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100 दिन (1991 फ़िल्म)

100 दिन (100 Days) हिन्दी भाषा की 1991 में बनी फ़िल्म है। फ़िल्म में मुख्य भूमिका में माधुरी दीक्षित, जैकी श्रॉफ और जावेद जाफ़री हैं। फ़िल्म एक रहस्य रोमांचक है जिसकी पटकथा अतिरिक्त संवेदी बोध वाली महिला के इर्दगिर्द घूमती है। यह ऐसी फ़िल्म है जिसमें रहस्य जैसी कोई चीज नहीं थी, लेकिन फ़िर भी उसमें एक ऐसा सस्पेंस था जिसने क्लाइमेक्स पर दर्शकों को हैरान कर दिया था। फिल्म सुपरहिट थी और दर्शकों ने इसे काफी पसंद किया था। .

12 संबंधों: एस॰ पी॰ बालसुब्रमण्यम, पटकथा, माधुरी दीक्षित, मुनमुन सेन, लता मंगेशकर, लक्ष्मीकांत बेर्डे, जावेद जाफ़री, जैकी श्रॉफ, अतिरिक्त संवेदी बोध, अमित कुमार, अलका याज्ञिक, अजीत वाच्छानी

एस॰ पी॰ बालसुब्रमण्यम

श्रीपति पण्डितराध्युल बालसुब्रमण्यम (तेलुगु: శ్రీపతి పండితారాధ్యుల బాలసుబ్రహ్మణ్యం; अंग्रेज़ी: S. P. Balasubrahmanyam; जन्म 4 जून 1946) एक भारतीय पार्श्वगायक, अभिनेता, संगीत निर्देशक, गायक और फ़िल्म निर्माता हैं। उन्हें कभी-कभी एसपीबी अथवा बालु के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने छः बार सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक के लिए राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार और आन्ध्र प्रदेश सरकार द्वारा २५ बार तेलुगू सिनेमा में नन्दी पुरस्कार भी जीता। .

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नव वर्ष

भारतीय नववर्ष की विशेषता   - ग्रंथो में लिखा है कि जिस दिन सृष्टि का चक्र प्रथम बार विधाता ने प्रवर्तित किया, उस दिन चैत्र शुदी १ रविवार था। हमारे लिए आने वाला संवत्सर २०७५ बहुत ही भाग्यशाली होगा, क़्योंकि इस वर्ष भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रविवार है,   शुदी एवम  ‘शुक्ल पक्ष एक ही  है। चैत्र के महीने के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि (प्रतिपद या प्रतिपदा) को सृष्टि का आरंभ हुआ था।हमारा नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को शरू होता है| इस दिन ग्रह और नक्षत्र मे परिवर्तन होता है | हिन्दी महीने की शुरूआत इसी दिन से होती है | पेड़-पोधों मे फूल,मंजर,कली इसी समय आना शुरू होते है,  वातावरण मे एक नया उल्लास होता है जो मन को आह्लादित कर देता है | जीवो में धर्म के प्रति आस्था बढ़ जाती है | इसी दिन ब्रह्मा जी  ने सृष्टि का निर्माण किया था | भगवान विष्णु जी का प्रथम अवतार भी इसी दिन हुआ था | नवरात्र की शुरुअात इसी दिन से होती है | जिसमे हमलोग उपवास एवं पवित्र रह कर नव वर्ष की शुरूआत करते है | परम पुरूष अपनी प्रकृति से मिलने जब आता है तो सदा चैत्र में ही आता है। इसीलिए सारी सृष्टि सबसे ज्यादा चैत्र में ही महक रही होती है। वैष्णव दर्शन में चैत्र मास भगवान नारायण का ही रूप है। चैत्र का आध्यात्मिक स्वरूप इतना उन्नत है कि इसने वैकुंठ में बसने वाले ईश्वर को भी धरती पर उतार दिया। न शीत न ग्रीष्म। पूरा पावन काल। ऎसे समय में सूर्य की चमकती किरणों की साक्षी में चरित्र और धर्म धरती पर स्वयं श्रीराम रूप धारण कर उतर आए,  श्रीराम का अवतार चैत्र शुक्ल नवमी को होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि  के ठीक नवे दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था | आर्यसमाज की स्थापना इसी दिन हुई थी | यह दिन कल्प, सृष्टि, युगादि का प्रारंभिक दिन है | संसारव्यापी निर्मलता और कोमलता के बीच प्रकट होता है हमारा अपना नया साल *  *विक्रम संवत्सर विक्रम संवत का संबंध हमारे कालचक्र से ही नहीं, बल्कि हमारे सुदीर्घ साहित्य और जीवन जीने की विविधता से भी है। कहीं धूल-धक्कड़ नहीं, कुत्सित कीच नहीं, बाहर-भीतर जमीन-आसमान सर्वत्र स्नानोपरांत मन जैसी शुद्धता। पता नहीं किस महामना ऋषि ने चैत्र के इस दिव्य भाव को समझा होगा और किसान को सबसे ज्यादा सुहाती इस चैत मेे ही काल गणना की शुरूआत मानी होगी। चैत्र मास का वैदिक नाम है-मधु मास। मधु मास अर्थात आनंद बांटती वसंत का मास। यह वसंत आ तो जाता है फाल्गुन में ही, पर पूरी तरह से व्यक्त होता है चैत्र में। सारी वनस्पति और सृष्टि प्रस्फुटित होती है,  पके मीठे अन्न के दानों में, आम की मन को लुभाती खुशबू में, गणगौर पूजती कन्याओं और सुहागिन नारियों के हाथ की हरी-हरी दूब में तथा वसंतदूत कोयल की गूंजती स्वर लहरी में। चारों ओर पकी फसल का दर्शन,  आत्मबल और उत्साह को जन्म देता है। खेतों में हलचल, फसलों की कटाई, हंसिए का मंगलमय खर-खर करता स्वर और खेतों में डांट-डपट-मजाक करती आवाजें। जरा दृष्टि फैलाइए, भारत के आभा मंडल के चारों ओर। चैत्र क्या आया मानो खेतों में हंसी-खुशी की रौनक छा गई। नई फसल घर मे आने का समय भी यही है | इस समय प्रकृति मे उष्णता बढ्ने लगती है, जिससे पेड़ -पौधे, जीव-जन्तु मे नव जीवन आ जाता है | लोग इतने मदमस्त हो जाते है कि आनंद में मंगलमय  गीत गुनगुनाने लगते है | गौर और गणेश कि पूजा भी इसी दिन से तीन दिन तक राजस्थान मे कि जाती है | चैत शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन सूर्योदय के समय जो वार होता है वह ही वर्ष में संवत्सर का राजा कहा जाता है,  मेषार्क प्रवेश के दिन जो वार होता है वही संवत्सर का मंत्री होता है इस दिन सूर्य मेष राशि मे होता है | नये साल के अवसर पर फ़्लोरिडा में आतिशबाज़ी का एक दृश्य। नव वर्ष एक उत्सव की तरह पूरे विश्व में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग तिथियों तथा विधियों से मनाया जाता है। विभिन्न सम्प्रदायों के नव वर्ष समारोह भिन्न-भिन्न होते हैं और इसके महत्त्व की भी विभिन्न संस्कृतियों में परस्पर भिन्नता है। .

