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लीलाबाड़ी विमानक्षेत्र

सूची लीलाबाड़ी विमानक्षेत्र

लीलाबाड़ी विमानक्षेत्र अरुणाचल प्रदेश के निकटवर्ती असम राज्य के लखीमपुर जिले में स्थित अन्तर्देशीय हवाई-अड्डा है। इस विमानक्षेत्र द्वारा असम और अरुणाचल प्रदेश राज्यों को वायु सेवाएं उपलब्ध होती हैं। अरुणाचल प्रदेश में फिल्हाल कोई विमानक्षेत्र प्रचालन में नहीं है, अतः राज्य केवल असम स्थित विमानक्षेत्रों पर ही निर्भर है। अरुणाचल की राजधानी से निकटतम विमानक्षेत्र (५७ कि॰मी॰) लीलाबाड़ी ही है। यहां से लगभग २८ लाख वर्ग नॉटिकल मील के वायुक्षेत्र का संचालन नियंत्रित होता है।- एन.आई.सी असम राज्य के विमानक्षेत्रों में लीलाबाड़ी विमानक्षेत्र अरुणाचल प्रदेश से निकटतम है। इसके अलावा असम राज्य में अन्य कई अन्तर्देशीय विमानक्षेत्र हैं, जैसे डिब्रुगढ़, जोरहाट, सिल्चर और तेजपुर विमानक्षेत्र। साथ ही एक अन्तर्राष्ट्रीय गुवाहाटी विमानक्षेत्र भी है। लीलाबाड़ी विमानक्षेत्र की भौगोलिक स्थिति पर है। विमानक्षेत्र में एकमात्र उड़ान पट्टी है जिसकी लंबाई ५४८० फीट और सागर सतह से ऊंचाई ३३३ फीट है। विमानक्षेत्र उत्तर लखीमपुर शहर से मात्र ७ कि॰मी॰ की दूरी पर स्थित है। शहर से यहां निजि वाहन द्वारा ५-१० मिनट में पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा सार्वजनिक वाहन में ऑटोरिक्शा भी चलते हैं। अन्य निकटवर्ती विमानक्षेत्रों में डपरिज़ो विमानक्षेत्र (७९ कि॰मी॰), ज़िरो (४० कि.मी), जोरहाट (६३ कि॰मी॰), डिब्रुगढ़ (९४ कि॰मी॰) और मोहनबाड़ी विमानक्षेत्र आते हैं। इन सभी में से मात्र डिब्रुगढ़ और जोरहाट ही प्रचालन में हैं। लीलाबाड़ी में एक ही अन्तर्देशिय टर्मिनल है। इस टर्मिनल में बैगेज ट्रॉली, बैठने का प्रबंध, पेय जल, टैक्सी सेवा, ग्राहक सुविधा/सहायता एवं सूचना केन्द्र, अल्पाहार सुविधा, दूरभाष काउन्टर आदि उपलब्ध हैं।-एकीक्रत.इन पर इस विमानक्षेत्र की नई टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन लेफ़्टि.जनरल एस.के.सिन्हा, असम के तत्कालीन राज्यपाल और पूर्वोत्तर परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष के कर कमलों द्वारा हुआ था। इस इमारत में ४०० यात्रियों की क्षमता है और इसकी कुल लागत ८.४५ करोड़ रुपये थी। के आधिकारिक जालस्थल पर लीलाबाड़ी विमानक्षेत्र से उत्तरी दिशा में हिमालय का दृश्य यहां सभी वातावरणीय स्थितियों में एयरबस-३२० के अवतरण की सुविधाएं उपलब्ध हैं। हवाई अड्डे का कुल क्षेत्रफल २२०.६१ एकड़ है जिसमें टर्मिनल बिल्डिंग ६२२५ वर्ग मीटर में बनी है। इस इमारत में २८२३ वर्ग मीटर का प्रस्थान लाउंज एवं ९६६ वर्ग मीटर का आगमन लाउंज है। एप्रन क्षेत्र ३५० X२५० फीट का है। विमान अवतरण हेतु नौवहन सेवाओं में डी.वी.ओ.आर/डी.एम.ई, एन.डी.बी.

