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रोकड़ बही

सूची रोकड़ बही

रोकड़ बही (कैश बुक या कैश एकाउण्ट) प्रारम्भिक लेखे की पुस्तक है जिसमें मुद्रा की प्राप्तियों तथा भुगतानों का लेखा किया जाता है। रुपया कहाँ-कहाँ से कितना आता है कहाँ-कहाँ कितना चला जाता है, फिर शेष कितना बच जाता है - इसे प्रकट करने के लिए रोकड़ बही बनायी जाती है। रोकड़ की समस्त प्राप्तियाँ डेबिट पक्ष में और समस्त भुगतान क्रेडिट पक्ष में लिखे जाते हैं। रोकड़ बही वह पुस्तक है जो रोजनामचा व खाता-बही दोनों के उद्देश्य की पूर्ति करती है। रोकड़ बही को सहायक पुस्तक के साथ-साथ एक प्रधान पुस्तक भी माना जाता है। चूँकि रोकड़ बही में लेन-देन की प्राथमिक प्रविष्टि की जाती है इसलिए इसे 'मूल प्रविष्टि की बही' (Book of Original Entry) भी कहा जाता है। .

2 संबंधों: दैनिकी, खाता बही

दैनिकी

किसी भी व्यापारी या संस्था के लिये यह संभव नहीं है कि वह सारे लेन-देन व्यवहारों को याद रख सके। इसलिये उन्हें याद रखने के लिये दैनिकी (जर्नल अथवा दैनंदिनी) तैयार किया जाता है। इसमें लेनदेन होते ही प्रविष्टि कर ली जाती है। अतः प्रत्येक सौदों या व्यवहार को क्रमवार लिखने कि क्रिया को प्रारंभिक लेखा कहा जाता है। इसे 'रोजनामचा' भी कहते हैं। इसमें सुविधा के लिये कुछ सहायक पुस्तके भी रखी जाती है। जैसे क्रय पुस्तक विक्रय पुस्तक, रोकड़ पुस्तक तथा मुख्य जर्नल आदि। उदाहरण के लिए - नगर पंचायत में दिनांक 15.4.2008 को कार्यालय के लिय 1000.00 रूपये नगद देकर फर्नीचर खरीदा। यह एक सौदा है जिसका जर्नल बुक में प्रारंभिक लेखा निम्नानुसार होगा - चूंकि जर्नल लेखे तैयार करने की प्रारंभिक पुस्तक है, इसलिये इसे महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। आजकल सीधे लेजर एवं सहायक बहियाँ तैयार करना प्रचलन में होने से अभिलेख का महत्व व्यापारिक प्रतिष्ठानों में अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। स्थानीय निकायों में यदि द्वि प्रविष्टि लेखा अपनाई जाती है तो उसमें जर्नल का बहुत महत्व रहेगा क्योंकि वे सभी व्यवहार जिसमें मुद्रा का वास्तविक लेनदेन नहीं हुआ है। समायोजन प्रविष्टियां आदि जर्नल के माध्यम से ही लेखाबद्ध की जायेगी। .

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खाता बही

खाता-बही या लेजर (ledger) उस मुख्य बही (पुस्तक) को कहते हैं जिसमें पैसे के लेन-देन का हिसाब रखा जाता है। आजकल यह कम्पयूटर-फाइल के रूप में भी होती है। खाता बही में सभी लेन-देन को खाता के अनुसार लिखा जाता है जिसमें डेबित और क्रेडित के के दो अलग-अलग कॉलम होते हैं। .

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