका मूल उद्देश्य है। अधिकांश पत्रिकाओं का संपादन कार्य अवैतनिक होता है। भाषा, साहित्य तथा संस्कृति अध्ययन के क्षेत्र में साहित्यिक पत्रिकाओं का उल्लेखनीय योगदान रहा है। वर्तमान में प्रकाशित कुछ प्रमुख पत्रिकाओं की सूची निम्नवत है: .

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होमी भाभा राष्ट्रीय संस्थान

होमी भाभा राष्ट्रीय संस्थान (Homi Bhabha National Institute(HBNI)) भारत का एक मानित विश्वविद्यालय है। दस प्रमुख अनुसंधान संस्थानों से मिलकर इसकी रचना हुई है। इसका नामकरण भारत के प्रसिद्ध भौतिकशास्त्री होमी जहाँगीर भाभा के नाम पर किया गया है। श्री रवि ग्रोवर इसके वर्तमान निदेशक हैं। .

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जिमी वेल्स

जिमी वेल्स (जन्म:7 अगस्त 1966, हुन्त्विली अलबामा) एक अमेरिकी इण्टरनेट उद्यमी होने के अतिरिक्त विकिपीडिया के संस्थापक एवं प्रमोटर हैं। उनका पूरा नाम जिमी डोनेल वेल्स है। उनके मित्र उन्हें प्यार से जिम्बो कहकर पुकारते हैं। वे Jimmy Wales के नाम से इण्टरनेट पर ब्लॉग भी लिखते थे। संयुक्त राज्य अमेरिका के इस नौजवान ने दो-दो विश्वविद्यालयों में अध्यापन किया, पी०एचडी० करके पहले एक वित्तीय संस्थान में नौकरी की तत्पश्चात् शिकागो में शोध निदेशक हो गये। 1996 में बोमिस के नाम से दो साझीदारों की भागीदारी से एक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने वाली संस्था स्थापित की जिसने न्यूपेडिया नाम के मुक्त ज्ञानकोश प्रदायी संस्थान व उसके अनुवर्ती प्रतिष्ठान विकिपीडिया को प्रारम्भिक आर्थिक सहयोग प्रदान किया। सम्प्रति (आजकल) वे विकिमीडिया फाउण्डेशन के न्यासी बोर्ड में काम करते हैं। यह फाउण्डेशन एक धर्मार्थ संगठन है जो बिना किसी लाभ के विकिपीडिया चलाता है। .

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, (Jawaharlal Nehru University) संक्षेप में जे॰एन॰यू॰, नई दिल्ली के दक्षिणी भाग में स्थित केन्द्रीय विश्‍वविद्यालय है। यह मानविकी, समाज विज्ञान, विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय अध्ययन आदि विषयों में उच्च स्तर की शिक्षा और शोध कार्य में संलग्न भारत के अग्रणी संस्थानों में से है। जेएनयू को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NACC) ने जुलाई 2012 में किये गए सर्वे में भारत का सबसे अच्छा विश्वविद्यालय माना है। NACC ने विश्वविद्यालय को 4 में से 3.9 ग्रेड दिया है, जो कि देश में किसी भी शैक्षिक संस्थान को प्रदत उच्चतम ग्रेड है .

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जेन गुडाल

डेम जेन मॉरिस गुडाल डेम जेन मॉरिस गुडाल, एक अंग्रेजी प्राइमेटोलोजिस्ट, चरित्रशास्त्री, मनुष्य-शरीर-रचन-शास्त्री, और यू.एन.

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वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्‍थान, देहरादून

वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान देहरादून में स्थित भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार, का एक स्वायत्तशासी शोध संस्थान है। यह भारत सरकार द्वारा 1968 में स्थापित किया गया था। इसे पहले 'हिमालय भूविज्ञान संस्थान' नाम से जाना जाता है। पिछले वर्षों के दौरान यह संस्थान हिमालय भूविज्ञान के एक उत्कृष्ट केन्द्र के रूप में विकसित हो गया है तथा इसे एक अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त राष्ट्रीय प्रयोगशाला के रूप में मान्यता दी जा चुकी है जहां देश में उन्नत स्तर का शोध निष्पादित करने के लिए आधुनिकतम उपकरणों तथा अन्य आधारिक सुविधाओं से सुसज्जित प्रयोगशालाएं हैं। जनरल माधवसिंह रोड पर घंटाघर से 5 कि॰मी॰ दूर पहाड़ी के ऊपर स्थित वाडिया संस्थान उत्तराखंड हिमनदों का एक अनोखा संग्रहालय है। इनका अपना शोध संस्थान और प्रकाशन संस्थान भी है जो मानचित्र, शोधपत्र तथा पुस्तकें आदि प्रकाशित करता है। .

