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प्रतिरोधक

सूची प्रतिरोधक

नियत मान वाले कुछ प्रतिरोधक प्रतिरोधक (resistor) दो सिरों वाला वैद्युत अवयव है जिसके सिरों के बीच विभवान्तर उससे बहने वाली तात्कालिक धारा के समानुपाती (या लगभग समानुपाती) होता है। ये विभिन्न आकार-प्रकार के होते हैं। इनसे होकर धारा बहने पर इनके अन्दर उष्मा उत्पन्न होती है। कुछ प्रतिरोधक ओम के नियम का पालन करते हैं जिसका अर्थ है कि -; V .

8 संबंधों: ऊष्मा, प्रतिरोधकता, विद्युत धारा, विद्युत परिपथ, विद्युत प्रतिरोध, वैद्युत अवयव, ओम का नियम, इलेक्ट्रानिक अवयवों का वर्ण संकेतन

ऊष्मा

इस उपशाखा में ऊष्मा ताप और उनके प्रभाव का वर्णन किया जाता है। प्राय: सभी द्रव्यों का आयतन तापवृद्धि से बढ़ जाता है। इसी गुण का उपयोग करते हुए तापमापी बनाए जाते हैं। ऊष्मा या ऊष्मीय ऊर्जा ऊर्जा का एक रूप है जो ताप के कारण होता है। ऊर्जा के अन्य रूपों की तरह ऊष्मा का भी प्रवाह होता है। किसी पदार्थ के गर्म या ठंढे होने के कारण उसमें जो ऊर्जा होती है उसे उसकी ऊष्मीय ऊर्जा कहते हैं। अन्य ऊर्जा की तरह इसका मात्रक भी जूल (Joule) होता है पर इसे कैलोरी (Calorie) में भी व्यक्त करते हैं। .

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प्रतिरोधकता

किसी पदार्थ की वैद्युत प्रतिरोधकता (Electrical resistivity; या resistivity, specific electrical resistance, or volume resistivity) से उस पदार्थ द्वारा विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करने की क्षमता का पता चलता है। कम प्रतिरोधकता वाले पदार्थ आसानी से विद्युत आवेश को चलने देते हैं। इसकी SI ईकाई ओम मीटर है। .

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विद्युत धारा

आवेशों के प्रवाह की दिशा से धारा की दिशा निर्धारित होती है। विद्युत आवेश के गति या प्रवाह में होने पर उसे विद्युत धारा (इलेक्ट्रिक करेण्ट) कहते हैं। इसकी SI इकाई एम्पीयर है। एक कूलांम प्रति सेकेण्ड की दर से प्रवाहित विद्युत आवेश को एक एम्पीयर धारा कहेंगे। .

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विद्युत परिपथ

एक सरल विद्युत परिपथ जो एक वोल्टेज स्रोत एवं एक प्रतिरोध से मिलकर बना है ब्रेडबोर्ड के ऊपर बनाया गया एक सरल परिपथ (मल्टीवाइव्रेटर) विद्युत अवयवों (वोल्टेज स्रोत, प्रतिरोध, प्रेरकत्व, संधारित्र एवं कुंजियों आदि) एवं विद्युतयांत्रिक अवयवों (स्विच, मोटर, स्पीकर आदि) का परस्पर संयोजन विद्युत परिपथ (Electric circuit) अथवा विद्युत नेटवर्क (electrical network) कहलाता है। विद्युत परिपथ बहुत विशाल क्षेत्र में फैले हो सकते हैं; जैसे-विद्युत-शक्ति के उत्पादन, ट्रान्समिसन, वितरण एवं उपभोग का नेटवर्क। बहुत से विद्युत परिपथ प्राय: प्रिन्टेड सर्किट बोर्डों पर संजोये जाते हैं। विद्युत परिपथ अत्यन्त लघु आकार के भी हो सकते हैं; जैसे एकीकृत परिपथ। जब किसी परिपथ में डायोड, ट्रान्जिस्टर या आईसी आदि लगे होते हैं तो उसे एलेक्ट्रॉनिक परिपथ भी कहा जाता है जो कि विद्युत परिपथ का ही एक रूप है। विद्युत परिपथ को परिपथ आरेख (सर्किट डायग्राम) के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। प्रायः एक या अधिक बन्द लूप वाले नेटवर्क ही विद्युत परिपथ कहलाते हैं। .

