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नॉर गेट

सूची नॉर गेट

नॉर द्वार (NOR gate) एक तर्क द्वार है जो तर्क नॉर को निरूपित करता है – यह दायीं तरफ दी हुई सत्य सारणी के अनुरूप होता है। यदि दोनों निवेश निम्न (बन्द) अवस्था में हैं तो निर्गम उच्च (चालु) अवस्था में प्राप्त होता है; यदि कोई एक अथवा दोनों निवेश उच्च अवस्था में हैं तो निर्गम निम्न अवस्था में प्राप्त होता है। नॉर द्वार ऑर संक्रिया (OR operation) के निषेध को प्रस्तुत करता है। .

2 संबंधों: निषेध (तर्क), लॉजिक गेट

निषेध (तर्क)

तर्क के रूप में निषेध (Negation) जिसे पूरक भी कहा जाता है एक संक्रिया है जो कथन को इसके विपरित अर्थ वाला बना देता है अर्थात मूल कथन p है तो निषेध p का अर्थ कथन p का नहीं होना होता है, अर्थात जब p सत्य है तब निषेध p असत्य होगा और जब कथन p असत्य है तब निषेध p सत्य होगा। अतः निषेध एकधारी (एकल-तर्क) तर्क संयोजक है। श्रेणी:व्याकरण श्रेणी:शब्दार्थविज्ञान श्रेणी:तर्क संयोजक.

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लॉजिक गेट

74 शृंखला के एक NAND गेट आईसी का व्यवस्था आरेख (उपर) तथा वास्तविक फोटो (नीचे) तर्कद्वार या लॉजिक गेट (logic gate) वह युक्ति है जिसका आउटपुट उसके इनपुट पर उपस्थित वर्तमान संकेतों या पूर्व संकेतों का कोई लॉजिकल फलन (Boolean function) हो। यह भौतिक युक्ति हो सकती है या कोई आदर्शीकृत युक्ति। आजकल अधिकतर अर्धचालक लॉजिक गेट प्रयोग किये जाते हैं किन्तु सिद्धान्ततः ये विद्युतचुम्बकीय रिले, तरल लॉजिक, दाब लॉजिक, प्रकाशिक लॉजिक, अणुओं आदि से भी बनाये जा सकते हैं। बूलीय लॉजिक से जिन अल्गोरिथ्म का वर्णन किया जा सकता है उन्हें इन भौतिक गेटों से उन अल्गोरिद्मों को साकार रूप भी दिया जा सकता है (बनाया भी जा सकता है)। जिस प्रकार एक दरवाजा (द्वार) दो अवस्थाओं - 'खुला या बन्द' में हो सकता है, उसी तरह लॉजिक गेट का आउटपुट भी 'हाई या लो' (High/Low) हो सकता है। लॉजिक गेट, ऐण्ड (AND) और ऑर (OR) जैसे सरल भी हो सकते हैं और एक कम्प्युटर जितना जटिल भी। डायोड का उपयोग करके बनाया गया लॉजिक गेट सबसे सरल लॉजिक गेट है। किन्तु इसके केवल AND तथा OR गेट ही बनाये जा सकते हैं, 'इन्वर्टर' नहीं बनाया जा सकता। अतः इसे एक 'अपूर्ण लॉजिक परिवार' कह सकते हैं। इन्वर सहित सभी लॉजिक गेट बनाने में सक्षम होने के लिये किसी प्रकार के प्रवर्धक की जरूरत होगी। इसलिये 'सम्पूर्ण लॉजिक परिवार' बनाने के लिये रिले, निर्वात नलिका या ट्रांजिस्टर का प्रयोग अपरिहार्य है। बाइपोलर ट्रांजिस्टरों का प्रयोग करके बना लॉजिक परिवार रेजिस्टर-ट्रांजिस्टर लॉजिक (RTL) कहलाता है। आरम्भिक एकीकृत परिपथों में इसी का उपयोग किया गया था। इसके बाद विभिन्न दृष्टियों से सुधार करते हुए डायोड-ट्रांजिस्टर लॉजिक (DTL) और ट्रांजिस्टर-ट्रांजिस्टर लॉजिक (TTL) आये। अब लगभग सब जगह ट्रांजिस्टर का स्थान मॉसफेट (MOSFETs) ने ले लिया है जिससे आईसी कम स्थान घेरती है और काम करने के लिये कम उर्जा क्षय होती है। वर्तमान में प्रयुक्त लॉजिक परिवार का नाम कम्प्लिमेन्टरी मेटल-आक्साइड-सेमिकंडक्टर (CMOS) है। .

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