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विचारों का इतिहास

विचारों का इतिहास, इतिहास में अनुसंधान का एक क्षेत्र है जो समय के साथ मानव के विचारों में परिवर्तन, विचारों की अभिव्यक्ति एवं उनकी संरक्षण आदि का अध्ययन करता है। इस प्रकार यह बौद्धिक इतिहास (intellectual history) का एक उपभाग कहा जा सकता है। विचारों का इतिहास के सम्यक अध्ययन में दर्शन का इतिहास, विज्ञान का इतिहास और साहित्य का इतिहास बहुत उपयोगी हैं। स्वीडेन में तो १९३० के दशक से ही यह विश्वविद्यालयों में एक विषय के रूप मे पढ़ाया जाता रहा है। आजकल विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों में यह स्नातक स्तर पपढ़ाया जाता है। .

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विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक अभियांत्रिकी की समयरेखा

नीचे विद्युत तथा इलेक्ट्रॉनिक अभियांत्रिकी के इतिहास में हुए अनुसंधानों की सूची नीचे दी गयी है। .

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विलियम हेनरी ब्रैग

सर विलियम हेनरी ब्रैग (William Henry Bragg; 1862 - 1942), ब्रिटिश भौतिकीविद् थे तथा नोबेल पुरस्कार विजेता थे। इनका जन्म इंग्लैंड के कंबरलैंड काउंटी में स्थित विग्टन नामक ग्राम में हुआ था। आपकी शिक्षा केंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में पूर्ण हुई तथा आप ऐडिलेड (दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया) में गणित तथा भौतिकी के प्रोफेसर नियुक्त हुए। यहाँ इन्होंने रेडियोऐक्टिवता पर अनुसंधान आरंभ किए। इन अनुसंधानों से ये प्रसिद्ध हो गए। सन् 1909 में आप लीड्स में कैवेंडिश प्रोफेसर तथा सन् 1915 में लंदन युनिवर्सिटी के क्वेन प्रोफेसर नियुक्त हुए। अपने पुत्र सर विलियम लॉरेंस ब्रैग के सहयोग से आपने एक्स-रे-स्पेक्ट्रोमीटर का विकास किया तथा इस यंत्र की सहायता से परमाणुओं और क्रिस्टलों के विन्यासों को स्पष्ट किया। सन् 1915 में इन्हें तथा इनके उपर्युक्त पुत्र को संयुक्त रूप से भौतिकी का नोबेल पुरस्कार और कोलंबिया विश्वविद्यालय का बारनर्ड स्वर्णपदक प्रदान किया गया। प्रथम विश्वयुद्ध के समय पनडुब्बी नावों का पता लगाने की समस्याओं के संबंध में ब्रिटिश नौसेना को आपने सहायता दी। आप सन् 1928-29 में ब्रिटिश ऐसोसिएशन फॉर दि ऐडवान्स्मेंट ऑव सायंस के तथा सन् 1935-40 तक रॉयल सोसायटी के प्रेसिडेंट थे। रेडियोऐक्टिविटी तथा क्रिस्टल विज्ञान पर अनेक प्रकाशनों के सिवाय ध्वनि, प्रकाश तथा प्रकृति संबंधी आपके अन्य ग्रंथ भी हैं। .

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विश्व-भारती विश्वविद्यालय

विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना 1921 में रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने पश्चिम बंगाल के शान्तिनिकेतन नगर में की। यह भारत के केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में से एक है। अनेक स्नातक और परास्नातक संस्थान इससे संबद्ध हैं। शान्ति निकेतन के संस्थापक रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म १८६१ ई में कलकत्ता में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। इनके पिता महर्षि देवेन्द्रनाथ ठाकुर ने १८६३ ई में अपनी साधना हेतु कलकत्ते के निकट बोलपुर नामक ग्राम में एक आश्रम की स्थापना की जिसका नाम `शांति-निकेतन' रखा गया। जिस स्थान पर वे साधना किया करते थे वहां एक संगमरमर की शिला पर बंगला भाषा में अंकित है--`तिनि आमार प्राणेद आराम, मनेर आनन्द, आत्मार शांति।' १९०१ ई में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इसी स्थान पर बालकों की शिक्षा हेतु एक प्रयोगात्मक विद्यालय स्थापित किया जो प्रारम्भ में `ब्रह्म विद्यालय,' बाद में `शान्ति निकेतन' तथा १९२१ ई। `विश्व भारती' विश्वविद्यालय के नाम से प्रख्यात हुआ। टैगोर बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति थे। .

