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संगठन

सूची संगठन

संगठन (organisation) वह सामाजिक व्यवस्था या युक्ति है जिसका लक्ष्य एक होता है, जो अपने कार्यों की समीक्षा करते हुए स्वयं का नियन्त्रण करती है, तथा अपने पर्यावरण से जिसकी अलग सीमा होती है। संगठन तरह-तरह के हो सकते हैं - सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक, सैनिक, व्यावसायिक, वैज्ञानिक आदि। .

10 संबंधों: प्रबन्धन, श्रम का विभाजन, समन्वय, संगठन सिद्धान्त, विशिष्टीकरण, व्यवसाय संगठन, आदेश की एकता, कार्य विभाजन, अधिकार, उत्तरदायित्व

प्रबन्धन

व्यवसाय एवं संगठन के सन्दर्भ में प्रबन्धन (Management) का अर्थ है - उपलब्ध संसाधनों का दक्षतापूर्वक तथा प्रभावपूर्ण तरीके से उपयोग करते हुए लोगों के कार्यों में समन्वय करना ताकि लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित की जा सके। प्रबन्धन के अन्तर्गत आयोजन (planning), संगठन-निर्माण (organizing), स्टाफिंग (staffing), नेतृत्व करना (leading या directing), तथा संगठन अथवा पहल का नियंत्रण करना आदि आते हैं। संगठन भले ही बड़ा हो या छोटा, लाभ के लिए हो अथवा गैर-लाभ वाला, सेवा प्रदान करता हो अथवा विनिर्माणकर्ता, प्रबंध सभी के लिए आवश्यक है। प्रबंध इसलिए आवश्यक है कि व्यक्ति सामूहिक उद्देश्यों की पूर्ति में अपना श्रेष्ठतम योगदान दे सकें। प्रबंध में पारस्परिक रूप से संबंधित वह कार्य सम्मिलित हैं जिन्हें सभी प्रबंधक करते हैं। प्रबंधक अलग-अलग कार्यों पर भिन्न समय लगाते हैं। संगठन के उच्चस्तर पर बैठे प्रबंधक नियोजन एवं संगठन पर नीचे स्तर के प्रबंधकों की तुलना में अधिक समय लगाते हैं। kisi bhi business ko start krne se phle prabandh yaani ke managements ki jaroort hoti h .

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श्रम का विभाजन

जब किसी बड़े कार्य को छोटे-छोटे तर्कसंगत टुकड़ों में बाँटककर हर भाग को करने के लिये अलग-अलग लोग निर्धारित किये जाते हैं तो इसे श्रम विभाजन (Division of labour) या विशिष्टीकरण (specialization) कहते हैं। श्रम विभाजन बड़े कार्य को दक्षता पूर्वक करने में सहायक होता है। ऐतिहासिक रूप से श्रम-विभाजन व्यापार की वृद्धि, सम्पूर्ण आउटपुट की वृद्धि, पूंजीवाद का उदय तथा औद्योगीकरण की जटिलता में वृद्धि से जुड़ा रहा है। परिष्कृत होकर धीरे-धीरे श्रम-विभाजन वैज्ञानिक प्रबन्धन के स्तर तक जा पहुँचा। मोटे तौर पर यह कार्यकारी-समाज है जिसके अलग-अलग भाग भिन्न-भिन्न काम करते हैं। जैसे- कुछ लोग कृषि करते हैं; कुछ लोग कुम्भकारी करते हैं और कुछ लोग लोहारी करते हैं। भारत की वर्णाश्रम व्यवस्था मूलत: श्रम-विभाजन का ही रूप है। .

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समन्वय

किसी संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उसकी विभिन्न क्रियाओं में सांमजस्य व तालमेल स्थापित करना ‘समन्वय’ कहलाता है। यह प्रबन्ध का वह कार्य है जो किसी संस्था के विभिन्न विभागों, कर्मचारियों तथा उसके समूहों में इस प्रकार एकीकरण स्थापित करता है कि न्यूनतम लागत पर वाछिंत उद्देश्यों की पूर्ति में सहायता मिलती है। ‘समन्वय प्रबन्ध का सार है।’ सार किसी वस्तु की आन्तरिक प्रकृति अथवा उसके महत्वपूर्ण गुण का नाम है। समन्वय वह महत्वपूर्ण तत्व है जिससे प्रबन्ध प्रक्रिया का निर्माण होता है। यह नियोजन की अवस्था में ही प्रारम्भ हो जाता है तथा संगठन, निर्देशन, नियन्त्रण आदि सभी कार्यों के साथ चलता है। समन्वय से ही प्रबन्ध निम्न वांछित परिणाम उपलब्ध कर पाता है जैसे-.

