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हार्डवेयर

सूची हार्डवेयर

कम्प्यूटर हार्डवेयर कम्प्यूटर का भौतिक भाग होता है जिसमें उसके डिजीटल सर्किट (digital circuit) लगे होते हैं जैसा कि कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर से प्रदर्शित होता है और यह हार्डवेयर के अंदर ही रहता है। किसी कंप्यूटर का हार्डवेयर उसके सोफ्टवेयर और हार्डवेयर डाटा की तुलना में यदा-कदा बदल जाता है। ये डाटा महसूस करने में वस्तुपरक नहीं होते हैं और इन्हें तत्काल, संशोधित अथवा मिटाया जा सकता है। फर्मवेयर (Firmware) किसी सोफ्टवेयर की एक विशेष किस्म होती है जिसे जरूरत पड़ने पर बदला जा सकता है और हार्डवेयर यंत्रों पर रक्षित किया जा सकता है जैसे केवल पठन स्मृति (read-only memory) (रोम) जहां इसे तत्काल बदला नहीं जा सकता है (और इसीलिए, वस्तुपरक रहने की तुलना में स्थिर बना दिया जाता है। अधिकांश कम्प्यूटर सामान्य यूज़र द्वारा नहीं देखे जाते हैं। यह ऑटोमोबाइल, माइक्रोवेव ओवन, इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी मशीन, कोम्पेक्ट डिस्क (compact disc) प्लेयर तथा अन्य यंत्रों में उपयोग की जाने वाली एक एम्बेडेड सिस्टम (embedded systems) है। पर्सनल कम्प्यूटर (Personal computer) ज्यादातर लोगों द्वारा परिचित कम्प्यूटर हार्डवेयर है जो कम्प्यूटरों के केवल लघु परिवार की रचना करता है (2003 में निर्मित सभी नए कम्प्यूटरों का लगभग 0;2 प्रतिशत) बाजार के आँकड़े देखें। .

26 संबंधों: एम्बेडेड सिस्टम, डीवीडी, ब्लू-रे डिस्क, मदरबोर्ड, माइक्रोप्रोसेसर, माइक्रोफोन, माउस, मॉडेम, यूऍसबी, रोम, सर्वर, सघन चक, संगणन हार्डवेयर का इतिहास, संकेतन यंत्र, स्फुर स्मृति, सॉफ्टवेयर, हार्ड डिस्क ड्राइव, जॉयस्टिक, व्यक्तिगत संगणक, इलैक्ट्रोकार्डियोग्राफी, कंप्यूटर, कुञ्जीपटल, केंद्रीय प्रक्रमन एकक, अंतरजाल, अंकीय इलेक्ट्रॉनिकी, २००८

एम्बेडेड सिस्टम

ADSL मॉडेम/रूटर के आतंरिक भागों का चित्र.अंतःस्थापित प्रणाली का एक आधुनिक उदाहरण.लेबल वाले हिस्सों में एक माइक्रोप्रोसेसर (4), रैम (6) और फ्लैश मेमोरी (7) शामिल है। एम्बेडेड सिस्टम एक कम्प्यूटर सिस्टम है, जिसे अक्सर रीयल-टाइम कम्प्यूटिंग की बाध्यताओं के साथ एक या कुछ समर्पित कार्यों को करने के लिए बनाया जाता है। यह पूरे उपकरण के एक भाग में एम्बेडेड (अंत:स्थापित) होता है, जिसमें अक्सर हार्डवेयर तथा यांत्रिक भाग शामिल होते हैं। इसके विपरीत, सामान्य उद्देश्य वाले किसी कम्प्यूटर, जैसे पर्सनल कम्प्यूटर, की रचना लचीला होने और अंतिम-प्रयोक्ता की आवश्यकताओं की एक वृहद श्रेणी की पूर्ति करने के लिए की जाती है। एम्बेडेड सिस्टम वर्तमान में प्रयोग किये जाने वाले अनेक उपकरणों को नियंत्रित करते हैं। एम्बेडेड सिस्टम को मुख्य प्रोसेसिंग के एक या अधिक अंतर्भागों, विशिष्टत: एक माइक्रोकंट्रोलर या एक डिजिटल सिग्नल प्रोसेसर (DSP), द्वारा नियंत्रित किया जाता है। हालांकि इसकी मुख्य विशेषता किसी एक विशिष्ट कार्य को संभालने के लिए समर्पित होना है, जिसमें अत्यधिक शक्तिशाली प्रोसेसर्स की आवश्यकता हो सकती है। उदाहरण के लिए, हवाई यातायात नियंत्रण प्रणालियों को एम्बेडेड के रूप में देखना उपयोगी हो सकता है, हालांकि उनमें मेनफ्रेम कम्प्यूटर तथा हवाई-अड्डों और राडार स्थानों के बीच क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय समर्पित नेटवर्क शामिल होते हैं। (संभवत: प्रत्येक राडार में अपने स्वयं के एक या एक से अधिक एम्बेडेड सिस्टम्स शामिल होते हैं।) चूंकि एम्बेडेड सिस्टम विशिष्ट कार्यों के प्रति समर्पित होता है, अतः डिजाइन इंजीनियर्स, उत्पाद के आकार व लागत को घटाकर तथा विश्वसनीयता एवं प्रदर्शन को बढ़ाकर इसे अधिक उपयोगी बना सकते हैं। पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं (Economies of scale) से लाभ उठाते हुए कुछ एम्बेडेड सिस्टम्स का उत्पादन बड़े-पैमाने पर किया जाता है। भौतिक रूप से, एम्बेडेड सिस्टम, वहनीय उपकरणों, जैसे डिजिटल घड़ियों तथा MP3 प्लेयर्स, से लेकर बड़ी स्थिर संस्थापनाओं, जैसे यातायात बत्तियों, कारखानों के नियंत्रकों अथवा परमाणु ऊर्जा केन्द्रों, तक की श्रेणी में होते हैं। जटिलता का स्तर एकल माइक्रोकंट्रोलर चिप के लिए निम्न जटिलता से लेकर किसी बड़े ढांचे (Chassis) या घेरे में लगी अनेक इकाइयों, उपकरणों तथा नेटवर्क्स के लिए उच्च जटिलता तक होता है। सामान्यत: "एम्बेडेड सिस्टम" शब्दावली की कोई सटीक परिभाषा नहीं दी जा सकती क्योंकि अधिकांश सिस्टम्स में विस्तारण अथवा प्रोग्रामिंग की क्षमता के कुछ तत्त्व भी शामिल होते हैं। उदहारण के लिए, हैण्ड-हेल्ड कम्प्यूटर्स अपने कुछ तत्वों, जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम्स और उन्हें शक्ति देने वाले माइक्रोप्रोसेसर्स, को एम्बेडेड सिस्टम्स के साथ साझा करते हैं, परन्तु वे अन्य अनुप्रयोगों को लोड करने और उपकरणों को जोड़ने की अनुमति भी देते हैं। इसके अलावा, यहां तक कि जो सिस्टम्स प्रोग्रामिंग की क्षमता को अपनी प्राथमिक विशेषता के रूप में प्रदर्शित नहीं करते, उन्हें भी सॉफ्टवेयर अद्यतनों का समर्थन करने की आवश्यकता होती है। "सामान्य उद्देश्य" से "एम्बेडेड" की ओर एक अबाध क्रम में बढ़ने पर, बड़े अनुप्रयोगों में अधिकांश स्थानों पर कुछ उप-घटक होंगे, भले ही सम्पूर्ण सिस्टम को "एक या कुछ समर्पित कार्यों को पूर्ण करने के लिए बनाया गया हो" और इस प्रकार उसे "एम्बेडेड" कहना उपयुक्त हो। .