17 संबंधों: एयरबस, एअर इंडिया क्षेत्रीय, ऐस्फाल्ट, डापोरिजो विमानक्षेत्र, डिब्रुगढ़ विमानक्षेत्र, तेजपुर विमानक्षेत्र, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, लखीमपुर जिला, लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलोई अन्तरराष्ट्रीय विमानक्षेत्र, सिल्चर विमानक्षेत्र, ज़िरो विमानक्षेत्र, जोरहाट विमानक्षेत्र, कंक्रीट, अरुणाचल प्रदेश, असम, उड़ानपट्टी, उत्तर लखीमपुर

एयरबस

एयरबस SAS (अंग्रेज़ी मेंचित्र:ltspkr.png, फ़्रांसीसी में /ɛʁbys/ और जर्मन में) एक यूरोपीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कम्पनी EADS की एक वायुयान निर्माण सहायक कम्पनी है। ब्लैगनैक, फ़्रांस में ट्युलाउज़ के पास स्थित और पूरे यूरोप में महत्वपूर्ण गतिविधि वाली यह कम्पनी समस्त विश्व के जेट विमानों की कुल संख्या के लगभग आधे का उत्पादन करती है। एयरबस की शुरुआत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी उत्पादकों के एक संघ के रूप में हुई। सदी के अंत के दौरान यूरोपीय सैन्य और अंतरिक्ष अनुसंधान कम्पनियों के एकीकरण ने 2001 में सरलीकृत संयुक्त स्टॉक कंपनी की स्थापना की अनुमति दी, जिसका स्वामित्व EADS (80%) और BAE सिस्टम्स (20%) के पास था। एक लंबी विक्रय प्रक्रिया के बाद 13 अक्टूबर 2006 को BAE ने अपनी हिस्सेदारी EADS को बेच दी। यूरोपीय संघ के चार देशों: जर्मनी, फ़्रांस, यूनाइटेड किंगडम और स्पेन, के सोलह स्थानों पर एयरबस के लगभग 57,000 कर्मचारी कार्य करते हैं। अंतिम असेम्बली उत्पादन ट्युलाउज़ (फ़्रांस), हैम्बर्ग (जर्मनी), सेविल (स्पेन) और, 2009 से, तियान्जिन (चीन) में होता है। संयुक्त राज्य अमरीका, जापान, चीन और भारत में एयरबस की सहायक कम्पनियां कार्यरत हैं। यह कम्पनी वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य पहले फ़्लाइ-बाइ-वायर (fly-by-wire) वायुयानों के उत्पादन और विपणन के लिये जानी जाती है। .

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एअर इंडिया क्षेत्रीय

अलायंसेयर का विमान नई दिल्ली विमानक्षेत्र में अलायंस एयर (एलायंस एयर), नाम से चली थी, एयर इंडिया की एक कम-कीमत वायु सेवा है।.

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ऐस्फाल्ट

मृत सागर से प्राप्त प्राकृतिक ऐसफाल्ट सड़क निर्माण में अस्फाल्ट कंक्रीट की मूल पर्त ऐस्फाल्ट (अंग्रेजी: Asphalt) एक चिपचिपा, काला और गाढ़ा तरल या अर्ध-तरल पदार्थ होता है, जिसे कच्चे पैट्रोलियम से प्राप्त किया जाता है। यह प्राकृतिक रूप से भी मिलता है। पहले इसे अस्फाल्टम भी कहा जाता है। इसका प्रयोग सड़क निर्माण, उड़ान पट्टी निर्माण इत्यादि में होता है। 'अस्फाल्ट' शब्द एक यूनानी शब्द से निकला है जिसका अर्थ है दृढ़, अचल तथा सुरक्षित। पुरातन काल में अस्फाल्ट का प्रथम उपयोग विभिन्न प्रकार के दो पदार्थो को आपस में जोड़ने में, जैसे हाथीदाँत, सीप या रत्नों से बनी आँखों को मूर्तियों के चक्षु गह्वरों में बैठाने के लिए, किया जाता था। ज्ञात हुआ है कि संभवत: भारत में अस्फाल्ट का सर्वप्रथम उपयोग लगभग 3,000 वर्ष ई.पू.

