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मौदूद अहमद

सूची मौदूद अहमद

मौदूद अहमद, एक बांग्लादेशी राजनेता थे, एवं 27 मार्च 1988 से 12 अगस्त 1989 के बीच वे, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री थे। इसके अलावा भी वे कई पदों पर रह चुके हैं: उपप्रधानमंत्री (1976-1978 और 1987-1988), उपराष्ट्रपति (1989-1990) विधी, न्याय एवं संसदीय कार्य मंत्री (2001-2006)। साथ ही वे नोआखाली से छह बार सांसद चुने गए थे। .

13 संबंधों: नोवाखाली, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी, बांग्लादेश सरकार, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री, बांग्लादेश की राजनीति, बंगाल, ब्रिटिश राज, मिजानुर्रहमान चौधरी, शहाबुद्दीन अहमद, हुसैन मोहम्मद इर्शाद, जातीय पार्टी, इस्लाम, काजी जफर अहमद

नोवाखाली

250px नोवाखाली (Noakhali) या मैजदी (Maijdi) बांग्लादेश के चटगाँव (Chittagong) मंडल में एक जिला है। इस जिले में मुख्य गंगवार क्षेत्र के अतिरिक्त मेघना नदी के मुहाने के कई द्वीप सम्मिलित हैं। इसका उत्तरी एवं मध्य भाग मेघना नदी की सतह से नीचा है, इसलिए यहाँ मकानों की बाढ़ की सतह से ऊपर उठाना पड़ता है। अधिकांश पर छोटे छोटे परवों में बसे हुए हैं। धान, जूट, लाल मिर्च, प्याज और तिलहन यहाँ की मुख्य फसलें हैं। नारियल, दाल तथा गन्ने का भी उत्पादन पर्याप्त मात्रा में होता है। नारियल से तेल निकाला जाता है। पीतल के बरतल, सूती वस्त्र तथा इत्र भी यहाँ बनाए जाते हैं। यहाँ का औसत ताप २७ डिग्री सें.

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बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी

यह बांग्लादेश का एक राजनीतिक दल है। श्रेणी:बांग्लादेश के राजनीतिक दल.

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बांग्लादेश सरकार

बांग्लादेश सरकार(বাংলাদেশ সরকার, बांलादेश सरकार), बांग्लादेश के संविधान द्वारा स्थापित, बांग्लादेश की प्रशासनिक एवं नियंत्रक प्राधिकारिणी है। यह, संपूर्ण बांग्लादेशी भूमि के शासन पर अपनी प्रभुसत्ता का दावा रखती है। संविधान के अनुसार, देश को लोकतांत्रिक, गणतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत्, एक स्वतंत्र न्यायपालिका के साथ, परिचालित किये जाने की बात की गई है। संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति बांग्लादेश के राष्ट्राध्यक्ष हैं, जबकि सरकार, प्रधानमंत्री व उनके द्वारा नामांकित मंत्रियों के नियंत्रण में कार्य करती है। प्रधानमंत्री और अन्य मंत्री मिलकर बांग्लादेश की उच्चतम् शासनिक एवं निर्णयात्मक निकाय का गठन करते हैं, जिसे बांग्लादेशी लहजे में, मंत्रिसभा(মন্ত্রিসভা) या कैबिनेट कहते हैं। 1971 के अस्थायी सरकार के गठन एवं अंतरिम संविधान के परवर्तन पश्चात् से बांग्लादेश की सरकारी व्यवस्था न्यूनतम् पाँचबार बदली जा चुकी है। बांग्लादेश की वर्तमान सरकारी व्यवस्था बहुदलीय संसदीय प्रणाली पर आधारित है। वरतमान व्यवस्था में प्रधानमंत्री को सरकार प्रमुख का दर्जा प्राप्त है, एवं बहुदलीय लोकतांत्रिक ढाँचे में, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के सिद्धांतों पर राष्ट्रीय संसद के सदस्यगण निर्वाचित होते हैं। कार्यपालिका पूर्णतः सरकार के नियंत्रण में होती है, जिसे प्रधानमंत्री व मंत्रिसभा के अन्य सदस्यगण परिचालित करते हैं। सरकार व सरकार के समस्त मंत्रियों की, संसद के प्रति उत्तरदेही है, और राष्ट्रीय संसद में सरकार के कीसी भी निर्णय, कार्य, कदम या योजना पर प्रश्न किया जा सकता है। इसके अलावा, संविधान संशोधन, महाभियोग व कानूनी फेरबदल जैसे कार्य भी संसदीय बहुमत द्वारा किया जाता है। न्यायपालिका और विधानपालिका के अलाव बांग्लादेश में एक स्वतंत्र श्रेणीबद्ध न्यायपालिका भी स्थापित है, जो न्यायिक मामलों को देखती है। .