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डीवीडी

अंकीय चित्रीय चक्रिका या अंचिच (DVD, जिसे डिजिटल वर्सटाइल डिस्क या डिजिटल वीडियो डिस्क) के रूप में भी जाना जाता है, एक ऑप्टिकल डिस्क स्टोरेज मीडिया फॉर्मेट है और इसे 1995 में Sony, Panasonic और Samsung द्वारा विकसित और आविष्कार किया गया। इसका मुख्य उपयोग वीडियो और डेटा का भंडारण करना है। DVD का आकार कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) के समान ही होता है, लेकिन ये छह गुना अधिक डेटा भंडारण करते हैं। DVD शब्द के परिवर्तित रूप अक्सर डाटा के डिस्क पर संग्रहण पद्धति को वर्णित करते हैं: DVD-ROM (रीड ओन्ली मेमोरी) में डेटा को सिर्फ पढ़ा जा सकता है, लिखा नहीं जा सकता, DVD-R और DVD+R (रिकॉर्ड योग्य) डेटा को सिर्फ एक बार रिकॉर्ड कर सकते हैं और उसके बाद एक DVD-ROM के रूप में कार्य करते हैं; DVD-RW (री-राइटेबल), DVD+RW और DVD-RAM (रैंडम एक्सेस मेमोरी) डेटा को कई बार रिकॉर्ड कर सकता है और मिटा सकता है। मानक DVD लेज़र द्वारा इस्तमाल तरंग दैर्घ्य 650 nm है; इस प्रकार, प्रकाश का रंग लाल है। DVD-वीडियो और DVD-ऑडियो डिस्क, क्रमशः उचित रूप से संरचित और स्वरूपित वीडियो और ऑडियो सामग्री को संदर्भित करता है। वीडियो सामग्री वाले अंचिच (DVD) सहित, अंचिच (DVD) के अन्य प्रकार को, अंचिच (DVD) डेटा डिस्क कहा जा सकता है। .

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ब्लू-रे डिस्क

ब्लू-रे डिस्क (BD या ब्लू-रे नाम से भी प्रचलित) एक प्रकाशीय (Optical) डिस्क संग्रहण माध्यम है, जिसे मानक DVD प्रारूप का स्थान लेने के लिए बनाया गया है। मुख्य रूप से इसका प्रयोग उच्च-परिभाषा वाले वीडियो (High-Definition Video), प्लेस्टेशन 3 (PlayStation 3) वीडियो गेम्स तथा अन्य डाटा को, प्रत्येक एकल परत वाले प्रोटोटाइप पर 25 GB तक और दोहरी परत वाले पर 50 GB तक, संग्रहित करने के लिए किया जाता है। यद्यपि ये संख्याएं ब्लू-रे डिस्क के लिए मानक संग्रहण को बताती हैं, तथापि यह एक मुक्त (Open-ended) विनिर्देशन है, जिसमें ऊपरी सैद्धांतिक संग्रहण सीमा अस्पष्ट छोड़ दी गई है। 200 GB डिस्क उपलब्ध हैं, तथा 100 GB डिस्क को किसी भी अतिरिक्त उपकरण या संशोधित फर्मवेयर के बिना पढ़ा जा सकता है। डिस्क के भौतिक आयाम मानक DVDs तथा CDs के ही समान होते हैं। ब्लू-रे डिस्क का नाम इसे पढ़ने में प्रयुक्त नीले-बैंगनी (blue-violet) लेज़र से लिया गया है। एक मानक DVD में 650 नैनोमीटर लाल लेज़र का प्रयोग किया जाता है, जबकि ब्लू-रे डिस्क कम तरंग-दैर्घ्य का प्रयोग करती है, 400 nm वाला नीला-बैंगनी लेज़र, तथा एक DVD की तुलना में लगभग दस गुना अधिक डाटा संग्रहण की अनुमति देती है। उच्च-परिभाषा वाली प्रकाशीय डिस्क के प्रारूप पर जारी युद्ध के दौरान, ब्लू-रे डिस्क ने HD DVD प्रारूप से प्रतिस्पर्धा की.

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मदरबोर्ड

मदरबोर्ड अधिकतर इलेक्ट्रॉनिक संयंत्रों जैसे लैपटॉप, कंप्यूटर आदि में लगा प्रिंटेड परिपथ बोर्ड बोर्ड होता है। इसे मेन बोर्ड या सिस्टम बोर्ड भी कहते हैं। कंप्यूटर के अलावा मदरबोर्ड का प्रयोग रोबोट और अन्य बहुत से इलेक्ट्रॉनिक युक्तियों में किया जाता है। यह संयंत्र के विभिन्न अवयवों को पकड़कर उनके स्थान पर रखता है, इसके साथ ही ये उन सभी का आपस में वांछित विद्युत संपर्क भी उपलब्ध कराता है। एक कंप्यूटर की रचना माइक्रोप्रोसेसर, मेन मेमोरी और मदरबोर्ड में लगे कंपोनेंट के द्वारा ही होती है। इसके साथ ही उसमें स्टोरेज, वीडियो डिस्प्ले और ध्वनि को नियंत्रित करने के लिए कंट्रोलर्स और कुछ और युक्तियां कनेक्टर द्वारा मदरबोर्ड से जुड़ी होती है। मदरबोर्ड का मुख्य भाग इसका चिपसेट होता है। चिप की सहायता से ही मदरबोर्ड की क्षमता और विशेषताओं के बारे में कल्पना की जाती है। मदरबोर्ड में मुख्यत: केन्द्रीय प्रोसेसिंग इकाई (सीपीयू), बायोस, स्मृति (मेमोरी स्टोरेज), सीरियल पोर्ट और की-बोर्ड और डिस्क ड्राइव के लिए कंट्रोलर होते हैं। उन मदरबोर्ड्स को वरीयता मिलती है, जिनमें कम से कम एक सॉकेट या स्लॉट हो जिसमें एक या अधिक माइक्रोप्रोसेसर स्थापित किए जा सकें। साथ ही उसमें क्लॉक जनरेटर, एक चिपसेट, विस्तार (एक्सपेंशन) कार्ड के लिए स्लॉट, विद्युत आपूर्ति (पावर) कनेक्टर्स होते हैं। .