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डापोरिजो विमानक्षेत्र

डापोरिजो विमानक्षेत्र अरुणाचल प्रदेश स्थित हवाईअड्डा है। श्रेणी:भारत में विमानक्षेत्र.

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डिब्रुगढ़ विमानक्षेत्र

डिब्रुगढ़ विमानक्षेत्र (जिसे स्थानीय लोग मोहनबाड़ी भी कहते हैं) डिब्रुगढ़ में स्थित है। इसका ICAO कोडहै VEMN और IATA कोड है DIB। यह एक नागरिक हवाई अड्डा है। यहां कस्टम्स विभाग उपस्थित नहीं है। इसका रनवे पेव्ड है। इसकी प्रणाली यांत्रिक हाँ है। इसकी उड़ान पट्टी की लंबाई 6000 फी.

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तेजपुर विमानक्षेत्र

तेजपुर विमानक्षेत्र असम के तेजपुर स्थित हवाईअड्डा है। .

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भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण एक संगठन / प्राधिकरण है, जो कि भारत सरकार के नागर विमानन मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत है। निगमित मुख्यालय राजीव गाँधी भवन सफदरजंग विमानक्षेत्र, नई दिल्ली में स्थित है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (ए ए आई) कुल 125 विमानपत्तनों का प्रबंधन करता है जिसमें 11 अंतर्राष्ट्रीय विमानपत्तन, 8 सीमा शुल्क विमानपत्तन, 81 घरेलू विमानपत्तन तथा रक्षा वायु क्षेत्रों में 25 सिविल एंक्लेव शामिल हैं। सुरक्षित विमान प्रचालन हेतु भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण सभी विमानपत्तनों एवं 25 अन्य‍ स्थानों पर जमीनी अधिष्ठापनों के साथ संपूर्ण भारतीय वायु क्षेत्र एवं समीपवर्ती महासागरीय क्षेत्रों में वायु ट्रैफिक प्रबंधन सेवाएं (ए टी एम एस) भी प्रदान करता है। इलाहाबाद, अमृतसर, कालीकट, गुवाहाटी, जयपुर, त्रिवेंद्रम, कोलकाता एवं चेन्नई के विमानपत्तन, जो आज अंतर्राष्ट्रीय विमानपत्तन के रूप में स्थापित हैं, विदेशी अंतर्राष्ट्रीय एयरलाइनों द्धारा भी प्रचालन के लिए खुले हैं। कोयबंटूर, त्रिचुरापल्ली, वाराणसी एवं गया के हवाई अड्डों से अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के अलावा राष्ट्रीय ध्‍वज वाहक भी प्रचालन करते हैं। केवल इतना ही नहीं अपितु आज आगरा, कोयबंटूर, जयपुर, लखनऊ, पटना आदि के विमानपत्तनों तक टूरिस्‍ट चार्टर भी जाते हैं। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने मुम्ब्ई, दिल्ली, हैदराबाद, बंगलौर एवं नागपुर के विमानपत्त्नों के उन्नयन के लिए तथा विश्वस्तरीय मानकों से बराबरी करने के लिए पर एक संयुक्त उद्यम भी स्थापित किया है। भारतीय भू क्षेत्र के ऊपर सभी प्रमुख वायुमार्ग वीओआर / डीवीओआर कवरेज (89 अधिष्ठापन) के साथ रडार द्धारा कवर्ड हैं (11 स्थानों पर 29 रडार अधिष्ठापन) जो दूरी मापन उपकरण के साथ सह-स्थित हैं (90 अधिष्ठापन)। 