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क्रिसमस

क्रिसमस या बड़ा दिन ईसा मसीह या यीशु के जन्म की खुशी में मनाया जाने वाला पर्व है। यह 25 दिसम्बर को पड़ता है और इस दिन लगभग संपूर्ण विश्व मे अवकाश रहता है। क्रिसमस से 12 दिन के उत्सव क्रिसमसटाइड की भी शुरुआत होती है। एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का जन्म, 7 से 2 ई.पू.

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पटकथा

पटकथा किसी फ़िल्म या दूरदर्शन कार्यक्रम के लिए पटकथा लेखक द्वारा लिखा गया कच्चा चिट्ठा होता है। यह मूल रूप से भी लिखा जा सकता है और किसी उपन्यास या कहानी के लिए भी तैयार किया जा सकता है। इसमें संवाद और संवादों के बीच होने वाली घटनाओं व दृश्यों का विस्तृत ब्योरा होता है। इसे अंग्रेजी में स्र्कीनप्ले कहा जाता है। जबतक साहित्य कहानी के विधा में होती है तब तक पटकथा की जरूरत नहीं होती क्योंकि तब वह केवल पठनीय मात्र होती है । किंतु उसे जैसे ही पर्दे पर लाने की कोशिश की जाती है तब इस कहानी में दर्र्श्यात्मक तथ्यों को वास्तविक रूप में दिखाने के लिए पटकथा की जरूरत पडती है। श्रेणी:फ़िल्म श्रेणी:फ़िल्म निर्माण.

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माधुरी दीक्षित

माधुरी दीक्षित (जन्म: 15 मई, 1965) हिन्दी फ़िल्मों की एक सुप्रसिद्ध अभिनेत्री एवं नृत्यांगना हैं। .

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मुनमुन सेन

मुनमुन सेन भारतीय सिनेमा की एक प्रमुख अभिनेत्री हैं। वह सुचित्रा सेन की बेटी हैं। .