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माइक्रोप्रोसेसर

माइक्रोप्रोसेसर (हिन्दी: सूक्ष्मप्रक्रमक) एक ऐसा डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक युक्ति है जिसमें लाखों ट्रांजिस्टरों को एकीकृत परिपथ (इंटीग्रेटेड सर्किट या आईसी) के रूप में प्रयोग कर तैयार किया जाता है। इससे कंप्यूटर के केन्द्रीय प्रक्रमण इकाई (CPU या सीपीयू) की तरह भी काम लिया जाता है।। हिन्दुस्टान लाइव। २४ जनवरी २०१० इंटीग्रेटेड सर्किट के आविष्कार से ही आगे चलकर माइक्रोप्रोसेसर के निर्माण का रास्ता खुला था। माइक्रोप्रोसेसर के अस्तित्व में आने के पूर्व सीपीयू अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक अवयवों को जोड़कर बनाए जाते थे या फिर लघुस्तरीय एकीकरण वाले परिपथों से। सबसे पहला माइक्रोप्रोसेसर १९७० में बना था। तब इसका प्रयोग इलेक्ट्रॉनिक परिकलकों में बाइनरी कोडेड डेसिमल (बीसीडी) की गणना करने के लिए किया गया था। बाद में ४ व ८ बिट माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग टर्मिनल्स, प्रिंटर और ऑटोमेशन डिवाइस में किया गया था। विश्व में मुख्यत: दो बड़ी माइक्रोप्रोसेसर उत्पादक कंपनियां है - इंटेल (INTEL) और ए.एम.डी.(AMD)। इनमें से इन्टैल कंपनी के प्रोसेसर अधिक प्रयोग किये जाते हैं। प्रत्येक कंपनी प्रोसेसर की तकनीक और उसकी क्षमता के अनुसार उन्हे अलग अलग कोड नाम देती हैं, जैसे इंटेल कंपनी के प्रमुख प्रोसेसर हैं पैन्टियम -1, पैन्टियम -2, पैन्टियम -3, पैन्टियम -4, सैलेरॉन, कोर टू डुयो आदि.उसी तरह ए.एम.डी. कंपनी के प्रमुख प्रोसेसर हैं के-5, के-6, ऐथेलॉन आदि। .

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माइक्रोफोन

एक माइक्रोफोन (जिसे बोलचाल की भाषा में Mic या Mike कहा जाता है) एक ध्वनिक-से-वैद्युत ट्रांसड्यूसर (en:Transducer) या संवेदक होता है, जो ध्वनि को विद्युतीय संकेत में रूपांतरित करता है। 1876 में, एमिली बर्लिनर (en:Emile Berliner) ने पहले माइक्रोफोन का आविष्कार किया, जिसका प्रयोग टेलीफोन स्वर ट्रांसमीटर के रूप में किया गया। माइक्रोफोनों का प्रयोग अनेक अनुप्रयोगों, जैसे टेलीफोन, टेप रिकार्डर, कराओके प्रणालियों, श्रवण-सहायता यंत्रों, चलचित्रों के निर्माण, सजीव तथा रिकार्ड की गई श्राव्य इंजीनियरिंग, FRS रेडियो, मेगाफोन, रेडियो व टेलीविजन प्रसारण और कम्प्यूटरों में आवाज़ रिकार्ड करने, स्वर की पहचान करने, VoIP तथा कुछ गैर-ध्वनिक उद्देश्यों, जैसे अल्ट्रासॉनिक परीक्षण या दस्तक संवेदकों के रूप में किया जाता है। शॉक माउंट वाला एक न्यूमन U87 कंडेंसर माइक्रोफोन वर्तमान में प्रयोग किये जाने वाले अधिकांश माइक्रोफोन यांत्रिक कंपन से एक विद्युतीय आवेश संकेत उत्पन्न करने के लिये एक विद्युतचुंबकीय प्रवर्तन (गतिज माइक्रोफोन), धारिता परिवर्तन (दाहिनी ओर चित्रित संघनित्र माइक्रोफोन), पाइज़ोविद्युतीय निर्माण (Piezoelectric Generation) या प्रकाश अधिमिश्रण का प्रयोग करते हैं। .

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माउस

माउस की भीतरी संरचना 'माउस' संगणकों में इस्तेमाल होने वाला एक इनपुट उपकरण है। यह कर्सर को चलाकर पटल के वांछित स्थान पर उसे ले जाने तथा इसका नोद्य (बटन) दबाकर उचित विकल्प चुनने में मदद करता है। यह एक छोटा सा यन्त्र है जो कड़े समतल सतह पर हथेली में पकड़कर चलाया जा सकता है। इसमें कम से कम एक नोद्य (बटन) लगा रहता है और कभी-कभी तीन से पाँच नोद्य (बटन) तक लगे रहते हैं। इसमे साधारणत: दो नोद्य तथा पटल (स्क्रीन) पर कर्सर (वैकल्पिक पेंसिल) उपर नीचे ले जाने के लिए एक गोलाकार नोद्य होता है। यह विशेषकर चियोसा (ग्राफिकल यूज़र इन्टरफेस) के लिए महत्वपूर्ण है। .

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मॉडेम

विभिन्न प्रकार के मॉडेम मॉडेम (modem) मॉडुलेटर-डीमॉडुलेटर (modulator-demodulator) का संक्षिप्त रूप है। यह एक ऐसी युक्ति (डिवाइस) है जो किसी आंकिक (डिजिटल) सूचना को मॉडुलेट करके एनॉलॉग (analog) प्रारूप में भेजती है और जो एनॉलॉग प्रारूप में इसे सिगनल मिलता है उसे डी-मॉडुलेट करके डिजिटल रूप में ग्रहण करती है। यह किसी संचरण के माध्यम (transmission media) और आंकिक मशीन (जैसे कम्प्यूटर) के बीच संचार स्थापित करने के लिये आवश्यक अवयव है। .

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यूऍसबी

यूएसबी 3.0 का प्रतीक चिन्ह व्यापक क्र्म्संचरण विधि तंत्र (युनिवर्सल सीरिअल बस) यह विभिन्न यंत्रों को कम्प्युटर से जोड़ने की व्यवस्था है। यूएसबी को इंटेल एवं अन्य टेक्नोलॉजी कम्पनियों ने मिलकर बनाया था। .

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रोम

यह लेख इटली की राजधानी एवं प्राचीन नगर 'रोम' के बारे में है। इसी नाम के अन्य नगर संयुक्त राज्य अमरीका में भी है। स्तनधारियों की त्वचा पर पाए जाने वाले कोमल बाल (en:hair) के लिये बाल देखें। इसका पर्यायवाची शब्द रोयाँ या रोआँ (बहुवचन - रोएँ) है। ---- '''रोम''' नगर की स्थिति रोम (Rome) इटली देश की राजधानी है। .

