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दैनिकी

सूची दैनिकी

किसी भी व्यापारी या संस्था के लिये यह संभव नहीं है कि वह सारे लेन-देन व्यवहारों को याद रख सके। इसलिये उन्हें याद रखने के लिये दैनिकी (जर्नल अथवा दैनंदिनी) तैयार किया जाता है। इसमें लेनदेन होते ही प्रविष्टि कर ली जाती है। अतः प्रत्येक सौदों या व्यवहार को क्रमवार लिखने कि क्रिया को प्रारंभिक लेखा कहा जाता है। इसे 'रोजनामचा' भी कहते हैं। इसमें सुविधा के लिये कुछ सहायक पुस्तके भी रखी जाती है। जैसे क्रय पुस्तक विक्रय पुस्तक, रोकड़ पुस्तक तथा मुख्य जर्नल आदि। उदाहरण के लिए - नगर पंचायत में दिनांक 15.4.2008 को कार्यालय के लिय 1000.00 रूपये नगद देकर फर्नीचर खरीदा। यह एक सौदा है जिसका जर्नल बुक में प्रारंभिक लेखा निम्नानुसार होगा - चूंकि जर्नल लेखे तैयार करने की प्रारंभिक पुस्तक है, इसलिये इसे महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। आजकल सीधे लेजर एवं सहायक बहियाँ तैयार करना प्रचलन में होने से अभिलेख का महत्व व्यापारिक प्रतिष्ठानों में अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। स्थानीय निकायों में यदि द्वि प्रविष्टि लेखा अपनाई जाती है तो उसमें जर्नल का बहुत महत्व रहेगा क्योंकि वे सभी व्यवहार जिसमें मुद्रा का वास्तविक लेनदेन नहीं हुआ है। समायोजन प्रविष्टियां आदि जर्नल के माध्यम से ही लेखाबद्ध की जायेगी। .

1 संबंध: लेसर किरण

लेसर किरण

कुहरे में लेज़र किरण एक कार के शीशे से परावर्तित होती हुई। लेजर (विकिरण के उद्दीप्त उत्सर्जन द्वारा प्रकाश प्रवर्धन) (अंग्रेज़ी:लाइट एंप्लीफिकेशन बाई स्टीमुलेटेड एमिशन ऑफ रेडिएशन) का संक्षिप्त नाम है। प्रत्यक्ष वर्णक्रम की विद्युतचुम्बकीय तरंग, यानि प्रकाश उत्तेजित उत्सर्जन की प्रक्रिया द्वारा संवर्धित कर एक सीधी रेखा की किरण में बदल कर उत्सर्जित करने का तरीक होता है। इस प्रका निकली प्रकाश किरण को भी लेज़र किरण ही कहा जाता है। ये किरण प्रायः आकाशीय रूप से कोहैरेन्ट (सरल रैखिक व एक स्रोतीय), संकरी अविचलित होती है, जिसे किसी लेन्स द्वारा परिवर्तित भी किया जा सकता है। ये किरणें संकरी वेवलेन्थ, विद्युतचुम्बकीय वर्णक्रम की एकवर्णीय प्रकाश किरणें होती है। हालांखि बहुवर्णीय प्रकाशधारिणी लेज़र किरणें या बहु वेवलेन्थ लेज़र भी निर्मित की जाती हैं। एक पदार्थ (सामान्यत: एक गैस और क्रिस्टल) को ऊर्जा, जैसे प्रकाश या विद्युत से टकराने के बाद वह अणु को विद्युतचुम्बकीय विकिरण (एक्सरे, पराबैंगनी किरणें) उत्सर्जित करने के लिए उत्तेजित करता है जिसको बाद में संवर्धित किया जाता है और एक किरण के रूप में इसे छोड़ा जाता है। लेजर एक ऐसी तकनीक के रूप में विकसित हुई है जिसके सहारे आज आधुनिक जगत के अनेक कार्य सिद्ध होते हैं। लेज़र का आविष्कार लगभग ५० वर्ष पहले हुआ था। आधुनिक जगत में लेजर का प्रयोग हर जगह मिलता है – वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं, सुपरमार्केट और शॉपिंग मॉल्स से लेकर अस्पतालों तक में भी। मनोरंजन के संसार में डीवीडी के प्रकार्य में लेज़र ही सहायक होता है, सुरक्षा और सैन्य क्षेत्र में वायुयानों को गाइड करने में, तोप और बंदूकों को लक्ष्य लॉक करने में, आयुर्विज्ञान के क्षेत्र में दंत चिकित्सा और लेज़र से आंख के व अन्य शारीरिक ऑपरेशन, कार्यालयों के कार्य में लेज़र प्रिंटर द्वारा डाक्यूमेंट प्रिंटिंग, संचा क्षेत्र में ऑप्टिकल फाइबर केबलों तक में लेज़र ही चलती है। पिछले ५० वषों में लेजर ने अपनी उपयोगिता को व्यापक तौर पर सिद्ध कर दिखाया है। लेजर किरण का आविष्कार थिओडोर मैमेन द्वारा हुआ मात्र एक संयोग ही था। थिओडोर मैमेन के कैमरे के लैंस की कुण्डली के ऊपर माणिक्य (रूबी) का एक टुकड़ा संयोग से रखने पर एक लाल रंग की प्रकाश किरण निकली। थिओडोर ने ह्यूज़स शोध प्रयोगशाला में इस पर गहन अध्ययन किया। उन्होंने वहां देखा कि किसी बल्ब के फ्लैश से माणिक्य के पतले से बेलन को आवेशित करना संभव है और फिर इससे ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है। इससे शुद्ध लाल रंग का प्रकाश उत्सर्जित होता है जिसकी तरंगें एक समान रूप और अंतराल से प्रवाहित होती हैं और एक सीधी रेखा में चलती हैं। चूंकि ये किरणें अत्यंत शक्तिशाली थीं और परीक्षण के दौरान सर्वप्रथम एक रेजर के ब्लेड में भी छेद बना सकती थी, इसलिए तत्कालीन भौतिकशास्त्रियों ने इसकी शक्ति को जिलेट में मापना शुरू किया। .

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