लोगो
यूनियनपीडिया
संचार
Google Play पर पाएं
नई! अपने एंड्रॉयड डिवाइस पर डाउनलोड यूनियनपीडिया!
डाउनलोड
ब्राउज़र की तुलना में तेजी से पहुँच!
 

संघर्षी व्यंजन

सूची संघर्षी व्यंजन

संघर्षी व्यंजन (fricative consonant) ऐसा व्यंजन वर्ण होता है जिसमें मुँह के दो उच्चारण स्थानों को पास लाकर एक बहुत ही तंग खोल से हवा को बाहर धलेका जाए। मसलन निचले होंठ को ऊपर के दाँत से जोड़ने से "फ़" की ध्वनि या जिह्वा के पिछ्ले हिस्से को मुँह की छत के पिछले हिस्से से जोड़ने से "ख़" की ध्वनि (ध्यान दें कि बिना बिन्दु वाला ख एक संघर्षी व्यंजन नहीं है)। इसी तरह श, ष, थ़ (बिन्दु वाला), झ़ (बिन्दु वाला) और ज़ भी संघर्षी व्यंजन हैं। संघर्षी व्यंजनों कि विशेषता है कि उनकी ध्वनि को वायु-प्रवाह जारी रखकर लम्बे समय तक बिना रुके शुद्ध रूप से जारी रखा जा सकता है। .

10 संबंधों: झ़, थ़, फ़, , ज़, व्यंजन वर्ण, , ख़, अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला, उच्चारण स्थान

झ़

thumb झ़ की ध्वनि सुनिए झ़ देवनागरी लिपि का एक वर्ण है। इसका प्रयोग हिंदी-उर्दू (उर्दू: ژ) में केवल गिनती के ही शब्दों में होता है, जैसे की "झ़ुझ़" (जो एक प्रकार की सेह या पोर्क्युपाइन होती है) और "अझ़दहा" (जिसे अंग्रेज़ी में ड्रैगन या dragon कहते हैं)। अंग्रेज़ी में इसका प्रयोग बहुत सारे शब्दों में होता है, जैसे की "टॅलिविझ़न" (television), "ट्रॅझ़र" (treasure यानि ख़ज़ाना), "विझ़न" (vision यानि दृष्टि या नज़र), "डिसिझ़न" (decision यानि फ़ैसला) और "डिविझ़न" (division यानि बाँटना या किसी चीज़ का भाग करना)। प्रथा के अनुसार "झ़" को कभी-कभी "ज़" लिख दिया जाता है जैसे की television को अक्सर "टेलिविज़न" लिख दिया जाता है हालाँकि यह पूरा सही नहीं है। अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला में इसके उच्चारण को ʒ के चिन्ह से लिखा जाता है और उर्दू में इसे ژ लिखा जाता है, जिस अक्षर का नाम "झ़े" है। .

नई!!: संघर्षी व्यंजन और झ़ · और देखें »

थ़

थ़ की ध्वनि सुनिए - यह थ से भिन्न है थ़ देवनागरी लिपि का एक वर्ण है जिसके उच्चारण को अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला में θ के चिन्ह से लिखा जाता है। मानक हिंदी और मानक उर्दू में इसका प्रयोग नहीं होता है, लेकिन हिंदी की कुछ पश्चिमी उपभाषाओं में इसका 'थ' के साथ सहस्वानिकी संबंध है। मुख्य रूप से इसका प्रयोग पहाड़ी भाषों को देवनागरी में लिखने के लिए होता है। अंग्रेज़ी के कईं शब्दों में इसका प्रयोग होता है, जैसे की 'थ़िन' (thin, यानि पतला)। .

नई!!: संघर्षी व्यंजन और थ़ · और देखें »

फ़

फ़ f देवनागरी वर्णमाला का एक अघोष अर्धओष्ठ्य संघर्षी व्यंजन है। प्रायः इसे अंग्रेजी या फ़ार्सी-अरबी से ली गयी शब्दोँ के लिए प्रयोग किया जाता है। .

नई!!: संघर्षी व्यंजन और फ़ · और देखें »

ष का संस्कृत उच्चारण सुनिए - यह श से थोड़ा भिन्न है श का उच्चारण सुनिए - हिंदी में ष इसी की तरह कहा जाता है, लेकिन संस्कृत का ष इस से भिन्न है ष देवनागरी लिपि का एक वर्ण है। संस्कृत से उत्पन्न कई शब्दों में इसका प्रयोग होता है, जैसे की षष्ठ, धनुष, सुष्मा, कृषि, षड्यंत्र, संघर्ष और कष्ट। अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला (अ॰ध॰व॰) में इसके संस्कृत उच्चारण को ʂ के चिन्ह से लिखा जाता है। संस्कृत में 'ष' और 'श' के उच्चारण में काफ़ी अंतर है, लेकिन हिंदी से 'ष' ध्वनि लगभग लुप्त हो चुकी है और इसे 'श' कि तरह उच्चारित किया जाता है, जिसका अ॰ध॰व॰ चिन्ह ʃ है। संस्कृत में 'क' और 'ष' का एक संयुक्त अक्षर 'क्ष' भी प्रयोग होता है। संस्कृत में 'क्ष' का उच्चारण भी 'क्श' से भिन्न है हालाँकि हिंदी में इनमें अंतर नहीं है। .

नई!!: संघर्षी व्यंजन और ष · और देखें »

ज़

ज़ की ध्वनि सुनिए ज़ देवनागरी लिपि का एक वर्ण है। हिंदी-उर्दू के कई शब्दों में इसका प्रयोग होता है, जैसे की ज़रुरत, ज़माना, आज़माइश, ज़रा और ज़ंग। अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला में इसके उच्चारण को z के चिन्ह से लिखा जाता है और उर्दू में इसको ز लिखा जाता है, जिस अक्षर का नाम ज़े है। .

