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तापोपचार

सूची तापोपचार

तापोपचार (Heat treatment) उन प्रक्रमों या विधियों को कहते हैं जो उष्मा के आदान-प्रदान के द्वारा पदार्थों के भौतिक गुणों को बदलने के लिये उपयोग किये जाते हैं। कभी-कभी इनकी सहायता से पदार्थ के रासायनिक गुण भी बदले जाते हैं। इनका धातुकर्म में बहुत उपयोग है। कांच आदि कुछ अन्य पदार्थों के उत्पादन में भी तापोपचार का प्रयोग होता है। तापोपचार द्वारा वांछित परिणाम पाने के लिये पदार्थ को प्राय: बहुत अधिक गरम करना या बहुत अधिक ठण्डा करना पड़ता है। एनिलिंग (annealing), केस कठोरीकरण (case hardening), प्रेसिपिटेशन सशक्तीकरण (precipitation strengthening), टेम्परिंग (tempering) तथा क्वेंचिंग (quenching) प्रमुख तापोपचार हैं। .

6 संबंधों: ऊष्मा, टेम्परिंग, तापानुशीतन, धातुकर्म, भौतिक गुण, कांच

ऊष्मा

इस उपशाखा में ऊष्मा ताप और उनके प्रभाव का वर्णन किया जाता है। प्राय: सभी द्रव्यों का आयतन तापवृद्धि से बढ़ जाता है। इसी गुण का उपयोग करते हुए तापमापी बनाए जाते हैं। ऊष्मा या ऊष्मीय ऊर्जा ऊर्जा का एक रूप है जो ताप के कारण होता है। ऊर्जा के अन्य रूपों की तरह ऊष्मा का भी प्रवाह होता है। किसी पदार्थ के गर्म या ठंढे होने के कारण उसमें जो ऊर्जा होती है उसे उसकी ऊष्मीय ऊर्जा कहते हैं। अन्य ऊर्जा की तरह इसका मात्रक भी जूल (Joule) होता है पर इसे कैलोरी (Calorie) में भी व्यक्त करते हैं। .

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टेम्परिंग

टेम्परिंग धातुओं, मिश्र धातुओं और कांच को गर्म करने की एक तकनीक है। इस्पात (steel) में, धातु को अधिक "मजबूत" बनाने के लिए टेम्परिंग की जाती है, इसके लिए भंगुर मार्टेंसाईट या बाइनाईट को फेराईट और सीमेन्टाईट के संयोजन में और कभी कभी टेम्पर्ड मार्टेंसाईट में बदल दिया जाता है। अवक्षेपण के द्वारा सख्त किये जाने वाले मिश्रधातु जैसे, एल्युमिनियम और सुपर मिश्र धातुओं की कई श्रेणियों को, अंतरधात्विक कणों के अवक्षेपण के लिए टेम्पर किया जाता है, जिससे धातु अधिक मजबूत बन जाती है। टेम्परिंग के लिए पदार्थ को इसके निम्न जटिल तापमान (critical temperature) से कम ताप पर नियंत्रित रूप से पुनः गर्म किया जाता है। भंगुर मार्टेंसाईट टेम्पर किये जाने के बाद अधिक सख्त और लचीला (ductile अर्थात अब इसे खींच कर लम्बी तारों में बदला जा सकता है) हो जाता है। कार्बन परमाणुओं को जब तेजी से ठंडा किया जाता है, वे ऑसटेंटाइन में फंस जाते हैं, आमतौर पर तेल या पानी के साथ मार्टेंसाईट बनाते हैं। मार्टेंसाईट टेम्पर किये जाने के बाद मजबूत बन जाता है क्योंकि जब इसे पुनः गर्म किया जाता है, इसकी सूक्ष्म संरचना पुनर्व्यवस्थित हो जाती है और कार्बन परमाणु विकृत काय-केन्द्रित-टेट्रागोनल (BCT) सरंचना (distorted body-centred-tetragonal (BCT) structure) में से बाहर विसरित हो जाते हैं, कार्बन के विसरण के बाद, परिणामी संरचना लगभग शुद्ध फेराईट होती है, जो काय-केन्द्रित सरंचना से युक्त होती है। धातु विज्ञान (metallurgy) में, हमेशा मजबूती और लचीलेपन (प्रत्यास्थता) पर बल दिया जाता है। यह नाजुक संतुलन टेम्परिंग की प्रक्रिया में निहित कई बारीकियों पर प्रकाश डालता है। टेम्परिंग की प्रक्रिया के दौरान समय और तापमान पर सटीक नियंत्रण एक जटिल प्रक्रिया है, जिससे उचित संतुलित यांत्रिक गुणधर्मों से युक्त धातु प्राप्त होती है। .