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सर्वर

एक सर्वर कंप्यूटर कंप्यूटर के क्षेत्र में, सर्वर हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर का एक संयोग है जिसे क्लाइंट की सेवा के लिए डिज़ाइन किया गया है। जब केवल इस संज्ञा का प्रयोग होता है तब यह विशिष्ट रूप से किसी कंप्यूटर से संदर्भित होता है जो किसी सर्वर ऑपरेटिंग सिस्टम को चालू रख रहा हो सकता है, लेकिन साधारणतः इसका प्रयोग सेवा प्रदान करने में सक्षम किसी सॉफ्टवेयर या संबंधित हार्डवेयर के संदर्भ में होता है। .

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सघन चक

सघन चक (सघन:कॉम्पैक्ट + चक (ती):डिस्क) या कॉम्पैक्ट डिस्क (इसे सीडी के रूप में भी जाना जाता है) एक प्रकाशीय चक होती है जिसमे आंकड़े अंकीय प्रारूप मे संचित रहते हैं। मूल रूप से इसका विकास ध्वनि रिकॉर्डिंग के संचय के लिए हुआ था, लेकिन बाद में इसका प्रयोग अन्य आंकड़ों के संचय के लिए भी किया जाने लगा। श्रृव्य चक (ऑडियो सीडी) तो अक्टूबर 1982 से व्यावसायिक रूप से उपलब्ध है। 2009 में भी यह श्रृव्य आंकड़ों के भौतिक भंडारण का मानक माध्यम बनी हुई हैं। सीडी का मानक या प्रसिद्ध व्यास (diameters) १२ सेंटीमीटर या १२० मिलीमीटर (4.7 in) होता है। जो कि ८० मिनट का डेटा (जानकारी) या लगभग ७०० मेगा बाइट डेटा (जानकारी) रखता है। और भी अन्य तरह कि कम व्यास कि भी सीडीया (मिनी सीडी) आती है। मिनी सीडी के विभिन्न 60 से 80 मिलीमीटर (2.4 - 3.1in) लेकर व्यास (diameters) है। शारीरिक विवरण सामान्य रूप से इस के चार भाग (परत) होते है। 200px A)(पहली परत):एक polycarbonate डिस्क परत धक्कों द्वारा बनाये एन्कोडेड डेटा रखती र्है। B)(दुसरी परत): एक चमकदार परत लेजर को प्रतिबिंबितं (reflect) करता है। C)(तीसरी परत):एक परत जो चमकदार परत (दुसरी परत) की रक्षा करती है। D)(चौथा परत):यह एक कलाकृति होती है जो डिस्क के शीर्ष पर मुद्रित होती है। ईस पर सीडी का नाम या कुछ चित्र आदि हो सकते है। E) यह सीडी को पद्ने (read) वाली लेजर होती है। एक सीडी मै डेटा का एक ही सर्पिल ट्रैक होता है, जिस पर सारा डेटा होत है। जो कि डिस्क के अंदर से बाहर कि ओर चक्कर दार होता है। यह सर्पिल ट्रैक होता है। सीडी प्लेयर सीडी पर धक्कों के रूप में संग्रहीत डेटा को खोजने और पढ़ने का काम है। सीडी प्लेयर के तीन बुनियादी घटक होते हैं: १) एक ड्राइव मोटर डिस्क spins. इस ड्राइव मोटर 200 और 500 rpm से ट्रैक को पढ़ती है। २) एक लेजर और एक लेंस प्रणाली: CD पर ध्यान केंद्रित करने और पढ़ने के लिये। ३) एक ट्रैकिंग प्रणाली लेजर: जिससे लेजर बीम सर्पिल ट्रैक का अनुसरण कर सके। 400px.

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संगणन हार्डवेयर का इतिहास

सूचना संसाधन (ब्लॉक आरेख) के लिए कंप्यूटिंग हार्डवेयर एक उचित स्थान है संगणन हार्डवेयर का इतिहास कंप्यूटर हार्डवेयर को तेज, किफायती और अधिक डेटा भंडारण में सक्षम बनाने के लिए चल रहे प्रयासों का एक रिकॉर्ड है। संगणन हार्डवेयर का विकास उन मशीनों से हुआ है जिसमें हर गणितीय ऑपरेशन के निष्पादन के लिए, पंच्ड कार्ड मशीनों के लिए और उसके बाद स्टोर्ड प्रोग्राम कम्प्यूटरों के लिए अलग मैनुअल कार्रवाई की आवश्यकता होती है। स्टोर्ड प्रोग्राम कंप्यूटरों के इतिहास का संबंध कंप्यूटर आर्किटेक्चर यानी इनपुट और आउटपुट को निष्पादित करने, डेटा संग्रह के लिए और एक एकीकृत यंत्रावली के रूप में यूनिट की व्यवस्था से होता है (दाएं ब्लॉक आरेख को देखें).

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संकेतन यंत्र

संकेतन यंत्र (pointing device) ऐसा निवेश यंत्र (इन्पुट यंत्र) होता है जिसके द्वारा किसी प्रयोगकर्ता को किसी संगणक (कम्प्यूटर) में एक दिक् (स्पेस) में किसी एक बिन्दु या स्थान चुनकर उसकी सूचना देने के लिए सक्षम करा जाता है। उदाहरण के लिए माउस ऐसा एक यंत्र है जो प्रयोगकर्ता को एक द्विआयामी दिक् में एक बिन्दु चुनने देता है। .

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स्फुर स्मृति

यूएसबी फ्लैश स्मृति (Flash Memory) एक प्रकार का विद्युतीय स्मृति भंडारक है जिसका प्रयोग विभिन्न इलेक्टॉनिक उपकरणों में सूचनाएं संजोने के लिए किया जाता है। इसका आविष्कार १९८० में जापान के फूजियो मसुओका ने किया था तथा १९८८ में इंटेल कॉर्पोरेशन ने पहली बार इसे बाजार में व्यावसायिक रूप से विपणित किया था। इसका प्रयोग सामान्य कंप्यूटरों, डिजिटल कैमरों, डिजिटल गेमों तथा मोबाईल फोनों में बहुत लोकप्रिय हुआ है। यह सस्ता तथा आवेग से लगे धक्कों के प्रति अधिक मजबूत होता है जिसकी वजह से पिछले दशक में इसका उपयोग बहुत होने लगा है। इसकी तकनीक विद्युतीय रूप से मिटाई जा सकने वाली स्मृति का एक प्रकार है। .

