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भंजक आसवन

सूची भंजक आसवन

भंजक आसवन (Destructive distillation) वह रासायनिक प्रक्रम है जिसमें उच्च ताप पर गरम करने के कारण काष्ठ आदि पदार्थ अपघतित हो जाते हैं। प्रायः यह शब्द कार्बनिक पदार्थों को हवा की अनुपस्थिति या बहुत कम आक्सीजन की उपस्थिति में सम्साधित करने को कहते हैं। इस प्रक्रिया द्वारा बड़े अणु टूट जाते हैं। कोक, कोयला गैस, गैस कार्बन, कोलतार तथा अमोनिया लिकर आदि कोयले के भंजक आसवन के बाद प्राप्त किये जाते हैं। .

5 संबंधों: प्रभाजी आसवन, शुष्क आसवन, कोयला गैस, कोक, अलकतरा

प्रभाजी आसवन

लीबिग संघनित्र का उपयोग करके बनाया गया एक प्रभाजी आसवन का उपकरण दो द्रवों के मिश्रण को पृथक करने के लिये आवश्यक प्लेटों का सैद्धान्तिक मान ज्ञात करने के लिये प्रयुक्त '''मैकेबी-थीले आरेख''' प्रभाजी आसवन (Fractional distillation) एक औद्योगिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी मिश्रण के अवयवों को अलग किया जाता है। यह आसवन की एक विशिष्ट विधि है। उदाहरण के लिये पेट्रोलियम से पेट्रोल, डीजल, केरोसिन एवं अन्य घटकों को इसी विधि से अलग किया जाता है। श्रेणी:आसवन श्रेणी:औद्योगिक प्रक्रम de:Destillation#Fraktionierte Destillation ja:蒸留#精留.

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शुष्क आसवन

जब किसी ठोस पदार्थ को गरम करके गैसीय उत्पाद प्राप्त किया जाता है तो इसे शुष्क आसवन (Dry distillation) कहते हैं। ये गैसें संघनित होकर द्रव या ठोस में भी बदल सकतीं हैं। .

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कोयला गैस

प्रदीपक गैसों में पहली गैस "कोयला गैस" थी। कोयला गैस कोयले के भंजक आसवन या कार्बनीकरण से प्राप्त होती है। एक समय कोक बनाने में उपजात के रूप में यह प्राप्त होती थी। पीछे केवल गैस की प्राप्ति के लिये ही कोयले का कार्बनीकरण होता है। आज भी केवल गैस की प्राप्ति के लिये कोयले का कार्बनीकरण होता है। कोयले का कार्बनीकरण पहले पहल ढालवाँ लोहे के भमके में लगभग 600 डिग्री सें.

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कोक

कोक कोक कोयले से तैयार किया जानेवाला ठोस ईंधन। यह कम राख वाले, कम सल्फरयुक्त, बिटुमिनस कोयले के प्रभंजक आसवन (destructive distillation) से प्राप्त होता है। सब प्रकार के कोयले कोक के लिये उपयुक्त नहीं होते। जो कोयला गरम करने से कोमल हो जाए और फिर न्यूनाधिक ठोस पिंड में बदल जाए उसे कोक बननेवाला कोयला कहा जाता है। जो कोयला गरम करने से चूर चूर हो जाय अथवा दुर्बलता से चिपका हुआ जिसका पिंड बने, वह कोयला कोक के लिये अनुपयुक्त समझा जाता है। अच्छे कोक का बनना कोयले की कोशिकाओं, उसमें उपस्थित गंधक एवं राख की मात्रा, भट्ठी के ताप तथा अन्य परिस्थितियों आदि पर निर्भर करता है। कभी कभी विभिन्न किस्म के कोयलों के मिलाकर गरम करने से अच्छा कोक बनता है। उत्तम कोक बननेवाले कोयले में विभिन्न अवयवों की मात्रा इस प्रकार होनी चाहिए: (१) जल ४ प्रतिशत से अधिक न हो; (२) राख की मात्रा सूखे कोयले के भार का नौ प्रतिशत से अधिक न रहे;.

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अलकतरा

अलकतरा, डांबर या कोलतार (coal tar) काले या भूरे रंग का अत्यन्त गाढ़ा द्रव है। जब कोक या कोयला गैस बनाने के लिये कोयले का कार्बनीकरण करते हैं तो एक सहुत्पाद (बाई-प्रोडक्ट) के रूप में कोलतार प्राप्त होता है। कोलतार वास्तव में फिनॉल, पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बनों (PAHs), तथा हेटेरोसाइक्लिक यौगिकों का मिश्रण होता है। कोलतार का उपयोग ब्यायलरों को गरम करने; साबुन, शैम्पू आदि एवं पक्की सड़के बनाने में होता है। .

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