52 रनवे पर आईएलएस अधिष्ठापन की सुविधा है तथा इनमें से अधिकांश विमानपत्तनों पर नाइट लैंडिंग की सुविधाएं हैं और 15 विमानपत्तनों पर आटोमेटिक मैसेज स्विचिंग सिस्ट‍म लगा है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्धारा कोलकाता एवं चेन्नई के वायु ट्रैफिक नियंत्रण केंद्रों पर देशज प्रौद्योगिकी का प्रयोग करके आटोमेटिक डिपेंडेंस सर्विलांस सिस्टम (ए डी एस एस) के सफल कार्यान्‍वयन ने भारत को दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र में इस उन्‍नत प्रौद्योगिकी का प्रयोग करने वाला पहला देश होने का गौरव प्रदान किया जिससे उपग्रह आधारित संचार प्रणाली का प्रयोग करके महासागरीय क्षेत्रों के ऊपर वायु ट्रैफिक का प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। उपग्रह संचार लिंक के साथ रिमोट कंट्रोल्ड वी एच एफ कवरेज के प्रयोग ने हमारे ए टी एम एस को और मजबूती प्रदान की है। वी-सैट अधिष्‍ठापनों द्धारा 80 स्थाननों को जोड़ने से बड़े पैमाने पर वायु ट्रैफिक प्रबंधन में वृद्धि होगी और बदले में एयरक्राफ्ट के प्रचालन की सुरक्षा में वृद्धि होगी। इसके अलावा, हमारे वृहद एयरपोर्ट नेटवर्क पर प्रशासनिक एवं प्रचालनात्मक नियंत्रण संभव होगा। मुम्‍बई, दिल्‍ली एवं इलाहाबाद के विमानपत्तनों पर निष्पादन आधारित नेविगेशन (पीएनबी) प्रक्रिया पहले ही कार्यान्वित की जा चुकी है तथा अन्य विमानपत्तनों पर चरणबद्ध ढंग से इसको लागू करने की संभावना है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने भारतीय अंतरिक्ष एवं अनुसंधान केंद्र (इसरो) के साथ प्रौद्योगिकीय सहयोग से गगन परियोजना शुरू की है जहां नेविगेशन के लिए उपग्रह आधारित प्रणाली का प्रयोग किया जाएगा। इस प्रकार जीपीएस से प्राप्‍त नेविगेशन के संकेतों को हवाई जहाजों की नेविगेशन संबंधी आवश्यकता को पूरा करने के लिए उन्नत किया जाएगा। प्रौद्योगिकी प्रदर्शन प्रणाली का पहला चरण फरवरी 2008 में पहले ही सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। प्रचालनात्मक चरण में इस प्रणाली को स्‍तरोन्‍नत करने के लिए विकास टीम को सक्षम बनाया गया है। भारतीय विमानपत्त‍न प्राधिकरण ने दिल्ली एवं मुम्‍बई के विमानपत्‍तनों पर ग्राउंड बेस्ड ऑगमेंटेशन सिस्टम (जी बी ए एस) उपलब्ध् कराने की भी योजना बनाई है। यह जीबीएएस उपकरण हवाई जहाजों को श्रेणी-2 (वक्र एप्रोच) लैंडिंग सिगनल उपलब्ध कराने और इस प्रकार आगे चलकर लैंडिंग सिस्टम के विद्यमान उपकरण को प्रतिस्थापित करने में समर्थ होगा, जिसकी