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सॉफ्टवेयर

कंप्यूटर विज्ञान में एक सॉफ्टवेयर सार्थक क्रमादेशों और ज़रूरी सूचनाओं का एक ऐसा तंत्र है जो कंप्यूटर के यन्त्रांश और दूसरे सॉफ्टवेयरों को आदेश देकर क्रमादेशक का मनचाहा काम करता है। व्यावहारिक तौर पर अगर कंप्यूटर को परिभाषित किया जाये तो हम हार्डवेयर को मनुष्य का शरीर और सॉफ्टवेर को उसकी आत्मा कह सकते हैं। हार्डवेयर कंप्यूटर के हिस्सों को कहते हैं, जिन्हें हम अपनी आँखों से देख सकते हैं, छू सकते हैं अथवा औजारों से उनपर कार्य कर सकते हैं। यह वास्तविक पदार्थ है। इसके विपरीत सॉफ्टवेयर कोई पदार्थ नहीं है। ये वे सूचनाएं, आदेश अथवा तरीके हैं जिनके आधार पर कंप्यूटर का हार्डवेयर कार्य करता है। कंप्यूटर हार्डवेयर सॉफ्टवेयर से परिचित होते हैं अथवा सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के हार्डवेयर से परिचित एवं उनपर आधारित होते हैं। .

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हार्ड डिस्क ड्राइव

हार्ड डिस्क ड्राइव (जिसे हार्ड डिस्क, हार्ड ड्राइव,, सख्त चक्रिका संचालक, डेटा भंडारण यन्त्र या HDD भी कहते हैं) एक आँकड़ों को सहेज कर सुरक्षित रखने वाला यन्त्र है, जो डिजिटल जानकारी चुम्बकीय रूप से लिख और पढ़ (पुनः प्राप्त) सकता है। इसमें घूमने वाले डिस्क्स (चिपटी गोल वस्तु,चक्रिका) होते हैं जिन्हें चुम्बकीय पदार्थ से लेप किया जाता है। बिजली न होने पर भी डेटा भंडारण यन्त्र आंकड़ों को सुरक्षित रखता है। डेटा भंडारण यन्त्र से आँकड़ों को बेतरतीब (रैंडम -एक्सेस) तरीके से पढ़ा जाता है। इसका मतलब है कि आँकड़ों के समूह को भंडारण यन्त्र में किसी भी जगह लिखकर सुरक्षित किया जा सकता है। मतलब आँकड़ों का भंडारण किसी खास क्रम में करने की आवश्यकता नहीं है। इसका अविष्कार १९५६ में आइ०बी०ऍम० नामक कंपनी में हुआ था। १९६० के दशक तक आँकडा भंडारण यन्त्र सभी सामान्य कार्य के संगणकों में सबसे प्रचलित अतिरिक्त/सहायक भंडारण यन्त्र बन गया। आँकड़ा भंडारण यन्त्र में नियमित रूप से सुधार होने लगा और आज सर्वर और व्यक्तिगत संगणकों के ज़माने में भी इसने अपनी जगह स्थिर रखी है। २०० से भी ज़्यादा औद्योगिक इकाइयों ने डेटा भंडारण यन्त्र बनाये हैं। हलाँकि ज़्यादातर डेटा भंडारण यन्त्र आज सीगेट(Segate),तोशिबा (Toshiba) और वेस्टर्न डिजिटल बनाते हैं। सारी दुनिया में आंकडा भंडारण यन्त्र का राजस्व २०१३ में $ ३२ बिलियन था जो की २०१२ की तुलना में ३% कम था। डेटा भंडारण यन्त्र को उसकी भंडारण क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर विश्लेषित किया जाता हैं। डेटा भंडारण यन्त्र की क्षमता बाइट्स में होती हैं। १०२४ बाइट को १ किलोबाइट कहा जाता है। उसी तरह से १०२४ किलोबाइट को १ मेगाबाइट कहा जाता है। १०२४ मेगाबाइट को १ गीगाबाइट कहते है और १०२४ गीगाबाइट को १ टेराबाइट कहा जाता है। डेटा भंडारण यन्त्र का पूरा भंडारण स्थान उपयोगकर्ता के लिए उपलब्ध नहीं होता क्यूंकि कुछ हिस्सा प्रचालन तन्त्र(ऑपरेटिंग सिस्टम) को रखने और कुछ और हिस्सा फाइल सिस्टम के लिए और कुछ हिस्सा संभवतः अंदरुनी अतिरेकता (inbuilt redundancy.) गलती सुधारने और डेटा पुन:प्राप्ति के लिए होता है। आंकडों को लिखने वाले नोक(हेड) के पटरी तक पहुंचने के समय और पढ़ते वक़्त वांछित क्षेत्र के नोक के नीचे तक पहुंचने में लगने वाले समय और आँकड़ों के यन्त्र से आवागमन की गति के आधार पर प्रदर्शन क्षमता का निर्धारण किया जाता है। आज के डेटा भंडारण यन्त्र मेज पर रखे जा सकने वाले संगणकों (डेस्कटॉप कंप्यूटर) के लिए ३.५ इंच और गोद में रखे जा सकने वाले संगणकों में २.५ इंच के होते हैं। डेटा भंडारण यन्त्र मुख्य प्रणाली से साटा, यूएसबी या एस.ए.एस(सीरियल अटैच्ड SCSI) जैसे मानक विद्युत् चालक तारों से जुड़े होते हैं। २०१४ तक डेटा भंडारण यन्त्र को अतिरिक्त या सहायक भंडारण के क्षेत्र में ठोस अवस्था वाले संचालक के रूप में टक्कर देने वाली तकनीक थी फ्लैश मेमोरी | आने वाले समय में यह माना जा रहा है कि हार्ड डिस्क अपना आधिपत्य जारी रखेगी लेकिन जहाँ गति और बिजली की कम खपत ज़्यादा ज़रूरी हैं वहाँ ठोस अवस्था वाले उपकरण (सॉलिड स्टेट डिवाइस) को हार्ड डिस्क की जगह पर इस्तेमाल किया जा रहा है। .

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जॉयस्टिक

जॉयस्टिक तत्व: #1 स्टिक, #2 बेस; #3 उत्प्रेरक; #4 अतिरिक्त बटन, #5 ऑटोफायर स्विच, #6 थ्रौटल; #7 हैट स्विच (पीओवी (POV) हैट); #8 सक्शन कप जॉयस्टिक एक इनपुट उपकरण होता है जो किसी धुरी पर घूमने वाली एक छड़ी से बना होता है, जो अपने कोण या दिशा की सूचना उस उपकरण को देती है, जो उसके नियंत्रण में होता है। जॉयस्टिकों का प्रयोग अक्सर वीडियो गेमों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है और आम तौर पर उसमें एक या अधिक दबाए जाने वाले बटन होते हैं, जिनकी स्थिति को कम्प्यूटर द्वारा भी पढ़ा जा सकता है। आधुनिक वीडियो गेम कन्सोलों पर इस्तेमाल किए जाने वाले जॉयस्टिक का एक लोकप्रिय प्रकार एनालॉग छड़ी है। जॉयस्टिक कई विमानों की कॉकपिट में प्रमुख उड़ान नियंत्रक रहा है, विशेष रूप से तेजी से उड़ने वाले लड़ाकू विमानों में केंद्रीय छड़ी या बगल की छड़ी के रूप में.