नई!!: संघर्षी व्यंजन और ज़ · और देखें »

व्यंजन वर्ण

व्यंजन (en:consonant) शब्द का प्रयोग वैसी ध्वनियों के लिये किया जाता है जिनके उच्चारण के लिये किसी स्वर की जरुरत होती है। ऐसी ध्वनियों का उच्चारण करते समय हमारे मुख के भीतर किसी न किसी अंग विशेष द्वारा वायु का अवरोध होता है। इस तालिका में सभी भाषाओं के व्यंजन गिये गये हैं, उनके IPA वर्णाक्षरों के साथ। नोट करें.

नई!!: संघर्षी व्यंजन और व्यंजन वर्ण · और देखें »

ख अक्षर ख देवनागरी वर्णमाला का एक व्यंजन है। क- वर्ग का दूसरा (क वर्ग.

नई!!: संघर्षी व्यंजन और ख · और देखें »

ख़

ख़ की ध्वनि सुनिए ख़ देवनागरी लिपि का एक वर्ण है। हिंदी-उर्दू के कई शब्दों में इसका प्रयोग होता है, जैसे कि ख़रगोश, ख़ुश, ख़बर, ख़ैर और ख़ून। अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला में इसके उच्चारण को x के चिह्न से लिखा जाता है और उर्दू में इसे خ लिखा जाता है, जिस अक्षर का नाम ख़े है। .

नई!!: संघर्षी व्यंजन और ख़ · और देखें »

अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला

अंतर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला (अ॰ध्व॰व॰, अंग्रेज़ी: International Phonetic Alphabet, इंटरनैशनल फ़ोनॅटिक ऐल्फ़ाबॅट) एक ऐसी लिपि है जिसमें विश्व की सारी भाषाओं की ध्वनियाँ लिखी जा सकती हैं। इसके हर अक्षर और उसकी ध्वनि का एक-से-एक का सम्बन्ध होता है। आरम्भ में इसके अधिकतर अक्षर रोमन लिपि से लिए गए थे, लेकिन जैसे-जैसे इसमें विश्व की बहुत सी भाषाओँ की ध्वनियाँ जोड़ी जाने लगी तो बहुत से यूनानी लिपि से प्रेरित अक्षर लिए गए और कई बिलकुल ही नए अक्षरों का इजाद किया गया। इसमें सन् २०१० तक १६० से अधिक ध्वनियों के लिए चिह्न दर्ज किए जा चुके थे, लेकिन किसी भी एक भाषा को दर्शाने के लिए इस वर्णमाला का एक भाग की ही ज़रुरत होती है। इस प्रणाली के ध्वन्यात्मक प्रतिलेखन (ट्रान्सक्रिप्शन) में सूक्ष्म प्रतिलेखन के चिन्हों के बीच में और स्थूल प्रतिलेखन / / के चिन्हों के अन्दर लिखे जाते हैं। इसकी नियामक अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक संघ है। उदाहरण के लिए.

नई!!: संघर्षी व्यंजन और अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला · और देखें »

उच्चारण स्थान

मानव द्वारा ध्वनि उत्पन्न करने वाले प्रमुख अंगों का विवरण 1. बाह्योष्ठ्य (exo-labial) 2. अन्तःओष्ठ्य (endo-labial)3. दन्त्य (dental) 4. वर्त्स्य (alveolar) 5. post-alveolar6. prä-palatal 7. तालव्य (palatal)8. मृदुतालव्य (velar)9. अलिजिह्वीय (uvular)10. ग्रसनी से (pharyngal) 11. श्वासद्वारीय (glottal)12. उपजिह्वीय (epiglottal)13. जिह्वामूलीय (Radical)14. पश्चपृष्ठीय (postero-dorsal)15. अग्रपृष्ठीय (antero-dorsal) 16. जिह्वापाग्रीय (laminal)17. जिह्वाग्रीय (apical)18. sub-laminal स्वनविज्ञान के सन्दर्भ में, मुख गुहा के उन 'लगभग अचल' स्थानों को उच्चारण बुन्दु (articulation point या place of articulation) कहते हैं जिनको 'चल वस्तुएँ' छूकर जब ध्वनि मार्ग में बाधा डालती हैं तो उन व्यंजनों का उच्चारण होता है। उत्पन्न व्यंजन की विशिष्ट प्रकृति मुख्यतः तीन बातों पर निर्भर करती है- उच्चारण स्थान, उच्चारण विधि और स्वनन (फोनेशन)। मुख गुहा में 'अचल उच्चारक' मुख्यतः मुखगुहा की छत का कोई भाग होता है जबकि 'चल उच्चारक' मुख्यतः जिह्वा, नीचे वाला ओठ, तथा श्वासद्वार (ग्लोटिस) हैं। व्यंजन वह ध्वनि है जिसके उच्चारण में हवा अबाध गति से न निकलकर मुख के किसी भाग (तालु, मूर्धा, दांत, ओष्ठ आदि) से या तो पूर्ण अवरूद्ध होकर आगे बढ़ती है या संकीर्ण मार्ग से घर्षण करते हुए या पार्श्व से निकले। इस प्रकार वायु मार्ग में पूर्ण या अपूर्ण अवरोध उपस्थित होता है। .

नई!!: संघर्षी व्यंजन और उच्चारण स्थान · और देखें »

निवर्तमानआने वाली
अरे! अब हम फेसबुक पर हैं! »