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संगठन सिद्धान्त

संगठन सिद्धान्त (Organizational theory) के अन्तर्गत राष्ट्रीय सामाजिक संगठन एक स्वयं सेवी एवं सामुदायिक संगठन है।जो की समाजशास्त्रीय अध्ययन किया जाता है। संगठन तथा मानव सेवा प्रकृत निर्मित प्राणियों की सेवा ही परम कर्तव्य है राष्ट्रीय सामाजिक संगठन की कार्य सम्पूर्ण भारत है। सभी वर्गी की राष्ट्रके हित में एकता स्थापित करना,मानव सेवा के लिए युवाओ को चरित्र निर्माण करना और भारत माता की सेवा व राष्ट्र भगति के लिए सादर समर्पित करना व देश स्मपुर भागीदारी सौपना जिससे देश व राष्ट्र बिकसित हो आदि कार्य है व भारत देश की संविधान की रक्षा करना,युवाओ की हक व अधिकार लड़ाई लड़ना भरतीय लोकतंत्र की हत्या होने से बचना। दिन दुखनियो को सेवा ही परम कर्तब व मुख सिद्धयन्त है। राष्ट्रीय अध्यक्ष सोशल वैज्ञानिक सह समाज सुधारक श्री शशीभूषण गाँन्धी Rashtriya samajik sangthan indian science reasurch organization welfare charitable mission head quater cnnagar nathpur narpatganj araria bihar.

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विशिष्टीकरण

कोई विवरण नहीं।

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व्यवसाय संगठन

उन संगठनों को व्यावसायिक संगठन (Business organization) कहते हैं जिनका निर्माण एवं प्रशासन कम्पनी कानूनों के अनुसार होता है और ये व्यावसायिक गतिविधियाँ (business activities), धर्मार्थ कार्य (charitable work) तथा कुछ अन्य कार्य करते हैं। अधिकतर व्यावसायिक संगठन कोई उत्पाद बेचने या कोई सेवा देने के निमित्त बनाए जाते हैं। विभिन्न देशों के विधान में भिन्न-भिन्न प्रकार के व्यावसायिक संगठन पारिभाषित हैं। इनमें से कुछ प्रमुख ये हैं- निगम (corporations), सहकारी संगठन (cooperatives), भागीदारी फर्म (partnerships), एकल व्यापारी (sole traders), सीमित देयता वाली कम्पनी (limited liability company) आदि। श्रेणी:संगठन श्रेणी:व्यावसायिक विधि श्रेणी:संगठन के प्रकार.

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आदेश की एकता

किसी कार्य को करने का निर्देश उसके लिए निर्धारित केवल एक व्यक्ति (या कमाण्डर) से ही आना चाहिए। इसे ही समादेश एकलता या आदेश की एकता (Unity of command) कहते हैं। कार्य करने से सम्बन्धित आदेश अलग-अलग लोगों से आने पर बहुत सी समस्याएँ उठ खड़ी होतीं हैं। अमेरिकी सेना के संयुक्त अभियान से सम्बन्धित १२ सिद्धान्तों में से एक सिद्धान्त 'आदेश की एकता' भी है। श्रेणी:सैन्य संगठन.

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कार्य विभाजन

किसी कार्य को छोटे-छोटे कार्यों में बांटना कार्य विभाजन (Division of work) कहलाता है। कार्य को जिन 'उपकार्यों' में बांटा जाता है उन कार्यों को पूरा करने की अवधि भी निर्धारित की जा सकती है। बड़े संगठनों में ऑपरेशन्स, वित्त, उत्पादन, विपणन (marketing) आदि विभाग बनाना वास्तव में कार्य का विभाजन ही है। .

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अधिकार

अधिकार, किसी वस्तु को प्राप्त करने या किसी कार्य को संपादित करने के लिए उपलब्ध कराया गया किसी व्यक्ति की कानूनसम्मत या संविदासम्मत सुविधा, दावा या विशेषाधिकार है। कानून द्वारा प्रदत्त सुविधाएँ अधिकारों की रक्षा करती हैं। दोनों का अस्तित्व एक-दूसरे के बिना संभव नहीं। जहाँ कानून अधिकारों को मान्यता देता है वहाँ इन्हें लागू करने या इनकी अवहेलना पर नियंत्रण स्थापित करने की व्यवस्था भी करता है। .

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उत्तरदायित्व

उत्तरदायित्व का निम्न अर्थ हो सकता हैं -.

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यहां पुनर्निर्देश करता है:

व्यवस्था, संस्था

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