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व्यक्तिगत संगणक

व्यक्तिगत कम्प्यूटर व्यक्तिगत संगणक या पर्सनल कम्प्यूटर ऐसी कम्प्यूटर तंत्र है जो विशेष रूप से व्यक्तिगत अथवा छोटे समूह के द्वारा प्रयोग मे लाए जाते हैं। इन कम्प्यूटरों को बनाने में माइक्रोप्रोसेसर मुख्य रूप से सहायक होते है; इसीलिये इसे माइक्रो कम्प्यूटर भी कहते हैं। पर्सनल कम्प्यूटर का निर्माण विशेष क्षेत्र तथा कार्य को ध्यान में रखकर किया जाता है। उदाहरणार्थ - घरेलू कम्प्यूटर तथा कार्यालय में प्रयोग किये जाने वाले कम्प्यूटर। बजार में, छोटे स्तर की कम्पनियाँ अपने कार्यालयों के कार्य के लिए पर्सनल कम्प्यूटर को प्राथमिकता देतीं हैं। पर्सनल कम्प्यूटर से किये जाने वाले मुख्य कार्यो में खेल-खेलना, इन्टरनेट का प्रयोग, शब्द-संसाधन (वर्ड प्रोसेसिंग) इत्यादि शामिल हैं। प्रथम पर्सनल कंप्यूटर सन 1974 में बिकसित किया गया था। किंतु सन 1977 में पहला व सफल माइक्रो कंप्यूटर पी, सी, विकसित हुआ। इसको विकसित करने का श्रेय युवा तकनीशियन स्टीव बोजनाइक को जाता है। 1.

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इलैक्ट्रोकार्डियोग्राफी

एक 26 वर्षीय पुरुष की 12 लीड ईसीजी. एक 12-लीड ईसीजी के लिए आवश्यक 10 इलेक्ट्रोड से जुड़े एक मरीज को दिखाने वाला चित्र इलैक्ट्रोकार्डियोग्राफी (ईसीजी या ईकेजी) त्वचा के विद्युत चालकों से एक नियत समय के लिए ह्रदय की वैद्युत गतिविधि को बाहर से रिकॉर्ड किए जाने की पारवक्षीय व्याख्या है। यह एक विद्युतहृद्‌लेखी उपकरण द्वारा उत्पन्न अप्रसारक रिकॉर्डिंग है। शब्द की व्युत्पत्ति, ग्रीक शब्द इलेक्ट्रो, क्योंकि यह वैद्युत गतिविधि से संबंधित है, कार्डियो, जिसका ग्रीक भाषा में अर्थ हृदय है, एवं ग्राफ, एक ग्रीक मूल का शब्द जिसका अर्थ "लिखना" होता है, से हुई है। मुख्य रूप से ईसीजी हृदय की हर धड़कन के दौरान हृदय की मांशपेशी के विध्रुवीकृत होने के समय त्वचा पर सूक्ष्म वैद्युत परिवर्तनों का पता लगा कर और उसमें विस्तार कर कार्य करता है। विश्राम की स्थिति में, हृदय के प्रत्येक मांसपेशी कोशिका की बाहरी दीवार, या कोशिका झिल्ली के एक सिरे से दूसरे सिरे तक एक आवेश होता है। इस आवेश को कम कर शून्य कर देना विध्रुवीकरण कहलाता है जो कोशिका के तंत्र को क्रियाशील करता है जो इसे सिकुड़ने के लिए प्रेरित करता है। ह्रदय की प्रत्येक धड़कन के दौरान एक स्वस्थ हृदय में विध्रुवीकरण के लहर की सुव्यवस्थित रूप से क्रमानुसार वृद्धि होती है जो शिरानाल-अलिन्द पर्व की कोशिकाओं के द्वारा सक्रिय कर दी जाती है, अलिन्द से होकर अलग हो जाती है, "अन्तस्थ चालन पथ" से होकर गुजरती है एवं फिर संपूर्ण निलय में फैल जाती है। इसकी पहचान हृदय के किसी एक हिस्से में लगाये गए दो विद्युत् चालकों की वोल्टता में सूक्ष्म उतार-चढ़ाव के रूप में की जाती है जिसे किसी स्क्रीन या कागज पर लहरदार रेखा के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। यह प्रदर्शन हृदय की मांसपेशी के विभिन्न भागों में हृदय की समग्र कमजोरियों को दर्शाता है। आमतौर पर 2 से अधिक विद्युत् चालकों का इस्तेमाल किया जाता है और उन्हें कई युग्मों में संयोजित किया जा सकता है। (उदाहरण के लिए: बायीं बाहु (एल ए), दायीं बाहु (आर ए) एवं बायें टांग (एल एल) वाले विद्युत् चालक युग्मों का निर्माण करते हैं: एलए+आरए, एलए+एलएल, आरए+एलएल) प्रत्येक युग्म से प्राप्त आउटपुट को लीड कहा जाता है। कहा जाता है कि प्रत्येक लीड हृदय पर विभिन्न दृष्टिकोण से देखते हैं। विभिन्न प्रकार के ईसीजी को रिकॉर्ड किए गए लीडों की संख्या के द्वारा सूचित किया जा सकता है, उदाहरण के लिए 3-लीड, 5-लीड या 12-लीड ईसीजी (कभी-कभी सिर्फ "एक 12-लीड).

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कंप्यूटर

निजी संगणक कंप्यूटर (अन्य नाम - संगणक, कंप्यूटर, परिकलक) वस्तुतः एक अभिकलक यंत्र (programmable machine) है जो दिये गये गणितीय तथा तार्किक संक्रियाओं को क्रम से स्वचालित रूप से करने में सक्षम है। इसे अंक गणितीय, तार्किक क्रियाओं व अन्य विभिन्न प्रकार की गणनाओं को सटीकता से पूर्ण करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से निर्देशित किया जा सकता है। चूंकि किसी भी कार्य योजना को पूर्ण करने के लिए निर्देशो का क्रम बदला जा सकता है इसलिए संगणक एक से ज्यादा तरह की कार्यवाही को अंजाम दे सकता है। इस निर्देशन को ही कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग कहते है और संगणक कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा की मदद से उपयोगकर्ता के निर्देशो को समझता है। यांत्रिक संगणक कई सदियों से मौजूद थे किंतु आजकल अभिकलित्र से आशय मुख्यतः बीसवीं सदी के मध्य में विकसित हुए विद्दुत चालित अभिकलित्र से है। तब से अबतक यह आकार में क्रमशः छोटा और संक्रिया की दृष्टि से अत्यधिक समर्थ होता गया हैं। अब अभिकलक घड़ी के अन्दर समा सकते हैं और विद्युत कोष (बैटरी) से चलाये जा सकते हैं। निजी अभिकलक के विभिन्न रूप जैसे कि सुवाह्य संगणक, टैबलेट आदि रोजमर्रा की जरूरत बन गए हैं। परंपरागत संगणकों में एक केंद्रीय संचालन इकाई (सीपीयू) और सूचना भन्डारण के लिए स्मृति होती है। संचालन इकाई अंकगणित व तार्किक गणनाओ को अंजाम देती है और एक अनुक्रमण व नियंत्रण इकाई स्मृति में रखे निर्देशो के आधार पर संचालन का क्रम बदल सकती है। परिधीय या सतह पे लगे उपकरण किसी बाहरी स्रोत से सूचना ले सकते है व कार्यवाही के फल को स्मृति में सुरक्षित रख सकते है व जरूरत पड़ने पर पुन: प्राप्त कर सकते हैं। एकीकृत परिपथ पर आधारित आधुनिक संगणक पुराने जमाने के संगणकों के मुकबले करोड़ो अरबो गुना ज्यादा समर्थ है और बहुत ही कम जगह लेते है। सामान्य संगणक इतने छोटे होते है कि मोबाइल फ़ोन में भी समा सकते है और मोबाइल संगणक एक छोटी सी विद्युत कोष (बैटरी) से मिली ऊर्जा से भी काम कर सकते है। ज्यादातर लोग “संगणकों” के बारे में यही राय रखते है कि अपने विभिन्न स्वरूपों में व्यक्तिगत संगणक सूचना प्रौद्योगिकी युग के नायक है। हालाँकि embedded system|सन्निहित संगणक जो कि ज्यादातर उपकरणों जैसे कि आंकिक श्रव्य वादक|एम.पी.३ वादक, वायुयान व खिलौनो से लेकर औद्योगिक मानव यन्त्र में पाये जाते है लोगो के बीच ज्यादा प्रचलित है। .