रनवे के प्रत्येक छोर पर जरूरत होती है। दिल्ली में अधिष्ठापित एडवांस्ड सर्फेस मूवमेंट गाइडेंस एंड कंट्रोल सिस्टम (ए एस एम जी सी एस) ने रनवे 28 के प्रचालन को कैट-3 ए स्तर से कैट-3 बी स्तर तक स्‍तरोन्‍नत किया है। कैट-3 ए सिस्‍टम 200 मीटर की विजिबिलिटी तक हवाई जहाजों की लैंडिंग को अनुमत करता है। तथापि, कैट-3 बी 200 मीटर से कम किंतु 50 मीटर से अधिक की विजिबिलिटी पर हवाई जहाजों की सुरक्षित लैंडिंग को अनुमत करेगा। ‘ग्राहकों की अपेक्षाएं’ पर अधिक बल के साथ भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के प्रयास को उस स्वतंत्र एजेंसी से उत्‍साहवर्धक प्रत्युत्तर मिला है जिसने 30 व्‍यस्‍त विमानपत्तनों पर ग्राहक संतुष्टि सर्वेक्षण संचालित किया है। इन सर्वेक्षणों ने हमें विमानपत्तनों के प्रयोक्‍ताओं द्धारा सुझाए गए पहलुओं पर सुधार करने में समर्थ बनाया है। विमानपत्तनों पर हमारे ‘व्यवसाय उत्तर पत्र’ के लिए रिसेप्टुकल लोकप्रिय हुए हैं; इन प्रत्‍युत्‍तरों ने हमें विमानपत्तनों के प्रयोक्ताओं की बदलती महत्‍वाकांक्षाओं को समझने में समर्थ बनाया है। सहस्राब्दि के पहले वर्ष के दौरान, भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण अपने प्रचालन को अधिक पारदर्शी बनाने तथा अधुनातन सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके ग्राहकों को तत्काल सूचना उपलब्ध कराने के लिए प्रयास कर रहा है। विशिष्ट प्रशिक्षण, कर्मचारी प्रत्‍युत्‍तर में सुधार तथा व्यावसायिक कौशल के उन्नयन पर फोकस स्‍पष्‍ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारतीय विमानपत्त‍न प्राधिकरण के चार प्रशिक्षण स्थापनाओं अर्थात नागरिक विमानन प्रशिक्षण कॉलेज (सी ए टी सी), इलाहाबाद; राष्ट्रीय विमानन प्रबंधन एवं अनुसंधान संस्‍थान (एन आई ए एम ए आर), दिल्ली और दिल्ली एवं कोलकाता स्थि‍त अग्नि प्रशिक्षण केंद्र (एफ टी सी) के बारे में ऐसी अपेक्षा है कि वे पहले से अधिक व्‍यस्‍त रहेंगे। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने सीएटीसी, इलाहाबाद एवं हैदराबाद एयरपोर्ट पर प्रशिक्षण सुविधाओं को स्तरोन्नत करने की भी पहल की है। हाल ही में सीएटीसी पर एयरपोर्ट विजुअल सिमुलेटर (ए वी एस) उपलब्ध कराया गया है तथा सीएटीसी, इलाहाबाद एवं हैदराबाद एयरपोर्ट को गैर रडार प्रक्रियात्‍मक एटीसी सिमुलेटर उपकरण की आपूर्ति की जा रही है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की एक समर्पित उड़ान निरीक्षण यूनिट (एफ आई यू) है तथा इसके बेड़े में तीन हवाई जहाज हैं जो निरीक्षण में समर्थ अधुनातन एवं पूर्णत: स्‍वचालित उड़ान निरीक्षण प्रणाली से सुसज्जित हैं।.