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लता मंगेशकर

लता मंगेशकर (जन्म 28 सितंबर, 1929 इंदौर) भारत की सबसे लोकप्रिय और आदरणीय गायिका हैं, जिनका छ: दशकों का कार्यकाल उपलब्धियों से भरा पड़ा है। हालाँकि लता जी ने लगभग तीस से ज्यादा भाषाओं में फ़िल्मी और गैर-फ़िल्मी गाने गाये हैं लेकिन उनकी पहचान भारतीय सिनेमा में एक पार्श्वगायक के रूप में रही है। अपनी बहन आशा भोंसले के साथ लता जी का फ़िल्मी गायन में सबसे बड़ा योगदान रहा है। लता की जादुई आवाज़ के भारतीय उपमहाद्वीप के साथ-साथ पूरी दुनिया में दीवाने हैं। टाईम पत्रिका ने उन्हें भारतीय पार्श्वगायन की अपरिहार्य और एकछत्र साम्राज्ञी स्वीकार किया है। .

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लक्ष्मीकांत बेर्डे

लक्ष्मीकांत बेर्डे (जन्म: 3 नवंबर, 1954 निधन: 16 दिसंबर, 2004) हिन्दी एवं मराठी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध हास्य अभिनेता हैं। .

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जावेद जाफ़री

जावेद जाफरी हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता हैं। इनका जन्म 4 दिसम्बर 1963 हुआ था। .

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जैकी श्रॉफ

जैकी श्रॉफ (जन्म नाम:जयकिशन काकुभाई श्रॉफ, तिथि: 1 फरवरी, 1957) हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध अभिनेता हैं। .

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अतिरिक्त संवेदी बोध

ESP में प्रयोगात्मक अनुसंधान के लिए बीसवीं सदी के प्रारम्भ में प्रयोग किया जाना वाला कार्ड. अतिरिक्त संवेदी बोध (ईएसपी) में ऐसी जानकारी शामिल होती है जो ज्ञात भौतिक चेतना के माध्यम से हासिल नहीं होती लेकिन जिसका भान, बुद्धि द्वारा होता है। इस शब्द को सर रिचर्ड बर्टन द्वारा गढ़ा गया था, और मानसिक क्षमताओं की जानकारी देने के लिए ड्यूक विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक जे.बी.

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अमित कुमार

अमित कुमार एक भारतीय फिल्म पार्श्व गायक, अभिनेता, निर्देशक और संगीत निर्देशक हैं। वह भारतीय गायक और अभिनेता किशोर कुमार और बंगाली गायक और अभिनेत्री रुमा गुहा ठाकुर के पुत्र हैं। अपने पिता की तरह, अमित कलकत्ता में दुर्गा पूजा समारोह के दौरान गाने के लिए गायन और बचपन से गाया करते थे। एक बार जब वह बंगाली अभिनेता उत्तम कुमार द्वारा आयोजित एक दुर्गा पूजा समारोह में मंच पर प्रदर्शन कर रहे थे, लोग ज्यादा गाने की मांग कर रहे थे और यह जानकारी उसकी मां तक ​​पहुंच गई। उसने किशोर कुमार से शिकायत की कि उनका बेटा "फिल्मी" गाने गा रहा था। सुनकर, किशोर कुमार ने उसे बंबई में लाने का फैसला किया। .

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अलका याज्ञिक

अलका याज्ञिक भारतीय सिनेमा की एक प्रसिद्ध पार्श्वगायिका हैं। वे हिंदी सिनेमा में तीन दशकों तक अपनी गायकी के लिए विख्यात हैं। हिंदी सिनेमा में वे सबसे ज्यादा गाने रिकॉर्ड करने वाली पांचवी पार्श्वगायिका हैं। उन्हें फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका पुरस्कार के ३६ नामांकनों में से ७ बार पुरस्कार मिल चुका है जो कि खुद में एक रिकॉर्ड है। उन्हें दो राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त है। साथ ही उनके २० गाने बीबीसी के "बॉलीवुड के श्रेष्ठ ४० सदाबहार साउंडट्रैक" में शामिल हैं। उनके कुछ हिट गानों में से हैं — "कुछ कुछ होता है", "टिप टिप बरसा पानी", "परदेसी परदेसी", "छम्मा छम्मा", "पूछो ज़रा पूछो", "एक दो तीन", "चाँद छुपा बादल में", "लाल दुपट्टा", "मुझको राणाजी" और "बाज़ीगर ओ बाज़ीगर"। .

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अजीत वाच्छानी

अजीत वाच्छानी हिन्दी फ़िल्मों के एक चरित्र अभिनेता एवं दूरदर्शन कलाकार थे। .

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100 डेज़ (1991 फ़िल्म), 100 दिन (1991 फिल्म)

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