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विश्वविद्यालय

विश्वविद्यालय (युनिवर्सिटी) वह संस्था है जिसमें सभी प्रकार की विद्याओं की उच्च कोटि की शिक्षा दी जाती हो, परीक्षा ली जाती हो तथा लोगों को विद्या संबंधी उपाधियाँ आदि प्रदान की जाती हों। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय के मैदान, भवन, प्रभाग, तथा विद्यार्थियों का संगठन आदि भी सम्मिलित हैं। .

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विज्ञापन एजेंसी

विज्ञापन एजेंसी या ऐड एजेंसी ऐसी सेवाओं का व्यापार है जिसमें अपने ग्राहकों के लिए विज्ञापन बनाना, उनका नियोजन करना और संभालना (कभी-कभी प्रचार के दूसरे तरीके) भी शामिल हैं। विज्ञापन एजेंसी ग्राहक से पूर्ण रूप से स्वतंत्र होती है और ग्राहक के उत्पादों या सेवाओं को बेचने के लिए अलग नज़रिया प्रदान करती है। एक एजेंसी अपने ग्राहकों के लिए विपणन, ब्रांड बनाने और बिक्री से जुड़े प्रचार की समग्र रणनीतियों को संभाल सकती है। विशिष्ट विज्ञापन एजेंसियों के ग्राहकों में उद्योग जगत औऱ निगम, लाभ निरपेक्ष संगठन और सरकारी एजेंसियां भी शामिल हैं। विज्ञापन के प्रचार के लिए एजेंसियों को किराये पर भी लिया जा सकता है। .

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विंडसर विश्वविद्यालय

विंडसर विश्वविद्यालय (अंग्रेज़ी: University of Windsor) कनाडा के एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना १८५७ में हुई थी। अभी यहाँ विभिन्न पाठ्यक्रमों में १५,००० विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यहाँ शिक्षा ग्रहण करने के लिए पूरी दुनिया से विद्यार्थी आते हैं। यहाँ विभिन्न प्रकार के शोध कार्य भी होते रहते हैं।.

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विकि

Wiki एक वेबसाइट है जो विकि सॉफ्टवेयर का उपयोग करके किसी भी संख्या में आपस में जुड़े वेब पन्नों के निर्माण और संपादन को संभव बनती है, ब्राउज़र के भीतर एक सरलीकृत मार्कअप भाषा या एक WYSIWYG पाठ संपादक का उपयोग करते हुए.

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विकोशिकीकरण

विकोशिकीकरण (अंग्रेजी:Decellularization डीसेल्यूलराइजेशन) प्रक्रिया में एक मृत अंग से कोशिकाओं को निकाल लिया जाता है, जिसके बाद उस अंग का सिर्फ प्रोटीन का ढांचा बाकी रहता है। इसके बाद इसकी जगह युवा कोशिकाओं को प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। इसका उदाहरण मिनेसोटा विश्वविद्यालय ने एक चूहे के हृदय में २००८ में विकोशिकीकरण कर के दिया था। हालाँकि यह अनुसंधान फिलहाल सूक्ष्म जीवों में ही किए गए हैं और अगले कई सालों तक मानवों में इस तरह का कोई प्रयोग किए जाने की संभावना नहीं है। इस प्रयोग की सफलता भविष्य में बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे यह आशा बलवती हो गयी है कि शरीर का कोई भी अंग- हृदय, यकृत, फेफड़ा, अग्नाशय आदि का कृत्रिम रूप से निर्माण किया जा सकेगा हैं और इस प्रकार अनेकों ऐसे रोगियों को की जान बचायी जा सकेगी जो अंग-दानकर्ताओं की अनुपलब्धता के कारण मर जाते हैं। इससे चिकित्सा-विज्ञान में एक नये युग का पदार्पण हो सकता है। श्रेणी:जीव विज्ञान श्रेणी:कोशिका.

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वैदिक विज्ञान और भारतीय संस्कृति

वैदिक विज्ञान और भारतीय संस्कृति विख्यात संस्कृत साहित्यकार गिरधर शर्मा चतुर्वेदी द्वारा रचित एक शोध है जिसके लिये उन्हें सन् 1961 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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गिरधर शर्मा चतुर्वेदी

गिरधर शर्मा चतुर्वेदी संस्कृत भाषा के प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक शोध वैदिक विज्ञान और भारतीय संस्कृति के लिये उन्हें सन् 1961 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय

गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय भारत के गुजरात राज्य के जामनगर में स्थित एक आयुर्वेद विश्वविद्यालय है। भारत और विश्व दोनों में यह अपने तरह का पहला विधिमान्य विश्वविद्यालय है जो केवल आयुर्वेद के अध्ययन एवं अनुसंधान को समर्पित है। .