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कुञ्जीपटल

कम्प्यूटर का एक कुंजीपटल संगणक की भाषा में कुंजीपटल (की-बोर्ड) एक इनपुट युक्ति है जो की टाइपराइटर के कुंजीपटल में कुछ आवश्यक परिवर्तन करके बनायी गयी है। कुंजीपटल में बहुत से (सैकड़ों) कुंजियाँ या बटन होते हैं जो किसी विशेष तरीके से विन्यस्त (arranged) होते हैं। ये बटन इलेक्ट्रानिक स्विच का काम करते हैं और दबाने पर कम्प्यूटर को एक विशेष डिजिटल संकेत (बाइट) प्रेषित करते हैं जो कि दबायी गयी कुंजी की पहचान होती है। कूजियाँ यांत्रिक हो सकते हैं या इलेक्ट्रानिक। कुंजियों के उपर एक या अधिक संकेत/अक्षर लिखे रहते हैं। हिन्दी भाषा के लिये दो कीबोर्ड होते हैं - इनस्क्रिप्ट जो कि सभी भारतीय भाषाओं का मानक कीबोर्ड है तथा रेमिंगटन जो कि पुराने जमाने के टाइपराइटर पर प्रयोग होता था। .

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केंद्रीय प्रक्रमन एकक

८०४८६ का एक केप्रे (सीपीयू), अपनी पैकिंग में केंद्रीय प्रक्रमन एकक (केंप्रए) (अंग्रेज़ी: सैंट्रल प्रोसेसिंग युनिट, लघुरूप:सी.पी.यू.) का अर्थ है ऐसा भाग जिसमें संगणक का प्रमुख काम होता है। हिन्दी में इसे केन्द्रीय विश्लेषक इकाई भी कहा जाता है। जैसा इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह संगणक का वह भाग है, जहां पर संगणक प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करता है। इसे हम संगणक का दिल भी कह सकते हैं। कभी कभी केंप्रए (सीपीयू) को सिर्फ प्रक्रमक या सूक्ष्मप्रक्रमक ही कहा जाता है। श्रेणी:कंप्यूटर * af:Sentrale verwerkingseenheid an:Microprozesador ar:وحدة المعالجة المركزية arz:بروسيسور bg:Централен процесор bs:Procesor ca:Unitat Central de Procés cs:Procesor cv:Процессор da:Central Processing Unit de:Hauptprozessor el:Κεντρική Μονάδα Επεξεργασίας eo:Procesoro es:Unidad central de procesamiento et:Protsessor eu:Prozesatzeko unitate zentral fa:واحد پردازش مرکزی fi:Suoritin fr:Processeur fur:CPU gl:CPU he:מעבד hr:Procesor hu:CPU ia:Processator central id:CPU is:Miðverk it:CPU ja:CPU kn:ಕೇಂದ್ರ ಸಂಸ್ಕರಣ ಘಟಕ ko:중앙 처리 장치 la:Processorium medium ln:Bɔngɔ́ (elektroníki) lt:Procesorius lv:Centrālais procesors mk:Процесор ml:സെന്‍ട്രല്‍ പ്രൊസസിങ് യൂണിറ്റ് mn:Төв процессор ms:Unit pemprosesan pusat nl:Processor nn:CPU no:CPU oc:Processor pl:Procesor ru:Процессор sah:Киин процессор simple:Central processing unit sk:CPU sl:Procesor sq:Procesori sr:Процесор sv:CPU sw:Bongo kuu (kompyuta) ta:மையச் செயற்பகுதி th:หน่วยประมวลผลกลาง tl:Processor tr:Merkezi işlem birimi uk:Центральний процесор ur:خرد عملیہ vi:CPU yi:פראצעסאר zh:中央处理器 zh-yue:處理器.