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तापानुशीतन

तापानुशीतन या 'अनीलन' या एनिंलिंग (Annealing) धातुकर्म और पदार्थ विज्ञान में एक प्रकार का ऊष्मा उपचार है। इसका उपयोग किसी वस्तु या पदार्थ में आवश्यक गुण (जैसे कठोरता, नम्रता आदि) लाने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में एक क्रान्तिक ताप से अधिक ताप तक वस्तु को गरम किया जाता है तत्पश्चात कुछ समय तक एक नियत ताप पर बनाए रखते हैं और अन्ततः नियंत्रित रूप में उसे ठण्डा कर दिया जाता है। तापानुशीतन का उपयोग तन्यता बढ़ाने, पदार्थ को मुलायम बनाने, पदार्थ में किसी कारण उत्पन्न प्रतिबलों को समाप्त करने, पदार्थ की संरचना को बदलने आदि के लिए किया जाता है। तापानुशीतन का उपयोग निम्नलिखित में से किसी एक या अधिक लक्ष्यों की पूर्ति के लिए किया जाता है-.

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धातुकर्म

धातुनिर्माता कारखाने में इस्पात का निर्माण दिल्ली का लौह-स्तम्भ भारतीय धातुकर्म के गौरव का साक्षी है। धातुकर्म पदार्थ विज्ञान और पदार्थ अभियांत्रिकी का एक क्षेत्र है, जिसके अंतर्गत धातुओं, उनसे बनी मिश्रधातुओं और अंतर्धात्विक यौगिकों के भौतिक और रासायनिक गुणों का अध्ययन किया जाता है। .

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भौतिक गुण

किसी भौतिक प्रणाली के किसी भी मापने योग्य गुण को भौतिक गुण (physical property) कहते हैं जो उस प्रणाली की बहुतिक अवस्था का सूचक है। इसके विपरीत वे गुण जो यह बताते हैं कि कोई वस्तु किसी रासायनिक अभिक्रिया में कैसा व्यवहार करती है, उसका रासायनिक गुण कहलाती है। .

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कांच

स्वच्छ पारदर्शी कांच का बना प्रकाश बल्ब काच, काँच या कांच (glass) एक अक्रिस्टलीय ठोस पदार्थ है। कांच आमतौर भंगुर और अक्सर प्रकाशीय रूप से पारदर्शी होते हैं। काच अथव शीशा अकार्बनिक पदार्थों से बना हुआ वह पारदर्शक अथवा अपारदर्शक पदार्थ है जिससे शीशी बोतल आदि बनती हैं। काच का आविष्कार संसार के लिए बहुत बड़ी घटना थी और आज की वैज्ञानिक उन्नति में काच का बहुत अधिक महत्व है। किन्तु विज्ञान की दृष्टि से 'कांच' की परिभाषा बहुत व्यापक है। इस दृष्टि से उन सभी ठोसों को कांच कहते हैं जो द्रव अवस्था से ठण्डा होकर ठोस अवस्था में आने पर क्रिस्टलीय संरचना नहीं प्राप्त करते। सबसे आम काच सोडा-लाइम काच है जो शताब्दियों से खिड़कियाँ और गिलास आदि बनाने के काम में आ रहा है। सोडा-लाइम कांच में लगभग 75% सिलिका (SiO2), सोडियम आक्साइड (Na2O) और चूना (CaO) और अनेकों अन्य चीजें कम मात्रा में मिली होती हैं। काँच यानी SiO2 जो कि रेत का अभिन्न अंग है। रेत और कुछ अन्य सामग्री को एक भट्टी में लगभग 1500 डिग्री सैल्सियस पर पिघलाया जाता है और फिर इस पिघले काँच को उन खाँचों में बूंद-बूंद करके उंडेला जाता है जिससे मनचाही चीज़ बनाई जा सके। मान लीजिए, बोतल बनाई जा रही है तो खाँचे में पिघला काँच डालने के बाद बोतल की सतह पर और काम किया जाता है और उसे फिर एक भट्टी से गुज़ारा जाता है। .

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यहां पुनर्निर्देश करता है:

ऊष्मा उपचार, उष्मा उपचार

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