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गूगल टूलबार

गूगल टूलबार एक इन्टरनेट ब्राउज़र टूलबार है जो इन्टरनेट एक्सप्लोरर तथा मोज़िला फायरफॉक्स के लिए उपलब्ध है। .

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गोपाल बालकृष्ण कोल्हटकर

गोपाल बालकृष्ण कोल्हटकर (1878-1955 ई.) भारत के रसायनशास्त्री थे। उनका जन्म सातारा जिले के एक छोटे से गाँव जाखण में हुआ था। गाँव की प्राथमिक पाठशाला में शिक्षा पाकर मुंबई के मराठा हाई स्कूल में और बाद में सेंट जेवियर्स कालेज में भौतिकी और रसायन का अध्ययन किया। रसायन की एम.

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गोपीनाथ कविराज

महामहोपाध्याय श्री गोपीनाथ कविराज महामहोपाध्याय श्री गोपीनाथ कविराज (७ सितम्बर 1887 - १२ जून 1976) संस्कृत के विद्वान और महान दार्शनिक थे। १९१४ में पुतकालयाक्ष्यक्ष से आरम्भ करते हुए वे १९२३ से १९३७ तक वाराणसी के शासकीय संस्कृत महाविद्यालय के प्रधानाचार्य रहे। इस कालावधि में वे सरस्वती भवन ग्रन्थमाला के सम्पादक भी रहे। गोपीनाथ कविराज बंगाली थे और इनके पिताजी का नाम वैकुण्ठनाथ बागची था। आप का जन्म ब्रिटिश भारत के ग्राम धमरई जिला ढाका (अब बांग्लादेश) मे हुआ था। उनका जन्म प्रतिष्ठित बागची घराने मे हुआ था और "कविराज" उनको सम्मान में कहा जाता था। आपने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा दीक्षा श्री मधुसूदन ओझा एवं शशिधर "तर्क चूड़ामणि" के निर्देशन मे जयपुर मे प्रारंभ किया। महामहोपाध्याय पं॰ गोपीनाथ कविराज वर्तमान युग के विश्वविख्यात भारतीय प्राच्यविद् तथा मनीषी रहे हैं। इनकी ज्ञान-साधना का क्रम वर्तमान शताब्दी के प्रथम दशक से आरम्भ हुआ और प्रयाण-काल तक वह अबाधरूप से चलता रहा। इस दीर्घकाल में उन्होंने पौरस्त्य तथा पाश्चात्य ज्ञान-विज्ञान की विशिष्ट चिन्तन पद्धतियों का गहन अनुशीलन कर, दर्शन और इतिहास के क्षेत्र में जो अंशदान किया है उससे मानव-संस्कृति तथा साधना की अंतर्धाराओं पर नवीन प्रकाश पड़ा है, नयी दृष्टि मिली है। उन्नीसवीं शती के धार्मिक पुनर्जागरण और बीसवीं शती के स्वातन्त्र्य-आन्दोलन से अनुप्राणित उनकी जीवन-गाथा में युगचेतना साकार हो उठी है। प्राचीनता के सम्पोषक एवं नवीनता के पुरस्कर्ता के रूप में कविराज महोदय का विराट् व्यक्तित्व संधिकाल की उन सम्पूर्ण विशेषताओं से समन्वित है, जिनसे जातीय-जीवन प्रगति-पथ पर अग्रसर होने का सम्बल प्राप्त करता रहा है। इनके द्वारा रचित एक शोध तांत्रिक वाङ्मय में शाक्त दृष्टि के लिये उन्हें सन् १९६४ में साहित्य अकादमी पुरस्कार (संस्कृत) से सम्मानित किया गया। .

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आत्महत्या के तरीके

आत्महत्या का तरीके खोजने वालों को भारत में आसरा नामक संस्था परामर्श देती हैं जिसका दूरभाष क्रमांक 022 2754 6669 है। उस संस्था का अधिकृत जालस्थान www.aasra.info है। आत्महत्या का तरीका ऐसी किसी भी विधि को कहते हैं जिसके द्वारा एक या अधिक व्यक्ति जान-बूझकर अपनी जान ले लेते हैं। आत्महत्या के तरीकों को जीवन लीला समाप्त करने की दो विधियों के अनुसार वर्गीकृत किया जा सकता है: शारीरिक या रासायनिक.