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बांग्लादेश के प्रधानमंत्री

गणप्रजातंत्र बांग्लादेश के प्रधानमंत्री (बांग्ला:বাংলাদেশের প্রধানমন্ত্রী, बाड़्ग्लादेशेर प्रोधानमोन्त्री), बांग्लादेश के राजप्रमुख के तौर पर स्थापित एक राजनैतिक पद है। बांग्लादेश की मंत्रीपरिषद शासित अथवा संसदीय सरकारी व्यवस्था में बांग्लादेश के राष्ट्रप्रमुख बांग्लादेश के राष्ट्रपति, राष्ट्रप्रमुख, वहीं, प्रधानमंत्री, सरकार प्रमुख अथवा राजप्रमुख होते हैं। प्रधानमंत्री व मंत्री परिषद सम्मिलित रूप से देश को प्रशासित एवं सरकारी तंत्र को नियंत्रित करते हैं। प्रधानमंत्री, मंत्रीपरिषद के प्रमुख होते हैं जो मिलकर सरकार की नीति निर्धारित करती है एवं राष्ट्रीय संसद के समक्ष निर्वाचित सरकार की नीतियों को प्रस्तुत करती है। साथ ही, समस्त मंत्रीपरिषद, सदन में सरकार की योजना व नीतियों की प्रस्तुति बचाव के लिए जिम्मेदार होते हैं। प्रधानमंत्री बांग्लादेश की एकसदनीय राष्ट्रीय संसद में बहुमत दल के नेता एवं सदन में सत्तापक्ष के नेता भी हैं। प्रधानमंत्री को कार्यकाल की शपथ बांग्लादेश के राष्ट्रपति द्वारा दिलाई जाती है। .

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बांग्लादेश की राजनीति

बांग्लादेश में राजनीति संविधान, में दिए गए संसदीय, प्रतिनिधित्व वादी लोकतांत्रिक, गणतांत्रिक प्रणाली के अंतर्गत होती है जिसके अनुसार: राष्ट्रपति बांग्लादेश के राष्ट्राध्यक्ष एवं बांग्लादेश के प्रधानमंत्री, सरकार एवं एक बहुदलीय जनतांत्रिक प्रणाली के प्रमुख होते हैं। कार्यकारी शक्तियाँ, बांग्लादेश की सरकार के अधिकारक्षेत्र के अंतर्गत आती हैं, एवं विधाई शक्तियां सरकार और संसद दोनों पर न्योछावर की गई हैं। इसके अलावा, बांग्लादेश में एक स्वतंत्र श्रेणीबद्ध न्यायपालिका भी है, जिसके शिखर पर बांग्लादेश की सर्वोच्च न्यायालय है। बांग्लादेश के संविधान को सन 1972 में लिखा गया था और तब से लेकर आज तक इसमें कुल 16 संशोधन किए गए हैं। .