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लखीमपुर जिला

लखीमपुर भारतीय राज्य असम का एक जिला है। इसी से मिलते जुलते नाम का एक जिला लखीमपुर खीरी जिला उत्तर प्रदेश में भी है। जिले का मुख्यालय उत्तर लखीमपुर है। वहीं जिले का हवाई अड्डा भी है जिसे लीलाबाड़ी विमानक्षेत्र कहते हैं। क्षेत्रफल - 2,277 वर्ग कि॰मी॰ जनसंख्या - 8,89,325 (2001 जनगणना) .

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लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलोई अन्तरराष्ट्रीय विमानक्षेत्र

लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलोई अन्तरराष्ट्रीय विमानक्षेत्र (असमिया:লোকপ্ৰিয় গোপীনাথ বৰদলৈ আন্তঃৰাষ্ট্ৰীয় বিমানবন্দৰ), जिसे गुवाहाटी अन्तरराष्ट्रीय विमानक्षेत्र भी कहते हैं, (पूर्व नाम बोरझार विमानक्षेत्र), भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिये प्रधान अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र है। यह असम की राजधानी गुवाहाटी में स्थित है। असम के स्वतंत्रता सेनानी एवं पूर्व मुख्य मंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई के नाम पर बना यह विमानक्षेत्र भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा संचालित है तथा भारतीय वायुसेना का एक महत्त्वपूर्ण वायु बेस भी है। .

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सिल्चर विमानक्षेत्र

सिल्चर विमानक्षेत्र जिसे कुम्भीग्राम हवाई अड्डा भी कहते हैं, असम राज्य के कछर जिले में स्थित हवाईअड्डा है। यह विमानक्षेत्र सिलचर शहर से २४ कि॰मी॰ उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित है। यहां की हवाई पट्टी की लंबाई ५,८५६ फ़ीट लंबी है और इसकी समुद्र सतह से ऊंचाई ३५३ फ़ीट है। यहां से मुख्यतः एयर इंडिया, जेट एयरवेज़ एवं एयर सहारा की अन्तर्देशीय वायुसेवाएं उपलब्ध हैं। विमानक्षेत्र परिसर में टैक्सी सेवा उपलब्ध है। विमानक्षेत्र पर चिकित्सा सुविधा, अपंग और वृद्ध यात्रियों हेतु व्हीलचेयर सुविधा भी उपलब्ध है। परिसर से सिल्चर रेलवे स्टेशन निकटम रेलवे कड़ी है। विमानक्षेत्र परिसर लगभग ३६.७० एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। अन्य निकटवर्ती विमानक्षेत्रों में इम्फाल विमानक्षेत्र ९४ कि.मी, लेंगपुई विमानक्षेत्र १२४ कि.मी, अगरतला विमानक्षेत्र १५५ कि.मी और गुवाहाटी विमानक्षेत्र १९५ कि.मी दूरी पर हैं। इनमें से गुवाहाटी एकमात्र अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र है। सिल्चर शहर से विमानक्षेत्र तक पहुंचने हेतु सार्वजनिक यातायात में नगर-बस सेवा के अलावा किराये पर कार और टैक्सियां मिलती हैं। विमानक्षेत्र पर प्रस्थान समय से २ घण्टे पूर्व पहुंच जाना यात्र्रियों के लिये सुविधाजनक रहता है। इस विमानक्षेत्र में एकमात्र अन्तर्देशीय टर्मिनल है और इस टर्मिनल से संचालित होने वाली वायुसेवाओं में एयर इण्डिया क्षेत्रीय, किंगफिशर एयरलाइंस, नॉर्थ ईस्ट शटल एवं इण्डियन एयरलाइंस हैं जो शहर को अगरतला, गुवाहाटी, आइज़ोल, इम्फाल और कोलकाता से जोड़ती हैं। .

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ज़िरो विमानक्षेत्र

ज़िरो विमानक्षेत्र अरुणाचल प्रदेश स्थित हवाईअड्डा है। श्रेणी:भारत में विमानक्षेत्र.

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जोरहाट विमानक्षेत्र

जोरहाट विमानक्षेत्र असम राज्य के जोरहाट में स्थित है। इसका ICAO कोडहै VEJT और IATA कोड है JRH। यह एक सैन्य तथा सार्वजनिक हवाई अड्डा है। यहां कस्टम्स विभाग उपस्थित नहीं है। इसका रनवे पेव्ड है। इसकी प्रणाली यांत्रिक नहीं है। इसकी उड़ान पट्टी की लंबाई 9000 फी.