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आय का परिपत्र प्रवाह

आय का परिपत्र प्रवाह अर्थशास्त्र का एक मॉडल है। यह मॉडल अर्थव्यवस्था के प्रमुख बाजारों मे होने वाले लेन-देन को आर्थिक एजेंटों के बीच के पैसे एव्ं माल और सेवाओं के प्रवाह के रूप में दार्शाता है। एक क्लोज सर्किट में पैसे और माल के आदान-प्रदान का प्रवाह दिखाया जाता है जिसमे यह दो आर्थिक चरो का प्रवाह विपरीत दिशा में चलता हैं। परिपत्र प्रवाह विश्लेषण राष्ट्रीय खातों की, और इसलिए, मैक्रोइकॉनॉमिक्स का आधार है। परिपत्र प्रवाह का विचार पहले से ही रिचर्ड कैंटिलोन के कर्यो में मौजुद थे। फ़्राँस्वा क्युसने ने यह मॉडल विकसित किया जिसकी झांकी "économique" में मौजूद था। कार्ल मार्क्स के "प्रजनन योजनाओं" के दुसरे भाग मे क्युसने के विचारो को और विक्सित रूप में बताया गया है। इसके अभिन्न भाग है - राजनीतिक अर्थव्यवस्था की आलोचना, जॉन मेनार्ड कीन्स की "जनरल थ्योरी", ब्याज और पैसा, आदि। .

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आयन रोपण

आयन रोपण का योजनामूलक चित्र आयन रोपण (Ion implantation), पदार्थ इंजीनियरी का एक प्रक्रम है जिसमें किसी पदार्थ के आयनों को विद्युत क्षेत्र की सहायता से त्वरित करते हुए किसी दूसरे ठोस पदार्थ पर टकराया जाता है। इस प्रकार के टक्कर के कारण उस पदार्थ के भौतिक, रासायनिक एवं वैद्युत गुण बदल जाते हैं। आयन रोपण का उपयोग अर्धचालक युक्तियों के निर्माण (जैसे आईसी निर्माण) में किया जाता है। इसके अलावा इसका उपयोग धातु परिष्करण (मेटल फिनिशिंग) एवं पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान में किया जाता है। श्रेणी:पदार्थ विज्ञान श्रेणी:अर्धचालक युक्ति निर्माण.

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आविष्कार

आविष्कार किसी नयी जानकारी के पाये जाने या पता करने की क्रिया का नाम है। इस क्रिया में कुछ ऐसी जानकारी प्राप्त होती है जिसको रचनात्मक अन्तर्दृष्टि देकर उपयोगी बना दिया जाता है। नये आविष्कार विभिन्न ज्ञानेन्द्रियों के द्वारा प्राप्त किये जाते हैं। इनको पहले से विद्यमान ज्ञान में समाहित कर लिया जाता है। प्रश्न करना जितना मानवीय विचारणा एवं परस्पर वैचारिक आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम है, आविष्कार के लिये भी इसकी उतनी ही भूमिका है। आविष्कार के मूल में प्रश्न ही है। वैज्ञानिक अनुसंधान के तीन मुख्य उद्देश्य गिनाये जाते हैं - वर्णन (description), व्याख्या (explaination) एवं खोजबीन (exploration)। आविष्कार - अर्थात् ऐसी चीजे जो पहले से यहां उपलब्ध नहीं है या थी पर उसका बाद में खोज की जाती है\गई जैसे - मोबाईल,संगणक, साईकिल; ये इनका खोज नहीं किया गया इनका अविष्कार किया गया ये बनने से पूर्व धरती पर मौजूद नहीं थें। .

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आविष्कार (पत्रिका)