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अंतरजाल

अंतरजाल का आंशिक मैप, १५ जनवरी २००५। प्रत्येक पंक्ति को दो नोड्स के बीच खींचा जाता है, आईपी पते जोड़ने से। रेखा की लंबाई नोड्स के बीच समय की देरी (पिंग) को दर्शाती है मानचित्र २००५ में डेटा संग्रह के लिए उपलब्ध कक्षा सी नेटवर्क के ३०% से कम का प्रतिनिधित्व करता है। रेखा रंग आरएफसी १९१८ के अनुसार उसके स्थान से मेल खाती है। अंतरजाल (इंटरनेट) (Internet आई पी ए: ɪntəˌnɛt) विष्व में डिवाइसों को लिंक करने के लिए इंटरनेट प्रोटोकॉल सूट (टीसीपी / आईपी) का उपयोग करने वाले इंटरकनेक्टेड कंप्यूटर नेटवर्क की वैश्विक प्रणाली है। यह नेटवर्क का एक नेटवर्क है जिसमें निजी, सार्वजनिक, शैक्षिक, व्यवसाय और वैश्विक नेटवर्क के सरकारी नेटवर्क शामिल हैं, जो कि इलेक्ट्रॉनिक, वायरलेस, और ऑप्टिकल नेटवर्किंग प्रौद्योगिकियों की व्यापक श्रेणी से जुड़ा हुआ है। इंटरनेट में सूचना संसाधनों और सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला है, जैसे इंटर लिंक किए गए हाइपरटेक्स्ट दस्तावेज़ और वर्ल्ड वाइड वेब (डबल्युडबल्युडबल्यु), इलेक्ट्रॉनिक मेल, टेलीफ़ोनी और फ़ाइल साझाकरण के अनुप्रयोग। १९६० के दशक में इंटरनेट नेटवर्क की उत्पत्ति संयुक्त राज्य संघीय सरकार द्वारा कंप्यूटर नेटवर्क के माध्यम से मज़बूत, गलती-सहिष्णु संचार के निर्माण के लिए शुरू की गई थी। १९९० के शुरुआती दिनों में वाणिज्यिक नेटवर्क और उद्यमों को जोड़ने से आधुनिक इंटरनेट पर संक्रमण की शुरुआत हुई, और तेजी से वृद्धि के कारण संस्थागत, व्यक्तिगत और मोबाइल कंप्यूटर नेटवर्क से जुड़े थे। २००० के दशक के अंत तक, इसकी सेवाओं और प्रौद्योगिकियों को रोजमर्रा की जिंदगी के लगभग हर पहलू में शामिल किया गया था। टेलीफ़ोनी, रेडियो, टेलीविज़न, पेपर मेल और अखबारों सहित अधिकांश पारंपरिक संचार मीडिया, ईमेल द्वारा पुनर्निर्मित, पुनर्निर्धारित, या इंटरनेट से दूर किए जाने वाले ईमेल सेवाओं, इंटरनेट टेलीफ़ोनी, इंटरनेट टेलीविजन, ऑनलाइन संगीत, डिजिटल समाचार पत्र, और वीडियो स्ट्रीमिंग वेबसाइटें अखबार, पुस्तक, और अन्य प्रिंट प्रकाशन वेबसाइट प्रौद्योगिकी के अनुकूल हैं, या ब्लॉगिंग, वेब फ़ीड्स और ऑनलाइन समाचार एग्रीगेटर्स में पुन: स्थापित किए जा रहे हैं। इंटरनेट ने त्वरित मैसेजिंग, इंटरनेट फ़ौरम और सोशल नेटवर्किंग के माध्यम से व्यक्तिगत इंटरैक्शन के नए रूपों को सक्षम और त्वरित किया है। ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं और छोटे व्यवसायों और उद्यमियों के लिए ऑनलाइन खरीदारी तेजी से बढ़ी है, क्योंकि यह कंपनियों को एक बड़े बाजार की सेवा या पूरी तरह से ऑनलाइन वस्तुओं और सेवाओं को बेचने के लिए अपनी "ईंट और मोर्टार" उपस्थिति बढ़ाने में सक्षम बनाता है। इंटरनेट पर व्यापार से व्यापार और वित्तीय सेवाओं को पूरे उद्योगों में आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ता है। इंटरनेट का उपयोग या उपयोग के लिए तकनीकी कार्यान्वयन या नीतियों में कोई केंद्रीकृत शासन नहीं है; प्रत्येक घटक नेटवर्क अपनी नीतियाँ निर्धारित करता है। इंटरनेट, इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस (आए पी एड्रेस), स्पेस और डोमेन नेम सिस्टम (डी एन एस) में दो प्रमुख नाम रिक्त स्थान की केवल अति परिभाषा परिभाषाएँ एक रखरखाव संगठन, इंटरनेट कॉरपोरेशन फॉर असाइन्ड नाम और नंबर (आए सी ए एन एन)। मुख्य प्रोटोकॉल के तकनीकी आधारभूत और मानकीकरण, इंटरनेट इंजीनियरिंग टास्क फ़ोर्स (आए ई टी एफ़) की एक गतिविधि है, जो कि किसी भी गैर-लाभप्रद संगठन के साथ संबद्ध अंतरराष्ट्रीय सहभागी हैं, जो किसी को भी तकनीकी विशेषज्ञता में योगदान दे सकते हैं। .

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अंकीय इलेक्ट्रॉनिकी

अंकीय इलेक्ट्रॉनिकी या डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स इलेक्ट्रॉनिक्स की एक शाखा है जिसमें विद्युत संकेत अंकीय होते हैं। अंकीय संकेत बहुत तरह के हो सकते हैं किन्तु बाइनरी डिजिटल संकेत सबसे अधिक उपयोग में आते हैं। शून्य/एक, ऑन/ऑफ, हाँ/नहीं, लो/हाई आदि बाइनरी संकेतों के कुछ उदाहरण हैं। जबसे एकीकृत परिपथों (इन्टीग्रेटेड सर्किट) का प्रादुर्भाव हुआ है और एक छोटी सी चिप में लाखों करोंड़ों इलेक्ट्रॉनिक युक्तियाँ भरी जाने लगीं हैं तब से डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक बहुत महत्वपूर्ण हो गयी है। आधुनिक व्यक्तिगत कम्प्यूटर (पीसी) तथा सेल-फोन, डिजिटल कैमरा आदि डिजिटल इलेक्ट्रॉनिकी की देन हैं। लकडी की तख्ती पर हाथ से बुनी हुई एक द्विआधारी घड़ी एक औद्योगिक अंकीय नियंत्रक इनटेल 80486DX2 माइक्रोप्रोसेसर अंकीय इलेक्ट्रॉनिकी, या सूक्ष्माड़विक आंकिक पद्धति ऐसी प्रणाली है जो विद्युत संकेतों को, रेखीय स्तर के एक निरंतर पट्टियों के बजाए एक अलग अलग पट्टियों की श्रृंखला के रूप में दर्शाती है। इस पट्टी के सभी स्तर संकेतों की एक ही अवस्था को दर्शाते हैं। संकेतो की इस पृथकता की वजह से निर्माण सहनशीलता के काऱण रेखीय संकेतो के स्तर में आये अपेक्षाकृत छोटे बदलाव अलग आवरण नहीं छोड़ते है। जिसके परिणाम स्वरुप संकेतो की अवस्था को महसूस करने वाला परिपथ इन्हे नजरअंदाज कर देता है। ज्यादातर मामलों में संकेतो की अवस्था की संख्या दो होती है और इन दो अवस्थाओं को दो वोल्टेज स्तरों द्वारा दर्शाया जाता है: प्रयोग में आपूर्ति वोल्टेज के आधार पर एक व दूसरा (आमतौर पर "जमीनी" या शून्य वोल्ट के रूप में कहा जाता है)| 1 उच्च स्तर पर होता है व 0 निम्न स्तर पर। अक्सर ये दोनों स्तर "लो" और "हाई" के रूप में प्रतिनिधित्व करते हैं। आंकिक तकनीक का मूल लाभ इस तथ्य पर आधारित है कि संकेतो की एक सतत श्रृंखला को पुनरुत्पादित करने के बजाए, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को संकेतो की ० या १ जैसे किसी ज्ञात अवस्था में भेजना ज्यादा आसान होता है। डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स आम तौर पर लॉजिक गेट्स के वृहद संयोजन व बूलियन तर्क प्रकार्य के सरल इलेक्ट्रोनिक्स से बनाया जाता है। .

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२००८

२००८ ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। .

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