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कंक्रीट

वाणिज्यिक भवन के लिये कंक्रीट बिछायी जा रही है। कंक्रीट (Concrete) एक निर्माण सामग्री है जो सीमेंट एवं कुछ अन्य पदार्थों का मिश्रण होती है। कंक्रीट की यह विशेषता है कि यह पानी मिलाकर छोड़ देने के बाद धीरे-धीरे ठोस एवं कठोर बन जाता है। इस प्रक्रिया को जलीकरण (Hydration) कहते है। इस रासायनिक क्रिया में पानी, सिमेन्ट के साथ क्रिया करके पत्थर जैसा कठोर पदार्थ बनाती है जिसमें अन्य चीजें बंध जातीं हैं। कंक्रीट का प्रयोग सड़क बनाने, पाइप निर्माण, भवन निर्माण, नींव बनाने, पुल आदि बनाने में होता है। कंक्रीट का उपयोग 2000 ई.पू.

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अरुणाचल प्रदेश

अरुणाचल प्रदेश ('अरुणांचल' नहीं) भारत का एक उत्तर पूर्वी राज्य है। अरुणाचल का अर्थ हिन्दी मे "उगते सूर्य का पर्वत" है (अरूण + अचल; 'अचल' का अर्थ 'न चलने वाला' .

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असम

असम या आसाम उत्तर पूर्वी भारत में एक राज्य है। असम अन्य उत्तर पूर्वी भारतीय राज्यों से घिरा हुआ है। असम भारत का एक सीमांत राज्य है जो चतुर्दिक, सुरम्य पर्वतश्रेणियों से घिरा है। यह भारत की पूर्वोत्तर सीमा २४° १' उ॰अ॰-२७° ५५' उ॰अ॰ तथा ८९° ४४' पू॰दे॰-९६° २' पू॰दे॰) पर स्थित है। संपूर्ण राज्य का क्षेत्रफल ७८,४६६ वर्ग कि॰मी॰ है। भारत - भूटान तथा भारत - बांग्लादेश सीमा कुछ भागो में असम से जुडी है। इस राज्य के उत्तर में अरुणाचल प्रदेश, पूर्व में नागालैंड तथा मणिपुर, दक्षिण में मिजोरम तथा मेघालय एवं पश्चिम में बंग्लादेश स्थित है। .

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उड़ानपट्टी

FAA विमानक्षेत्र का मानचित्र, ओ’हारे विमानक्षेत्र पर, बाएं से उड़ानपट्टी 14/32 ढाल नीचे, उड़ानपट्टी 4/22 ढाल ऊपर, एवं उड़ान पट्टी 9/27 तथा 10/28 क्षैतिज चेन्नई विमानक्षेत्र की हवाई चित्र उड़ानपट्टी (RWY या रनवे) विमानक्षेत्र में एक भूमी की पट्टी होती है, जिस पर विमान उड़ान भर (टेक ऑफ) और अवतरण (लैंडिंग) कर सकते हैं। इसके अलावा अनेकों युद्धाभ्यास भी करते हैं। रनवे मानव निर्मित भी हो सकती है और प्राकृतिक भी। मानव निर्मित रनवे की सतह प्रायः अस्फाल्ट या कांक्रीट से या दोनो के मिश्रण से बनी होती है। प्राकृतिक रनवे की सतह घास, पक्की मिट्टी इत्यादि की हो सकती है। .

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उत्तर लखीमपुर

उत्तर लखीमपुर भारत के असम प्रदेश में लखीमपुर जिला का एक कस्बा है। यह जिले का मुख्यालय भी है। इसी नाम से जिले का मंडल भी है। .

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उत्तर लखीमपुर विमानक्षेत्र

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