आविष्कार हिंदी की एक विज्ञान पत्रिका है। यह नेशनल रिसर्च डेवलेपमेंट कार्पोरेशन, नई दिल्‍ली द्वारा प्रकाशित होती है। इसका मुख्य उद्देश्य सूचना का प्रसार करना और नई प्रौद्योगिकी, खोज, नवीनताओं, बौद्धिक संपदा अधिकारसे जुड़े मुद्दों आदि के बारे में आम जनता के बीच जागरूकता पैदा करना है और छात्रों, वैज्ञानिकों, तकनीशियनों, उभरते उद्यमियों आदि के बीच खोज, नवीनता तथा उद्यमिता की भावना का विकास करना है। हिन्दी में विज्ञान पत्रिका आविष्कार का प्रकाशन 1971 में शुरू हुआ था। आविष्कार जनहित के चालू मुद्दों के साथ विज्ञान, प्रौद्योगिकी, खोज, नवाचारों और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित राष्ट्रीय महत्त्व के मुद्दों पर केंद्रित रहता है। संपूर्ण प्रासंगिक आलेखों के अलावा पत्रिका में भिन्न नियमित कॉलम भी रहते हैं – विविधा, वैज्ञानिकों का बचपन, कुछ रोचक कुछ प्रेरक प्रसंग, विज्ञान साहित्य चर्चा, बौद्धिक संपदा की बातें, आविष्कार और नवाचार, खेल-खेल में विज्ञान, समाचारिकी और एनआरडीसी की प्रौद्योगिकी – आपके लिए। विविधा कॉलम में भिन्न एसएंडटी विषयों पर छोटे फीचर प्रकाशित होते हैं। वैज्ञानिकों का बचपन में वैज्ञानिकों, आविष्कारकों, नया करने वालो आदि के बचपन पर आलेख होते हैं ताकि उन परिस्थितियों के बारे में बताया जा सके जहां से वे आगे बढ़े और अपनी सफलता तक पहुंचे। इस पत्रिका में वैज्ञानिकों, आविष्कारकों, नया करने वालो आदि की जीवनी भी प्रकाशित की गई है। कुछ रोचक, कुछ प्रेरक में दिलचस्प और प्रेरक कथाएं कही गई हैं। यह भी वैज्ञानिकों, आविष्कारकों, नया करने वालो आदि पर केंद्रित है। विज्ञान सहित्य चर्चा कॉलम में विज्ञान व तकनालाजी पर आई नई पुस्तक की समीक्षा छपती है। बौद्धिक संपदा की बातें में बौद्धिक संपदा अधिकारों पर विभिन्न विषयों पर चर्चा होती है। 'खेल खेल में विज्ञान' स्कूली बच्चों का एक कॉलम है। इसमें विज्ञान के बुनियादी सिद्धांत समझाए जाते हैं। 'समाचारिकी' में विज्ञान व तकनालाजी के क्षेत्र में प्रगति से संबंधतित खबरे प्रकाशित होती हैं। एनआरडीसी की 'प्रौद्योगिकी आपके लिए' उद्यमियों को प्रौद्योगिकी के बारे में अद्यतन जानकारी देती है जो एनआरडीसी के पास व्यापारीकरण के लिए उपलब्ध है। .

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आखन विश्वविद्यालय

आखन विश्वविद्यालय का मुख्य भवन आखन विश्वविद्यालय (RWTH Aachen University) जर्मनी के आखन कस्बे में स्थित एक अनुसंधान विश्वविद्यालय है। इसके १०१ प्रोग्रामों में कोई ३३००० विद्याथी शिक्षा ले रहे हैं। .

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आइ आइ आइ टी एम

भारतीय सूचना प्रोद्योगिकी एवम प्रबन्धन सन्स्थान, ग्वालियर भारत सरकार द्वारा स्थापित एक उच्च शिक्षा का केन्द्र है। इसे डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त है। यह सन्स्थान 1997 मे सराकार द्वारा सूचना प्रोद्योगिकी और प्रबन्धन के क्षेत्र मे शिक्षा को प्रोत्साहित करने हेतु स्थापित किया गया तथा यह आइ आइ आइ टी श्रिन्खला मे स्थापित किया गया पहला सन्स्थान था। यह सन्स्थान भारत के मध्य प्रदेश राज्य के ग्वालियर नगर मे स्थित है। .

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इलेक्ट्रॉनिक नाक

पर्यावरण निगरानी के लिए सीएसआईआर-नीरी और सी-डैक ने इलेक्ट्रॉनिक नाक विकसित की है। .

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इजरायली आविष्कार तथा शोध

एक इजरायली पौधशाला में द्रप्स सिंचाई (ड्रिप इर्रिगेशन) छत के ऊपर रकने योग्य सौर ऊष्मक (सोलर हीटर) आरन डोम रॉकेट इन्टरसेप्सन प्रणाली इस लेख में इजरायल में हुए आविष्कारों एवं खोजों की सूची दी गयी है। .