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बंगाल

बंगाल (बांग्ला: বঙ্গ बॉंगो, বাংলা बांला, বঙ্গদেশ बॉंगोदेश या বাংলাদেশ बांलादेश, संस्कृत: अंग, वंग) उत्तरपूर्वी दक्षिण एशिया में एक क्षेत्र है। आज बंगाल एक स्वाधीन राष्ट्र, बांग्लादेश (पूर्वी बंगाल) और भारतीय संघीय प्रजातन्त्र का अंगभूत राज्य पश्चिम बंगाल के बीच में सहभाजी है, यद्यपि पहले बंगाली राज्य (स्थानीय राज्य का ढंग और ब्रिटिश के समय में) के कुछ क्षेत्र अब पड़ोसी भारतीय राज्य बिहार, त्रिपुरा और उड़ीसा में है। बंगाल में बहुमत में बंगाली लोग रहते हैं। इनकी मातृभाषा बांग्ला है। .

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ब्रिटिश राज

ब्रिटिश राज 1858 और 1947 के बीच भारतीय उपमहाद्वीप पर ब्रिटिश द्वारा शासन था। क्षेत्र जो सीधे ब्रिटेन के नियंत्रण में था जिसे आम तौर पर समकालीन उपयोग में "इंडिया" कहा जाता था‌- उसमें वो क्षेत्र शामिल थे जिन पर ब्रिटेन का सीधा प्रशासन था (समकालीन, "ब्रिटिश इंडिया") और वो रियासतें जिन पर व्यक्तिगत शासक राज करते थे पर उन पर ब्रिटिश क्राउन की सर्वोपरिता थी। .

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मिजानुर्रहमान चौधरी

मिजानुर्रहमान चौधरी, एक बांग्लादेशी राजनेता थे, एवं 9 जुलाई 1986 से 27 मार्च 1988 के बीच वे, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री थे। .

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शहाबुद्दीन अहमद

शहाबुद्दीन अहमद एक बांग्लादेशी न्यायाधीश थे। वे बांग्लादेश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं, जोकी बांग्लादेश का सर्वोच्च न्यायिक पद है। उन्हें इस पद पर बांग्लादेश के राष्ट्रपति हुसैन मुहम्मद इरशाद द्वारा, परंपरानुसार, वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति किया गया था। .

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हुसैन मोहम्मद इर्शाद

हुसैन मोहम्मद बांग्लादेश के राष्ट्रपति थे। इनका कार्यकाल २४ मार्च १९८२ से २७ मार्च १९८२ तक रहा। श्रेणी:बांग्लादेश के राष्ट्रपति.

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जातीय पार्टी

जातीय पार्टी या जातीयो पार्टी से निम्नलिखित में से किसी का बोध हो सकता है.

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इस्लाम

इस्लाम (अरबी: الإسلام) एक एकेश्वरवादी धर्म है, जो इसके अनुयायियों के अनुसार, अल्लाह के अंतिम रसूल और नबी, मुहम्मद द्वारा मनुष्यों तक पहुंचाई गई अंतिम ईश्वरीय पुस्तक क़ुरआन की शिक्षा पर आधारित है। कुरान अरबी भाषा में रची गई और इसी भाषा में विश्व की कुल जनसंख्या के 25% हिस्से, यानी लगभग 1.6 से 1.8 अरब लोगों, द्वारा पढ़ी जाती है; इनमें से (स्रोतों के अनुसार) लगभग 20 से 30 करोड़ लोगों की यह मातृभाषा है। हजरत मुहम्मद साहब के मुँह से कथित होकर लिखी जाने वाली पुस्तक और पुस्तक का पालन करने के निर्देश प्रदान करने वाली शरीयत ही दो ऐसे संसाधन हैं जो इस्लाम की जानकारी स्रोत को सही करार दिये जाते हैं। .

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काजी जफर अहमद

मौदूद अहमद, एक बांग्लादेशी राजनेता थे, एवं 12 अगस्त 1989 से 6 दिसंबर 1990 के बीच वे, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री थे। .

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