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विद्युत प्रतिरोध

आदर्श प्रतिरोधक का V-I वैशिष्ट्य। जिन प्रतिरोधकों का V-I वैशिष्ट्य रैखिक नहीं होता, उन्हें अनओमिक प्रतिरोधक (नॉन-ओमिक रेजिस्टर) कहते हैं। किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवान्तर तथा उससे प्रवाहित विद्युत धारा के अनुपात को उसका विद्युत प्रतिरोध (electrical resistannce) कहते हैं।इसे ओह्म में मापा जाता है। इसकी प्रतिलोमीय मात्रा है विद्युत चालकता, जिसकी इकाई है साइमन्स। जहां बहुत सारी वस्तुओं में, प्रतिरोध विद्युत धारा या विभवांतर पर निर्भर नहीं होता, यानी उनका प्रतिरोध स्थिर रहता है। right समान धारा घनत्व मानते हुए, किसी वस्तु का विद्युत प्रतिरोध, उसकी भौतिक ज्यामिति (लम्बाई, क्षेत्रफल आदि) और वस्तु जिस पदार्थ से बना है उसकी प्रतिरोधकता का फलन है। जहाँ इसकी खोज जार्ज ओह्म ने सन 1820 ई. में की।, विद्युत प्रतिरोध यांत्रिक घर्षण के कुछ कुछ समतुल्य है। इसकी SI इकाई है ओह्म (चिन्ह Ω).

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वैद्युत अवयव

वैद्युत अवयव (Electrical components) वैद्युत अवयवयों (electrical elements) की संकल्पना (कांसेप्ट) वैद्युत नेटवर्कों के विश्लेषण में प्रयुक्त होती है। इसको वास्तविक 'वैद्युत अवयव' अथवा वास्तविक एलेक्ट्रॉनिक अवयव के बजाय 'आदर्श वैद्युत अवयव' समझना चाहिये। किसी भी वैद्युत नेटवर्क को मॉडल करने के लिये उसे विद्युत के सरलतम् अवयव के नेटवर्क के रूप में अभिव्यक्त किया जा सकता है। ध्यान देने की बात है कि व्यावहारिक/भौतिक रूप से 'विद्युत अवयवों' का कोई अस्तित्व नहीं है। इनकी संकल्पना कुछ विद्युत के आदर्श, सरलीकृत अवयवों के रूप में की गयी है। एक या कुछ वैद्युत अवयवों की सहायता से किसी भी भौतिक (फिजिकल) एलेक्ट्रॉनिक अवयव को निरुपित किया जा सकता है। .

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ओम का नियम

जॉर्ज साइमन ओम प्रतिरोध ''R'', के साथ ''V'' विभवान्तर का स्रोत लगाने पर उसमें विद्युत धारा, ''I '' प्रवाहित होती है। ये तीनों राशियाँ ओम के नियम का पालन करती हैं, अर्थात ''V .

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इलेक्ट्रानिक अवयवों का वर्ण संकेतन

१०० किलोओम तथा ५% टॉलरेंस वाले प्रतिरोधक का वर्ण संकेतन वर्ण संकेतन (color coding) का प्रयोग प्रतिरोधक तथा कुछ अन्य इलेक्ट्रानिक अवयवों का मान या रेटिंग दर्शाने के लिए किया जाता है। इस संकेतन का विकास १९२० के दशक में रेडियो मैनुफैक्चरर्स एशोसिएशन द्वारा किया गया था। इसे EIA-RS-279 के नाम से प्रकाशित किया गया था। वर्तमान अन्तरराष्ट्रीय मानक IEC 60062 है। छोटे इलेक्ट्रानिक अवयवों का मान एवं रेटिंग को संख्या के रूप में सीधे लिखने के बजाय वर्ण-संकेतों के रूप में लिखने के कुछ लाभ हैं, जैसे बहुत छोटी संख्याओं के रूप में लिखने की कठिनाई तथा उसे पढ़ पाने की कठिनाई। किन्तु इसकी कुछ हानियाँ भी हैं, जैसे वर्णांध व्यक्ति के लिये वर्ण संकेत पढ़ना कठिन है। .

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