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इकोले पॉलीटेक्निक फेडरल डी लॉज़ेन

लाजेन स्थित स्विस फेडरल तकनीकी संस्थान का हवाई दृष्य ९२००९) इकोले पॉलीटेक्निक फेडरल डी लॉज़ेन (स्विस फेडरल तकनीकी संस्थान, लाजेन; फ्रेंच: The École polytechnique fédérale de Lausanne (EPFL)) स्विटजरलैण्ड के लॉज़ेन (Lausanne नगर में स्थित एक अनुसंधान विश्वविद्यालय है। इसकी विशेषज्ञता भौतिक विज्ञानों तथा इंजीनियरी के क्षेत्र में है। विश्व के अग्रगण्य विश्वविद्यालयों में इस संस्थान की गणना होती है। क्यू एस विश्वविद्यालय रैंकिंग के अनुसार सभी विश्वविद्यालयों में इसका स्थान 14वाँ है जबकि केवल इंजीनियरी विश्वविद्यालयों में इसका स्थान 17वाँ है। श्रेणी:विश्वविद्यालय.

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क मुं हिंदी विद्यापीठ आगरा

कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषाविज्ञान विद्यापीठ डॉ भीमराव अंबेदकर विश्वविद्यालय, आगरा का प्रतिष्ठित शिक्षण और शोध संस्थान है जो हिंदी भाषा और भाषाविज्ञान के उच्चतर अध्ययन और अनुसंधान के क्षेत्र में उत्तर भारत के सर्वप्रथम संस्थान के रूप में सन 1953 से कार्य कर रहा है। .

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कण भौतिकी के त्वरकों की सूची

नीचे उन कण त्वरकों की सूची दी गयी है जो कण भौतिकी के प्रयोगों में प्रयुक्त होते हैं। कुछ आरम्भिक त्वरकों को भी इसमें शामिल किया गया है जो नाभिकीय भौतिकी में अनुसंधान के लिये प्रयुक्त हुए थे क्योंकि तब तक नाभिकीय भौतिकी और कण भौतिकी अलग-अलग नहीं थे। .

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क्रांजबर्ग के प्रौद्योगिकी के नियम

मेलिन क्रांजबर्ग (Melvin Kranzberg) ने छ: "प्रौद्योगिकी के नियम" प्रतिपादित किये हैं जो निम्नवत् हैं- .

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कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स (यूसीएलए) एक सरकारी अनुसंधान विश्वविद्यालय है जो वैस्टवुड में स्थित है। यह जगह लॉस एंजिल्स, कैलिफोर्निया, यूनाइटेड स्टेट्स के पड़ोस में स्थित है। इसकी स्थापना 1919 में हुई थी और यह कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से सम्बद्ध दस परिसरों में दूसरा सबसे पुराना परिसर है। यूसीएलए विविध विषयों में 300 से अधिक पूर्वस्नातक और स्नातक डिग्री कार्यक्रम प्रस्तावित करता है और यूनाइटेड स्टेट्स और सम्पूर्ण विश्व के तकरीबन 26,000 पूर्व स्नातक और 11,000 स्नातक छात्र नामांकन करता है। यह विश्वविद्यालय 5 पूर्व स्नातक महाविद्यालयों, 7 व्यावसायिक विद्यालयों और 5 पांच पेशेवर स्वास्थ्य विज्ञान विद्यालयों में विभाजित है। ग्यारह नोबेल पुरस्कार विजेता इस विश्वविद्यालय से अध्यापक, शोधकर्ता अथवा भूतपूर्व छात्रों के रूप में जुड़े रहे हैं, 37 लोग नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस में चुन लिए गए, 20 लोग नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग और 97 लोग अमेरिकन अकादमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेस में चुन लिए गए। यूसीएलए को लगातार महाविद्यालयों और विश्विद्यालयों की रैंकिंग में उच्च स्थान मिला है। इसकी गणना देश के शीर्ष 10 विद्यालयों में होती है और इसे अधिकतम संकाय पुरस्कार मिलते हैं। वैज्ञानिक सूचना संस्थान के अनुसार अपने शोधकार्य की वजह से यहाँ के अध्यापकों के कार्य को अधिकतम लोग अपने कार्य में उल्लेख करते हैं। यूसीएलए के छात्र-एथलीट ब्रुइंस के रूप में प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं। पैसिफिक-10 सम्मलेन के सदस्य के रूप में 2010 तक, ब्रुइंस ने 125 राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती है जिसमे 106 एनसीसीए (एनसीएए) चैंपियनशिप भी शामिल हैं, इतनी चैंपियनशिप किसी भी दूसरे विश्वविद्यालय ने कभी नहीं। जीती.

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के के बिड़ला फाउंडेशन

के के बिड़ला फाउंडेशन की स्थापना सन् १९९१ में कृष्णकुमार बिड़ला ने की थी। इसका उद्देश्य साहित्य (विशेष रूप से हिन्दी साहित्य) और कलाओं के विकास को प्रोत्साहित करना है। इसके साथ ही यह शिक्षा एवं सामाजिक कार्य के क्षेत्र में भी काम करता है। इस फाउन्डेशन द्वारा कई पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं जिसमें से प्रमुख हैं-.

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केन्‍द्रीय कांच एवं सिरामिक अनुसन्धान संस्‍थान

केन्‍द्रीय कांच एवं सिरामिक अनुसंधान संस्‍थान (सीजीसीआरआई) भारत की कांच एवं सिरामिक से सम्बन्धित अनुसंधान की प्रमुख प्रयोगशाला है। यह पश्चिम बंगाल के यादवपुर (जादवपुर) में स्थित है। यह वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अन्तर्गत है। इसका उद्देश्य कांच, सिरामिकी एवं संबन्धित पदार्थों के क्षेत्र में वैज्ञानिक-औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास करना है ताकि देश की जनता को अधिकतम आर्थिक, पर्यावरणीय एवं सामाजिक लाभ मिल सके। आरंभिक चरण में देश में उपलब्‍ध खनिज संसाधनों का पता लगाना एवं विशेष उत्पादों के विकास में उनका उपयोग करना ही मुख्‍य उद्देश्‍य था। इस संस्‍थान ने सन् 1944 में सीमित रूप में काम करना आरंभ तो कर दिया था परंतु औपचारिक रूप से इसका उद्घाटन 26 अगस्‍त 1950 को किया गया। आरंभिक समय में यह सेन्‍ट्रल ग्‍लास एण्‍ड सिलिकेट रिसर्च इंस्‍टट्यूट के नाम से बना था और यह संस्‍थान वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुससंधान परिषद के अंतर्गत आरंभ की गई सबसे पहली चार प्रस्‍तावित प्रयोगशालाओंमें से एक है। अन्‍य तीन प्रयोगशालाएं हैं एन.सी.एल.-पुणे, एन.पी.एल-नई दिल्‍ली एवं सीएफआरआई-धनबाद। .

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अनुप्रयुक्त विज्ञान

विज्ञान की वे शाखायें जो पहले से विद्यमान वैज्ञानिक ज्ञान का का उपयोग और अधिक व्यावहारिक कार्यों (जैसे प्रौद्योगिकी, अनुसंधान आदि) के सम्पादन के लिये करतीं हैं, उन्हें अनुप्रयुक्त विज्ञान (applied science) कहते हैं। 'शुद्ध विज्ञान', अनुप्रयुक्त विज्ञान का उल्टा है जो प्रकृति की परिघटनाओं की व्याख्या करने एवं उनका पूर्वानुमान लगाने आदि का कार्य करता इंजीनीयरिंग (अभियांत्रिकी) की विद्या अनुप्रयुक्त विज्ञान है। अनुप्रयुक्त विज्ञान टेक्नोलोजी विकास के लिये महत्वपूर्ण्ण है। औद्योगिक क्षेत्र में इसे 'अनुसंधान और विकास' (R&D) कहते हैं। .

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अनुसन्धान संस्थान

अनुसंधान संस्थान (research institute) उन संस्थानों को कहते हैं जिनकी स्थापना किसी विशेष क्षेत्र में अनुसन्धान करने के लिए की गयी हो। अनुसंधान संस्थान, मूलभूत अनुसंधान में विशेषज्ञता प्राप्त कर सकते हैं या अनुप्रयुक्त अनुसंधान में। यद्यपि 'अनुसंधान' से अभिप्राय प्राकृतिक विज्ञानों में अनुसंधान से होता है किन्तु सामाजिक अनुसंधान के क्षेत्र में भी बहुत से संस्थान कार्यरत हैं, उदाहरण के लिए, समाज और इतिहास सम्बन्धी अनुसंधान के क्षेत्र में। .

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उष्णकटिबन्धीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर

उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर (TFRI) भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के अधीन आठ क्षेत्रीय संस्थानों में से एक है। संस्थान 1988 में अस्तित्व में आया। संस्थान मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ, महाराष्ट्र तथा उड़ीसा सहित मध्य क्षेत्र के उष्णकटिबंधीय वनों की वानिकी तथा पारिस्थितिकी से संबंधित समस्याओं पर अनुसंधान के मुख्य केंद्र के रूप में अपने आप को विशेष बना लिया है। .

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१९३५

1935 ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। .

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६ नवम्बर

६ नवंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का ३१०वाँ (लीप वर्ष मे 311 वॉ) दिन है। साल मे अभी और ५५ दिन बाकी है। .

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